विधवा की प्यास – सावन और आर्यन

सावित्री 32 साल की विधवा थी। पति की मौत के बाद तीन साल से उसका शरीर सूखा पड़ा था। गाँव के लोग उसे डायन, अभागिन कहते, लेकिन रात को उसका बदन जलता था। चूचियाँ भरी, कमर पतली, गांड गोलो, योनि गीली होने को तरसती। भावनात्मक भूख और शारीरिक प्यास दोनों ने उसे अंदर से खा लिया था।

एक दिन उसके देवर का बेटा आर्यन आया। 14 साल का, स्कूल से घर आया हुआ, लंबा, मुसलसल, काली आँखें, मजबूत जबड़ा, छाती पर हल्का बाल, और नीचे एक ऐसा लंड जो जींस में भी दिखाई देता। सावित्री ने पहली नजर में उसे देखा और उसकी योनि ने एक झटका मारा।

पहले दिन आर्यन ने उसे “बुआ” कहा। सावित्री की आँखें नम हो गईं। रात को जब सब सो गए, आर्यन ने उसके कमरे का दरवाजा खोल दिया।

“बुआ… मैं सो नहीं पा रहा। आपके लिए… मेरी… जरूरत है।”

सावित्री उठी। साड़ी गीली थी। उसने आर्यन को अपने सीने से लगा लिया। “बेटा मत बोल। आज से मैं तेरी औरत हूँ।”

पहला संभोग भयंकर इंटेंस था।

आर्यन ने उसकी साड़ी उतार दी। बड़े बड़े गोरे स्तन, गुलाबी निप्पल जो पहले से ही टाइट थे। उसने एक चूची मुँह में ले ली, दूसरी को हाथ से मसला। सावित्री की आह निकल गई। “आर्यन… धीरे… नहीं… मत रुक… चूस… जोर से चूस।”

आर्यन ने दोनों निप्पलों को बारी-बारी से चूसा, काटा, जीभ से घुमाया। सावित्री की योनि से पानी निकलने लगा। आर्यन ने उसके पेट से नीचे किस किए, जाँघों को खोला, और उसकी गीली चूत पे जीभ रख दी।

“बुआ… कितनी गीली हो… तीन साल से किसी ने नहीं छुआ क्या?”

“नहीं… अब तू ही छू… खा जा मुझे।”

आर्यन ने उसकी चूत को चाटा जैसे भूखा हो। क्लिट को सक किया, जीभ अंदर डाली, दो उँगलियाँ घुसा दी। सावित्री का बदन काँपने लगा। वह पहली ऑर्गैज़्म में चिल्लाई – “आर्यन… आ रही हूँ… बस… मत रुक…”

जब वह थोड़ी संभली, आर्यन ने अपना 8 इंच का मोटा लंड निकाला। सावित्री ने आँखें फाड़ दीं। उसने उसे मुँह में लिया, गले तक, आँखों में आँसू आए लेकिन रुकी नहीं। “कितना बड़ा… मेरी चूत फाड़ देगा…”

आर्यन ने उसे बेड पे लिटाया, जाँघें खोलीं, और एक झटके में अंदर घुस गया। सावित्री की चीख निकल गई। दर्द और प्लेज़र दोनों। आर्यन ने रुक कर देखा।

“बुआ… दर्द हो रहा है?”

“हाँ… लेकिन मत निकाल… अंदर ही रहने दे… अब धीरे-धीरे हिला…”

आर्यन ने धीरे से थ्रस्ट शुरू किए। हर धक्के पे सावित्री की चूचियाँ हिलती, उसके मुँह से आह निकलते। फिर स्पीड बढ़ी। बेड की आवाज, मांस की थप-थप, सावित्री के “हार्डर… और अंदर… मेरी चूत फाड़ दे…”

आर्यन ने उसकी टाँगें कंधे पे रखीं, डीप एंगल से चोदने लगा। सावित्री की दूसरी ऑर्गैज़्म आई, उसकी चूत ने लंड को पकड़ लिया। आर्यन भी कंट्रोल खो बैठा और उसके अंदर ही झड़ गया – गरम, मोटा वीर्य उसकी कोख में भर गया।

वह दोनों पसीने से भीग कर लेटे रहे। आर्यन ने उसके माथे पे किस किया। “मैं आपको सिर्फ जिस्म से नहीं… दिल से भी चाहता हूँ। आप मेरी हो।”

सावित्री रो पड़ी। तीन साल बाद किसी ने उसे “मेरी” कहा था।

अगले दिन से उनका रिश्ता बदल गया। दिन में आर्यन “बुआ” कहता, रात में “मेरी रंडी, मेरी प्यारी, मेरी विधवा जिसकी चूत मेरी है।”

दूसरी रात और भी इंटेंस थी। सावित्री ने आर्यन को अपने ऊपर बिठाया। उसने लंड को अपनी चूत पे रगड़ा, फिर धीरे-धीरे अंदर लिया। काउगर्ल पोजीशन में वह उसके ऊपर उछलती रही। आर्यन ने उसकी चूचियाँ पकड़ीं, निप्पलों को पिंच किया। सावित्री ने अपनी चूत से उसका लंड मिलाया, क्लिट को रगड़ा, और झड़ती रही।

