कुछ दिनों पहले की बात है. पापा ने मुझे आकर पूछा, आकाश मेरे दोस्त ने दो टिकट भेजी है. हम मध्यप्रदेश के एक मंदिर दर्शन के लिए जा रहे है. में पापा की बात सुनकर काफी खुश हुआ. कॉलेज की भी छुट्टिया चल रही थी. नए फोटो खींचने मिलेंगे।
दो दिन बाद जाना था. मेने तुरंत अपनी तैयारियां सुरु कर दी. नए कपडे भी ले खरीद लिए क्यूंकि फोटो अछि अणि चाहिए थी ताके अपने दोस्तों को दिखा सकू.
सलून में जाकर दाढ़ी भी करवा ली. बाल भी काट लिए. झाट के बाल भी बहोत बढ़ गए थे तो उन्हें भी साफ़ कर लिया। में जाने के लिए अब तैयार था.
में बहोत ही उस्सुक था पापा के साथ घूमने जाने के लिए. लेकिन जैसे ही आखिरी दिन आया पापा के भाई की खबर हमें मिली। घरपर माँ से मुहे पता चला की पापा के सगे भाई मतलब मेरे चाचा की हालत नाजुक है. उन्हें हॉस्पिटल में रखा है.
आज रात की टिकट थी लेकिन अब पापा को गांव जाना पड़ा. तो पापा ने कहा. तुम पूजा को अपने साथ लेकर जाओ. पूजा मेरी बड़ी बहन थी. हमारे बिच करीब २ साल का ही फरक था. इसलिए हमारी बाते और विचार ज्यादा मिलते थे. पापा की बात सुनकर में चौक गया था. क्यूंकि मेने ये सोचा नहीं था.
सब घरमे बैठे थे. पूजा दीदी भी सामने ही बैठी थी. हमारी बातचीत हुई. दीदी ने कहा में चलती हु तुम्हारे साथ. वो तो खुश हो गयी थी. मेरे लिए भी अच्छा ही था क्यूंकि अब में वहा जाकर कही भी घूम सकता था. कोई रोक टोक नहीं थी.
जैसे ही हमने अपनी बाते ख़तम की. माँ भी पापा के सात जाने के लिए तैयारी करने लगी. दीदी ने भी कमरे में जाकर अपनी बैग भर ली. कुश ही देर में हमारी बस थी.
मेने भी अपनी बैग तैयार कर ली. और हम १ घंटे पहले घर से निकल पड़े. पापा मम्मी को जा रहे है कहकर निकले।
रात के १० बज रहे थे. में और दीदी बस अड्डे पे पहोचे। बस अड्डे पे बहोत ही चहल पहल थी. काफी लोग दिख रहे थे. हमारी बस कड़ी थी. हमने हमारी टिकिट बताई और हम बस के अंदर चले गए.
हमारी सीट पीछे की थी. बिच से चलते समय दीदी आगे चल रही थी में पीछे। तभी दीदी थोड़ी हड़बड़ाई तो मेने पूजा दीदी के कमर पे हात रखा और उनको संभाला। सारे लोग अपनी अपनी बैग रखने में इतने व्यस्त थे के वो हमें जाने के लिए जगा ही नहीं दे रहे थे. किसी तरह हम पीछे की सीट पे पोहचे
कोने में खिड़की पास दीदी बैठी। में बगल में बैठा। पीछे कोई नहीं था हमारे सिवा।
कुछ देर बाद बस सुरु हुई. हम चल पड़े. पापा का फोन आया, पापा को मेने बताया के हम निकल पड़े. वह पापा भी ट्रैन में बैठे थे. उनकी भी ट्रैन निकल पड़ी थी.
बस जैसे ही हाईवे पे चलने लगी. बस के अंदर अँधेरा छा गया. अब पीछे सीट पे दूसरी खिडकी के पास एक बुजुर्ग अंकल आकर बैठे थे.
