बीवी की अदला बदली मॉल में

मेरा नाम रेनू है. मेरे पति नीरज काफी दिनों से हम बाते कर रहे थे की एक बार बीवियों की अदला बदली का खेल खेलते है. नीरज का कहना था की आजकल सब लोग एकबार तो अपनी बीवी का अदला बदली का खेल खेलते है. हमें भी इसका अनुभव लेना चाहिए। और वैसे भी इस शहर में हम किसी को भी नहीं जानते थे। तो कोई दिक्कत की बात नहीं थी. जो भी इस शहर में होता वो तो हमारे ही बिच रहता।

मुझे थोड़ा अजीब सा लग रहा था क्यों की अपने पति के सामने पराये मर्द के सात में कैसे रहूंगी। मुझे बहोत शर्म आएगी। लेकिन नीरज ने इतनी बार मुझसे इसबारेमे बात की के में मान गयी.

नीरज का एक ऑनलाइन दोस्त बन गया था. वो अपनी बीवी के साथ हमसे मिलने आने वाला था. शनिवार के दिन हमने उनसे मिलने का तय किया।

मेने सारी तैयारी कर ली. नीरज बहोत ही ज्यादा उस्साहित था. मुझे तो बहोत ही डर लग रहा था. लेकिन सोचा एकबार मिल लू उस आदमी से तो शायद बादमे ज्यादा डर नहीं लगेगा।

हम शनिवार की सुभह करीब ११ बजे मॉल में पोहचे। तीसरी मंजिल पे खाने की दुकाने थी, वही हम बैठे थे. कुछ देर बाद मनीष और उसकी बीवी जोति वह पहोची।

हम दोनों को देखकर थोड़ा चौक गए. क्यूंकि देखकर ही लग रहा था की पैसे वाले घर से. दोनों भी बहोत ही खूबसूरत दिख रहे थे. मेने मनीष की तरफ देखा तो उसकी अछि बॉडी थी. जिम जाता होगा जरूर।

और ज्योति ने जो कपडे पहने थे. वो देखकर तो में सोचने लगी नीरज की तो आज मनोकामना पुरु हो जाएगी। ज्योति ने वन पीस ड्रेस पहना था जो की सिर्फ घुटनो तक था. ऊपर से उसके बड़े स्तन देखकर तो में खुद चौक गयी थी. ड्रेस गले से इतना निचे था के स्तनों का ऊपरी भाग दिख रहा था. स्तनों की बिच की दरार देख तो नीरज भी चौक गया था.

हम यहाँ क्यूँ आये है येतो चारो को पता ही था. तो हमने ज्यादा देर न की. मनीष ने ही बात आगे बढ़ायी और कहा चलो मॉल में घूम लेते है. ऐसे कहकर हमने अपने अपने पति बदल लिए. में मनीष के साथ चलने लगी. और नीरज ज्योति के साथ. कुछ देर आगे चलने के बाद मनीष ने नीरज को कहा आप लोग आगे चलो हम आते है.

ऐसे कहकर मनीष मुझे दूसरी और ले गया. हम सीधा ५ वि मंजिल पर आ गए. जैसे हम ऊपर आये. मनीष थोड़ा खुल गया. हम आस पास की दुकानों में कपडे देखते हुए बाते करते हुए चल रहे थे. तभी मनीष ने मेरे कंधो पे हात रखा. में थोड़ा सहम गयी. लेकिन कुछ कहा नहीं। फिर हम एक कपड़ो की दुकान में गए.

शनिवार था तो थोड़ी भीड़ थी. उस भीड़ में कपडे देखते हुए हम अंदर की और बढ़ने लगे. तभी मनीष ने मेरी कमर पे अपने दोनों हात रखे. में फिर से चौक गयी. में समाज गयी की मनीष अपने मूड में आ गया है.

डर तो लगने लगा था. लेकिन मजा भी आ रहा था. मनीष ने भीड़ का फायदा उठाया और अपने आप को मेरी पीठ से चिपकाकर हम आगे बढ़ रहे थे. हम अंदर एक कोने में आये. में कपडे हात में लेकर देख रही थी. मनीष बाते ने बाते करते करते मेरी पीठ पे हात घूमना सुरु किया।  मनीष का मर्दानी हात जब मेरी पीठ पे घूम रहा था मेरे शरीर की गर्मी बढ़ने लगी थी.

मनीष का हात मेरी गर्दन से होकर निचे कमर तक पोहच रहा था. उन कुछ ही पलो में मनीष ने मेरे पूरी पीठ पे हात घुमा दिया। मेने एक ड्रेस पसंद किया। सोचा इसे खरीद लू.

