बेटी, दामाद और में

डिवोर्स के बाद में अपनी बेटी को लेकर बड़े शहर चली आयी. जब डिवोर्स हुआ तब मेरी बेटी १२ साल की थी. मेरे पति का दूसरी औरत के साथ चक्कर था. तो मेने उसे छोड़ दिया.

अब कई साल हो चुके है. मेरी बेटी पूर्णिमा भी २२ साल की हो चुकी है. पूर्णिमा और मेरे बिच एक अच्छे दोस्त का रिश्ता बन गया था. हम दोनों भी पढ़े लिखे थे. कई बार हम अमेरिका और लंदन जाकर आये थे. बाहर की दुनिया में रहकर आने की वजसे दोनों भी काफी खुले विचार के हो चुके थे. हमें छोटे कपडे पहनना पसंद था.

सेक्स जैसी बाते हमारे लिए आम थी. मेरा रिस्ता जैसे जैसे पूर्णिमा के सात गहरा होता गया, हम चुदाई की बाते भी करने लगे. एकबार तो हम जर्मनी के एक दुकान में गए, वहा सेक्स टोय मिल रहे थे. हम दोनों दुकान में घुमन्ते हुए अलग अलग प्रकारके सेक्स टॉय को हात में लेकर उसके ऊपर बाते करने लगे. वहा हमें अजीब अजीब प्रकारके सेक्स टॉय देखने मिले। कई तो ऐसे थे की देखकर ऐसे लग रहा था की रोज इस्तेमाल की जाने वाली चीज है, लेकिन उसको सेक्स टॉय की तरह इस्तेमाल किया जाता था.

जैसे लिपस्टिक, मेकअप का ब्रश। दुकान में घूमते हुए हमें नकली लंड भी देखने मिले. अलग अलग आकर के लंड थे. उसमे भी गोरे काले लंड की पसंद दी गयी थी. हम देखकर हैरान हो रहे थे और एक एक लंड को हात में लेकर देख रहे थे.

हमने २ लंड ख़रीदे और दो और सेक्स टॉय ख़रीदे जो बटन से चलते थे, और हिलते रहते थे. हम वो सेक्स टॉय लेकर घर आये और उसी दिन रात को हमने उसे इस्तेमाल भी किया

में अपने कमरे में इस्तेमाल कर रही थी और पूर्णिमा उसके कमरे में. दूसरे दिन दोनों भी काफी खुस थे. हम दोनों भी सुभह की चाय पीते वक्त अपना अनुभव एक दूसरे को बता रहे थे.

पूर्णिमा कहने लगी, उसने जो काला लंड लिया था वो ऐसे लग रहा था की असली का लंड है. चुत में डालते ही मजा आने लगा. मेने पूर्णिमा को कहा मुझे भी वो नकली लंड मेरे लिए लिया था वही अच्छा लगा. मेने रातको और फिर एकबार सुभह नाहते वक्त भी लंड को चुत में डालके पानी निकाला. बहोत मजा आया.

हम खुलकर अपनी अपनी कहानिया एक दूसरे को बता रहे थे.

कुछ ही महीनो में हमारे बिच जो शर्म थी वो भी ख़तम हो गयी. एकबार रातको खाना खाकर में सोने जा रही थी. सोचा पूर्णिमा सो रही है के नहीं देख लू. तो जैसे ही मेने दरवाजा खोला.

सामने पूर्णिमा पूरी नंगी खुर्सी पे बैठी थी, सामने लैपटॉप पे सेक्स वीडियो चल रहा था और वो चुत में ऊँगली डालकर चुत रगड़ रही थी.

मुझे देखके चौकने की बजाय वो चुत को मसलती रही. और मुझे कहने लगी, माँ दरवाजा खटकाके अंदर आना होता है.

में भी ज्यादा चौकी नहीं, मुझे तो पता ही था की पूर्णिमा रातको चुत के साथ खेलती है. मेने उसे कहा, जल्दी सो जाना. ज्यादा रात तक जगी मत रहना.

