मेरा नाम श्रुति है. में बिहार की रहने वाली हु. मेरे माता पिता दोनों भी अछि जॉब करते थे. पैसा ठीकठाक था, इसलिए उन्होंने मुझे दिल्ली में हॉस्टल में पढाई के लिए भेजा था. पढाई के दौरान दिल्ली में मेरी मुलाकात विकास से हुई. वो भी बिहार का ही रहने वाला था.
विकास से में पहली बार एक दोस्त के बर्थडे पार्टी में मिली थे. दोस्त की बर्थडे पार्टी एक क्लब में थी. वहा बातचीत हुई और हम अच्छे दोस्त बंद गए. फिर हमारा काफी बार मिलना हुआ. हम क्लब में जाया करते थे. विकास क्लब में मुझे चिपक चिपक के नाचा करता था. एक दिन उसने मुझे क्लब के अँधेरे माहौल में होठोंपे किस कर लिया. उस दिन के बाद सब कुछ बदल गया. हम दोनों के शरीर एक दूसरे के करीब आने लगे.
विकास मुझे होटल के रूम पे ले गया. वह विकास के साथ बहोत चुदाई की. हम दोनों को सेक्स बहोत पसंद था, इसलिए जब भी रूम पे जाते थे. सारी पोजीशन में हम चुदाई करते थे. रूम के सभी जगह का पूरा इस्तेमाल किया. हमें मिलकर अभी २ ही महीने हुए थे. लेकिन इन दो महिनोमे हम करीब २० बार अलग अलग जगह जाकर चुदाई कर चुके थे. कुछ न मिले तो कार की पार्किंग में कार में बैठे बैठे में विकास का लंड चूस लेती थी. वो मेरी चुत में ऊँगली डालकर मेरा पानी निकलता था. कोई न कोई तरीका ढूंढ़कर हम चुदाई कर ही लेते थे.
फिर करीब ६ महीने बाद हमने शादी करने का फैसला किया. घर वालो ने शादी भी करवादी. अभी वक्त था हनीमून का तो हम पहाडोमे हनीमून पे गए थे. मनाली, शिमला, कश्मीर ऐसे करीब १५ दिन का हमारा सफर था. पुरे सफर में दोनों एक दूसरे को अपने शरीर से दूर ही नहीं कर रहे थे. पहाड़ो में घूमते हुए, एक ऐसी भी जगा मिली जहा दूर दूर तक कोई नहीं था. हम पहाड़ की उचाई पे थे. चारोतरफ हरयाली और देखने वाला कोई नहीं. अब ऐसे मोके में किसका मन नहीं करेगा चुदाई का.
विकास ने आस पास देखकर पुस्टि कर ली के कोई देख नहीं रहा. और फिर हम वही खुले नीले आसमान के निचे ही सुरु हो गए. किस करने से सुरवात हुई थी जो चुदाई पे ही जाकर रुकी. बहोत मजा आया लेकिन ऐसे खुले में चुदवानेमें. खासकर तब जब विकास ने मेरी पैंट को पूरा निचे उतर दिया. और ठंडी हवा मेरे चुत को लगने लगी. मेरी गांड पिछेसे हवाके झोको को महसूस कर रही थी. विकास ने मुझे वही पर झुकाया, में सामने के बड़े पत्थर पे हात रखकर झुककर खड़ी हो गयी और पिछेसे विकास ने मुझे पेलना सुरु किया. आअह्ह। .. उससस इस्सस आहहह. … में खुलकर चिल्ला रही थी क्यूंकि दूर तक कोई सुनाने वाला था. विकास भी काफी जोश में था. तो वो भी जोर जोर से धक्के देकर चोद रहा था.
पूरा हनीमून हमने चोद चोद कर ही निकला. फिर हम वापस घर ए. काफी महीनेतक घरपर ही चुदाई होती रही. शादी को अब करीब १ साल होने आया था. धीरे धीरे हम दोनों ने महसूस किया के अब सेक्स करने में इतना मजा नहीं आ रहा है. अब सेक्स करना भी एक काम तरह महसूस हो रहा था. वो मजा जो पहले आता था वो कम हो गया है.
