स्विगी वाले लड़के से हो गया प्यार
मेरा नाम मालिनी है. में और मेरे पति हम दोनों एक बड़ी सोसाइटी में रहते है. में हमेशा घरका सामान स्विगी से मंगाती हु. मुझे मार्किट जाकर सामान लाना पसंद नहीं।
हमारे घर सामान लेकर जो स्विगी वाला लड़का आता, उससे मेरी बातचीत होने लगी. हर बार वही आता तो मुझे अब उससे बाते करने में कोई दिक्कत महसूस नहीं हुई. स्विगी का सामान लेकर वो घर अत. में दरवाजा खोलती और उसे में सामान अंदर किचेन में रखने कह देती। पैसे तो ऑनलाइन ही दे दिए होते तो पैसे की कोई वैसे दिक्कत कभी हुई नहीं।
सुरवात में तो वो डरा डरा रहता। लेकिन धीरे धीरे वो भी मुजसे खुलकर बाते करने लगा. मेने उससे अपना नाम पूछा। उसने अपना नाम धीरज बताया। में उससे पूछने लगी के कितना कमा लेते हो. तो धीरज ने कहा की ३० हजार के ऊपर कमा लेते है स्विगी के डिलीवरी वाले लड़के। मेने कहा अछि कमाई है.
एक दिन सुबह के वक्त मेरे पति ऑफिस चले गए. मेने ऑनलाइन स्विगी से कुछ सामान मंगाया। कुछ देर बाद धीरज ही सामान लेकर आया. में अभी अभी नहाकर निकली थी. मेने एक नायलोन का नील रंग का गाउन पहना था. तभी दरवाजे की घंटी बजी. जल्दबाजी में ऐसे ही गाउन पहनकर बाहर आयी. गाउन के अंदर मेने कुछ भी नहीं पहना था.
दरवाजा खोला तो वो स्विगी से धीरज था. मेने उसे अंदर आने कहा. वो हमेशा की तरह सामान उठाकर अंदर किचेन में रखने चला गया. मेने दरवाजा बंद किया और अंदर किचेन में उसे सामान कहा रखना है बताने लगी.
तभी मेने देखा बड़ी वाली गेहू की थैली में निचे के अलमारी में रखना ही भूल गयी. मेने झुककर जैसे ही अलमारी खोली और गेहू की थैली अंदर रखने गयी तो मेरा दया स्तन गाउन बाहर बाहर निकला और निचे लटकने लगा. में इतना डर गयी के मेरे हातो से गेहू की थैली फिसल गयी और सारा गेहू निचे फ़ैल गया
हडबडात में मेने अपना गाउन स्तनों पे ढक दिया। लेकिन तब तक धीरज ने मेरा स्तन देख लिया था. वो मेरी तरफ ही टकटकी लगाकर देख रहा था. में डरते हुए घूम गयी और गाउन को ठीक करने लगी.
गाउन को ठीक करकर जब में घूमी और धीरज को देखा तो वो धीरे धीरे थैली से सामान निकल रहा था. वो भी जो हुआ वो सोचकर दंग था.
मेने धीरज को धीमी आवाज में कहा रहने दो वो, में कर लुंगी। तो धीरज ने कहा ये घेऊ में भर देता हु. मेने उसे कहा नहीं रहने दो में कर लुंगी।
लेकिन वो माना नहीं। उसने पास में रखे बड़े पतीले को लिया और निचे बैठकर जमीन पे गिरा हुआ गेहू भरने लगा. में वही खड़ी थी.
मेरे दिमान में बार बार एक ही ख्याल आ रहा था. धीरज ने मेरा स्तन देख लिया। उसने मेरा निप्पल भी देखा। में एक नजर निचे बैठे धीरज की और देखती और फिर अपने स्तनों को हात लगाती।
घरमे हम दोनों के आलावा कोई नहीं था. बार बार धीरज के बारेमे सोचते हुए मेरा शरीर तपने लगा. गाउन के मेरे निप्पल तने जा रहे थे. निचे चुत ने अपने दरवाजे खोलना सुरु किया।
धीरज की नज़रे मेरे नंगे पेरो को देखि जा रही थी. पता मुझे क्या हुआ मेने अपने गाउन की नाड़ी धीरेसे खोली। और गाउन को थोड़ा ऊपर उठा दिया।
अब मेरी गोरी जांग धीरज को दिखने लगी. धीरज एक हात से गेहू भरते हुए मेरी जांग को देख रहा था. में काफी करीब खड़ी थी.