पूजा दीदी अपना मोबाईल देखते बैठी थी में बैठे बैठ सोने की कोशिश कर रहा था. करीब एक घंटे बाद दीदी ने अपना फोन रखा और मेरा हात पकड़के मेरे कंधो पे सर रखकर सोने लगी.
दीदी ऐसे मुझे चिपक गयी जैसे में उसका बॉयफ्रेंड ही हु. कुछ देर बाद मेने महसूस किया के दीदी को सोने में दिक्कत हो रही है. पास में मेने देखा सीट तो खाली है. तो में थोड़ा खिसक गया और पीछे की सीट पे बिच में बैठा। दीदी का जो जैकेट उसने हात में पकड़ा था वो मेने अपने पैर पर रखा और दीदी को कहा सीट पे लेट जायो।
दीदी ने अपना सर मेरे पेअर पे रखा और आरामसे सीट पे सो गयी. मेने अपना हात दीदी को न छुए इसलिए दूर रखा था लेकिन दीदी ने मेरे हात खींचकर अपने सीने से लगाया और हात को पकड़कर सो गयी. में फिर से चौक गया. क्यूंकि दीदे के कोमल स्तनों का स्पर्श मुझे महसूस हो रहा था. दीदी के स्तन बड़े और कोमल थे. मेरे दिमाग में दीदी को सोते हुए देख गंदे गंदे ख्याल आने लगे.
में दीदी के शरीर को ऊपर से निचे तक टटोलने लगा. कॉलेज की खूबसूरत लड़कियों की तरह सुन्दर सा बदन मेरे इतने करीब पाकर मेरा लंड खड़ा होने लगा. वो पहिला मौका था जब दीदी ने मेरे अंदर का लड़का जगा दिया। उसके बाद मेरी नजर पूजा दीदी के तरफ जब भी देखती में कभी उनके स्तनों को देखता तो कभी उनके गुलाबी होतो को.
जब रातको बस ढाबे पे खाना खाने रुकी थी. तब हम निचे उतरे। रातके करीब २ बजे थे. तब शायद पूजा दीदी को भी पता चला की में उनके तरफ आकर्षित हो रहा हु. दीदी की नज़ारे भी थोड़ी नशीली सी दिख रही थी. ढाबे पे खाना खाने के बाद बस की तरफ जाते समय पूजा दीदी ने फिर से मेरा हात पकड़ा और करीब आ गयी. हमें ऐसे बर्ताव कर रहे थे एक दूसरे साथ जैसे पति पत्नी हो. दीदी बार बार मेरे करीब ही आ रही थी. उसके स्तन बार बार मेरे शरीर को रगड़ रहे थे.
बस की तरफ पोहचे, लोग अभी भी खाना खा रहे थे. हमने सोचा अंदर जाकर बैठे, तो पूजा दीदी पहले बस में चढ़ने गयी. तब ऊपर चढ़ते समय मेरी आखो के सामने दीदी की बड़ी गोल गांड देखकर मेरा मन मचलने लगा. मेरे मुँह के कुछ ही दुरु पूजा दीदी की गांड थी.
हम अंदर आकर अपनी सीट पे बैठे। दीदी फिर से मुझे चुपक के बैठी। बस चलने लगी. मेने दीदी के कंधो पे हात रखा और उनको करीब ले लिया। पास ही में बैठे चाचा हमें देखे जा रहे थे. अँधेरा था तो ज्यादा कुछ उनको भी दिखाई नहीं दे रहा था. पूजा दीदी ने अपने बैग से एक शॉल निकली उसे हमने आगे से दोनों के ऊपर ओढ़ लिया।
दोनों के चेहरे पे एक मुस्कराहट थी. हमारे बाते नहीं हो रही थी लेकिन दोनों के हात बाते कर रहे थे. कुश देर बाद जैसे ही बस में अँधेरा छा गया. दीदी ने मेरी तरफ देखा। मेने दीदी की तरफ देखा दोनों एक दूसरे की आखो में देखने लगे. और हमने एक दूसरे को चुम लिया। आह्हः। दीदी के गुलाबी होठो का स्पर्श मेरे होटो पे होते ही मेरे शरीर में मानो बिजली सी दौड़ गयी.