और में दरवाजा बंद करके अपने कमरे में चली गयी. अभी तो दोनों के बिच कोई शर्म रही नहीं थी. घरमे दोनों भी कभी कबार नंगे ही घुमा करते थे. ये हमारा तरीका था एक दूसरे के मन को शर्म से दूर करने का.

कुछ ही महीनो बाद पूर्णिमा ने बताया के उसको बॉयफ्रेंड मिल गया है. उसका नाम आरव था. वो उसके सात अब वक्त बिताने लगी थी. दोनों बाहर घूमने जाया करते थे. मुझे तो सबकुछ पता ही था. पूर्णिमा मुझे सब बताया करती थी.

पूर्णिमा ने मुझे ये तक बताया था की आरव उसको होटल रूम बुक करके ले गया था. वहा पे दोनों ने बहोत चुदाई की. मेने पूर्णिमा को कहा की हमेशा कंडोम का इस्तिमाल करना. शादी के पहले सेफ्टी जरुरी है.

मुझे कोई भी एतराज नहीं था. पूर्णिमा वैसे भी बड़ी हो चुकी थी. वो अपना ख्याल रख सकती थी.

फिर एक दिन हम गोवा घूमने गए. हम गोवा पोहचे ही थे की पूर्णिमा ने मुझे बताया की उसका बॉयफ्रेंड भी कल आने वाला है. मे पहले कभी उसके बॉयफ्रेंड से मिली नहीं थी. सिर्फ फोटो देखि थी.

में थोड़ी हिचकिचा रही थी. लेकिन अब वो आने ही वाला था तो में कुछ नहीं कर सकती थी. दूसरे दिन उसका बॉयफ्रेंड भी गोवा आ गया. हम उसे एक रेस्टुरेंट में खाने पे मिले. वो दिखने में एक मॉडल की तरह था, ऊपर के शर्ट के बटन खुले और उसकी छाती हलकी सी दिखाई दे रही थी. उसको देखकर तो मेरे निप्पल खड़े हो गए. मेरी नजरे बार बार पूर्णिमा के बॉयफ्रेंड पे जा रही थी.

हम जब वहा से निकल रहे थे, उसका बॉयफ्रेंड पैसे देने गया तो , पूर्णिमा ने मेरी तरफ देखा और कहने लगी, में देख रही हु तुम मेरे बॉयफ्रेंड से ज्यादा ही बातचीत कर रही हो.

में शर्मा रही थी. मेने कहा ऐसा कुछ नहीं है.

पूर्णिमा बोली, अच्छा माँ. तुम्हारे जो निप्पल खड़े हुए है, कपड़ो के ऊपर से साफ दिख रहे है.

मेने शर्माके अपना ड्रेस ठीक किया. पूर्णिमा को मेरी भावना का पता चल गया था.

हम वहा से निकले.

पूर्णिमा के बॉयफ्रेंड ने हमारे ही होटल में कमरा ले लिया. अब शाम हो गयी, पूर्णिमा और उसका बॉयफ्रेंड गोवा के प्रसिद्ध क्लब में जा रहे थे. पूर्णिमा सेक्सी ड्रेस पहनकर तैयार हो गयी.

जाते हुए मुझे बोली, माँ तुम सो जाना, मुझे लेट हो जायेगा. रातको में आरव के कमरे में ही सो जाउंगी. मेने मुड़कर पूर्णिमा को कहा कंडोम पता है ना.

वो हसते हुए चली गयी

में अकेली रूम में कुछ करने को नहीं. नींद भी नयी आ रही थी. तो टीवी देखते हुए बैठी थी. टीवी देखते हुए कब २ बज गए पता ही नहीं चला.

तभी में बोतल से पानी पीते हुए जब खिड़की से बाहर देख रही थी, तो मुझे आरव और पूर्णिमा आते हुए दिखे. वो पीछे की तरफ आरव के कमरे की और जा रहे थे.

मेने सोचा देखु तो इतनी जल्दी कैसे आ गए. में तुरंत कमरे के बाहर गयी. पीछे की तरफ कोने में आरव का कमरा था. बाहर बहोत अँधेरा था. पीछे की तरफ कोई नहीं आता जाता. और रातके २ भी बज रहे थे.