में क्या करू इस सोच में ही थी के तभी मुझे अपने पैरो पे धीरज का हात महसूस होने लगा. में चौक गयी. धीरज मेरे पैर को निचे से छूते हुए ऊपर ले जाने लगा. मुझे अजीब सा महसूस हो रहा था. मुझे समज नहीं आ रहा था के में क्या करू. क्या ये सही है, मुझे ये करना चाहिए। या धीरज को में यही रोक दू.
में सोच सोच में इतनी खो गयी के तब तक धीरज का हात मेरी जांग तक पोहच ही गया. उसके हात का स्पर्श मेरी जांग पे महसूस होते ही मेरे शरीर की गर्मी आसमान छूने लगी
में कुछ कहती इसके पहले धीरज मेरे नजदीक आया और उसने सीधा अपना मुँह मेरी जांग पे रखकर होठो से मेरी जांग चूमना सुरु किया। आह्हः हहहहह।
गाउन को हटाकर जैसे ही धीरज ने जांग चूमि में पानी पानी हो गयी. मेरी चुत धीरज ने देख ली. आह्हः अहःअहः है. में वही खड़ी धीरज को देखते हुए आनंद ले रही थी. मेरी सास फूलने लगी. धीरज जांग को चूमते हुए जैसे ही मेरी चुत तक पोहचा। उसने अपनी जबान मेरी चुत को लगायी और चुत को चाटने लगा.
इस्सस अह्ह्ह अहहह अहहह।।। अह्ह्ह अहहहहहह
िस्सश्श उफ्फ्फफ्फ्फ़ अहहहहहह
अब तो मेरा दिमाग पूरा सुन्न हो गया था. धीरज की जबान मेरी चुत पे घूमते हुए मुझे महसूस होने लगी. धीरज अहहह अहःअहः हहहह हहह.
मेरी दोनों जांग को पकड़े धीरज अपना मुँह मेरी चुत पे दबाते हुए चाट रहा था अहह अह्ह्ह ाहाहाः।।।।
धीरज को चुत के और भी अंदर जाने मिले इसलिए अपना दाया पैर पास के डिब्बे पे रखा,
पैर ऊपर उठाते ही चुत खुल गयी. धीरज की जबान चुत के अंदर जाकर घिसने लगी. अहह अह्ह्ह हाहा हाह। . अम्म्मम्म अह्ह्ह ममम जितना भी पानी चुत से निकल रहा था, धीरज सब पिए जा रहा था. अहहहहहह उम्म्म्म
में धीरज का सर दबाते हुए उसके मुँह को चुत पे घिसने लगी. आह्हः अहःअहः। चुत काफी गरम हो चुकी थी.
काफी देर मेरी चुत को चाटने के बाद जैसे ही धीरज खड़ा हुआ. मुझे उसपर बहोत प्यार आने लगा. मेने उसकी स्विगी की टशर्ट अपने हातो से उतरी। उसकी पेंट खोली और उतार दी.
धीरज की अंडरवेर पे नजर पड़ी तो देखा उसका लंड तना हुआ था. मेने धीरज की तरफ प्यार से देखा। उसको देखते हुए अपने गाउन की नाड़ी खोली और धीरे से अपना गाउन निचे गिरा दिया।
गाउन निचे गिरते ही में पूरी नंगी धीरज के सामने खड़ी हो गयी. धीरज मेरे नंगे गोर बदन को देखकर चौक गया. मेरे बड़े बड़े स्तनों को टकटकी लगाए देखने लगा. अपनी जबान होठो पे घिसते हुए मेरे स्तनों को देख रहा था. उसके मुँह में पानी आ रहा था.
