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मेरा नाम राहुल है, उम्र २८ साल, मुंबई में रहता हूँ। मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ और अपनी जिंदगी को हमेशा से bisexual महसूस करता रहा हूँ। लड़कियों की नरम शरीर और मीठी सांसें मुझे पागल कर देती थीं, लेकिन लड़कों की मजबूत बाहें और कठोर लंड भी मेरे मन में आग लगा देते थे। ये राज मैंने कभी किसी से नहीं कहा था, लेकिन एक रात सब बदल गया।
कंपनी की पार्टी में मुझे प्रिया मिली। वो २६ साल की खूबसूरत लड़की थी—लंबे बाल, गोल-मटोल गांड और बड़े-बड़े स्तन। हम दोनों शराब के नशे में बातें करते-करते होटल के रूम तक पहुंच गए। कमरे में घुसते ही प्रिया ने मुझे जोर से किस किया। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस रही थी। मैंने उसकी साड़ी खोल दी और उसके नंगे स्तनों को चूसने लगा। प्रिया कराह रही थी, “राहुल, और जोर से…”
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। प्रिया मुस्कुराई और बोली, “मेरा सरप्राइज है।” दरवाजा खुला तो अंदर आया विक्रम—प्रिया का दोस्त, ३० साल का हाईट वाला मर्द, चौड़ी छाती और जिम किया हुआ शरीर। प्रिया ने बताया कि वो दोनों bisexual couple हैं और आज रात वो मुझे दोनों के साथ एन्जॉय करना चाहते हैं।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। प्रिया ने मुझे बेड पर लिटाया और मेरे कपड़े उतार दिए। मेरा ८ इंच का लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था। प्रिया ने उसे मुंह में ले लिया और चूसने लगी। उधर विक्रम ने मेरी जांघों को चूमते हुए मेरे लंड के पास आ गया। उसकी गर्म सांस महसूस होते ही मैं सिहर गया। विक्रम ने प्रिया के साथ मिलकर मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया—एक साथ दोनों की जीभें मेरे लंड पर नाच रही थीं।
“उफ्फ… क्या मजा आ रहा है,” मैं कराह उठा।
प्रिया ने विक्रम को किस किया और बोली, “अब राहुल को दिखाओ तेरा ताकत।” विक्रम ने अपना ७ इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। मैंने पहली बार किसी मर्द का लंड इतने करीब से देखा। प्रिया ने मुझे विक्रम का लंड चूसने को कहा। मैं झिझका, लेकिन प्रिया की उंगलियां मेरी गांड में घुस रही थीं, जिससे मैं और उत्तेजित हो गया। मैंने विक्रम का लंड मुंह में लिया। स्वाद अजीब लेकिन रोमांचक था। विक्रम मेरे बाल पकड़कर मुंह में धकेल रहा था।
प्रिया ने अपना मुंह मेरी गांड पर रख दिया और चाटने लगी। तीनों का शरीर एक-दूसरे से लिपटा हुआ था। फिर प्रिया ने मुझे अपनी चूत में लंड डालने को कहा। मैंने प्रिया को चोदा जोर-जोर से, जबकि विक्रम मेरी पीठ से चिपककर अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ रहा था। थोड़ी देर बाद विक्रम ने लुब्रिकेटेंट लगाया और धीरे-धीरे अपना लंड मेरी गांड में घुसा दिया। दर्द के साथ-साथ अनोखा सुख मिल रहा था।
“आह… फाड़ दो मेरी गांड… और जोर से चोदो,” मैं चिल्लाया।
प्रिया मेरे नीचे लेटी हुई थी और मैं उसे चोद रहा था, जबकि विक्रम पीछे से मेरी गांड मार रहा था। तीनों का तालमेल कमाल का था। प्रिया की चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी और विक्रम का लंड मेरी गांड को भर रहा था। हम तीनों पसीने से तर थे।
करीब आधे घंटे बाद विक्रम पहले झड़ गया मेरी गांड के अंदर। गर्म वीर्य की महसूस होते ही मैं भी प्रिया की चूत में झड़ गया। प्रिया भी जोर से चीखकर झड़ गई।
उस रात हम तीनों बार-बार पोजीशन बदलते रहे—कभी प्रिया दोनों लंडों को चूसती, कभी मैं विक्रम को चोदता जबकि प्रिया मुझे चोदती। सुबह तक हम थक चुके थे, लेकिन खुशी से झूम रहे थे।
उस दिन के बाद मेरी bisexual जिंदगी शुरू हो गई। प्रिया और विक्रम अब मेरे नियमित पार्टनर बन गए। हम अक्सर साथ घूमते, सेक्स करते और एक-दूसरे की इच्छाओं को पूरा करते। Bisexual होना अब मुझे शर्म की बात नहीं, बल्कि खुली आजादी लगती है। जिंदगी में दोनों तरफ का मजा लेना—औरत की नरमी और मर्द की ताकत—ये अनुभव अनमोल है।
अगर आप भी ऐसी कहानी पढ़ना पसंद करते हैं तो बताएं, मैं और लिख सकता हूँ। (शब्द संख्या: लगभग ५००)
नोट: ये पूरी तरह काल्पनिक कहानी है, केवल मनोरंजन के लिए। असली जिंदगी में सहमति और सुरक्षा जरूरी है।
















