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Hindisexstory

मेरी बीवी अपनी कपड़ो की दुकान चलाती थी. तो हमने सोचा घरके काम में हात बटाने के लिए हम एक
मेरा नाम मीरा है. जबसे मेरे स्तनों का आकर बढ़ा है, बार बार मेरा मन स्तनों को दबानेका करता रहता
कुछ दिनों पहले की बात है. पड़ोस की आंटी दुपहर के करीब २ बजे छत पे आकर कपडे सुखाया करती
मेरा नाम गीता है. में अभी ११ वि में हु. कुछ ही दिन पहले मेरा रिजल्ट आया और में पास
एक छोटे से गांव में मंदिर को सम्भालनेका काम गांव का एक पंडित किया करता था. गांव में ज्यादातर बुजुर्ग
मेरा नाम मालिनी है. में और मेरे पति हम दोनों एक बड़ी सोसाइटी में रहते है. में हमेशा घरका सामान
दो दिन पहले की बात है. संजना ने मुझे फोन किया और मिलने बुलाया। संजना और में कॉलेज के दोस्त
शाम का वक्त, में हमेशा की तरह दोस्त के सात घर पे पिने बैठने वाला था. मेने सारि तैयारियां कर
कुछ ही दिनों पहले की बात है. में अपने कंप्यूटर क्लास से ७ बजे घर आई. घर आके देखा तो
नम्रता और मेरे बिच हमेशा ही एक दोस्ती का नाता रहा है. शादी के बाद हमने अपने खुले विचारोंका पूरा
कुछ महीनो पहले की बात है. में घर पे दुपहर को आया करता था. कुछ दिनों से मेने देखा के
मेरा बेटा अमरदीप ९ वि कक्षामे पड़रहा था. उसको बचपनसेही पढाई में कोई दिलचप्सी नहीं थी. हमेशा खेलता रहता था.
सतीश के साथ काफी दिनों से व्हाट्सप्प पे बात चल रही थी. कॉलेज के वक्त उसने मुझे पटा लिया था.
मेरा नाम नीरज है. मेरी उम्र ३६ साल है. मेरी शादी हो चुकी है और २ बच्चे भी है. मेरी
सुभह करीब ११ बजे में गौरव के घर गया. गौरव मेरा दोस्त है. मेरा नाम गोपाल है. में २० साल
निकुंज मेरे पति है. उनके चाचा कुछ ही दिन पहले शहर से गांव आये थे. उनका घर हमारे घर से
भारिश की वजेसे आज सुभह बहोत ही अँधेरा था. में सुभह करीब ६ बजे उठ गयी थी. मुझे जल्दी उठाने
मेरा नाम अनीता है. में दिल्ली में रहती हु. आज जो में कहानी बताने जा रही हु. वो सच्ची घटना
सुबह का वक्त था. मेरे पति सोहम नाहने गए थे. में कमरे में आई और बेड की चद्दर ठीक से
डिवोर्स के बाद में अपनी बेटी को लेकर बड़े शहर चली आयी. जब डिवोर्स हुआ तब मेरी बेटी १२ साल