कॉलेज की दोस्त के साथ लेस्बियन

प्रीति के साथ मेरी दोस्ती कॉलेज के एक प्रोजेक्ट के दौरान शुरू हुई. हम दोनों के बिच तब बाते होने लगी. प्रीति ने मुझे बहोत मदत की प्रोजेक्ट बनाने में तबसे हम दोनों साथ रहने लगे. मेरा नाम अंजलि है.

धीरे धीरे प्रीति और मेरी दोस्ती गहरी होने लगी. लेकिन जैसे जैसे में उसके साथ वक्त बिताने लगी, मुझे महसूस हुआ की मेरा प्रीति के शरीर के तरफ आकर्षण बढ़ रहा है. क्यूंकि प्रीति एक अचे घर से आती थी. दिखने में गोरी थी. प्रीति के स्तन बड़े और गोल आकर्षक थे. प्रीति की गांड भी बड़ी थी.

एकबार प्रीति क्लास में मेरे सामने निचे पड़ी पेन उठाने के लिए झुकी तो उसके टॉप के अंदर मेरी नजर गयी. प्रीति के स्तन की बिच की गुफा मुझे दिखी. काफी सूंदर नज़ारा था.

 प्रीति के स्तन मेरे स्तनों से काफी बड़े थे. जब भी मेरे बगल में बैठती मेरी नजर उसके स्तनों को निहारती. में नजर चुराके प्रीति के स्तन देखती रहती। मुझे प्रीति के शरीर का स्पर्श भी अच्छा लगने लगा था. उसके कोमल हात, उसकी मुलायम कमर. में तो बहाना ढूंढती प्रीति को छूने का.

में प्रीति के सात मस्ती करते समय ज्यादातर उसको गले लगाती. कभी कभी पीछे से पकड़ लेती ताकि उसके कोमल शरीर का मुझे आनंद मिल सके. एक बार तो प्रीति इतनी सूंदर दिख रही थी के मेरा मन उसके होठो को चूमने का हुआ. उसदिन मेने प्रीति को कसकर गले लगाया, और उसके गाल पे चुम लिया.

कुछ और महीने बीते। अब में प्रीति के स्तनों को मस्ती मस्ती में दबाने भी लगी. जब भी ऐसा मौका मिलता जहा हम दोनों ही है कमरे में, तब में पीछे से आकर दोनों हातोंसे प्रीति के स्तनों को जोर से दबा देती और उसको कसकर पीछे से पकड़ लेती।  मुझे प्रीति के बड़े कोमल स्तनों को दबाने ने बहोत मजा आता.

फिर एक दिन प्रीति जींस पेंट पहनकर कॉलेज आयी थी. उसमे उसकी गांड काफी बड़ी और गोल दिख रही थी. में अपने मन को संभाल नहीं पायी। क्लास में कुछ लड़किया ही थी. और वो सब आगे बैठी थी. पीछे कोई देख नहीं रहा था. तो मेने क्लास में ही जब हम पीछे बैठे थे, तब जैसे ही प्रीति खड़ी हुई, मेने उसकी गांड दबा दी.

मेने प्रीति के गांड पे हात घुमाते हुए उससे कहा, की अछि लग रही है.  प्रीति खड़ी होकर अपने बाल बांध रही थी. मेने प्रीति को कहा जरा घूमकर खड़ी हो. तो प्रीति मेरी तरफ अपनी गांड करके खड़ी होकर अपने बाल बांधने लगी. और में प्रीति की गांड को इतने करीब से देख रही थी मन मचलने लगा. गांड करीब से तो और भी सूंदर दिख रही थी. प्रीति के गांड के निचे जो दो आधे चाँद बन रहे थे. मेरे गांड पे ऐसा कभी नहीं देखा. दायी और बायीं गांड के निचे दिख रहे आधे चाँद की वजसे गांड और भी आकर्षक दिख रही थी.