आरव और पूर्णिमा मस्ती में हस्ते हुए एक दूसरे का हात पकड़के कमरे की और आये. में दिवार के पीछे छुपकर उन्हें देख रही थी. में काफी करीब थी.

आरव ने चाबी से दरवाजा खोला ही था की पूर्णिमा ने वही पे उसे कसकर गले लगाया और होठो पे दोनों चूमने लगे. कोने में दीवार के पीछे आरव ने पूर्णिमा को टिकाया, और उसके स्तनों को जोर जोर से दबाकर चूमने लगा.

में चौक गयी, में सोचने लगी, ये दोनों पागल हो गए है. ऐसे खुले में क्या कर रहे हे. वो दोनों मदहोश होकर एक दूसरे को चूमे जा रहे थे. और पूर्णिमा को भी बेवकूफ, कमरे में जाने की बजाय बाहर ही उसको चुम रही थी.

में देखती रही. मेने सोचा कुछ देर चूमने के बाद अंदर कमरे में चले जायेंगे लेकिन नहीं आरव ने पूर्णिमा का ड्रेस वही ऊपर उठा दिया. पूर्णिमा ने सेक्सी वन पीस पार्टी ड्रेस पहना था.

आरव ने पूर्णिमा का ड्रेस उसके पेट के ऊपर तक उठा दिया. निचे पूर्णिमा की पैंटी दिखने लगी थी. दीवार पे सटके पूर्णिमा को खड़ा करके होठो को चूमते हुए आरव ने पैंटी के अंदर अपना हात डाला और चुत को मसलने लगा.

ये सब देखकर मुझे यहाँ कुछ होने लगा. मेरे निप्पल तन गए. चुत निचे मचलने लगी. आरव को पूर्णिमा की चुत को मसलते हुए देख मेरा भी मन करने लगा. पूर्णिमा ने आरव के शर्ट के बटन खोल दिए. आरव के निप्पल चूमने लगी.

आरव ने पूर्णिमा की चुत जोर जोर से मसलते हुए अचानक उसने पूर्निका की पैंटी निचे उतार दी. पैंटी निकाल के आरव ने उसे अपने हात में लिया और पैंटी को सूंघते हुए, उसने उस पैंटी को अपने पेंट के अंदर लंड के पास डाल दिया.

फिर आरव निचे बैठा. उसने पूर्णिमा की एक टांग पहले अपने कंधे पे ली और फिर दूसरा पैर अपने कंधे पे लिया और पूर्णिमा को दीवार से लगाकर कंधे पे बिठाकर निचे उसकी चुत को चाटने लगा. आह्ह्ह्ह अहःअहः.. अहःअहः

पूर्णिमा के चेहरे के वो भाव देखते ही में यहाँ पानी पानी हो गयी. पूर्णिमा अपना मुँह खोलकर सिसकते हुए आनद ले रही थी. अहहह अहहहह अहःअहः.

आरव पूर्णिमा की जांग पकड़कर चुत को जिब से चाटे जा रहा था. आहहह अहा… मन में आया की मेरी भी कोई चुत चाटो अह्ह्ह. आज के जवान लड़के कितनी अछि चुत चाटते है.

अहहह अहःअहः। उम्म्म अह्ह्ह्ह उम्म्म्म ाम्म्म

मेरा भी हात अपनी पैंटी में चला गया और में भी अपनी चुत को रगड़ने लगी. आह्हः हहहह.

काफी देर आरव ने पूर्णिमा की चुत चाटी, फिर उसने पूर्णिमा को वही पे झुककर खड़ा किया , पीछे से लौडे को चुत में धकेला और जोर जोर से पूर्णिमा को चोदने लगा. अहह हः अहहह। उम्म्म्म अहंम

में अपनी बेटी को चुदाई करते हुए आखो के सामने देख रही थी. अह्ह्ह अह्ह्ह्ह।।।।। क्या नजारा था. अह्ह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़. ाहाहहहह

कुछ देर चुदाई के बाद दोनों ऐसे ही अंदर चले गए, और फिर अंदर जाकर चुदाई सुरु थी. में धीरेसे उसके कमरे पे पास गयी, दरवाजे के बाहर पूर्णिमा की सिसकने की आवाज आ रही थी.

