सुबह का वक्त था में घर से क्रिकेट मैच खेलने चला गया था. जब १० बजे के आस पास घर आ रहा था, तो मेने देखा के अम्मी पडोसीके पिछेके दरवाजेसे निकली और हमारे पीछे के दरवाजेसे अंदर आई. मेने सोचा ये पडोसी के घर क्यों गयी थी. और अगर जाना ही था तो आगे के रास्ते से भी जा सकती थी.
उसी दिन शामको मुझे पता चला के पड़ोस के घर में तो सिर्फ सलीम चाचा है. उनकी बीवी और बच्चे तो घूमने गए है. मुझे फिर से सुबह की अम्मी की बाते याद आने लगी. मुझे कुश शक होने लगा.
दूसरे दिन फिर से में सुभह क्रिकेट मैच खेलने जा रहा हु कहकर घर से निकला, लेकिन इस बार में गया नहीं। पास की दुकान पे बैठा रहा और करीब ९ बजे फिर से घर की और आया.
घर में दाखिल हुआ, अंदर देखा तो अम्मी दिख नहीं रही थी. मेरा शक और गहरा होने लगा. में अपने घर के पीछे के रस्ते से पड़ोस के सलीम चाचा के घर की तरफ पोहचा, पीछे का दरवाजा बंद था. तो में अंदर झाकने के लिए कोई जगा मिल रही है तो ढूढने लगा. पीछे एक बड़ी दीवाल थी. उसको लगकर एक खिड़की दिख गयी. खिड़की पे अंदर से एक परदा चढ़ा हुआ था. मेने धीरेसे खिड़की का परदा कोने से हटाया और जैसे ही अंदर झाकने लगा.
मेरे तो होश ही उड़ गए. अंदर काले बुरखे में एक औरत थी. उसकी पीठ मेरी तरफ थी. सलीम चाचा ने उस औरत को गले लगाकर रखा था. दोनों एक दूसरे के होठो को चुम रहे थे. सलीम चाचा के दोनों हात औरत की गांड पे थे, और वो गांड दबाये जा रहे थे.
मुझे डर महसूस हो रहा था लेकिन आगे क्या होगा ये देखने की भी ख्वाइश जाग रही थी. तो में वही खड़ा अंदर झांकता रहा.
सलीम चाचा ने उस औरत को चूमते हुए उसके मम्मो को को भी दबाया। फिर आगे से बुरखा उठाकर उसके मम्मो को चूसने लगा. आह्ह्ह्ह।। उम्. वो औरत भी उसे पूरा सहयोग कर रही थी. उसने दोनों मम्मो को चूसने दिया।
फिर जैसे दोनों ने फिर से एक दूसरे को चूमा और औरत जाने के लिए निकली। मुझे लगा अब मुझे भी चले जाना चाहिए। में जाने ही वाला था के उस औरत ने अपना मुँह जैसे ही पीछे घुमाया में चौक गया. वो औरत और कोई नहीं मेरी अम्मी थी.
मेरी आँखे खुली की खुली रह गयी, मेरी सास कुछ देर के लिए थम गयी. मुझे समज नहीं आ रहा था के में क्या करू.
मेरी आखो के सामने अम्मी सलीम चाचा के घर के पीछे के दरवाजे से निकली। और हमारे घर में चली गयी. में भी धीरेसे पीछे के दरवाजे से अंदर आया.
अम्मी ने मुझे अंदर आते हुए देखा। वो थोड़ा चौक गयी.
लेकिन बात टालते हुए मुझे कहने लगी, अरे फैज़ल तू पीछे के रस्ते से क्यों आ रहा है. कहा गया था.
तो में अम्मी की तरफ एक नजर देखने लगा. अम्मी को शायद पता चल गया के में उससे ऐसे क्यों बर्ताव कर रहा हु. मेने कुछ नहीं कहा. में सिर्फ देखता रहा.
अम्मी थोड़ी डर गयी, वो पीछे मुड़कर अपने काम में लग गयी.
मुँह छुपाकर मुझे पूछने लगी, क्या खाओगे आज फैजल। क्या बनावु में तुम्हारे लिए.
