मेने घर में कैमरा लगा के रखा था ताके मुझे पता रहे के मेरे काम के जाने के बाद घर पर कोण कोण आता है.
Author: Sankalp Chaudhary
सुबह का वक्त था मेने नाहा लिया और कॉलेज जाने के लिए निकल रहा था. अपनी बैग उठाई और सारी चीजे ठीक से बैग में
कुछ दिनों पहले की बात है. पापा ने मुझे आकर पूछा, आकाश मेरे दोस्त ने दो टिकट भेजी है. हम मध्यप्रदेश के एक मंदिर दर्शन
में एक कंपनी के मार्केटिंग डिपार्टमेंट में जॉब करता हु. मेरे साथ और एक लड़की काम करती है. उसका नाम निमिता है. में और निमिता
पार्ट २ के बाद से हर दिन ऑफिस में उसकी एक झलक भी मुझे पागल कर देती थी। वो जानबूझकर टाइट ब्लाउज पहनती, स्कर्ट थोड़ी
उस पहली रात के बाद से हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। रुचिका अब मेरी लाइफ का सबसे बड़ा एडिक्शन बन चुकी थी। ऑफिस में
नमिका और में कॉलेज में दोस्त बने. मेरा नाम गिरिजा है. नमिका के पिता नहीं है. वो जब छोटी थी तभी नमिका के पापा ने
मेरा नाम सोहम है. में अपनी बीवी रीना के साथ जैसेलमेर घूमने आया था. रीना और में हम दोनों काफी मजमौले इंसान है. हम दोनों
हमारी शादी को १ साल हो गया था. अरेंज मैरेज थी इसलिए एक दूसरे को समझने में थोड़ा वक्त लगा. अभी हम दोनों भी मुंबई
सुभह जब में उठा, निचे काफी शोर गुल चल रहा था. उठकर आया आया और झांककर देखा तो मौसी और उसका बेटा घर आये थे.
मेरा नाम युसूफ है. में स्कूल में पढता हु. ये मेरे बचपन की कहानी है. अब्बू ने दो शादिया की थी. मेरी अम्मी पहली बीवी
मेरा नाम मीरा है. जबसे मेरे स्तनों का आकर बढ़ा है, बार बार मेरा मन स्तनों को दबानेका करता रहता है. कॉलेज में भी सारे
कुछ महीनो पहले की बात है. में घर पे दुपहर को आया करता था. कुछ दिनों से मेने देखा के माँ दुपहर को बाहर चली
मेरा नाम ऋतुराज है. ये कथा मेरे निजी जीवन में घटी एक सच्ची घटना के आधार पर लिखी है. सुभह का वक्त था. में दोस्तों
में अपनी यूपीएसी की तैयारी कर रहा था. मेरा नाम युग है. परिवार के साथ हरियाणा में रहता हु. कुछ दिनों पहले ही मुझे अपने