प्रीति के शरीर के साथ खेलकर में इतनी उत्तेजित हो जाती थी के घरपर जाकर अपने कपडे उतारकर सीधा चुत को सहलाने लगती. अपने कमरे में बेड पे लेटकर आँखे बंद करके प्रीति को याद करती और चुत को जोर जोर से घिसती। चुत में ऊँगली डालकर प्रीति का नाम लेती अह्ह्ह्ह अहहह प्रीति. अहहहह….

प्रीति का नाम लेकर झड़ने में मुझे बहोत मजा आने लगा था. सच कहु तो मुझे प्रीति की चुत चाटने का बहोत मन था. में पूरी कोशिश में थी के प्रीति मुझे एक दिन अपनी चुत चाटने दे.

जब जब हम कॉलेज में मिलते, में प्रीति के शरीर के साथ खेलती रहती। मौका ढूंढ़कर उकसे शरीर पे चान्स मारती रहती।

धीरे धीरे प्रीति को समज आ ही गया था की में उसके शरीर के तरफ आकर्षित हो गयी हु. लेकिन अछि बात ये थी के प्रीति ने कभी मुझे रोका नहीं. जैसे जैसे दिन आगे बढे हमारे बिच सेक्स की बाते होने लगी. हम खुलकर सेक्स की बाते करते. हम दोनों एक दूसरे को बताने लगे की चुत को कैसे सहलाना होता है. कैसे ऊँगली चुत में डालकर मसलना होता है. प्रीति एक दिन मुझे बताने लगी के वो पूरी नंगी होकर अपने स्तनों को एक हात से दबाते हुए अपनी चुत में ऊँगली डालकर जोर जोर से घिसती है और उससे ज्यादा मजा आता है.

हमारी बढ़ती हुई सेक्स की बातो ने हम दोनों को और करीब ला लिया. प्रीति भी मेरे स्तनों को दबाने लगी. कहने लगी, दबा दबाके स्तन बड़े होते है. जब भी मौका मिलता प्रीति मेरे स्तन दबा देती। हम एक दूसरे के शरीर के साथ खेलने लगे थे.

कॉलेज के बाथरूम में एकबार कोई नहीं था. तब मे प्रीति के नजदीक गयी और सामने से प्रीति के स्तनों को दोनों हातोसे दबाने लगी. प्रीति खड़ी रहकर मुझे देख रही थी और आनंद ले रही थी. प्रीति को मेरा स्तनों को दबाना अच्छा लगने लगा तो उसने अपना टीशर्ट ऊपर उठाया और मुझे अपने स्तन दिखा दिए. में तो देखकर पागल ही हो गयी, मेने स्तनों को दबाया तो पता चला की बहोत ही कोमल है. प्रीति के निप्पल बड़े हो चुके थे. में निप्पल को ऊँगली में पकड़ के दबाते हुए आनंद लेने लगी. प्रीति अहह की आवाज करते हुए तड़पने लगी. में प्रीति के स्तनों को दबाये जा रही थी लेकिन तभी बाहर से किसी के आने की आह्ट हुई तो डर से प्रीति ने अपना टीशर्ट निचे कर दिया।

हम वहा से निकले। कॉलेज के निचे के कैंटीन के बाहर एक कोने में खड़े होकर एक दूसरे को निहारने लगे. दोनों के चेहरे पे एक अजीब सी ख़ुशी थी. में प्रीति के स्तनों को देख ही रही थी के प्रीति ने कहा के मुझे बहोत मन कर रहा है.

मुझे समज आया की प्रीति अब तप चुकी है. यही मौका है.

मेने प्रीति को कहा की तो तुम्हारे घर चलते है. प्रीति ने कहा लेकिन अभी घर पे माँ होगी. वो १२ बजे काम पे चली जाएगी। हमें तब तक रुकना पड़ेगा.