कुछ देर बाद में वहा से निकली और अपने कमरे में आकर पहले तो नकली लंड निकाला और उससे अपनी चुत की चुदाई करने लगी. आँखे बंद कर रही थी तो मुझे आरव का लंड दिखाई दे रहा था. आह्हः अहहहहहह अहहहह अहहह।।। जोर जोर से नकली लंड को चुत में डाल रही थी. अह्ह्ह्ह आह.

कुछ देर बाद मेरी चुत झड़ गयी.

अह्ह्ह्ह बहोत मजा आया.

दूसरे दिन सुबह करीब ११ बजे पूर्णिमा रूम में वापस आयी. वो अभी भी वही रात के कपड़ो में थी. नहाकर जब पूर्णिमा नास्ता कर रही थी. तब मेने पूर्णिमा को कहा की जो भी करोगी रूम के अंदर किया करो.

मेरी बात सुनकर पूर्णिमा चौक गयी. मेरे तरफ देखकर कहने लगी, तुमने देख लिया.

मेने कहा, हा सबकुछ

वो और भी ज्यादा शोक हो गयी. उसे याद आया की क्या क्या मेने देखा होगा. हस्ते हुए टेडी मेडी शकल करने लगी.

फिर बोली, हा ठीक हे अगली बार ध्यान दूंगी।

दोनों के चेहरे पे एक हलकी मुस्कान थी. दोनों भी रात के बारेमे सोच रहे थे.

कुछ देर बाद हम आरव के साथ गोवा घूमने निकले. काफी सारि जगह थी गोवा में, गाड़ी लेकर निकले थे.

आरव मुजसे एक दोस्त की तरह बात कर रहा था. एक जगह हम चर्च में गए. वहां थोड़ी भीड़ थी, तो आरव मेरे पीछे खड़ा मुझे पकड़ के चलने लगा. मेरे ध्यान में आया की आरव मुझे जानभूझकर हात लगा रहा है. मेरे करीब आ रहा है.

मेने जींस और टॉप पहना था. मेरी गांड पे बार बार अपना लंड टिका रहा था. पूर्णिमा तो मोबाईल से फोटो खींचने में व्यस्त थी.

मुझे भी यही चाहिए था तो में भी जानभूझकर आरव के शरीर को अपना शरीर रगड़ रही थी. एक मौका भी मिला जहा मेने आरव का हात पकड़कर चलते हुए अपने कोमल स्तनों को आरव के हात को घिसने लगी.

हम दोनों एक दसूरे को खुश करने में इतने खो गए थे की ध्यान ही नहीं रहा की पूर्णिमा हमें देख रही है. में आरव का हात पकडे हुए थी, सामने से चलते हुए आ रहे थे तो पूर्णिमाने जिन नजरो से मुझे देखा , में समज गयी के उसको पता चल गया है.

मुझे लगा अब वो ग़ुस्सा करेगी, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. बल्कि उसने मेरी और आरव की फोटो लेनी सुरु की.

जैसे जैसे हम नयी जगह जा रहे थे. एक दूसरे की फोटो खींच रहे थे, पूर्णिमा मुझे और आरव को जानभूझकर करीब ले अति और हमारी फोटो खींचती. एकबार तो पूर्णिमा ने आरव को कहा की माँ को पीछे से पकड़ो, में चौक गयी, आरव ने मुझे कसकर कमर पे पीछे से पकड़ा जैसे बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड पकड़ते है. तब आरव ने अपना लंड मेरी गांड पे टिका के रखा था. सामने पूर्णिमा हमारी फोटो लेने लगी.

मुझे समज नहीं आ रहा था के ये पूर्णिमा में कोनसा बदलवा हो गया.