शॉल के अंदर मेने अपना हात दीदी की जांग पे दबाये रखा था और होठो पे चूमना जारी रहा. चूमते चूमते में इतना खो गया के में भूल ही गया के में अपनी दीदी को चुम रहा हु. मेरे शॉल के अंदर छुपे हात सीधा दीदी के स्तनों की और मुड़े और मेने दीदी के स्तनों को दबा दिया। आहहह। दीदी आह्ह्ह्ह। बड़े स्तनों को दबाते ही जो कोमलता महसूस होने लगी. मेरा लंड पेंट के अंदर तनकर उछलने लगा. आह्हः अहहह। मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। में जोर जोर से दीदी के स्तनों को दबाने लगा.
अह्ह्ह अहहह। अहाः चूमते चूमते मेने दीदी के गाल चुम लिए. उनकी सिसकने की धीरी आवाज मेरे कानो में गूंजने लगी. स्तन दबाते दबाते मेने दीदी की गर्दन चुम ली.
एक हाट स्तनों को दबाये जा रहा था. दूसरा हात दीदी के पीठ पे रगड़ रहा था. अह्ह्ह अहह. दीदी का मादक मदन छूने में बहोत ही मजा आ रहा था. बदन को चुकार फिर से हम ठीक से बैठे।
मेने आस पास नजर घुमाई। कोने में बैठे अंकल खिड़की के पास सर रखकर सो गए थे. मेने सोचा मौका अच्छा है. शॉल के अंदर से दीदी का टॉप ऊपर करने लगा. दीदी को समाज आगया के में उनके स्तनों को चूसना चाहता हु. तो उन्होंने आगे से टॉप ऊपर किया। में धीरेसे से शॉल के अंदर चला गया. अंदर जैसे ही मेरा महू दीदी के स्तनों को छुआ में पागल ही हो गया. मेने निप्पल मुँह में लिए और अपना मुँह पूजा दीदी के स्तनों पे दबाते हुए उसे चूसने लगा. अह्ह्ह उम्म्म्म ामममम ामम. उम्म्म्म। अम्मम्म।। उम्म्म।।
यकीन नहीं हो रहा था मुझे के में स्तनों को चूस रहा हु. वो भी इतनी बड़े स्तनों को. मेने दोनों हातो से स्तनों को दबाते हुए चूसना सुरु किया। आआ स्तनों की त्वचा को छूकर जो मजा आ रहा था. मुझे रहा नहीं जा रहा था. में पागलो की तरह कभी दाया निप्पल चूस रहा था तो कभी बाया। मेरा बर्ताव एक जानवर की तरह हो चूका था.
काफी देर स्तनों को चूसने के बाद जब में सीधा बैठा। कोने वाला अंकल जग गए थे. उन्होंने हमें देख लिया था. लेकिन चुपचाप बैठे रहे. उनकी आँखे हमारे ही तरफ बार बार घूर रही थी.
कुछ देर हमें कुछ नहीं किया तो वो फिर से सोने लगे. मेरा लंड अब पेंट के अंदर काफी उछल रहा था. मेने दीदी को कहा तुम्ह सो जायो मेरे पैर पे सर रखकर जैसे पहले सोइ थी.
दीदी ने अपना मुँह मेरे पैर पे रखा और लेट गई सीट पे. मेने दीदी के ऊपर शॉल डाली और उसे पूरा धक् दिया। अब शॉल के अंदर में दीदे के स्तनों को दबाने लगा. आअह्ह्ह अहह उफ्फ्फफ्फ्फ़। अह्ह्ह्ह।
दीदी भी तप चुकी थी. उसने धीरेसे मेरे पेंट का बटन खोला और मेरे लंड को बाहर निकला। अह्ह्ह्ह। .. दीदी।। पूजा दीदी ने लंड को पूरा बाहर निकला में शॉल को उनके मुँह पे पकड़े बैठा था ताके किसी को कुछ दिखे न. अह्ह्ह दीदी ने लंड को मुठी में पकड़के बाहर निकला और सोते सोते लंड को मुँह में ले लिया आह्हः अहहह। उम्म्म्म। पूजा दीदी मेरे लंड को चूसने लगी. अहहह अहहह उफ्फफ्फ्फ़ अम्म्म। मुँह को ऊपर निचे करते हुए चूसे जा रही थी.