रातको बेड पर सोते हुए हम एक दूसरे के सात बाते करते हुए अपनी राय बता रहे थे. तभी विकास ने कहा, की मेरे पास एक उपाय है इसका. लेकिन उसके लिए तुम्हे पहले में जो कहु उसके लिए राजी होना पड़ेगा.
तो मेने कहा की ऐसी क्या बात है. में तो हमेशा ही तैयार रहती हु. तुम जो भी कहते हो, सब के लिए में राजी थी.
तो विकास कहने लगा. ऐसे नहीं. में जो करने की बात कर रहा हु, ये पूरी अलग बात है. और पूरा प्लान तुम्हारे ऊपर निर्भर है. अगर तुम ना कर दोगी तो हम कभी कर नहीं पाएंगे.
तो में थोड़ी सहमति हुए बोली. बताओ ना ऐसी क्या बात है. अब और ज्यादा दुविधा में मत रखो.
विकास ने कहा. अपना हात आगे लायो। विकास ने मेरा हात अपने हात में पकड़ा और कहा की … वादा करो की ग़ुस्सा नहीं होगी.
तो मेने हस्ते हुए कहा की….. हा में वादा करती हु के ग़ुस्सा नहीं होगी..
फिर विकास ने कहा. के मेरे दिमाग में ये बात कई महीनो से चल रही है. लेकिन तुम बुरा मानोगी इसलिए मेने नहीं पूछा.
में बहोत जिज्ञासा से उससे पूछा। क्या बात है बताओ।
तो विकास डरते हुए बोलै. में तुम्हे किसी और से चुदवाते हुए देखना चाहता हु.
ये सुनकर मेरे तो होश उड़ गए. में विकास की तरफ देखती रही. मेरे मुँह से कोई भी शब्द नहीं निकला
विकास आगे कहा. देखो मेरा प्लान है के हम दिल्ली जायेंगे. वह किसी अजनबी लड़केको में मना लूंगा। होटल रूम में रहकर रातको हम अपना खेल खेलेंगे.
दो दिन रहेंगे दिल्ली में और फिर वापस आ जायेंगे. किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा.
विकास की बाते सुनकर मेरी चुत तड़पने लगी. मेने तुरंत विकास को होठोंपे किस किया और चूमते हुए में उसके उपर आयी. दोनों ने चूमते हुए एक दूसरे के कपडे उतरे और फिर विकास ने मुझे पेलना सुरु किया. मुझे पूरा नंगा कर मेरे चुत में लंड डालकर चोदते हुए मुझे पूछने लगा. चोदे गी ना दूसरे मर्द से. में भी फूली हुई सास को..पकड़ते हुए कहने लगी. हा जानू चुदवाउंगी। मेरी हा सुनकर और जोर से मुझे पेलने लगा. अहहहह उम्म्म फ़फ़फ़ आहहह। ….शशशशश
बहोत जोर जोर से आज पेल रहा था. काफी देर तक पेला फिर मेरे ही मुँह में पानी डालकर सो गया.
कुछ दिनों में ही विकास दिल्ली जाने की सारि तैयारी कर ली. उसने कहा की एक अजनबी लड़के से बात हो चुकी है. में बहोत ही डरी हुई थी लेकिन एक आनंद भी था की कुछ नया करने मिलेगा. और पति के सामने चुदवाने का मजा ही कुछ अलग होगा.
हम दो दिन बाद निकले बिहार से. दिल्ली के एक बड़े होटल में रूम बुक किया था. विकास उस लड़के से बात कर रहा था. मेने सुना की आज रात को ही वो दोनों मिलने का प्लान कर रहे है. मेने अपनी सारि तैयारी कर ली थी. अपने बदन से सारे बाल हटा दिए थे. चुत को भी पूरा साफ कर लिया था. विकास ने कहा था की साड़ी पहना. तो मेने गुलाबी साड़ी और काले रंग का ब्लाउज़ पहना. ब्लाउज़ की दोनों बाजु नहीं थी. इस साड़ी में बहोत ही आलीशान बंगले में रहने वाली औरत लगती थी.