में ड्रेस को लेकर मुड़ी ही थी. आगे औरतो ने भीड़ की थी. तो रुकना पड़ा. तभी मनीष ने मेरी कमर को कसकर पकड़ा और पीछे से अपना लंड मेरी गांड पे दबाया। अह्ह्ह। मनीष ने कसकर मेरी कमर को पकड़ लिया। था. आस टेबल पे कपडे रखे थे. इसवजसे कोई हमें देख नहीं सकता था. मनीष ने कसकर अपना लंड मेरी गांड पे दबाये रखा और धीरे धीरे अपनी कमर को हिलाते हुए वो लंड को गांड पे पटकने लगा.

मुझे अपनी गांड पे महसूस हो रहा था के मनीष का लंड खड़ा हो चूका है. हम उस भीड़ से बाहर निकले। मनीष ने ड्रेस के पैसे  दिए.

हम फिर मॉल में घूमने लगे. चलते चलते मेरे दिमाग में ख्याल आया. नीरज मेरा पति भी ऐसे ही ज्योति के साथ कर रहा होगा। उसके भी मजे चल रहे होंगे।

तो में भी कर ही लेती हु. ऐसा मौका बार बार कहा मिलेगा।

मनीष और में हम एक जगह पोहचे वह अलग अलग प्रकारकी गेम थी. हम अंदर आये तो वह मनीष ने कहा सामने जो गेम है वहा चलते है. मुझे ज्यादा पता नहीं था. में साथ चली गयी. वह जाने के बाद उस आदमी ने बताया के ये भूल भुलया वाला गेम है. इसमें अंदर जाने के बाद आपको बाहर आने का रास्ता ढूंढना होता है. अंदर बहोत अँधेरा भी होगा।

उस आदमी की बाते सुन में समाज गयी के मनीष ने यही गेम क्यूँ चुना। मनीष ने प्यार से मुझे पूछा चलते है ना

तो मेने मुस्कुराते हुए कहा. हा चलते है.

मनीष ने पैसे दिए. और हम उस भुलभुलैया का दरवाजा खोलकर अंदर चले आये. हमारे आगे एक परिवार भी था. उनके दो बचे भी थे.

अंदर तो काफी अँधेरा था. रौशनी को देखते देखते हम आगे बढ़ने लगे.

घुमावदार रास्ता। अंदर आते ही जैसे ही घुमावदार रस्ते पे हम मुड़े। मनीष की हरकते सुरु हो गयी. मनीष ने मेरी कमर पे पकड़ के रखा था. में आगे के परिवार को देखते हुए चल रही थी. तभी मनीष ने मेरे स्तनों को जोर से दबा दिया। अह्ह्ह ह.. अह्ह्ह आआआआहहह

मनीष ने दोनों स्तनों को एक साथ दबा दिया।  मुझे दर था आगे चलने वाले परिवार हमको देख न ले. मेने मनीष का हात अपने सीने से हटाया। फिर हम आगे बढ़ने लगे.

अब मनीष मेरी पीठ पे हात घूमने लगा. उसका धीरे धीरे निचे सरका और मनीष ने मेरी मेरी गांड दबा दी. अह्ह्ह। मनीष क्या कर रहे हो. मेने धीरेसे कहा. कोई देख लेगा।

में उसकी तरफ जैसे ही मुड़ी। मनीष ने मुझे कसकर पकड़ा और मेरे होठो को चूमने लगा. अह्ह्ह अहह. उम्म्म्म। में अपने आप को छुड़वाने लगे. लेकिन मनीष ने मुझे छोड़ा नहीं वो मेरे होठो को पागलो की तरह चूमता रहा. कसकर पकड़ के मेरी गांड को दोनों हातो से दबाते हुए मुझे अपने शरीर पे खींच रहा था. उसकी बैचेनी और जबरदस्ती का प्यार देखकर में कुछ ही पल में पिघल गयी

में भी मनीष को चूमने लगी. उसकी पीठ पे हात घूमने लगी. दोनों के शरीर एक दूसरे पे रगड़ते हुए चुम रहे थे. अह्ह्ह अहह हां. उम्म्म अम्म्मा मां. अम्म

कुछ देर बाद हमें किसी की आने की आवाज सुनाई दी तो हम दूर हुए. आगे पीछे देखा और फिर से आगे बढ़ने लगे. वो जो परिवार आगे चल रहा था वो काफी आगे चला गया था.

अब मनीष काफी गरम हो चूका था. मनीष ने मेरे कंधे पे आँख रखा और हम प्यार करते हुए चलने लगे. वो मेरे स्तनों को दबा रहा था. मुझे होठो पे चुम रहा था. मेरी पीठ पे हात घुमा रहा था. मेरी गांड दबा रहा था.