कुछ देर बाद उसका सबर का बांध टूट गया और धीरज ने सीधा मेरे स्तनों को दोनों हातो से जकड लिया और जोर जोर से दबाते हुए अपना मुँह स्तनों पे रखकर चूमने लगा. अह्ह्ह अहहह हाहाहाहा। धीरज की बैचनी और उसका स्तनों को जोर जोर दबाना अहहह अहहहहह श्श्श्हशस
मेरे शरीर में तो आग ही लग गयी अहहहह। ..
धीरज दोनों हातोंसे से मेरे स्तनों को मसलने लगा. मेरे स्तनों को चूमने लगा. निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा. आहहहहह अह्ह्ह। जैसे ही नीरज ने मेरे निप्पल को मुँह में पकड़ के खींचा में पागल ही हो गयी.
धीरज के अंदर का हैवान जाग गया था. वो जोर जोर स्तनों को दबाते हुए ऊपर आया और उसने मुझे होटो पे चुम लिया। मेने भी उसे कसकर गले लगाया और हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे. अह्ह्ह अहहह उम्म्म्म अम्म्मम्म अम्म्मम्म
दोनों का शरीर भट्टी की तरह तप रहा था. दोनों मदहोश हो चुके थे. उम्म्म उम्म्म ाह्म्म्मम्म्म्म
चूमते चूमते धीरज ने मेरे स्तनों को छोड़ा और कसकर गले लगाकर पीठ पे हात घूमने लगा. जैसे ही धीरज के हात निचे जाने लगे. मेरे शरीर ने उछलना सुरु किया। यहाँ होठो को चूमते हुए पीठ पे धीरज के हात कमर से निचे गए और मेरी बड़ी गांड पे दोनों हात रखकर धीरज ने कसकर गांड दबा दी. अह्ह्ह्ह में उछली।
धीरज के पंजे गांड को कसकर पकडे दबाये जा रहे थे. मेरा शरीर धीरज के शरीर को रगड़ रहा था. अह्ह्ह अहहह हहहहह हाहाहा।।। अहहह धीरज ने मुझे कसकर पकड़ लिया था.
हहह अहहह अहह. उम्म्म्म ामममममम अम्म्मा।
जैसे ही दोनों के होठ दूर हुए. मेने धीरज की गर्दन पे काट लिया। मेरे शरीर में भी हवस भर गयी थी. में धीरज की गर्दन को चूमते हुए निचे बढ़ने लगी, धीरज के सीने से होकर, उसके निप्पल को चूमते हुए जैसे ही में निचे बैठी,
मेरे दोनों हातो ने धीरज की अंडरवेर पकड़ी और खींचकर निचे उतार दी. धीरज का लंड जैसे ही मेरे सामने आया मेरे मुँह ने अपने आप धीरज के लंड को अंदर ले लिया। धीरज का लंड काफी बड़ा था. ऐसे ही लंड को मुझे मनोकामना थी
मेने लंड को मुठी में पकडे चूसना सुरु किया। अहःअहः हाहाहा उम्म्म्म। अम्म्मम्म। लंड काफी तना हुआ था. आज लंड चूसने में एक अलग ही मजा आ रहा था. मेने मुँह में लंड लेकर जोर जोर से चूसना सुरु किया। लंड को हिलाते हुए चूस रही थी.
लंड के निचे लटकी हुई गोटियों को हात से दबाते हुए मसलने लगी. आह्हः हहहह हाहाहा। जितना अंदर मुँह में लंड ले सकी उतना अंदर लेकर चूस रही थी. अहहह अहहह। उम्म्म अह्ह्ह मममम अह्ह्ह्ह हहममम
पूरा लंड चूसकर में जैसे ही खड़ी होना चाहा, धीरज ने वही मुझे निचे पकड़ के रखा. मेरा सर पकड़कर धीरज ने मेरे मुँह में अपना लंड दबाया और मुँह को चोदने लगा. अहहह हाहाहा। में इसके लिए तैयार नहीं थी. लेकिन धीरज ने मेरा सर दोनों हातो से पकडे रखा था और वो मेरे मुँह में पुरे अंदर तक लंड को डालकर चोदने लगा अहह अहह हहह. अहहह। ाहाःहाहा।।।। लंड मेरे मुँह के अंदर चारो तरफ घिसते हुए गले तक जा रहा था.