में मेकउप करके तैयार बैठी थी. करीब १० बज गए थे. कुछ देर बाद विकास ने उस बंदे को फोन करके बुलाया. कुछ ही देर में दरवाजे की बेल बजी. यहाँ मेरी धड़कने बढ़ने लगी. विकास ने दरवाजा खोला. एक लड़का अंदर आया. जैसे दरवाजा बंद हुआ और वो लड़का मेरे सामने आया में देखकर खुश हो गयी. गोरा चिट्टा कॉलेज जानेवाला लड़का. सफ़ेद रंग की शर्ट और नीले रंग की जीन्स पहने हुए. अच्छीखासी बॉडी थी. बिलकुल रणवीर कपूर की तरह दिख रहा था. हलकी सी चेहरे पर दाढ़ी. चेहरे पे मुस्कान. दोनों एक दूसरे को देखते हुए मुस्कुराये. वो लड़का पीछे विकास से कुछ बात करने के लिए मुड़ा, विकास ने धीरी आवाज में उसे हा सुरु हो जायो कहा.
वो लकड़ा फिर मुड़ा और मेरी तरफ आकर उसने अपना हात बढ़ाकर हेलो कहा. अपना नाम उसने नीरज कहा. मेने भी उसे अपना नाम श्रुति बताय. फिर नीरज ने कहा, श्रुति आप बहोत ही खूबसूरत लग रही हो इस साड़ी में. मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुराया, और करीब आकर उसने मेरे दोनों हात पकड़कर मुझे गले से लगा लिया.
आअह्हह्ह। … एक पराये मर्द को गले लगाना वो भी अपने पति के सामने एक अलग ही अनुभव था, नीरज ने मुझे गले लगाकर अपने दोनों हात मेरे पीठ पर घूमना सुरु किया. मेरा ब्लाउज़ काफी छोटा था और पीछे सब खुला खुला. इस वजसे नीरज का हात मेरी पीठ पर सीधा लग रहा था. पीठ से होकर कमर तक जैसे उसका हात पोहचा, मेरे बदन में आग सी लग गयी. पता नहीं मुझे क्या होने लगा. मेने नीरज को कसकर पकड़लिया.
फिर नीरज ने मेरी हलचल देखते हुए मेरे गर्दन पे चुम लिया. आआह.. उसके होठ जैसे ही गर्दन पर गहने लगे मेरा शरीर मानो तड़पने लगा. नीरज गर्दन पर चुनते हुए गालो तक पोहच गया. मेरे गालोको चूमते हुए मेरे होठो तक पोहचा और जैसे दोनों के होठ सामने आये. दोनों ने एक नजर एक दूसरे को देखा और होठ से होठ टकरा गए.
उम् अह्ह्ह्ह उम् उम्म्म। कसकर एक दूसरे को पकड़कर होठ से होठ घिस रहे थे. नीरज ने अपनी जबान मेरे मुँह में दाल दी. जोनो की जबान लड़ने लगी. काफी मजा आ रहा था. शरीर की गर्मी अब चर्म सिमा पे थी. काफी देर तक नीरज मेरे होटोंसे खेल रहा था. फिर सुने मेरे साडी का पल्लू निचे उतर दिया. मेरे मम्मो की बिच की दरार देखकर वो ललचाने लगा. हवस भरी नजरोसे मेरे मम्मो को देख उसका सय्यम टुटा और उसने सीधा अपना मुँह मेरे मम्मो पर रख दिया. ब्लाउज़ के ऊपर से ही दोनों मम्मो को दबा दबाकर बिच की दरार में अपनी जीभ डालकर चाटने लगा. आहहहह अहह. श्श्श. मेने भी उसके सर को पकड़कर उसको गले लगाकर रखा था.
