हाय दोस्तों, ये कहानी मेरी ज़िंदगी का वो हिस्सा है जो मैं कभी किसी को बताना नहीं चाहता था, लेकिन आज
हिम्मत करके बता रहा हूँ।
नाम है मेरा रोहन, 28 साल का, एक सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब करता हूँ।
ये साजिश शुरू हुई थी मेरी साली प्रिया से वो मेरी बीवी की छोटी बहन, 24 साल की, कॉलेज की स्टूडेंट।
प्रिया उफ्फ, क्या बताऊँ, वो तो आग है। लंबे बाल, कातिलाना फिगर, और वो मुस्कान जो सीधे दिल में तीर
चुभो दे।
लेकिन वो साजिश वो बदला ये सब एक छोटी सी लड़ाई से शुरू हुआ, जो एक उत्तेजक तूफान बन गया।
मैंने उसे चोदा, वो मुझे चोदती रही, और आज भी वो राज़ हमारे बीच है।
चलो, शुरू से सुनो, हर पल को महसूस करो, जैसे मैं महसूस कर रहा हूँ अभी भी।
सब कुछ परफेक्ट था या ऐसा ही लगता था।
मैं और मेरी बीवी नेहा की शादी को दो साल हो चुके थे।
नेहा अच्छी लड़की है, पर जायरे में से एकदम घरेलू, थोड़ी शांत।
मुंबई में हमारा निवास एक छोटे से फ्लैट फ्लैट में।
नेहा के रिश्तेदार लखनऊ के हैं। प्रिया नेहा की छोटी बहन मुंबई कॉलेज के लिए आ गई थी।
वो हमारे फ्लैट के पास ही एक पीजी में रहती थी, लेकिन अक्सर आती-जाती रहती।
प्रिया बिंदास थी, हमेशा हँसती-खेलती, छोटे-छोटे टॉप्स पहनती, कमर दिखाती जींस।
मैं देखता भी था, लेकिन कंट्रोल में रखता। आखिरकार, वो मेरी साली थी।
एक दिन, घर पर झगड़ा हो गया। नेहा की मम्मी-पापा आए थे, और बातें बढ़ीं।
नेहा चाहती थी कि मैं उनके साथ लखनऊ शिफ्ट हो जाऊँ, लेकिन मेरी जॉब मुंबई में थी।
प्रिया ने बीच में बोल दिया, भाभी, जीजा सही कह रहे हैं।
तुम हमेशा घर-घर की बातें करती हो।
नेहा गुस्सा हो गई, तू चुप रह, तू तो अभी बच्ची है।
मैंने बीच में आया, प्रिया, तू भी ज़्यादा बोल रही है।
बस, वो आग लग गई।
प्रिया की आँखें लाल हो गईं, वो चली गई।
लेकिन उसके जाते वक्त, वो मुझे देखकर बोली, जीजा, एक दिन तुझे पछताना पड़ेगा।
उसकी आवाज में कुछ था गुस्सा, या कुछ और?
मैंने हँस दिया, लेकिन मन में एक खटका सा लगा।
उस रात, नेहा सो गई, मैं बालकनी में सिगरेट पी रहा था।
प्रिया का मैसेज आया जीजा, सॉरी अगर बुरा लगा।
लेकिन भाभी हमेशा मुझे दबाती है।
मैंने रिप्लाई किया, कोई बात नहीं। तू हमारी फैमिली है।
वो ऑनलाइन थी, टाइपिंग फिर, जीजा, कल कॉफी पियोगे मेरे साथ?
पीजी के पास एक कैफे है। मैं सोचा, क्यों नहीं, सुलझा लूँ।
नेहा को बताया, वो बोली, ठीक है, लेकिन जल्दी आना।
अगली शाम, मैं प्रिया से मिला।
वो कैफे में बैठी थी, ब्लू टॉप में, जो उसके क्लीवेज को हल्का सा दिखा रहा था।
बाल खुले, होंठों पर ग्लॉस। जीजा, आ गए?
वो मुस्कुराई, लेकिन आँखों में शरारत।
हम कॉफी ऑर्डर की, बातें शुरू हुईं।
प्रिया ने बताया, कॉलेज में बॉयफ्रेंड था, लेकिन ब्रेकअप हो गया।
लड़के सब बकवास होते हैं जीजा।
तुम जैसे नहीं। मैं हँसा, मैं तो बूढ़ा हो गया।
वो मेरी ओर झुकी, नहीं जीजा, तुम तो फिट हो।
जिम जाते हो ना? उसकी नजरें मेरी आर्म्स पर।
कॉफी पीते हुए, उसका पैर मेरे पैर से छुआ।
गलती? या जानबूझकर? मैंने हटाया, लेकिन दिल धड़का।
बातें गहरी हुईं। प्रिया बोली, जीजा, भाभी लकी है।
तुम इतने केयरिंग हो। मैंने नेहा की तारीफ की, लेकिन प्रिया ने कहा,
हाँ, लेकिन कभी-कभी लगता है, वो तुम्हें वैल्यू नहीं देती।
उसकी उँगली टेबल पर मेरी उँगली से छुई।
एक करंट सा लगा। कैफे से निकलते वक्त, वो बोली, जीजा, वॉक करें? पास में पार्क है।
हम गए। पार्क में, शाम ढल रही थी। प्रिया अचानक रुकी, जीजा, वो दिन सॉरी।
लेकिन सच तो है ना? मैंने सिर हिलाया।
वो करीब आई, तुम्हें पता है, मैं तुम्हें हमेशा पसंद करती थी।
उसके होंठ करीब। मैं पीछे हटा, प्रिया, ये लेकिन वो हँसी, मज़ाक कर रही थी जीजा।
लेकिन उसकी आँखें कुछ और कह रही थीं। घर लौटते वक्त, मन बेचैन था।
प्रिया की साजिश क्या ये शुरुआत थी?