लेकिन जो भी हो मुझे काफी मजा आ रहा था. आरव के शरीर का स्पर्श मुझे उत्तेजित करने लगा था.

हम पूरा दिन गोवा में घूमे. शाम होते होते आरव पूर्णिमा से ज्यादा मेरे करीब हो गया था. मेरे कंधो पे हात रखकर घूम रहा था.

हम शाम को होटल में वापस आये. सभी थके हुए थे.

आरव भी हमारे ही कमरे में आकर बैठा. में खुर्सी पे बैठी पानी पि रही थी. आरव टीवी लगाकर क्रिकेट मैच देखते हुए बैठ गया.

कुछ देर बाद पूर्णिमा ने कहा के पास में पार्लर है, तो वो पार्लर होकर आती हु.

में सोच में थी के ये मुझे और आरव को अकेले कमरे में छोड़कर क्यूँ जा रही है.

पूर्णिमा कुछ ही देर में निकली, आरव ने जाकर दरवाजा बंद किया.

फिर जैसे ही वो मुड़ा, वो मेरी तरफ अजीब ही नजरो से देखने लगा. में थोड़ी सहम गयी थी. उठकर पानी की बोतल सामने टेबल पे रखने गयी, तो आरव मेरे नजदीक आया और बोला,

आज घूमने में बहोत मजा आया ना.

मेने धीरेसे कहा, हा

फिर वो कहने लगा, गोवा की बात ही कुछ और है, कहते हुए उसने मेरे कंधो पे हात रख दिया. मेरे करीब आकर बाते करने लगा. मुझे डर और उस्साह दोनों एक साथ महसूस हो रहा था.

में पीछे मुड़ी और अपने कमरे की तरफ जा रही थी के आरव का हात जो मेरे कंधो पे था वो धीरेसे नीचे आया. आरव मेरी पीठ को सहलाते हुए कमर तक आ गया.

फिर आरव बोलै, क्या में आपको एक बार गले लगा सकता हु.

मुझे समज नहीं आया में क्या बोलू. में कुछ कहती उसके पहले आरव ने मुझे कसकर गले लगा लिया. आरव के हात मेरी पीठ पर चिपक गए. अह्ह्ह्ह. उफ्फफ्फ्फ़ मेरे स्तन आरव की छाती पे छूने लगे.

मेने भी दोनों हातोंसे से आरव को पकड़ लिया. उसकी पीठ पे हात’रख दिया.

मुझे लगा गले लगाकर मुझे छोड़ देगा. लेकिन आरव ने सीधा मेरी गर्दन पे चुम लिया. उसके होठ गर्दन पे लगते ही मेरे मुँह से निकला. आह्हः अहहह. आरव अह्ह्ह्ह। . और कसकर उसको पकड़ लिया.

मेरी ऐसी आवाज सुनकर आरव और उत्तेजित हो उठा और करकर पकड़कर मेरी गर्दन पे सभी जगह चूमने लगा. आह्हः अहहह.

मेरे कंधो से ड्रेस को सरकाया और कंधो पे चूमने लगा. आहहह. यहाँ तो में पिघल गयी. आअह्ह्ह. मुझे भी मजा आने लगा. आहहहह..

आरव ने फिर चूमते हुए अपने होठ मेरे होठो पे ले आया और हमें एक दसूरे को चुम लिया. अहम उम्म्म्म अम्मम्म मममम अम्मम्म

दोनों पागलो की तरह एक दूसरे को चूमने लगे. होठो को होठ रगड़ने लगे. आरव ने मेरी ड्रेस पीछे से उठाकर अंदर हात ङाल दिया और मेरी पीठ पे अपना हात रगड़ने लगा.