तभी मेरी नजर मेरे पति विकास पर पड़ी. वो अपनी शर्ट और पैंट दोनों उतारकर सिर्फ अंडरवेर पहने सामने की ख़ुर्शी पर बैठा था. में भूल ही गयी थी के मेरा पति भी इस कमरे में है. विकास मुझे देखते हुए अपने अंडरवेर पर अपना हात घुमाते हुए अपने लंड को मसल रहा था.
यहाँ नीरज ने मेरा ब्लाउज़ ढीला कर दिया था. मेने अपने ब्लाउज़ की पिन खोली और ब्लाउज़ हटा दिया. अंदर पहना ब्रा देख नीरज उसपर चूमने लगा. कुछ देर ऊपर से ही चूमते हुए उसने ब्रा को ऊपर उठाकर दोनों मम्मो को बहार निकल दिए. में डर गयी, नीरज अब पूरा जानवर बन गया था. ब्रा जैसे ऊपर उठाया, अंदर से बहार निकले दोनों बड़े बड़े मम्मो को देख उससे रहा नहीं गया और सीधा चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा. आअह्ह्ह.. ाहः.. स्स्स्सह्श स्सश्श्श. उम्म्म्म
मेने भी ब्रा को निकाल दिया और नीरज के लिया रास्ता खोल दिया। मम्मो को जोर जोर से दबा दबा कर उसने तो मेरी हालत ख़राब कर दी. नीरज को चूचियों को चूसते हुए देख ऐसा लग रहा था की काफी दिनों से भूका है. आज मिल गया है तो पागल सा हो गया है.
मम्मो को चूसने के बाद जब नीरज पीछे हटा, उसने मुझे एक नजर ऊपर से निचे देखा। अपना शर्ट उतरके उसने फिर मेरी साड़ी का पल्लू पकड़ा और खीचने लगा. में गोल घूमते हुए साडी उतारने लगी.
जैसे साडी पूरी उतरी में सिर्फ चड्डी पहने नीरज और मेरे पति विकास के सामने खड़ी थी. नीरज ने अपना हाट अपने लंड पर रखते हुए इशारा किया. में इशारा समज़ गयी. उसके सामने निचे बैठी और उसकी पैंट उतारनें लगी. बटन खोलकर जैसे उसकी पैंट निचे खींची, मुझे नीरज के अंडरवेर के अंदर खड़ा लंड दिखने लगा. नीरज की पैंट पूरी निकल के फिर मेने दोनों हतोसे उसकी अंडरवेर पकड़ी और निचे खींचने लगी. जैसे अंडरवेर निचे आयी, अंदर से बड़ा लंबासा नीरज का लंड उछल के बाहर आया.
अंडरवेर को हटाके जैसे मेने नीरज के बड़े लंड हात में पकड़ा, मुजसे रहा नहीं गया और मेने लंड को सीधा मुँह में लेकर चूसना सुरु किया. आआह. नीरज का लंड काफी गरम था. मुँह में लेखर मेने जबान से चाटने लगी. उम्म्म अम्माम्मा.आआह्ह्ह. नीरज भी कर कराती आवाज में लंड चुसवाने का आनंद लेने लगा. जितना लंड मुँह में जा सके उतना अंदर तक ले लिया। नीरज के दोनों गोटियों को हात में पकड़कर मसलने लगी. मुँह में लंड और हात में गोटिया।
काफी देर तक लंड को सुने के बाद नीरज हम रुके. नीरज ने मुझे उठाकर बेड पर लिटा दिया. फिर वो ऊपर आकर सूझे होठोंपे चूमने लगा. चूमते चूमते निचे जाने लगा. मम्मो को चूमते हुए मेरी डोढी तक पोहचा, दोधी को चाटने लगा. में तड़पने लगी. आआह्ह। ..इसीसीसीसिस आआहाह सशह्ह्हह्ह इससष। … जबान डोढी पर गोल गोल घुमाकर अंदर डाल रहा था.