तो मेने कहा ठीक है, हम कॉलेज के गार्डन के पास लोगो से दूर होकर बैठे थे ताकि हमारी बाते कोई सुन न सके. प्रीति की आँखे देखते हुए मेने कहा तुम्हारी आखे नशीली हो चुकी है. तो प्रीति कहने लगी, तुम्हने जिस तरह मेरे निप्पल दबाये, बहोत मजा आया मुझे। अभी भी निप्पल खड़े है मेरे।

उसकी तरफ देखते हुए मेने भी प्रीति को कहा मेरा भी मन मचल रहा है. हमारी बाते धीरे धीरे गन्दी होने लगी.

में इतनी तप गयी थी के मुजसे अब रहा नहीं गया. मेने सोचा यही मौका प्रीति को अपनी इच्छा बता दू

मेने डरते हुए प्रीति को कहा, अगर तुम बुरा ना मानो तो में एक बात बोलू.

प्रीति बोली, हा बोलो न मेरी जान…. आज तुम जो भी बोलेगी सब मुझे अच्छा ही लगेगा।

प्रीति की बात सुनकर मुझे हिमत मिली. मेने डरते हुए प्रीति को कहा, के प्रीति मुझे तुम्हारे शरीर का बहोत ही ज्यादा आकर्षण हो गया है.

तुम्हे मिलती हु तो मुझे तुम्हे होठोंपे चूमने का मन करता है. तुम्हारे बड़े बड़े स्तनों को देखती हु तो दबाने ने का मन करता है. प्रीति मेरी बात सुनकर और भी ज्यादा उस्साहित हो गयी. उसने मेरा हात पकड़ लिया और खींचकर अपनी जांग पर रखकर पकड़ के बैठी।

मुझे कहने लगी, और क्या क्या करने का मन होता है मुझे देखकर।

मे और भी ज्यादा खुल गयी मेने कहा प्रीति तेरी गांड भी बहोत ही बड़ी है. मुझे तेरी गांड भी दबाने  में मजा आता है. प्रीति मेरी बात सुनकर आह भर ने लगी.

फिर मेने प्रीति को कहा, प्रीति मुझे तेरी चुत चाटनी है.

मेरी ये बात सुनकर प्रीति जैसे मेरी तरफ हवस भरी आखो से देखने लगी में भी पागल सी होने लगी.

प्रीति मुझे देखते हुए कहने लगी, मेरी चुत तेरी ही है. में चुत खोलकर दूंगी तब पूरी चाट लेना.

मेने एक नजर निचे प्रीति की चुत की तरफ देखा. अह्ह्ह.. प्रीति को ऊपर से निहारते हुए मन तो पागल हो रहा था.

१२ बजे तक हम कॉलेज के बाहर ही बैठे थे. गन्दी गन्दी बाते चल रही थी. दोनों को भी लग रहा था की कब घर जाकर कपडे निकालकर नंगे होंगे.

जब वक्त पूरा हुआ.

हम सीधा प्रीति के घर की और निकले। कुछ ही देर बार हम प्रीति के घर पोहचे.

प्रीति ने दरवाजा खोला, अन्दर आते ही मुझे उसने अपने कमरे की तरफ इशारा किया. में उसके कमरे में चली आयी. पिछेसे प्रीति ने सब दरवाजे खिड़किया बंद की और कमरे में मेरे पीछे आयी. अंदर आकर प्रीति ने जैसे ही कमरे का दरवाजा बंद किया वो सीधा मेरी तरफ आयी और मेरे मुँह को कसकर पकड़कर होठो को चूमने लगी.

अह्ह्ह्हह. उम्म्म्म. इसी का तो इंतजार था. मुझे लगा था की सिर्फ मुझमे ही हवस भरी है. लेकिन मुजसे ज्यादा तो प्रीति उत्तेजित लग रही थी.

हम दोनों ने कसकर एक दूसरे को गले लगाया. एक दूसरे की पीठ पे हात घुमाने लगे.

अह्ह्ह.. क्या सूंदर होठ थे प्रीति के. चूमने में बहोत मजा आ रहा था. कोमल होठो पे दोनों के होठ घिस रहे थे.