अह्ह्ह्ह. बहोत सालो बाद किसी मर्द का स्पर्श मिला है. आहहह. में तो पागल ही हो गयी थी. देखते ही देखते आरव ने मेरे स्तनों को दबाना सुरु किया. आअह्ह्ह. होठो को चूमते हुए मेरे स्तनों को चूस रहा था. अहहह

मुजसे भी अब रहा नहीं गया और मेने आरव का शर्ट खोल दिया. और उसकी छाती पे में हात घूमने लगी. आअह्ह्ह्हह. आदमी की छाती मुझे बहोत पसंद है. आरव के निप्पल को उंगलियों से रगड़ने लगी… आरव ने फिर मेरा टॉप ऊपर उठा लिया. मेने आरव का शर्ट उतार दिया।

टॉप निकलते ही, मेने अपना ब्रा पीछे से खोल दिया. ब्रा ढीला हुआ वैसे आरव ने ब्रा खींचकर निकल दिया. आह्हः मेरे स्तनों को खला देख आरव ने उसको दबाया और निप्पल को मुँह में लेकर चबाने लगा. अह्ह्ह्ह. मेरे स्तन पूर्णिमा से भी काफी बड़े थे. आरव जोर जोर से मेरे स्तनों को दबाते हुए निप्पल चूसने लगा. निप्पल का आकर भी काफी बड़ा हो चूका था. अह्ह्ह्हह अहहहहह

आरव को मेरे निप्पल चूसते हुए देख मुझे उसपर बहोत ही प्यार आने लगा. में अपने हात आरव की नंगी पीठ पर घुमाते हुए. उसके बालो को सहलाने लगी.

अह्ह्ह आरव अहहहहह उफ्फफ्फ्फ़

निप्पल को चूसते हुए, आरव ने मेरी जींस खोल दी. मेने जींस उतार दी. अब में सिर्फ पैंटी पे खड़ी थी. मेने भी अरवी की जींस के बटन खोल दिए थे. बटन खोलते हुए आरव के अंडरवेर पे मेरा हात लगा. आरव का लंड बड़ा हो चूका था.

निप्पल को चूसने के बाद जब आरव रुका, उसने पहले अपनी जींस उतरी. पीछे खुसी दिखी तो उसपर वो बैठ गया. मेरी तरफ हवस भरी आखो से देखने लगा. मुझे बहोत ही शर्म आने लगी थी.

मेरी नजर आरव की अंडरवेर पर पड़ी. लंड का आकर अंडरवेर पे दिख रहा था. मुजसे राह नहीं गया और आरव के सामने बैठी. उसकी अंडरवेर पकड़ी और खींचकर निचे उतार दी. आअह्ह्ह आरव ला लंड उछल कर सामने आया. आअह्ह्ह्ह. क्या बड़ा लंड था. दाये बाये डोल रहा था.

मेने आरव के लंड को मुठी में पकड़ा और हिलाते हुए सीधा मुँह में ले लिया. आअह्ह्ह्ह. उफ्फ्फ्फ़. बहोत दिनों बाद आज लंड मुँह में आया था. आह्ह्ह्ह. उम्म्म्म अह्ह्ह्ह आरव अह्ह्ह अह्ह्ह.

जैसे जैसे मुँह में लंड जा रहा था मेरे शरीर की गर्मी बढ़ रही थी. आरव आह्हः अहहह. में जोश में लंड को चूसने लगी. बड़ा होने के बावजूद मेने पूरा लंड मुँह में ले लिया। मेरे गले में लंड छू रहा था. अह्ह्ह्ह अहहह.

में पुरे लंड को जबान से चाटने लगी. निचे आरव की गोटिया थी. काफी बड़ी थी. मेने गोटियों को भी चाट लिया. इतने करीब से लंड को देख बहोत ही मजा आ रहा था.

कुछ देर बाद आरव खड़ा हुआ, वो मुझे हात पकड़कर अंदर के कमरे में ले आया. बेड पर सुलाके आरव ने मेरी पैंटी खींच दी. आह्ह्ह्ह. में भी पूरी नंगी हो गयी

मुझे डर था की मेरी चुत देखकर आरव क्या सोचेगा. क्यूंकि पूर्णिमा से काफी बड़ी चुत थी मेरी.

लेकिन जैसे ही आरव ने पैंटी निकली. उसने मैरे पैर फैलाके सीधा मेरी चुत को चाटना सुरु किया. अहहह अहहह. अहःअहः. आरव अपनी जबान को अंदर डाल कर मेरी चुत चाट रहा था. ऊँगली से चुत को रगड़ रहा था. आह्ह्ह्ह.

