सुबह का वक्त था. मेरे पति सोहम नाहने गए थे. में कमरे में आई और बेड की चद्दर ठीक से रखने लगी. कुछ ही पल
भारिश की वजेसे आज सुभह बहोत ही अँधेरा था. में सुभह करीब ६ बजे उठ गयी थी. मुझे जल्दी उठाने की आदत थी. सुभह सुभह
मेरा नाम रविंद्र है. लोग मुझे रवि के नाम से जानते है. में कॉलेज में पढता हु. आज जो स्टोरी में आपको बताने जा रहा
शीतल दीदी के घर आज में रहने आयी थी. शीतल दीदी मेरी मौसी की बेटी है. दोनों पति पत्नी बड़े खुले मिजास के है. हमेशा
हेलो दोस्तों, आज जो में कहानी बताने जाने वाली हु वो एक सच्ची घटना पे आधारित है. कुछ दिनों पहले ही हमने एक टूशन टीचर
आज जो में कहानी बताने जा रही हु वो सच्ची घटना पे आधारित है. मेरा नाम नीमा है. में एक टीचर हु। कॉलेज के बच्चो
दो दिन पहले की बात है. संजना ने मुझे फोन किया और मिलने बुलाया। संजना और में कॉलेज के दोस्त है. कॉलेज के बाद दोनों
सुभह का वक्त था. पापा अपने काम पे निकल गए. मेने माँ को कहा के में अपने सहेली स्नेहल के घर जा रही हु वह
सुबह का वक्त था मेने नाहा लिया और कॉलेज जाने के लिए निकल रहा था. अपनी बैग उठाई और सारी चीजे ठीक से बैग में
हेलो दोस्तों में आज जो आपको अपनी घर की कहानी सुनाने जाने वाली हु वो पूरी तरह सत्य घटना पे आधारित। ये कहानी में और
कुछ दिनों पहले की बात है. पापा ने मुझे आकर पूछा, आकाश मेरे दोस्त ने दो टिकट भेजी है. हम मध्यप्रदेश के एक मंदिर दर्शन
शाम का वक्त, में हमेशा की तरह दोस्त के सात घर पे पिने बैठने वाला था. मेने सारि तैयारियां कर ली थी. कुछ देर बाद
मेरा नाम नंदिनी है. ये कथा कुछ दिनों पहले की है. में एक स्कल में टीचर हु. बड़े बच्चो को पढ़ाती हु. स्कुल में हमेशा
मेरा नाम अनुजा है. में अभी २७ साल की हु. आज में जो कहानी बताने जा रही हु वो मेरी जिंदगी का सच है जो
सतीश के साथ काफी दिनों से व्हाट्सप्प पे बात चल रही थी. कॉलेज के वक्त उसने मुझे पटा लिया था. तब मुझे कोई अच्छा लड़का