अह्ह्ह अहहह। अहह. उम्मम्मम।।। दीदी के होठो का लंड पे होने वाला स्पर्श अद्बुध था. मेरे शरीर की गर्मी आसमान चुने लगी थी. अह्ह्ह अहहू अह्ह्ह उफ्फ्फ उम्म्म
मुजसे भी रहा नहीं गया और मेने अपना हाता शॉल के अंदर से दीदी के पजामे के अंदर डाल दिया और चुत को ढुंडके चुत को मसलने लगा. अह्ह्ह अहह. दीदी की चुत पहले से गीली हो चुकी थी. मेने दीदी के चुत में ऊँगली डाली और जोर और से रगड़ने लगा. उम्म्म अम्मम्म अम्मा। दीदी भी यहाँ पुरे जोश के साथ मेरा लंड चूस रही थी. अह्ह्ह अहहह उम्मम्मम अम्म्म . दोनों भी मदहोश होकर एक दसूरे को मजा दे रहे थे. अह्ह्ह अहहह उम्मम्मम
काफी देर तक ये चला फिर बस एक जगह पोहची तो बाहर की आवाज सुनकर सब बस में जग गए. हमें अपना काम बीचमे ही रोकना पड़ा. दीदी उठकर बैठी मेने अपने लंड को फिर से पैंट में डाल दिया।
उसके बाद हमें मौका नहीं मिला कुछ करने का. दोनों भी भरे पड़े थे. दोने के शरीर तप रहे थे.
एक दूसरे को चूमते तो कभी में दीदी के स्तनों को जोर से दबा देता। दीदी भी मेरे लंड को जोर से दबा देती। हम ऐसे ही एक दूसरे के शरीर के सात खेल रहे थे.
पोहचने में अभी ३ घंटे और बचे थे तो हम एक दूसरे को गले लगाकर सो गए.
सुभह करीब ८ बजे हमारी बस पोहची उस गांव में. बस स्टॉप पे काफी चहल पहल थी. हम बस से उतर के पास के ढाबे पे खाना खाने चले गए. दोनों को भूक लगी थी. खाना कहते समय दोनों की नजरे एक दूसरे को ललचा रही थी. हमने जल्दी जल्दी नास्ता किया। और सीधा होटल जो पापा ने बुक किया था वहा चले गए.
होटल काफी आलीशान था. जैसे ही हम अंदर कमरे में आये दरवाजा मेने बंद किया। कमरा काफी बड़ा था, ऐसी की ठण्ड हवा ने रोमांटिक माहौल बना दिया था. मेने सब सामान कोने में रखा. पूजा दीदी पास ही आयने में देखते हुए अपने बाल बांध रही थी. हमारी नज़ारे मिली।
मुजसे रहा नहीं गया. मेने सीधा पूजा दीदी को पीछे से पकड़ लिया आअह्ह्ह।। पूजा दीदी का कोमल शरीर का स्पर्श और कमरे की ठंडी ऐसी की हवा ने मेरे तन बदन में बिजली कड़का दी. मेने कसकर दीदी को पकड़ा और अपने लंड को उनकी गांड पे दबा दिया। अह्ह्ह्ह उम्मम्मम अम्म्मम्म्म्म
जैसे ही दीदी को मेरा श्पर्श हुआ दीदी भी सिसकने की आवाज करने लगी. मेने दीदी के कंधे पे चुम लिया और चूमते चूमते मेरे दोनों हात दीदी के स्तनों पे रखकर उन्हें दबाने लगा. अह्ह्ह अहहह उम्म्म्म।। पूजा दीदी अह्ह्ह अहहह।।।।।।