एक दूसरे की पीठ पे हात घुमाते हुए मेने प्रीति का टीशर्ट ऊपर उठा दिया. प्रीति ने भी मेरा कुर्ता ऊपर उठा दिया. दोनों ने एक दूसरे का टॉप निकाल दिया.

दोनों के ब्रा एक दूसरे पे छूने लगे. प्रीति के बड़े स्तनों पे में अपने स्तन दबाने लगी. अहहहहह… कोमल पीठ पे हात घुमाते हुए,

फिर गालो को चूमते हुए मेने प्रीति के स्तनों को जोर जोर से दबाया. वो आह भरने लगी. आह्ह्ह्ह. प्रीति ने जैसे देखा के में बहोत ही उत्तेजित होकर उसके स्तन दबा रही हु, उसने खुद ही अपना ब्रा खोल दिया.

जैसे ही ब्रा हटा, और प्रीति के बड़े बड़े दो स्तन मेरे आखो के सामने आये, में चौक ही गयी. इतने सूंदर स्तन देखकर मुजसे रहा नहीं गया और मेने प्रीति के स्तनों पे मुँह रखकर चुम लिया. प्रीति के निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगी, दोनों हातोंसे से स्तनों को दबाने लगी. अहहह. अहःअहः. उम्मम्मम

प्रीति ने मेरी पीठ पे हात घुमाते हुए मेरा भी ब्रा खोल दिया. मेरा ब्रा निचे गिरा और प्रीति ने मेरे स्तनों को दबाना सुरु किया. आह्ह्ह्हह अहहह.. प्रीति मेरे निप्पल ऊँगली में पकड़कर दबा रही थी. उफ्फ्फ्फ़. अअअअअअ हहहह आह्ह्ह्ह

दोनों को भी बहोत मजा आ रहा था.

फिर प्रीति और में पीछे बेड पे चढ़े. प्रीति निचे सोइ और में प्रीति के ऊपर सो गयी और उसके होठो को चूमने लगी, चूमते चूमते निचे जाने लगी. स्तनों से होकर निचे प्रीति की नाभि चूमने लगी. फिर जैसे ही में प्रीति की जांग तक पहोची, मेरी धधकने बढ़ने लगी. मेने प्रीति की जींस खोली और निचे खींच दी.

जींस निकली तो प्रीति मुझे पैंटी में सोइ दिखाई दी. प्रीति को नंगा देखकर बहोत ही आखो को सुख मिल रहा था. मेने भी अपना पजामा उतार दिया और पैंटी पे आ गयी. फिर प्रीति की गोरी जांग को चूमते हुए मेने प्रीति की पैंटी पकड़ी और निचे खींच दी.

प्रीति जैसे ही पूरी नंगी हुई. मेरी नजर प्रीति के चुत पे पड़ी. आह्हः. बहोत ही सुन्दर चुत थी. मेने प्रीति के पैर फैलाये और चुत को खोला. चुत पे अपना मुँह रखा और जीभ से प्रीति की चुत चाटने लगी. आह्ह्ह्ह अह्ह्ह. उम्म्म प्रीति सिसकने लगी. आह्हः अहःअहः

प्रीति की गीली चुत फनफना रही थी. मेने अपना मुँह चुत पे दबाये रखा और जीभ को अंदर चुत में डालकर चुस्ती रही. आह्हः. पानी एक ऊँगली चुत में रगड़ने लगी. बहोत मजा आ रहा था. यही तो मुझे चाहिए था.