आरव को चुत चाटते हुए देख लगा के उसे भी मजा आ रहा है. आरव जी जबान चुत के अंदर जब घिसने लगी मेरा शरीर ऐसे तड़पने लगा, जैसे बिजली का करंट लगा हो. अह्ह्ह अहहह. उम्म्म्म अम्मम्म अम्मामा

काफी देर बाद आरव खड़ा हुआ, उसने अपना लंड आगे लिया और बिना कंडोम लगाए मेरी चुत में अपना लंड डाल दिया. में कुछ कहती उसके पहले आरव ने चुदाई सुरु की.

अहह अह्ह्ह। उम्म्म अम्म्म अह्ह्ह्ह. उम्म्म

अह्ह्ह आरव। …

लंड चुत के अंदर घिसने से जो मजा आ रहा था, मेने सोचा जाने दो कंडोम से ये मजा नहीं मिलेगा. मेने आरव को रोका नहीं, उसको कसकर गले लगाकर चुदाई जारी रखी

आह्हः अहःअहः. आरव. अह्ह्ह्ह अहहहह.

काफी देर तक चुत की चुदाई के बाद. आरव पीछे हटा, मेरे स्तनों के ऊपर आकर बैठा और दोनों स्तनों के बिच अपना लंड रगड़ने लगा. मेने भी अपने स्तनों को दोनों हातोंसे से पकड़कर बिच में दबा दिया और लंड के लिए बिच में जगा बना दी. अरवा अपनी कमर आगे पीछे करते हुए लंड को स्तनों के बिच घिसने लगा. यह से आवाज करने लगा. अहहह अहह अह्ह्ह्ह. अम्मम्म

फिर जब रुका, उसने अपने लंड को मेरे मुँह में दे दिया. और झुककर मेरे मुँह को चोदने लगा. मेने भी अपना मुँह खोल दिया और लौड़े को अंदर आने दिया.

आरव इतनी जोर से मेरे मुँह में लंड पटक रहा था के लंड का टोपा मेरे गले में लग रहा था. अह्ह्ह्ह अहहहह अहहह. अहहह उम्मम्मम.

फिर आरव पीछे हटा, उसने मुझे पलट दिया, मेरी गांड पे आरव ने अपना मुँह रखा और चूमने लगा. गांड को दोनों हातोंसे पकड़कर दबाने लगा. गांड के बिच अपना लंड डालकर घिसने लगा.

में सब महसूस कर रही थी. मेरी गांड पूर्णिमा के गांड से दो गुना बड़ी थी. शायद इसलिए आरव को मेरी गांड ज्यादा पसंद आ गयी.

गांड के साथ खेलकर जब तो पीछे गया, उसने कमर पकड़कर मुझे उठाया और घोड़ी बनाकर पिछेसे लौड़े को चुत में धकेल दिया, आहहहह आहहहह. उम्म्म्म

चुदाई फिर से सुरु हुयी. आहहहह आहहह. उम्म्म्म अम्म्मम्म

दोनों भी अभी चिल्लाने लगे. अहहह अहहहह. आरव अहहह अहहहहह यह. उम्म्म्म अम्मम्म

आरव तो जोर जोर से धक्के देते हुए लंड को चुत में पटक रहा था. इतनी जोर जैसे से लंड को पटक रहा था की लंड के घिसने की वजसे मेरी चुत बहोत ही ज्यादा गरम हो चुकी थी. मेरे से वो संभाला नहीं गया और में कुछ ही देर में झड़ गयी. आहहह अहहहहह अहहहह अहहह. चुत ने पानी छोड़ दिया अहहहह

अपने मुँह को बेड] पे दबाते हुए चिल्ला रही थी. अहहहहह…

कुछ देर बाद जब आरव का भी पानी निकलने वाला था, आरव ने लौड़े को झट से पीछे खींचा, मुझे कहा मुँह में लो. में पलटी और लौड़े को मुँह में ले लिया. जैसे लंड मुँह में गया आरव ने के लंड से गरम पानी बरसने लगा. उम्म्म्म. में सारा पानी पि गयी. अहहहह. अह्ह्ह्ह. ाहहम उम्म्म्म.