दीदी के कंधो को चूमते हुए गालो को चूमा वैसे दीदी मेरी तरफ मुड़ी और मुझे होठो पे चुम लिया उम्म्म्म उम्म्म।। दोनों ने कसकर एक दूसरे को गले लगाया। दीदी के हात मेरी पीठ पे और मेरे हात दीदी के पीठ पे. दोनों के अंदर हवस भरी थी. चूमते हुए दोनों एक दूसरे के मुँह में अपनी जबान डालने लगे. दीदी भी काफी तप गयी थी. आह्हः अहहह उम्म्म अम्म्मम्म
मुजसे इतना प्यार सहा नहीं जा रहा था तो मेने दीदी का कुरता उठा लिया और दीदी को नंगा करने लगा… दीदी का कुरता निकला और ब्रा दिखने लगा. जैसे ही ब्रा सामने आया दीदी की बड़े बड़े स्तनों को देखकर में पागल ही हो गया. मेने होठो से अपना मुँह निचे लिया और ब्रा के ऊपर से दिख रहे स्तनों को चूमने लगा. आह्ह्ह्ह उम्मम्मम। . स्तनों की बिच की दरार में अपनी जबान डालकर घिसने लगा. अह्ह्ह अहहह अहाः। दीदी ने मेरा तड़पना महसूस किया और अपना ब्रा खुद ही खोल दिया। ब्रा निचे गिरा और जो दृस्य मेरे सामने आया में अपने आप को रोक ही नहीं पाया।
मेने अपने दोनों हातो से पूजा दीदी के दोनों स्तनों को दबा दिया। और ऐसे मसलने लगा के दीदी की चीख निकल गयी. अह्ह्ह्ह इतने बड़े स्तन। आआह्ह्ह बाहर से पता नहीं लग रहा था. लेकिन काफी बड़े है दीदी के स्तन तो. मअह्ह्ह्हह अहह. मेने निप्पल मुँह में लेकर चूसना सुरु किया। बरी बरी दोनों स्तनों को दबाते हुए निप्पल चूसते हुए पूरा आनंद लेने लगा. अहहह अहहह उम्मम्मम्म अम्मा।।।।
घरमे ही इतने अच्छे आम थे और में बाहर ढूंढ रहा था.
अह्ह्ह।। मेने पूजा दीदी के पुरे आम चूस लिए. दीदी ने मेरी टीशर्ट उतर दी. मेरे बदन पे अपने कोमल हात घूमने लगी. अह्ह्ह्ह। हह. दोनों का भी शरीर तप रहा था।
फिर मेने अपनी पेंट उतर दी और अंडरवेर पे दीदी के सामने खड़ा हुआ. दीदी ने मेरे अंडरवेर की तरफ देखा। मेरा खड़ा लंड अछेसे अंडरवेर के ऊपर से दिखाई दे रहा था.
दीदी ने अपना हात मेरे लंड की तरफ बढ़ाया और लंड को ऊपर से दबाने लगी. मेने भी दीदी के पजामे की नाड़ी खोली और दीदी का पंकजा निचे गिरा।
दीद को आज पहली बार में पैंटी में देख रहा था. दीदी का कोमल बदन कटीला था. बड़े बड़े स्तन, नाजुक कमर. अह्ह्ह्हह अह्ह्ह। ..
दीदी ने प्यार से मुझे पीछे के बेड पे घकेला। में बेड पे लेटा वैसे दीदी ने मेरी अंडरवेर खींचकर उतार दी.
में लंड को मुठी में पकड़े जैसे वो निचे झुकी उसने मेरी तरफ देखा और मेरी आखो में देखते हुए मेरा लंड मुँह में ले लिया आह्ह्ह्ह अहहह।।। ऐसे तो मेने सिर्फ सेक्स वीडियो में देखा था. आज अपने साथ होते हुए महसूस करके पता लगा के कितना मजा आता हे जब लड़की लंड को मुँह में लेकर चूसती है.