मेने कहा जो तुम खिलाओगी वो खा लूंगा। कहते हुए में पीछे से अम्मी के करीब आते जा रहा था.
मेने आगे कहा, तुम तो जिस प्यार से खिलाती हो, सामने वाला तो खुश हो जाता है.
अम्मी थोड़ी चौक गयी मेरी बाते सुनकर। मुझे हड़बड़ाते हुए पूछने लगी. ये तुम क्या कह रहे हो फैज़ल।
वही अम्मी, खाने की बाते। मुझे भी भूक लग रही है. तो मेने सोचा तुम मुझे क्या खिलाओगी आज.
में अम्मी के अब पीछे ही खड़ा था. मेने धीरेसे अम्मी को कहा, वैसे ही खिलाना जैसे तुम सलीम चाचा को अभी अभी खिलाके आई हो.
अम्मी मेरी बात सुनकर कुछ बोल ही नहीं रही थी.
मेने धीरेसे अपना हात अम्मी के गांड पे रखकर अम्मी की गांड दबायी, अम्मी ने तुरंत मुड़कर देखा और कहा,
फैज़ल तुम ये क्या कर रहे हो. में तुम्हारी माँ हु.
मेने कसकर अम्मी को अपनी बाहो में लिया, और आखो में देखते हुए कहा. यही तो में भी सोच रहा हु, के तुम मेरी माँ हो.
कहते हुए मेरे दोनों हात अम्मी के कोमल पीठ को सहला रही थी. मेने अम्मी की आखो में देखते हुए कहा, जो सलीम चाचा के साथ कर रही थी, वो मुझे भी करने दो नहीं तो में अब्बू को सब बता दूंगा।
सलीम चाचा का नाम सुनकर ही अम्मी के होश उड़ गए. वो मेरी तरफ देखती रही. पीछे मेरे हात धीरेसे से कमर की निचे की और बढे और मेने दोनों हातो से अम्मी की गांड दबा दी जैसे सलीम चाचा दबा रहे थे.
मेरे गांड दबाते ही अम्मी ने आह्ह्ह्हह। की आवाज की. मेने अम्मी को कसकर चुम लिया। होठो को होठ रगड़ने लगी. अम्मी मुझे दूर करने लगी. लेकिन मेने कसकर अम्मी को अपनी बाहो में भर उसको चूमना जारी रखा,
आह्हः उम्मम्मम उम्म्म्म उम्म्म्म
होठो को होठ रगड़ने लगे, मेरे दोनों हात अम्मी के पीठ पे घूम रहे थे. अम्मी को गांड को दबा रहे थे. आह्ह्ह्ह अहहह उम्म्म्म
फिर चूमते हुए एक हात आगे लिया और अम्मी के स्तनों को दबाने लगा. आह्हः अह्ह्ह उम्म्म्म।। एक हात गांड पे, दूसरा स्तनों पे और ऊपर होठो होठ रगड़ रहे थे. आह्हः अहह उम्म्म्म अह्ह्ह्ह उम्मम्म
उसी जल्दबाजी में मेने अम्मी का बुरखा ऊपर उठाया, निचे से कुरता भी ऊपर उठा, स्तनों के ऊपर हात रखा तो ब्रा हात को लगने लगा. अम्मी अभी भी मुझे दूर करने की कोशश में थी. मेने अम्मी की गर्दन को चूमना सुरु किया तो उसके मुँह से सिसकने की आवाज आने लगी. आह्हः अहह उम्म्म फैजल अह्ह्ह।। मत कर ये सब. में तेरी माँ हु बेटा।।। आह्ह्ह्ह ये सब सही नहीं है.