काफी देर तक मेने प्रीति की चुत चाटी।

फिर में प्रीति के ऊपर पलटकर ६९ की पोजीशन में लेट गयी. मेरी चुत सामने देखकर प्रीति ने तुरंत उसे अपने मुँह में ले लिया. यहाँ मैंने प्रीति की चुत में अपनी जबान डाली और हम दोनों एक दूसरे की चुत को चाटने लगे. उम्म्म ममममम ममममम अम्म्मम्म अहह आमममम

प्रीति ने मेरी जांग दोनों हातोंसे से कसकर पकड़ ली थी और मेरी चुत को अपने मुँह पे दबाये रखा था. आह्ह्ह्ह प्रीति। .. प्रीति भी चुत चाटने में माहिर थी. जबान को अछि तरह चुत में घिस रही थी. आह्ह्हह्ह्ह्ह अहहहहहहहह…

दोनों ने एक दूसरे की चुत को अच्छी तरह चूसा, फिर मेने प्रीति को पलटकर लिटाया. उसकी बड़ी गांड मेरे सामने आयी. मेने पहले तो प्रीति की गांड को दोनों हातोंसे से दबाया, प्यार से सहलाते हुए ठीक से प्रीति की बड़ी कोमल गांड को देखती रही. फिर मुजसे रहा नहीं गया. तो में प्रीति की गांड पे बैठी और अपनी गीली चुत को प्रीति के गांड पे रगडने लगी.

अहहह अहहह. सुसस्सस. अम्मम्म. प्रीति की कोमल गांड पे चुत घीसते समय बहोत मजा आ रहा था. आह्ह्ह्हह अह्ह्ह

गांड पे चुत घिसते हुए अपने दोनों हातो से प्रीति की पीठ सहला रही थी. प्रीति का कटीला बदन आखो के सामने देख में मदहोश हो चुकी थी. अह्ह्ह्ह उम्मम्मम

काफी देर चुत घिसने के बाद, मेने प्रीति को सीधा लिटाया, उसके पैरो को फैलाया, और बिच में बैठे मेने कैची बना ली. प्रीति की और मेरी चुत एक दूसरे के ऊपर रखकर में घिसने लगे. आहहहह अहहह.

प्रीति भी अपनी कमर हिलाते हुए अपनी चुत मेरी चुत पे घिसने लगी. अह्ह्ह अहहह उम्म्म्म प्रीति।।। अह्ह्ह करो आअह्ह्ह मजा आ रहा है. दोनों की गीली चुत एक दूसरे के ऊपर घिस रही थी. अह्ह्ह अहःअहः….

दोनों चुत का पानी एक दूसरे में घुल रहा था. आहहह…. काफी देर हम चुत को घिसते रहे.

जब हम दोनों को ऐसास हुआ की अब ज्यादा देर तक हम नहीं रह सकते तो,

हम दोनों एक दूसरे के बगल में सो गए. दोनों ने होठो को चूमना सुरु किया. अपने आप दोनों के हात एक दूसरे की चुत पे चले गए. और हम दोनों एक दूसरे की चुत को सहलाने लगे. आअह्ह्ह्हह. अहहह….

ऊँगली अंदर चुत में दाल जोर जोर से चुत को घिसने लगे. आह्ह्ह्ह. होठो को चूमते हुए,,, स्तनों को एक दूसरे पे रगड़ते हुए एक दूसरी की चुत को घिस रहे थे

अहहह अह्ह्ह हाहा अह्ह्ह हाःहाहा. अहःअहः
उफ्फफ्फ्फ़. अह्ह्ह

अचानक दोनों ने होठ दूर किये, एक दूसरे की आँखोमे देखते हुए चुत को मसलते हुए. एक लम्बी सास ली और दोनों की चुत एक साथ झड़ गयी

अह्ह्ह्हह अहहहह. उफ्फ्फ्फफ्म आअह्हह्ह्ह्हह हहहहह। . अह्ह्ह प्रीति आह्ह्ह्ह अहहह

हम कुछ देर ऐसे ही कसकर एक दूसरे को गले लगाकर सोये रहे.

फिर में उठी और कपडे पहने. प्रीति को कहा में घर जाती हु. बहोत देर हो गयी है. प्रीति ने भी सिर्फ टॉप पहन लिया और में वहा से निकल गयी.

उस दिन के बाद प्रीति मेरी बहोत अछि दोस्त बन गयी. हम जब भी मौका मिलता एक दूसरे की चुत के साथ खेलते।

One comment

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