अहहह अहहहह हहह. उम्म्म्म ाममममम मां. ामममम
काफी देर मुँह की चुदाई की फिर जब धीरज रुका। में खड़ी हुई. धीरज ने मुझे पकड़ा और किचेन के फर्श को मुझे टिका दिया। मेरी तरफ आया और मुझे किचेन के फर्श पे बिठा दिया। मेरे पैर फैलाये और पैरो के बिच आकर मेरी चुत में अपना लंड फिरसे डाल दिया अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह। में करहाई अह्ह्ह्हह
धीरज का लम्बा लंड चुत के अंदर चला गया, दोनों ने एक दूसरे को कसकर पकड़ा और चुदाई सुरु हो गयी. अह्ह्ह्ह अहहह। धीरज के चेहरे के भाव और मेरी सिसकती हुई आवाज दोनों भी बड़े प्यार से चुदाई कर रहे थे. धीरे मेरे होठो को चूमते हुए मेरे स्तनों को दबाने लगा.
निचे से लंड को जोर जोर से चुत में पटकने लगा. अह्ह्ह अहहहह धीरज अह्ह्ह अहहह धीरज पे मुझे बड़ा प्यार आ रहा था. अह्ह्ह्हह
चुदाई चल ही रही थी के धीरज ने मुझे कसकर पकड़ा, अपने दोनों हात मेरी गांड के निचे डाले और कसकर मेरी गांड पकड़कर धीरज ने मुझे अपनी कमर पे उठा लिया। अह्ह्ह् धीरज क्या कर रहे हो. में गिर जाउंगी
धीरज ने कहा नहीं गिरोगी। . ऐसे कहकर धीरज ने मुझे अपनी कमर पे उठा लिया। और उठा के निचे से लंड को मेरी चुत में जोर जोर से पटकने लगे. अहहह अहहहहह। अहहह। ससष्ठ अह्ह्ह अहहह। शहहह
धीरज अपने लंड पे मेरी चुत पटकने लगा. अह्ह्ह अहहह। गांड को कसकर पकड़कर उठाये मुझे खड़े खड़े चोद रहा था. अह्ह्ह्ह हां
मेरे स्तनों के बिच धीरज का मुँह दबा हुआ था. अहह अह्ह्ह अहहह ः. ऐसी चुदाई पहले कभी नहीं की थी. बहोत उत्तेजित हो उठी थी. अह्ह्ह्ह
कुछ देर बाद धीरज ने मुझे निचे उतरा। वो थका हुआ था. मेने पूछा। …..अब
तो धीरज ने कहा तुम्हारे कमरे में चलते है. मेने उसका हात पकड़ा और अपने कमरे में ले आयी.
अंदर आते है. धीरज सामने पलंग पे लेट गया. फिर अपना लंड हात में पकड़कर मुझे कहा, अब इसपे बैठो।
में धीरज को ऐसे लंड हात से पकड़कर हिलाते हुए देख…. मुस्कुरायी। एक अजनबी लड़का मुझे अपने लंड पे बैठने के लिए कह रहा है. और मुझे उससे कोई दिक्कत नहीं है.