यहाँ मेरा लंड पेंट के अंदर तन गया था. अम्मी के कोमल शरीर को महसूस करने के बाद दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था. आह्हः उम्मम्मम्म।।।
फिर जैसे ही मेने बुरखा उतरा, उसके साथ अंदर का कुरता भी निकल गया. अम्मी को ब्रा में देखा तो में पागल ही हो गया. ब्रा के ऊपर से दिख रहे बड़े बड़े स्तनों को देख मेरे मुँह में पानी आ गया. मेने अपना मुँह स्तनों पे रखकर उसे चूमना सुरु किया। आह्हः अहहह उम्म्म्म। आआआ. दोनों हातो से दबाये जा रहा था. आह्हः हहहह उम्मम्मम्मम्म
स्तनों को चूमते हुए, ब्रा निचे कर दी, और जैसे ही निप्पल दिखने लगे, तुरंत मुँह में लेकर चूसने लगा. आह्ह्ह्ह अहहह।। अम्मी का एक एक स्तन मेरे मुँह के आकर का था. अह्ह्ह हहह उम्. निपल को चूसते हुए जब मुँह स्तन पे दबा रहा था… उसकी कोमलता से में और उत्तेजित होने लगा. आह्हः अहह उम्म्म्म।।।
दोनों स्तनों को बरी बरी चूस लिया। चूसते हुए मेने अपना टीशर्ट उतार दिया था. स्तनों को चूसते ही जब में पीछे हटा, और अम्मी की आखो में देखा तो उसकी आखो में भी हवस दिखाई दे रही थी. उसकी नज़ारे नशीली हो चुकी थी. मानो मुझे कह रही हो, अब क्या करोगे आगे.
मेने अम्मी का हात पकड़के पास के कमरे में ले आया. गद्दे पे निचे सुलाके उसपर चढ़ गया. अम्मी के होठ, गर्दन को चुनते हुए निचे जाने लगा. निचे जाने लगा. अम्मी की नाभि को चूमते हुए अपनी जीभ उसपे घिसने लगा. अम्मी की आअह्ह्ह्ह की आवाज पुरे कमरे में गूंज रही थी. आअह्ह्ह अहह उम्म्म्म
निचे निचे आते हुए, अम्मी की सलवार खोल दी, दोनों हातो से पकड़के निचे खींची और अम्मी को नंगा करने लगा. अम्मी की बड़ी सी चड्डी देखकर मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा. मेने अपनी पेंट उतार दी. लंड अंदर बहोत चूब रहा था. अब में सिर्फ अंडरवेर पे था.
सामने अम्मी भी चड्डी पहने गद्दे पे लेटी हुई बहोत सुन्दर दिख रही थी. आह्हः।।
जब मेने अम्मी की चड्डी दोनों हातो से पकड़ी और निचे खींचने लगा. अम्मी ने शरमाते हुए अंगड़ाई ली. मेने अम्मी की चड्डी उतार दी और जब चुत को पहली बार देखा, आह्ह्हह्ह्ह्ह।। कितना सुन्दर नजारा था.
मेने जरा भी देर न की, और सीधा अम्मी की चुत को चूसने लगा. आह्ह्ह्ह अहह उम्म्म।। अहह. जबान को चुत पे रगड़ते हुए मेने चुत को चाटना सुरु किया आह्हः अहह ह उम्मम्मम आह्ह्ह्ह उफ्फ्फफ्फ्फ़
गर्म चुत से पानी टपक रहा था. जबान को अंदर डालते हुए पूरा पानी चूसने लगा. उम्म्म्म उम्म्म्म अम्मी गद्दे पे तड़प रही थी.
मेने दोनों पैर फैलाये और ऊँगली चुत में डालकर रगड़ने लगा. आअह्ह्ह अहहहह उम्म्म्म। रगड़ते हुए मेने देखा और एक ऊँगली जा सकती है. तो दोनों ऊँगली को एक साथ चुत में डालकर रगड़ने लगा. आह्हः अहह अहहह उम्म्म्म
चुत को चाटने के बाद, मेने लंड आगे लिया, अपनी अंडरवेर निकाल दी, और धीरेसे लंड को अंदर डालकर अम्मी के ऊपर लेट गया और चुदाई सुरु हुई. आह्ह्ह्हह आहहह। उम्मम्मम। लंड जैसे ही अम्मी की चुत में घिसने लगा, मेरे शरीर में एक ख़ुशी की लहार बहने लगी. में जोर जोर से अम्मी को चोदने लगा. आह्हः अहह हहह। .