फिर जैसे निचे निचे खिसकने लगा. मेरा तो बदन तड़पने लगा. मेरी जांघ पर जाकर नीरज चूमने लगा. फिर धीरेसे उसने दोनों हतोसे मेरी चड्डी उतर दी. और में मानो पानी पानी हो गयी. मुझे अपने आपको पूरा नंगा होते देख बहोत ही अजीब सा महसूस हो रहा था. नीरज ने मेरी चड्डी निकलतेही मेरे पैर फैलाये और सीधा चुत पे मुँह रखकर चाटने लगा.
अहहहहह. आहहह. नीरज की जबान चुत के अंदर घूमने लगी. यहाँ मेरे बदन में बिजली घूमने लगी। चुत को चटवाते हुए ४४० वोल्ट का करंट लग रहा था. नीरज ने चुत से निकलने वाले पानी को भी चाट लिया। चुत में एक ऊँगली डालकर रगड़ते हुए चुत को चाट रहा था. चुत की गर्मी दुगनी हो चुकी थी.
फिर नीरज पीछे हटा, उसने अपना लंड आगे लिया और बड़ा तनहुआ लंड सीधा चुत में घुसेड़ दिया. लंड को चुत में महसूस करना एक अनोखा अनुभव होता है. इसबार तो पराये लंड को चुत में ले रही थी. तो और भी मजा आ रहा था. नीरज ने पूरा लंड चुत में दाल मेरे ऊपर सो गया और वो मुझे चोदने लगा. अहहहहह. िस्स्सस्स उफ्फ्फ्फ़ जोर जोर से लंड को चुत में धकेलकर चोद रहा था. अहहहह। … अहहहहह. लंड और चुत दोनों भी पानी से भर गए थे. वफ्फ आह्हः आअह्हह्हा. अहहहहह।।। बहोत दिन बाद आज फिरसे चुदवाने में मजा आ रहा था.
बहोत देर चोदने के बाद फिर नीरज निचे लेटा और में फिर उसके लंड पर बैठ गयी. फिर उम्र से उछल उछल कर नीरज से चुदवाने लगी. गांड को उठउठाकर लंड अंदर ले रही थी. नीरज मेरी तरफ देखते हुए आह भरने लगा. अहहहहहह. मेरे मम्मो उछल रहे थे. उन्हें देख वो चुदवाने का आनंद ले रहा था.
काफी देर बाद फिर नीरज ने मुझे घोड़ी बना दिया. पिछेसे गांड पे फटके मरते हुए उसने अपना लंड चुत में दाल दिया और मेरी कमर को पकड़कर फिरसे मुझे चोदने लगा. में झुककर बैठी थी. पीछे से नीरज मुझे चोदे जा रहा था. तभी मेरी नजर सामने बैठे मेरे पति विकास पर पड़ी. वो वह पूरा नंगा होकर अपना लंड हात में पकड़ कर हिला रहा था. मेने उसे जोर जोर से लंड को हिलाते हुए देखा.
अपने पति के सामने किसी और से चुदवाने का मजा ही कुछ और है. मेने पति की आखो में देखा वो भी मुझे देख जोर जोर से लंड दिला रहा था. तभी उसके लंड ने पानी छोड़ दिया. यहाँ में भी झड़ गयी. अहःअहः आहहहहहह. सससससस ुस्सस्फ्फ्फ्फ़
लेकिन अभी भी नीरज रुका नहीं। नीरज अभी भी मुझे चोदे जा रहा था. काफी देर बाद जब नीरज ने मेरे चुत से लंड बाहर निकला, उसने मुझे तुरंत सीधा किया और मेरे मुँह में लंड देकर सारा पानी मुँह में छोड दिया. में भी प्यासी थी तो में सारा नीरज का पानी पि गयी.
तब जाकर नीरज शांत हुआ.
उस दिन के बाद से मेरे पति विकास ने ऐसे बहोत से लड़को से मुझे चुदवाया है. दोनों को भी बहोत मजा आने लगा था. हमारा वो जोश फिरसे वापस आ गया था.
कैसी लगी हमारी कहानी जरूर कमेंट करके बताना।
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