Bisexual hindi sex story

बाइसेक्सुअल हिंदी सेक्स स्टोरीज को पढ़ने के लिए आप निचे दी गयी लिंक पे क्लिक करे. इन कहानियो को बायसेक्सुअल लोगो ने लिखा है. अपनी कहानियो को लोग अपने अंदाज में प्रकाशित करके अपना अनुभव लोगो के सामने रखते है. इन बायसेक्सुअल सेक्स कहानिका आनंद ले और अपने अंदर की गर्मी को ठंडा करे. आप भी अगर अपना अनुभव बताना चाहते है तो जरूर हमें ईमेल लिखकर अपनी कहानिया भेजे। हम आपकी कहानियो को लोगो तक पोहचायेंगे।

कुलसुम आंटी की गांड का हर कोई दीवाना था, वो जब भी मोहल्ले के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने
मेरा नाम अनुज है. में ऑफिस में काम करता हु. ऑफिस छोटा है. सिर्फ ९ लोग ऑफिस में काम करते
सिस्टर ब्रा पैंटी सेक्स कहानी में कॉलेज में एक लड़की को मैंने बहन बना लिया. उसका बॉयफ्रेंड उसे चोदता था.
कुछ महीनो पहले की बात है. में घर पे दुपहर को आया करता था. कुछ दिनों से मेने देखा के
जब मैं ग्रेजुएशन कर रहा था. उसी बीच मैंने एक सरकारी नौकरी के लिए एग्जाम दिया था। मैं उसका एग्जाम
मेरा नाम विवान है. में अभी स्कूल में पढता हु. कुछ ही दिनों पहले मेरी सबसे छोटी मासी घर आई
मैंने एक आंटी की मदद की उनका सामान उनके घर पहुंचाने में. उन्होंने मुझे अंदर बुला लिया. उनके घर में
काजल की हाईट कम है, पर पूरा शरीर भरा हुआ है। उपर से उसका चेहरा एक दम गोरा और भरा
दोस्तों, मैं सायली हूं। आज मैं आपको बताने जा रही हूं कि कैसे मैंने जोखिम उठाया और अपने पिता की
सभी को नमस्कार, यह घटना लॉकडाउन के दौरान और लॉकडाउन के कारण घटी। मैं रिट्ज़ हूँ, 24 साल का। मैं
मैं रोज ही इसकी सेक्सी स्टोरीज पढ़ती हूँ और आनन्द लेती हूँ। आप लोगो को भी यहाँ की सेक्सी और
जिस दिन से मैंने इस नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया था मेरी नज़र अवनी भाभी पर बनी हुई थी, उनके
२० साल का हो गया हु. जब से लंड खड़ा हो गया है, रातको हिलाये बिना नींद ही नहीं आती.
हेलो दोस्तों में आज जो आपको अपनी घर की कहानी सुनाने जाने वाली हु वो पूरी तरह सत्य घटना पे
मेरा नाम पंकज है. में और मेरी गर्लफ्रेंड साक्षी दोनों मेट्रो से जा रहे थे. कुछ देर बाद मेने देखा
मेरा नाम अनुजा है. में अभी २७ साल की हु. आज में जो कहानी बताने जा रही हु वो मेरी
सर्दी का मौसम कई बार बहुत खास हो जाता है। जब आपको कुछ ऐसी चीजें सामने आ जाते हैं जो
मेरा नाम गीता है. में अभी ११ वि में हु. कुछ ही दिन पहले मेरा रिजल्ट आया और में पास
नैना आंटी के सिखाए गुर उनकी अपनी बेटी टीना पर आज़माने के बाद उसी परिवार की एक और चुदासी चूत
मेरी कहानी कुछ ऐसी है‌ कि बाकी कहानियों की तरह मेरी कहानी में कोई डायलॉग्स नहीं है। हम मां-बेटे के

मेरा नाम राहुल है, उम्र २८ साल, मुंबई में रहता हूँ। मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ और अपनी जिंदगी को हमेशा से bisexual महसूस करता रहा हूँ। लड़कियों की नरम शरीर और मीठी सांसें मुझे पागल कर देती थीं, लेकिन लड़कों की मजबूत बाहें और कठोर लंड भी मेरे मन में आग लगा देते थे। ये राज मैंने कभी किसी से नहीं कहा था, लेकिन एक रात सब बदल गया।