कुछ दिन बीत गए। प्रिया रोज मैसेज करती जीजा, आज क्या खाया?
या कॉफी मिस कर रही हूँ। नेहा नोटिस नहीं करती।
एक रात, नेहा के मम्मी-पापा का फोन आया, नेहा रोने लगी।
मैं कंसोल कर रहा था। प्रिया का मैसेज – जीजा, भाभी रो रही है? मैं आऊँ?
मैंने हाँ कहा। प्रिया आई, नेहा को गले लगाया। रात गहरी हो गई, नेहा सो गई।
प्रिया बोली, जीजा, मैं थोड़ी देर रुकूँ?
डर लग रहा है अकेले पीजी जाने में।
मैंने सोफे पर जगह दी। लेकिन वो उठी, जीजा, पानी लाओ ना।
किचन में, वो पीछे से आई, जीजा, वो दिन पार्क में मज़ाक नहीं था।
उसके हाथ मेरी कमर पर। मैं मुड़ा, वो करीब।
प्रिया, रुक लेकिन उसके होंठ मेरे होंठों पर। गर्म, नरम, जैसे आग।
मैंने धक्का दिया, लेकिन कमजोर।
वो फुसफुसाई, जीजा, एक बार बस।
उसके हाथ मेरी शर्ट में, छाती सहलाई।
मेरा लंड कड़ा हो गया। प्रिया, नेहा सो रही है।
लेकिन वो घुटनों पर बैठ गई, मेरी पैंट खोली।
लंड बाहर कड़ा, लंबा।
वो चूसी, जीभ से खेली। उम्म जीजा, कितना बड़ा।
भाभी लकी है। मैं कराहा, हाथ उसके बालों में।
वो चूसती रही, गहराई तक। मैं झड़ने वाला था। प्रिया अंदर वो निगल गई।
फिर उठी, ये बदला है जीजा। अब तेरा नंबर।
वो चली गई, लेकिन रात भर नींद नहीं आई। साजिश ये तो शुरुआत थी।
अगले दिन, नेहा ऑफिस गई।
प्रिया का मैसेज जीजा, आ जाओ मेरे पीजी।
नेहा को बोलो मीटिंग है।
मैं गया। दरवाजा खोला, प्रिया नंगी सिर्फ लॉन्जरी में।
जीजा, आ गए बदला लेने?
वो मुझे बिस्तर पर धकेला। मैंने विरोध किया, लेकिन वो ऊपर चढ़ गई।
उसके स्तन मेरे मुँह पर। मैं चूसे, काटा। आह जीजा हाँ। उसके निप्पल कड़े।
हाथ नीचे, मेरी पैंट खोली, लंड पकड़ा। कितना हार्ड।
वो ऊपर बैठी, चूत पर रगड़ी। गीली, गर्म। जीजा, डालो।
मैंने धक्का दिया। अंदर। टाइट, जैसे पहली बार।
प्रिया चिल्लाई, ओह फक जीजा, जोर से।
वो सवार हुई, ऊपर-नीचे। उसके बाल लहराते, स्तन उछलते।
मैंने कमर पकड़ी, नीचे से धक्के। प्रिया तू रंडी है।
वो हँसी, हाँ जीजा, तेरी रंडी। भाभी को बोलना, साली ने चोदा।
कमरा चीखों से गूँजा। मैंने झड़ा अंदर।
वो काँपी, कमिंग जीजा। हम लेटे रहे, पसीने से भीगे।
ये साजिश है प्रिया। वो बोली, हाँ, लेकिन मजा आया ना?
उसके बाद, रोज मिलते। कभी पार्किंग में कार में, कभी उसके पीजी में।
एक बार, डॉगी में चोदा उसकी गांड ऊपर, मैं पीछे से।
हार्डर जीजा फाड़ दो। गांड में ट्राई किया, दर्द से चीखी, लेकिन बोली, जारी रखो।
बदला ये तो लत बन गया।
महीने बीत गए। नेहा को शक हुआ। रोहन, तू बदल गया है।
प्रिया मैसेज जीजा, आज रात मेरे पास।
मैं गया। वो बेड पर, टॉय के साथ। जीजा, आज नया ट्राई करें।
बंधा मुझे, चाबुक से मारा हल्के से। दर्द में मजा। फिर चोदा, जंगली।
लेकिन डर था। एक दिन, नेहा ने फोन चेक किया।
मैसेज देखे। प्रिया? ये क्या?
घर में तूफान। नेहा रोई, तू मेरी बहन को?
प्रिया आई, भाभी, ये साजिश थी।
लेकिन अब प्यार है। नेहा चली गई मायके।
परिवार टूटा। मम्मी-पापा गुस्सा।
लेकिन प्रिया बोली, जीजा, मैं तेरे बिना नहीं रह सकती।
हम साथ रहे। नेहा ने माफ किया, लेकिन दूरी बनी।
प्रिया और मैं रोज चोदते। साजिश बदला बन गई, प्यार।
आज हम साथ हैं, प्रिया मेरी लाइफ पार्टनर।
नेहा खुश है अपनी लाइफ में।
साजिश ने हमें जोड़ा। रातें अभी भी आग की।
जीजा, चोदो मुझे। मैं चोदता हूँ, जोर से। दोस्तों, बदला कभी खत्म नहीं होता, बस रूप बदल जाता है।
ये हमारी कहानी साजिश, बदला, और अनंत उत्तेजना।
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