अह्ह्ह अहहह। दीदी ने बड़े प्यार से लंड को मुँह में लिया और जबान को ऊपर से निचे घिसते हुए लंड को अचे से चूस लिया। आह्हः अहहह उम्म्म्म ममम. पूरा लंड अंदर मुँह में ले रही थी. अहम्म्म्म्म उम्म्म
लंड को चाटते हुए मेरी गोटियों को मसल रही थी. आहहह अहह.. उफ्फफ्फ्फ़
लंड पूरा चाटने के बाद जैसे वो पीछे हटी, मेने उसे बेड पे खींच लिया। बेड पे सुलाकर उसके ऊपर आया. दीदी की चड्डी दोनों हातो से पकड़ी और उतर दी. नंगी होते ही जो चुत दिखाई दी. आह्ह्ह्ह अहह. मुँह में पानी ही आ गया. पूजा दीदी की चुत तो काफी सुन्दर थी. मेने तुरंत दीदी के पैर फैलाये और सीधा चुत को चाटने लगा. अह्ह्ह उम्म्म्म अम्म्मम्म।।।
अहह चूत पहले से ही गीली थी. मेने जबान जैसे ही चुत में डालकर चाटना सुरु किया दीदी बेड पे पछली की तरह तड़पने लगी. मेरा नाम पुकारते हुए सिसक रही थी अह्ह्ह ओमममम अम्मम्म। अम्म्म। मम
आवाज सुनकर मेरा जोश बढ़ रहा था. शरीर मेरा भी तपने से में पागलो की तरह दीदी की चुत को चाटने लगा. उम्म्म अह्ह्ह। .. जबान पूरी अंदर तक डाले, जितना पानी निकल रहा था वो सब चूस रहा था. फिर एक ऊँगली दीदी के चुत में डाली और दीदी की चुत को मसलने लगा. अहह हां उम्मम्मम अम्मम्म
पूरी चुत को चाटने के बाद, दीदी के फैलाये हुए पैरो के बिच बैठा और धीरेसे मेरा लंड दीदी के चुत में डालने लगा. दीदी मेरी तरफ देख रही थी. उसके चेहरे पे डर के भाव थे. मेने धक्के देते हुए धीरेसे लंड को अंदर चुत में धकेलते हुए ऊपर सो गया. अह्ह्ह हहह. आधा लंड चुत में चला गया था. अह्ह्ह उम्म्म्म अम्म्मम्म
दीदी को चूमते हुए बचा हुआ लंड भी अंदर चुत में धकेला और चुदाई सुरु हुई अहहह अहह अम्म ममम अम्म मममम
चुत ने अछि तरह मेरे लंड को जकड लिए था. चुत के अंदर घिसाव की वजस से मेरा लंड और तन गया अहह अहहह गीली चुत का पानी तेल की तरह काम कर रहा था. मेने दीदी को कसकर पकड़े चोदना सुरु किया अहह अह्ह्ह अहह. उम्म्म अम्म्मा।ममम
दीदी के चेहरे पे जो सिकंज भरी भावना थी वो देखकर और जोर से चोदने का मन कर रहा था उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह अहहह उम्म्म्म अह्ह्ह्ह ाहः
काफी देर चुदाई की फिर जैसे ही मेने लंड खींचा बहार दीदी ने मुझे चुम लिया। दोनों भी अब चुदाई में मदहोश हो चूकते थे. चूमते चूमते हम दोनों एक दूसरे को लपटे बेड पे गोल गोल घूमने लगे. फिर दीदी घूमते हुए मेरे ऊपर आ गयी. उठकर मेरे ऊपर बैठी। धीरेसे मेरे लंड को पकड़के अपनी चुत में डाला और लंड को अंदर लेकर मेरे ऊपर कूदने लगी. अह्ह्ह अहहहहह