में हस्ते हुए पलंग पे चढ़ी. धीरज के लंड के ऊपर बैठकर लंड चुत में डाला और लंड के ऊपर उछल ने लगी. अहह हहहह। लंड पूरा चुत के अंदर जाकर बाहर आ रहा था. अह्ह्ह अहहह ः. कूदते हुए मेरे स्तन ऊपर निचे उछल रहे थे. में अपने ही स्तनों को दबाते हुए लंड को अंदर ले रही थी. अहह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह
मदहोशी से भरी में। . लंड पे बैठने के पूरा आनंद लेने लगी. अहह अहहह अहहहहहहह अहह. धीरज भी कहराने लगा था. अहह अहह अहहह अहहह।। उफ्फफ्फ्फ़
काफी देर लंड पे कूदने के बाद, जब में उठी. पता नहीं मुझे क्या हुआ. में सीधा धीरज के मुँह पे जाकर बैठ गयी और अपनी चुत धीरज के मुँह में देकर उससे चुत को चटवाने लगी अहह अह्ह्ह।
धीरज नई अपनी जबान चुत में दबाये राखी और चुत को अंदर से चाटने लगा. अहह अहहह हहह. में अपनी कमर को हिलाते हुए चुत को धीरज के मुँह पे रगड़ रही थी. अह्ह्ह अहहह उम्म्म अह्ह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़
ये करने में मुझे बहोत मजा आता है. अहहह उम्म्म्म
चुत को अछि तरह चटवाने के बाद जब में पास में बैठी। धीरज उठकर खड़ा हुआ. उसने मुझे सीदा लिटा दिया। मेरे पैर फैलाये और लंड को चुत में धकेल के मेरे ऊपर सो गया. और मुझे चोदने लगा अहह अहह अहह हहहहह। उम्म्म्म। ामममम। मुझे महसूस हुआ धीरज की गति बढे जा रही है. वो काफी जोश में मुझे चोदने लगा. अह्ह्ह अहःअहः। मेरे ऊपर सोकर मुझे होठो पे चूमते हुए मेरी चुत को मारे जा रहा था. अहहह अहहह। उम्म्म्म
अह्ह्ह अह्ह्ह। उम्म्म्म अहहहहहह
जैसे ही नीरज रुका, उसने फिर मुझे पलट दिया। जैसे में पलटी। धीरज ने अपना मुँह मेरी बड़ी गांड के बिच में डालकर चाटने लगा. अह्ह्ह्ह। अह्ह्ह मेरी कोमल गांड पे धीरज का मुँह रगड़ते हुए महसूस होने लगा. अह्ह्ह अहःअहः। धीरज ने अपनी जबान मेरी गांड पे रगड़ना सुरु किया। गांड को चूमने लगा. अहह अहहह उम्म्म्म अम्मम्म।
जैसे ही गांड को चूमकर वो पीछे हटा, उसने मुझे घोड़ी बना दिया। मेरी गांड ऊपर उठी, मुँह निचे पलंग पे दबा हुआ. मेने अपनी पोजीशन ली, वहा धीरज ने अपना लंड पीछे से मेरी चुत में धकेला और कसकर पकड़कर मुझे चोदने लगा अहह अहह अह्ह्ह्ह। . जोर जोर से लंड को चुत में पटक रहा था. अहह अहहह। धीरे अहह अहहह
बहोत देर तक चुदाई चली फिर जब धीरज ने कहा के मेरा पानी निकलने वाला है. तो मेने तुरंत अपनी गांड आगे की और पीछे घूमकर धीरज का लंड मुँह में ले लिया। लंड को मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी. अहह उम् उम्म्म अम्म उम्म्म्म
कुछ ही पल में धीरज ने अपना सारा पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया। अह्ह्ह उम्म्म अम्मम्म अह्ह्ह्ह
आह्हः में पूरा पानी पि गयी. अह्ह्ह उम्म्म्म
फिर धीरज शांत हुआ. मेरे भी दो बार झड़ चुकी थी. ऐसी चुदाई का मजा पहले कभी नहीं आया.
धीरज और में कुछ देर पास सोये रहे. मेने धीरज को कसकर गले लगा लिया था.
कुछ देर बाद उठे और धीरज कपडे पहनकर चला गया.
उस दिन के बाद से, जब भी स्विगी से सामान मंगाती हु, धीरज ही लेकर आता है और हम चुदाई करते है.
कैसी लगी मेरी कहानी जरूर कमेंट करके बताना