कुछ दिनों पहले की बात है. पापा ने मुझे आकर पूछा, आकाश मेरे दोस्त ने दो टिकट भेजी है. हम मध्यप्रदेश के एक मंदिर दर्शन
शाम का वक्त, में हमेशा की तरह दोस्त के सात घर पे पिने बैठने वाला था. मेने सारि तैयारियां कर ली थी. कुछ देर बाद
मेरा नाम नंदिनी है. ये कथा कुछ दिनों पहले की है. में एक स्कल में टीचर हु. बड़े बच्चो को पढ़ाती हु. स्कुल में हमेशा
मेरा नाम अनुजा है. में अभी २७ साल की हु. आज में जो कहानी बताने जा रही हु वो मेरी जिंदगी का सच है जो
सतीश के साथ काफी दिनों से व्हाट्सप्प पे बात चल रही थी. कॉलेज के वक्त उसने मुझे पटा लिया था. तब मुझे कोई अच्छा लड़का
२० साल का हो गया हु. जब से लंड खड़ा हो गया है, रातको हिलाये बिना नींद ही नहीं आती. आज भी सुभह से लंड
नम्रता और मेरे बिच हमेशा ही एक दोस्ती का नाता रहा है. शादी के बाद हमने अपने खुले विचारोंका पूरा उपयोग किया और करते आ
सुभह का वक्त था. माँ मंदिर चली गयी थी. पापा शहर से बाहर थे. में सुभह के करीब ७ बजे उठी. नहाने जा रही थी,
मेरा नाम रेनू है. में एक गर्ल्स कॉलेज के हॉस्टल में पढ़ती हु. कॉलेज की छुट्टियों में घर आयी थी. गर्ल्स कॉलेज में सभी लड़कियों
में एक कंपनी के मार्केटिंग डिपार्टमेंट में जॉब करता हु. मेरे साथ और एक लड़की काम करती है. उसका नाम निमिता है. में और निमिता
मेरा नाम चारुलता है. में अच्छा जीवन कैसे जीना है इस विषय पे लोगो को सलाह देती हु. कुछ दिनों पहले की बात है. मेरे
बहोत दिनों बाद मेरे मौसी का लड़का हमारे घर आया था. उसका नाम अनुज है. अनुज के साथ मेरी अछि बनती थी. सुभह सुभह वो
सुभह का वक्त था. मेरे पति नहाकर निकले और कमरे में आये. उन्होंने टावल पहना था. में बेड की चद्दर ठीक कर रही थी. अचानक
सुभह का वक्त था. करीब ८ बजे थे. मेरे पति नहाकर आये और नास्ता करने बैठ गए. आज मेरे एक कॉलेज के दोस्त के साथ
एक छोटे से गांव में मंदिर को सम्भालनेका काम गांव का एक पंडित किया करता था. गांव में ज्यादातर बुजुर्ग लोग थे. जवान सारे काम