कंपनी की पार्टी में मुझे प्रिया मिली। वो २६ साल की खूबसूरत लड़की थी—लंबे बाल, गोल-मटोल गांड और बड़े-बड़े स्तन। हम दोनों शराब के नशे में बातें करते-करते होटल के रूम तक पहुंच गए। कमरे में घुसते ही प्रिया ने मुझे जोर से किस किया। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस रही थी। मैंने उसकी साड़ी खोल दी और उसके नंगे स्तनों को चूसने लगा। प्रिया कराह रही थी, “राहुल, और जोर से…”

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। प्रिया मुस्कुराई और बोली, “मेरा सरप्राइज है।” दरवाजा खुला तो अंदर आया विक्रम—प्रिया का दोस्त, ३० साल का हाईट वाला मर्द, चौड़ी छाती और जिम किया हुआ शरीर। प्रिया ने बताया कि वो दोनों bisexual couple हैं और आज रात वो मुझे दोनों के साथ एन्जॉय करना चाहते हैं।

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। प्रिया ने मुझे बेड पर लिटाया और मेरे कपड़े उतार दिए। मेरा ८ इंच का लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था। प्रिया ने उसे मुंह में ले लिया और चूसने लगी। उधर विक्रम ने मेरी जांघों को चूमते हुए मेरे लंड के पास आ गया। उसकी गर्म सांस महसूस होते ही मैं सिहर गया। विक्रम ने प्रिया के साथ मिलकर मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया—एक साथ दोनों की जीभें मेरे लंड पर नाच रही थीं।

“उफ्फ… क्या मजा आ रहा है,” मैं कराह उठा।

प्रिया ने विक्रम को किस किया और बोली, “अब राहुल को दिखाओ तेरा ताकत।” विक्रम ने अपना ७ इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। मैंने पहली बार किसी मर्द का लंड इतने करीब से देखा। प्रिया ने मुझे विक्रम का लंड चूसने को कहा। मैं झिझका, लेकिन प्रिया की उंगलियां मेरी गांड में घुस रही थीं, जिससे मैं और उत्तेजित हो गया। मैंने विक्रम का लंड मुंह में लिया। स्वाद अजीब लेकिन रोमांचक था। विक्रम मेरे बाल पकड़कर मुंह में धकेल रहा था।

प्रिया ने अपना मुंह मेरी गांड पर रख दिया और चाटने लगी। तीनों का शरीर एक-दूसरे से लिपटा हुआ था। फिर प्रिया ने मुझे अपनी चूत में लंड डालने को कहा। मैंने प्रिया को चोदा जोर-जोर से, जबकि विक्रम मेरी पीठ से चिपककर अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ रहा था। थोड़ी देर बाद विक्रम ने लुब्रिकेटेंट लगाया और धीरे-धीरे अपना लंड मेरी गांड में घुसा दिया। दर्द के साथ-साथ अनोखा सुख मिल रहा था।

“आह… फाड़ दो मेरी गांड… और जोर से चोदो,” मैं चिल्लाया।

प्रिया मेरे नीचे लेटी हुई थी और मैं उसे चोद रहा था, जबकि विक्रम पीछे से मेरी गांड मार रहा था। तीनों का तालमेल कमाल का था। प्रिया की चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी और विक्रम का लंड मेरी गांड को भर रहा था। हम तीनों पसीने से तर थे।

करीब आधे घंटे बाद विक्रम पहले झड़ गया मेरी गांड के अंदर। गर्म वीर्य की महसूस होते ही मैं भी प्रिया की चूत में झड़ गया। प्रिया भी जोर से चीखकर झड़ गई।

उस रात हम तीनों बार-बार पोजीशन बदलते रहे—कभी प्रिया दोनों लंडों को चूसती, कभी मैं विक्रम को चोदता जबकि प्रिया मुझे चोदती। सुबह तक हम थक चुके थे, लेकिन खुशी से झूम रहे थे।

उस दिन के बाद मेरी bisexual जिंदगी शुरू हो गई। प्रिया और विक्रम अब मेरे नियमित पार्टनर बन गए। हम अक्सर साथ घूमते, सेक्स करते और एक-दूसरे की इच्छाओं को पूरा करते। Bisexual होना अब मुझे शर्म की बात नहीं, बल्कि खुली आजादी लगती है। जिंदगी में दोनों तरफ का मजा लेना—औरत की नरमी और मर्द की ताकत—ये अनुभव अनमोल है।

अगर आप भी ऐसी कहानी पढ़ना पसंद करते हैं तो बताएं, मैं और लिख सकता हूँ। (शब्द संख्या: लगभग ५००)

नोट: ये पूरी तरह काल्पनिक कहानी है, केवल मनोरंजन के लिए। असली जिंदगी में सहमति और सुरक्षा जरूरी है।

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