अम्मी के चेहरे पे दिख रही भावना मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी. अम्मी को ऐसे बिलबिलाते देख और मजा आ रहा था. मेने जोर जोर से लंड को चुत में मारते हुए मन में सोच रहा था. साली पडोसी से चुदवाती है. आअह्ह्ह अहहह अहहह। रंडी घर में हु में। .. फिर भी पडोसी से चुदवाने गयी. आह्हः अहह. ले अभी मेरा लंड अहहह अहहह अहह हहहह।।।
लंड बहोत ही तन गया था. मेने जोर से धक्का देते हुए लंड को पूरा अंदर धकेल दिया था. अहह अहह उम्मम्मम आह्ह्ह्ह अहहहह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़
काफी देर की चुदाई के बाद मेने लंड बाहर खींचा, लंड चुत के पानी से पूरा गिला हो चूका था.
पीछे हटकर मेने अम्मी को पलटकर सोने कहा. जैसी हो अम्मी पलटी, और उसकी जो मोटी सी गोरी गांड उछलकर मेरे सामने आई में बिना कुछ सोचे सीधा दोनों हातो से अम्मी की गांड को दबाने लगा. आह्ह्ह्ह अहहह। बहोत बड़ी गांड थी अम्मी की. गांड चूमने लगा. अह्ह्ह उम्मम्मम अहह
चूमते हुए गांड को मेने ऊपर उठाया, अम्मी घुटनो पे बैठे गांड ऊपर उठा दी, मुँह गद्दे पे था.
गांड की और देखते हुए मेने अपना लंड आगे लिया, धीरे से चुत को ढूंढते हुए लंड को अंदर धकेला, धीरेसे लंड पूरा अंदर गया.
आह्ह्ह्हह अहहह। .लंड चुत में रखकर गांड और पीठ को देखते हुए बड़ा मजा आ रहा था.
मेने प्यार से अम्मी की पीठ सहलाई और जोर का झटका देते हुए लंड को चुत में मारा। आह्ह्ह्ह अहा….
दोनों हातो से अम्मी की कमर पकड़कर मेने चुदाई सुरु की. अह्ह्ह हहह. लंड चुत में घिसने लगा. आहहहहह उम्म्म्म आअह्ह्ह
अंदर जाते हुए जो मजा आ रहा था. आह्हः अह्ह्ह।।।। जन्नत आह्ह्ह्ह अहह
पूरा लंड में चुत दबा दबा के अंदर दाल रहा था और जोर से चुदाई सुरु की. आह्हः अहहह अहह उम्म्म अह्हह्ह्ह्ह
अह्ह्ह। अम्मी भी आवाज करने लगी. अहह अहहह अहह आह उम्मम्मम आम आह
काफी देर चुदाई के बाद मेरे लंड ने अपना पानी चुत में ही छोड़ दिया। मेने लंड को चुत में दबाये रखा और पूरा पानी चुत में ही गिरने दिया। आह्हः अहह
उम्मम्मम अम्म्मम्म
तब जाकर मेरी आत्मा शांत हुई. मेने लंड को चुत से बाहर खींचा। लंड छोटा होने लगा. था.
अम्मी वही पे गद्दे पे कुछ देर सोइ रही. में उठकर अपने कपडे पहनकर बाहर चला गया.
उस दिन के बाद से अम्मी ने सलीम चाचा के पास जाना बंद कर दिया। जब भी जरुरत पड़ती में ही अम्मी को घरमे चोद देता. अम्मी और मेरे बिच अब इतनी नजदकियां बन गयी थी. के कभी कभी तो में मोबाइल पे गेम खेलते हुए कमरे में बैठा देखती तो खुद आकर मेरी पैंट निचे उतार के मेरा लंड चूसने लगी. लंड को हिला हिला के चुस्ती और पानी जो निकलता उसे पि जाती।
घरमे अब अम्मी के सात चुदाई बहोत आम बात हो गयी थी.
कैसी लगी मेरी कहानी जरूर कमेंट करकर बताना