मुझे भी मजा आने लगा. हम उस छोटी सी जगासे आगे बढ़ते हुए जैसे एक कमरे में पोहचे, वहा सिर्फ एक ही पिले रंग का बल्ब जल रहा था. काफी अँधेरा था. मनीष ने मुझे वही रोका। मेरी तरफ आया और गालो को चूमते हुए उसने मेरा ड्रेस ऊपर उठा दिया। मेने कहा। ….. क्या कर रहे हो. तो कहने लगा. चूसने दो ना

मेने कहा नहीं। .. मत करो। … आह्हः कोई आ जायेगा। तो वो कहने लगा कोई नहीं आएगा।

और ड्रेस ऊपर उठाकर उसने मेरे ब्रा को भी ऊपर कर दिया। ब्रा के निचेसे जैसे मेरे बड़े स्तनों को बाहर निकलते देखा मनीष ने निप्पल को मुँह में लेकर चूसना सुरु किया। अहहह अह्ह्ह अहह..

दोनों स्तनों को दबाते हुए निप्पल चूसने लगा. अहह अहहह ः….

में सोच में पड़ गयी ये में क्या कर रही हु. कोई अगर अचानक से आ गया तो. अहह अहहह अहह. उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्हह्ह

लेकिन मनीष जो अपना कमीना पन दिखा रहा था मुझे वो अच्छा भी लग रहा था. अह्ह्ह अह्ह्ह मनीष आह्हः

मनीष जोर जोर से मेरे स्तनों को दबाके चूस रहा था तभी हमें कुछ लोगो की खिलखिलाने की आवाज आने लगी. पीछे के कमरे से कोई आ रहा था.

में दर गयी. मनीष को दूर किया और पहले अपना ड्रेस निचे कर लिया।

हम धीरे धीरे आगे बढ़ने लगे. आगे के कमरे में जब पोहचे तो हमने देखा हम एक बड़ी कमरे में आ गए है. वह बहोत से लोग जमा थे.

कुछ देर बाद हमारे पीछे जो चल रहे थे वो भी वही दरवाजेसे अंदर आये. वो बच्चे थे.

हमें वहा से एक अपनी मनपसंदीदा चीज उठाकर आगे की और जाना था. मेने एक छोटी सी गुड़िया उठा ली.

जैसे ही घंटी बजी सभी जो दरवाजा मिले वहा से बाहर निकलने लगे.

मनीष ने मुझे पकड़के रखा था. मुझे कहा हम आखिर में जायेंगे।

जैसे ही सभी चले गए. फिर हमने भी एक दरवाजे को खोला और अंदर चले आये. मुझे लगा था के खेल ख़तम हो गया. लेकिन अंदर आने के बाद पता चला के खेल तो अब सुरु हुआ है.

अंदर के कमरे में फिर से अंधेर। एक ही बल्ब जल रहा था. उस अँधेरे कमरे से हम आगे जाने लगे. एक कमरे से दूसरे कमरे में आगे बढ़ रहे थे.

आगे के कमरे में और भी ज्यादा अँधेरा था. मनीष ने जैसे ही जान लिया यहाँ कोई नहीं है. उसने मुझे कोने में खींच लिया। अँधेरे में कसकर पकड़कर मुझे चूमने लगा. मेने कहा मत करो. लेकिन वो रुका नहीं। मुझे होठो पे चूमता रहा.

आह्हः अहहह। जोर जोर से मेरे स्तनों को दबाते हुए मेरी गर्दन चूमने लगा.

देखती ही देखते उसने अपना हात निचे उतारा और अपनी पेंट खोल दी, में डर गयी

मनीष ने अपने लंड को बाहर निकला। मेरे ड्रेस के ऊपर मुझे उसका लंड महसूस होने लगा.

मनीष ने मुझे कहा निचे बैठो।

सच कहु तो में भी इतनी गरम हो चुकी थी. के बिना कुछ सोचे निचे बैठी। मेरे सामने मनीष का लंड देखकर में पागल सी हो गयी. काफी लम्बा और तगड़ा था लंड

जैसे ही मेने मनीष के लंड को मुठी में पकड़ा। मेरे शरीर में बिजली बहने लगी. मेने लंड को हिलाते हुए सीधा मुँह में ले लिया और चूसने लगी. अह्ह्ह अह्ह्ह्ह।

लंड को जबान से चाटने लगी. हम्म्म अम्मम्म अहंमम उम्म्म्म ममम

चाटते हुए हिलती और फिर मुँह के अंदर लेकर चुस्ती अह्ह्ह अहहह अह्ह्ह।

मनीष को भी जोश आया तो उसने मेरा मुँह दोनों हातोंसे कसकर पकड़ा और मेरे मुँह में लंड को पटकते हुए मेरा मुँह चोदने लगा अहह अहह अहह अहहह।

लंड पूरा गले तक जाने लगा अहह अहहह हां. मनीष अहःअहः हहह

काफी देर तक मेरे मुँह को चोदने के बाद, मनीष ने मुझे वही पे निचे सुला दिया।

हमें यकीन था की अभी सभी लोग दूर चले गए होंगे।

तो मनीष ने मुझे निचे लिटा के मेरा पजामा निचे खींचा। मेरी निक्कर भी निचे खींची। पूरी निकर निकलना सही नहीं था. तो घुटनो तक निचे उतार दी.