लौड़े को पूरा पानी छोड़ने तक मुँह में पकडे रखा फिर जब लंड छोटा होने लगा तब मुँह से बाहर निकाला.

आरव बड़ी बड़ी सास ले रहा था.

वो बहोत थक चूका था. वही बीएड पर वो लेट गया. मेने उठकर बेड से निचे उतरी, और बाहर जाकर पहले अपने कपडे पहन लिए. क्यूंकि पूर्णिमा कभी भी आ सकती थी.

वापस आकर देखा तो आरव सो चूका था. आरव को ऐसे नंगा सोते हुए देखना किसी सपने से कम नहीं था. में आरव के नजदीक गयी, और उसके लौड़े को एक बार नजदीक से देखने लगी.

मेरा मन किया एकबार फिर से मुँह में ले लू, तो धीरेसे मेने आरव के लंड को चूमा और होठो से पकड़कर मुँह में ले लिया. कुछ देर मुँह में पकड़कर जबान से अंदर ही उसे चाटने लगी. अहह. आदमी के लंड को चूसने का एक अलग ही मजा है. अह्ह्हम्म्म

फिर में बाहर निकल आयी. कुछ देर बाद आरव भी जग गया, उसने कपडे पहने और वो बाहर चला गया. कहके गया के में अपने कमरे जा रहा हु. पूर्णिमा को बता देना.

मेने ठीक है कहा.

करीब आधे घंटे बाद जब पूर्णिमा आयी, तो में ऐसी बर्ताव कर रही थी के कुछ हुआ ही नहीं.

मेने पूर्णिमा को कुछ पता नहीं चलने दिया.

हम दोनों भी अपने अपने कामो में लगे रहे. पूर्णिमा और आरव रातको गोवा के बिच पे गए थे.

लेकिन जब रातको जब पूर्णिमा वापस आयी, और हम सोने जा रहे थे. मेने पूर्णिमा को कहा लाइट बंद कर देना.

पूर्णिमा ने लाइट बंद की बेड पे आकर मेरे बगल में आकर सोइ और कहने लगी, कंडोम लिया था ना

में चौक गयी. मेने कहा ये क्या कह रही हो.

तो पूर्णिमा मेरी तरफ आयी मुझे पीछे से कसकर पकड़कर मेरे कानो में बोली, कैसा था आरव का लंड

ये बात सुनकर मेरे तो होश हो गए. मेरे मुँह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा था.

पूर्णिमा बोली, में जानभूझकर तुम दोनों को अकेला छोड़कर गयी थी.

मेरे तो होश उड़ रहे थे.

फिर पूर्णिमा बोली, बॉयफ्रेंड मेरा है, लेकिन हम दोनों भी उसका इस्तेमाल करेंगे. उसको पता नहीं चलने देना.

में ये सुनकर अंदर से खुश हो गयी. पलटकर मेने पूर्णिमा को खुसी से गले लगा लिया,

हम दोनों बाते करने लगे. मेने पूर्णिमा को सब बता दिया जो भी हुआ था वो जाने के बाद.

उस दिन के बाद से आरव को हम दोनों ने खुप इस्तेमाल किया.

आरव के साथ एक साल तक पूर्णिमा थी, फिर उसका दूसरा बॉयफ्रैंड बन गया.

अब जब भी पूर्णिमा का बॉयफ्रेंड बनता वो मुझे भी उसके साथ जुड़ा देती, हमें पता था की आदमी को चुत चोदने में बहोत मजा आता है. फिर वो किसी की भी हो.

पूर्णिमा के साथ मुझे भी नए नए लड़को का लंड चूसने मिलने लगा. माँ बेटी की ऐसी दोस्ती ने दोनों का फायदा कर दिया.

4 comments

  1. Manju kanwar

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