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Antarvasna sex story

मेरा बेटा अमरदीप ९ वि कक्षामे पड़रहा था. उसको बचपनसेही पढाई में कोई दिलचप्सी नहीं थी. हमेशा खेलता रहता था.
२० साल का हो गया हु. जब से लंड खड़ा हो गया है, रातको हिलाये बिना नींद ही नहीं आती.
सुभह नास्ता करते समय पति ने मुझे कपडे पहनते हुए बुलाया. शीतल यहाँ आना जरा. पति ने बताया के आज
घर में कोई नहीं था. मेरी बड़ी दीदी प्रीति कॉलेज से आयी. में पानी पिने उठा ही था के दीदी
सुभह का वक्त था. नहाकर निकली और कपडे पहनके ऑफिस के लिए निकल रही थी. कमरे से बाहर आई तो
भारिश की वजेसे आज सुभह बहोत ही अँधेरा था. में सुभह करीब ६ बजे उठ गयी थी. मुझे जल्दी उठाने
शाम का वक्त, में हमेशा की तरह दोस्त के सात घर पे पिने बैठने वाला था. मेने सारि तैयारियां कर
हेलो दोस्तों में आज जो आपको अपनी घर की कहानी सुनाने जाने वाली हु वो पूरी तरह सत्य घटना पे
कुछ दिनों पहले की बात है. शाम को दरवाजेकी घंटी बजती है. में अपने मोबाइल पे गेम खेल रहा था.
सावित्री 32 साल की विधवा थी। पति की मौत के बाद तीन साल से उसका शरीर सूखा पड़ा था। गाँव
कुछ दिनों पहले की बात है. सुभह का वक्त था. बड़े भैया काम से जल्दी घर से निकल गए थे.
मेरा नाम सुनीता है. मेरी शादी को करीब ३ साल हो गए है लेकिन अभी तक मेरा पति मुझे बच्चा
मेरा नाम अर्जुन। अभी में एक कॉलेज में पढता हु. कुछ दिनों पहले की बात है. हमारे पड़ोस में एक
मेरा नाम समीरा है. में ४२ साल की हु और दिल्ली में रहती हु. मेरा तलाक हो चूका है और
प्रीति के साथ मेरी दोस्ती कॉलेज के एक प्रोजेक्ट के दौरान शुरू हुई. हम दोनों के बिच तब बाते होने
दो दिन पहले की बात है. संजना ने मुझे फोन किया और मिलने बुलाया। संजना और में कॉलेज के दोस्त
सुभह का वक्त था. पापा अपने काम पे निकल गए. मेने माँ को कहा के में अपने सहेली स्नेहल के
मेरा नाम नंदिनी है. ये कथा कुछ दिनों पहले की है. में एक स्कल में टीचर हु. बड़े बच्चो को
सुभह का वक्त था. में कमरे में सोया था. बाहर से माँ ने आवाज दी, मोहन तुम्हारा दोस्त किशन आया
मेरा नाम कविता है. मेरा २२ साल का एक बेटा है. कुछ दिनों पहले मेरे पति ने ऑफिस से घर