मेरी चुत खुली। मनीष ने दोनों पैरो को उठके निचे से मेरी चुत को चाटने लगा. अह्ह्ह्ह। मनीष की जबान चुत में घुसी और चुत को अंदर से चाटने लगी. अह्ह्ह अहहह ः. अहहू फ्फ्फफ्फ्फ्म उफ्फ्फ्फ़. अह्ह्ह।

मनीष ने चुत को चाटते हुए एक ऊँगली भी चुत में डाल दी. जोर जोर से ऊँगली चुत में रगड़ते हुए चुत को चाट रहा था. आहहह अहहह अहहह।

में जमीन पे सोइ चुत चाटने का आनंद ले रही थी.

जैसे ही चुत चटाकर ख़तम हुआ मनीष ने अपना खड़ा लंड आगे किया और मेरी चुत में धकेल दिया।

अह्ह्ह अहहह। उम्म्म्म। अम्मम्म

लंड चुत को घिसते हुए अंदर चला गया और फिर मनीष ने चुदाई सुरु की. अह्ह्ह अहहह हहह हाहाहा। मनीष अहह हहह ः. ाहः हहह. जोर जोर से चुदाई सुरु हुई अहह हहह

अहहह अहहह मममम अम्माम्मा
मनीष कभी से तड़प रहा था मुझे चोदने के लिए. पूरा जोश लगाके चोदने लगा अहह अहा हहह…..

अह्ह्ह अहहह उम्मम्मम अम्माम्मा

काफी देर चुदाई चली. फिर मनीष ने मुझे उठाया और झुककर खड़ा किया।

में कोने के टेबल पे हात रखकर झुककर खड़ी हो गयी.

मनीष पीछे आया और मेरी गांड को दबाते हुए उसने अपना लंड चुत में फिर से धकेला और फिर चुदाई सुरु हो गयी. अहह अहहह। इसबार तो लंड और अंदर चला गया. अहहह अहहह अहहहहह

इतना बड़ा लंड चुत में घिसने की वजसे चुत काफी गरम हो गयी थी. पानी निकलते जा रहा था. अहह अहह अहह ह. उम्मम्मम। अम्म्म। एक अलग ही मजा आ रहा था चुदाई का.

अहह हहहह।। अहहह

हमारी यहाँ चुदाई जोरो शोरो से चल ही रही थी. तभी अचानक एक लड़का लड़की उसी कमरे में आये. उस अंधेरेमे उन्होंने हमें चुदाई करते हुए देख लिया। दोनों हमें देखकर हसे.

में डर गयी. लेकिन मनीष रुका नहीं। वो मुझे चोदता रहा. मुझे भी अभी इतना फरक नहीं पड़ रहा था. देख रहे हो तो देखने दो.

अँधेरा तो था ही. तो उन्हें हमारी शकल ठीक से धिकाई नहीं दी होगी।

हम चुदाई करते रहे. वो हमें देखते हुए आगे चले गए.

हमारी चुदाई जारी रही. मनीष ने अब मेरी कमर कसकर पकड़ के रखी थी. जोर जोर से मुझे चोद रहा था. अहहह अहहह। उम्म्म्म अम्मम्म अह्ह्हा हहहह

में तो तभी झड़ गयी. अहहह अहह उम्म्म्म अहःअहः अहहह

काफी देर बाद जब मनीष की झड़ने की बारी आयी. तो मनीष ने अपना लंड चुत से बाहर खींचा और मेरे मुँह के पास आकर मेरे मुँह में दे दिया। जैसे ही मेने लंड चूसा लंड से पानी निकलने लगा.

गरम पानी इतना निकला के में पि गयी. आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह। पानी निकलते समय लंड को मुँह में ही पकड़ के रखा था. फिर जब लंड खाली हुआ. मनीष ने लंड को मेरे मुँह से बाहर खींच लिया

अह्ह्ह अह्हह्ह्ह ः.

दोनों लम्बी चुदाई के बाद शांत हुए.

हमने अपने कपडे बराबर किये। और निकल पड़े बाहर की और.

कुछ देर बाद जब हम वापस मिले। तब मेरे पति को देखकर मुझे बहोत शर्म आ रही थी.

हमने साथ में खाना खाया और घर चले आये.

मेरे पति मुझे पूछ रहे थे के क्या क्या हुआ. तो मेने बात टाल दी और कहा के मॉल में क्या होगा। सिर्फ घूम रहे थे.

मेने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की के उन्हें कुछ पता ना चले

कैसी लगी मेरी कहानी मुझे कमेंट करके जरूर बताना

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