Antarvasna sex kahaniya

सावित्री 32 साल की विधवा थी। पति की मौत के बाद तीन साल से उसका शरीर सूखा पड़ा था। गाँव
मैं पढ़ाई के लिए दिल्ली आया और एक कमरा लिया रहने के लिए. मकान मालकिन भाभी को देख कर लगा
मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता हूँ और हमें अक्सर ट्रेनिंग्स और मीटिंग्स के लिए दुसरे शहरों में जाना
सुभह का वक्त था. पापा अपने काम पे निकल गए. मेने माँ को कहा के में अपने सहेली स्नेहल के
ये तब की कहानी है जब मेरी दीदी की शादी नहीं हुई थी। मैं और मेरी दीदी (बड़ी बहन) दादाजी
आसाम की हरी भरी वादियां और जवान दिलों का संगम. किसको लुभा नहीं लेगा। ऐसे ही आसाम की हरी भरी
सुबह का वक्त था. मेरे पति सोहम नाहने गए थे. में कमरे में आई और बेड की चद्दर ठीक से
हेलो दोस्तों मैं आपका प्यारा रवि. आप सभी के कमैंट्स और मेल के लिए थैंक्स. आप सभी ने मेरी पिछली
मेरा नाम मीत (बदला हुआ नाम) है. मेरी उम्र 30 साल है और मैं अविवाहित हूँ.मैं पंजाब में रहता हूँ.
सुबह की बात थी. पापा ने मुझे बाहर से आवाज लगायी. अर्जुन स्कूल नहीं जाना. जल्दी उठो. में पापा से
सुभह जब में उठा, निचे काफी शोर गुल चल रहा था. उठकर आया आया और झांककर देखा तो मौसी और
हेलो , आज जो बड़ा लण्ड और प्यासी चूत की कहानी बताने जा रहा हू वो मेरी प्यासी चूत की
मेरा नाम जय है. में रोहतक में रहता हु. कुछ दिनों पहले की बात है. में अपनी छोटी चाची के
पम्मी दीदी के साथ चुदाई का सिलसिला शुरू हुए अभी महिना ही गुज़रा था की एक दिन जब मैं और
मेरी माँ का नाम शशि है। हम कोयंबटूर में रहते हैं। वह 37 साल की हैं, लेकिन दिखने में उनसे
जब मैं ग्रेजुएशन कर रहा था. उसी बीच मैंने एक सरकारी नौकरी के लिए एग्जाम दिया था। मैं उसका एग्जाम
पत्नी कितनी ही खुबसूरत क्यूँ न हो, सालियों की जवानी पे जीजा का दिल आ ही जाता है. और जब
रातकी बस थी. माँ ने मुझे घरमे आवाज लगायी. सोनू बैग भरके तैयार रखना. मेने अपनी बैग भरकर रख दी
मेरा नाम आशुतोष है. में बिहार का रहने वाला हु. कुछ ही दिन पहले मेरा इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन हुआ.
मेरा नाम नीरज है. मेरी उम्र ३६ साल है. मेरी शादी हो चुकी है और २ बच्चे भी है. मेरी