लंड फिर से चुत के अंदर था. अह्ह्ह उम्म्म दीदी के खुले बाल और उछलते हुए दूध से भर स्तनों को देखते हुए में चुदाई का आनंद ले रहा था. दीदी भी चुदाई के लिए भरी पड़ी थी. रंडी की तरह मेरे लंड पे उछल रहि थी. अहह अहहह अहा उम्मम्ममा अम्मम्म।
काफी देर दीदी का कूदना जारी रहा फिर वो जब रुकी मेने दीदी का हात पकड़ा और उठकर बैठा। अभी भी दीदी की चुत में लंड फसा हुआ था. दोनों ने एक दूसरे को देखा और होठो को चूमते हुए मेने दीदी को गले लगाया मेरे हात दीदी की गांड के निचे दबा के दीदी को आगे पीछे करते हुए लंड को चुत के अंदर घिसने लगा. अह्ह्ह अहहह। बैठ बैठे चुदाई सुरु हुई अहह अहहह अहह अहहह अहहह। लंड चुत में घिसे जा रहा था. ऊपर पूजा दीदी के कोमल होठ आग में तेल का काम कर रहे थे. अह्ह्ह अहहह उम्म्म्म अह्ह्ह
पूजा दीदी की बड़ी गांड को कसकर दबाने में और भी मजा आ रहा था. अह्ह्ह अहहह हहह… चुत में लंड की रगड़ाई रुकी और फिर दीदी को मेने घोड़ी बना दिया। दीदी के पीछे जैसे में आया, मेने पहले तो दीदी की बड़ी गांड देखते ही उसपे दो जोर से चपेट लगाई। मेरा मन अभी जानवर वाली हरकते करने लगा. चपेट गांड पे मरकर मेने निचे से दीदी की चुत को जोर से मसला। अहहह अह्ह्ह
खड़े लंड दीदी की गांड पे मरने लगा. जैसे के लकड़ी से गांड पे मार रहा हु. फिर गांड की दरार में लंड को रगड़ने लगा..अह्ह्ह अह्ह्ह हहममममम। गांड को मेने चूमा। नजदीक से गांड को देखने लगा.
फिर लंड को धीरेसे चुत के अंदर खिसकाया और कमर को कसकर पकड़े जो मेने चुदाई सुरु की फिर तो में रुका ही नहीं। आह्हः अह्ह्ह्ह अह्ह्ह क्या छिनाल दीदी मिली है अहहह अहह लंड को जोर से अंदर मरते हुए में दीदी को चोदने लगा. अहह अहहह। उम्म्म्म। दीदी की गांड पे पड़ने वाले धक्के से जो आवाज हो रही थी ऐसे लग रहा था. के कोई तालिया बजा रहा है. अहह अहह दीदी अह्ह्ह अहह. दीदी भी सिसक रही थी ाःहाहा आकाश उफ्फफ्फ्फ़ अहहह
मेने काफी देर चुदाई की फिर जब मेरा पानी आने वाला था, मेने दीदी को सामने किया और पूजा दीदी के मुँह में मेरा गिला लंड दबा दिया। दीदी ने भी रोका नहीं। जैसे ही लंड को दीदी चूसने लगी, मेरे लंड ने पानी की बौछार कर दी. अह्ह्ह अहहह अहह में दीदी का मुँह पकड़े लंड को दबाये रखा था. अहह अहहह। सारा पानी दीदी के मुँह में छोड़ दिया उफ्फ्फ्फ़। अह्ह्ह्हह
दीदी भी सारा पानी पि गयी. जब्द लंड छोटा होने लगा तो मुँह से बाहर निकला।
दोनों की भी सासे फूली थी. दोनों भी थके हुए थे तो ऐसे ही नंगे साथ सो गए. उस दिन हम कमरे पूरा दिन नंगे ही थे. दीदी को मेने अपने से दूर जाने दिया ही नहीं। जैसे ही लंड खड़ा होता में दीदी को अलग अलग पोजीशन में चोदता
कैसी लगी मेरी और मेरी पूजा दीदी की चुदाई की कहानी जरूर कमेंट करके बताना