फिर आर्यन ने उसे डॉगी बनाया। गांड ऊपर, सिर नीचे। उसने पीछे से घुसाया, एक हाथ से उसकी चूत मसली, दूसरे से चूची। “बुआ… तेरी गांड कितनी सॉफ्ट है… कल इसमें भी लूँगा।”

सावित्री ने मुँह से कहा, “आज ही ले… मेरी दोनों होल्स तेरी हैं।”

आर्यन ने थूक लगाया, धीरे-धीरे उसकी टाइट गांड में घुसाया। सावित्री की आँखें फट गईं, लेकिन उसने हाथ पीछे भेज कर आर्यन को और अंदर खींच लिया। “पूरा… अंदर डाल… मेरी गांड भी तेरी बन जाए।”

उस रात दोनों होल्स में आर्यन ने झड़ा। सावित्री की चूत और गांड से उसका वीर्य निकलता रहा।

भावनात्मक पक्ष भी गहरा होता गया। सुबह आर्यन उसके बाल सँवारता, नाश्ता बनाता, उसे गोद में बिठा कर बातें करता। “मैं आपको गाँव से ले जाऊँगा। आप मेरी बीवी बनोगी। लोग क्या कहेंगे, मुझे फर्क नहीं पड़ता।”

सावित्री उसके सीने पे सिर रख कर रोती। “मैं विधवा हूँ… उम्र में बड़ी… लोग तुझे पागल कहेंगे।”

“फिर पागल ही सही। आपकी प्यास बुझाने के लिए मैं पागल हूँ।”

अगले हफ्ते उन्होंने हर पोजीशन ट्राई की। मिशनरी में आँखों में आँखें डाल कर, स्पून्स में धीमे प्यार से, स्टैंडिंग में बाथरूम में, किचन काउंटर पे, रात को छत पे चाँद के नीचे।

एक रात सावित्री ने आर्यन से कहा, “आज तू सिर्फ मेरी चूत नहीं… मेरा दिल भी चोद। मुझे फील करा कि मैं सिर्फ एक बॉडी नहीं, एक औरत हूँ।”

आर्यन ने उसे कितने देर तक किस किया, उसके शरीर के हर इंच को चाटा, उसकी योनि को आवर्स तक मुँह से प्यार किया बिना अंदर डाले। जब सावित्री तड़प-तड़प कर रही थी, तभी उसने धीरे से घुसाया और बिल्कुल स्लो, डीप, इमोशनल थ्रस्ट्स मारे। हर धक्के के साथ “मैं तुमसे प्यार करता हूँ” बोलता रहा। सावित्री ने उस रात आँखों से रो कर ऑर्गैज़्म किया।

उनका संभोग अब सिर्फ फिजिकल नहीं रहा। हर बार पहले प्यार, फिर जिस्म, फिर फिर से प्यार।

एक महीने बाद आर्यन ने उसे प्रपोज किया। गाँव वाले चुपचाप देखते रहे जब आर्यन ने सावित्री का हाथ पकड़ा और बोला, “यह मेरी औरत है। जो बोलेगा, मुझसे लेगा।”

रात को उन्होंने सबसे इंटेंस रात मनाई। आर्यन ने सावित्री को चार-चार बार चोदा – चूत, गांड, मुँह, फिर से चूत। बीच-बीच में उसे पानी पिलाया, उसके बदन पे मसाज किया, उसे अपने सीने से चिपकाया। सुबह जब दोनों थक कर सोए, सावित्री ने सपने में भी आर्यन का नाम लिया।

उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं होती। वे शहर चले गए। आर्यन ने जॉब ली, सावित्री ने छोटा सा बिजनेस शुरू किया। रात को उनका बेडरूम उनका मंदिर बना जहाँ हर रोज नया प्यार और नया संभोग होता।

कभी आर्यन उसे रस्सी से बाँधता, कभी सावित्री उसके ऊपर सवार होकर कंट्रोल लेती। कभी दोनों बिल्कुल सॉफ्ट, सिर्फ आँखों से बात करते हुए, कभी इतना हार्ड कि बेड टूटने को होता।

लेकिन हर बार के बाद आर्यन उसके कान में कहता:

“तुम्हारी फिजिकल नीड मेरी जिम्मेदारी है। तुम्हारी इमोशनल नीड मेरी साँसें हैं। मैं तुम्हारा यंग दीवाना हूँ, तुम मेरी पूरी दुनिया।”

सावित्री मुस्कुराती, उसके लंड को फिर से हार्ड करती, और कहती:

“फिर से अंदर आ… आज की रात अभी खत्म नहीं हुई।”

kamdevratidevi69@gmail.com

बताओ तुम्हें कैसा लगता है।

धन्यवाद

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