दोस्त के छोटे भाई का लंड मुँह में लिया
नमिका और में कॉलेज में दोस्त बने. मेरा नाम गिरिजा है. नमिका के पिता नहीं है. वो जब छोटी थी तभी नमिका के पापा ने दूसरी शादी कर ली थी. तबसे नमिका, उसकी माँ और छोटा भाई तीनो अलग रहते थे. उनका घर काफी बड़ा था. एक बड़ी कोठी थी.
जब भी कॉलेज जल्दी ख़तम होता था, में नमिका के साथ उसके घर चली आती थी. उसकी माँ सुभह ही काम पे चली जाती. घरमे सिर्फ में, नमिका और उसका छोटा भाई राजेश जो अभी स्कूल में पढता था, हम तीनो ही रहते।
धीरे धीरे मेरी दोस्ती नमिका के छोटे भाई से होने लगी. वो बहोत ही बत्तमीज किसम का लड़का था. नमिका और मुजसे बहोत बार बत्तमीजी से बाते करता. कोई टोकने वाला नहीं तो ज्यादा ही बोलने लगा था. फिर भी जब हम घरमे रहते, साथ में कभी टीवी पे गेम खेलते. हमारी तीनो के बिच काफी मस्ती मजाक भी चलता।
जब भी राजेश बत्तमीजी करता, नमिका और में राजेश की बहोत पिटाई करते।
एक दिन ऐसे ही नमिका और में घर आये. नमिका कपडे बदलने के लिए बाथरूम में चली गयी. तभी राजेश अचानक से पीछे से आया और मुझे कसकर पकड़कर उठाने लगा.
में उसको चिल्लाई. उसकी पिटाई भी की. कमीने को पिटाई का कोई फरक नहीं पड़ता. राजेश की उचाई मेरे से थोड़ी ही कम थी.
उस दिन के बाद राजेश का मेरे करीब आना जारी रहा. बार बार वो मुझे छूता, मेरे करीब आने की कोशिश करता. एक बार तो मस्ती मस्ती में उसने अपना हात मेरे स्तनों पे रगड़ दिया। ऐसे बर्ताव करने लगा जैसे गलती से लग गया.
एक दिन राजेश टीवी पे गेम खेलते हुए बैठा था. नमिका घर के काम कर रही थी. तो में राजेश के बगल में जाकर बैठी और उसे गेम खेलते हुए देखने लगी.
कुछ देर बार मेने देखा. राजेश गेम खेलते हुए बार बार अपने लंड को हात लगा रहा है. और लंड को हात लगते हुए मेरी तरफ तिरछी नजर से देख भी रहा है. दो तीन बार उसने ऐसा किया. तो में समज गयी के राजेश मुझे अपने लंड की तरफ आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है.
मेने ग़ुस्से से राजेश की तरफ देखा, और धीरेसे उसके गाल पे थप्पड़ जड़ दिया और में उठकर चली गयी.
लेकिन जब दो दिन बाद में फिरसे नमिका के घर आयी, राजेश कमीना मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था. कमीनो को उस दिन थप्पड़ मारा तो भी सुधरा नहीं।
कुछ देर बाद जब नमिका अंदर चली गयी,
मेने सोचा आज कमीना क्या करता है देखती हु.
में फिर से राजेश के बगल में जाकर बैठी. वो आज भी टीवी पे गेम लगाकर खेल रहा था. राजेश हमेशा टीशर्ट और शार्ट पैंट पहनता था. उस पैंट में उसकी जांग हमेशा दिखती रहती थी.
मुझे देखकर राजेश मुस्कुराने लगा. मेने भी मुस्कुराते हुए उसे फिर से धीरेसे थप्पड़ मारा, फिर वो मुस्कुराने लगा. और दो तीन बार मेने धीरेसे थप्पड़ मारा, और आखिरी बार थप्पड़ मारते हुए मेने अपना हात सीधा उसके लंड पे रखकर उसका लंड दबा दिया.
मेरा हात लंड पे लगते ही राजेश भी चौक गया. लंड दबाकर में उठकर चली गयी. मुझे उसे ललचाये रखना था.
उस दिन के बाद में सीधा ३ दिन के बाद नमिका के घर आयी. राजेश मुझे देखकर खुश हुआ. जैसे ही नमिका अंदर चली गयी. कमीना मेरे बगल में आकर बैठा और कहने लगा, उस दिन की तरह करो ना. बहोत मजा आया था.
राजेश की बात सुनकर और उसका मासूम सा मुँह देखकर मुझे हसी आ गयी. मेने प्यार से उसके गाल सहलाये. नमिका के रूम के दरवाजे की तरफ देखते हुए मेने धीरेसे राजेश की शॉर्ट पैंट की तरफ देखा. उसकी जांग पे हात रखा और जांग को सहलाते हुए धीरेसे मेने अपना हात ऊपर उठाते हुए राजेश की पेंट के ऊपर से ही उसका लंड दबा दिया.
अह्ह्ह्ह. मुझे भी अजीब सा महसूस हो रहा था. जैसे जैसे में लंड को दबाने लगी. राजेश ला लंड बड़ा होने लगा. में प्यार से दबाये जा रही थी. राजेश की शकल पे भी एक मदहोशी छायी थी. वो भी धीरेसे आह्हः की आवाज करते उसने अपने पैर फैला दिए
कुछ ही देर में मुझे एसास हुआ की राजेश का लंड काफी लम्बा है. मेने आशा नहीं की थी के लंड इतना बड़ा हो सकता है. में पेंट के ऊपर से राजेश का लंड दबाते हुए उसकी लम्बाई नापने लगी.
अह्ह्ह. काफी लम्बा है राजेश का लंड. राजेश के लंड को दबाते हुए मेरी भी चुत में खुजली होने लगी. मेरी भी चुत जाग गयी. मेरे निप्पल तन गए. राजेश के लंड को हात लगाने में बहोत मजा आ रहा था.
में राजेश के लंड को दबाने में इतनी मग्न हो गयी के भूल ही गयी नमिका को भी देखना है.
नमिका दरवाजा खोलकर बाहर आयी और वो सीधा किचेन में चली गयी. में डर गयी और तुरंत अपना हात पीछे खींच लिया. उठकर राजेश से दूर चली गयी.
नसीब अच्छा था के नमिका ने हमें देखा नहीं।
कुछ देर में दूर खड़ी रहकर अपनी कॉलेज की बैग से कुछ ढूंढने का नाटक करने लगी. नमिका किचेन से निकली।
आकर मुझे बोली. पास में एक आंटी है, उनको में कपडे सीने के लिए देकर आयी थी. उनसे में कपडे लेकर आती हु. तुम भी चलोगी. तो मेने कहा, नहीं तुम जाकर आजायो.
तो नमिका ने कहा ठीक है. में आती हु तुम यहाँ पे ही रुको.
जैसे ही नमिका जाने के लिए निकली, राजेश पीछे मुड़कर मेरी तरफ देखने लगा. हमारी आँखे मिली. दोनों के चेहरे पे एक प्रकारकी ख़ुशी थी.
जैसे ही नमिका घर से बाहर निकली, मेने अंदर से दरवाजा बंद किया.
राजेश को मेने आखो से इशारा किया ऊपर चलो.
हम दोनों तुरंत ऊपर आये. राजेश के कमरे में चले गए. अंदर आते ही. दोनों भी एक दूसरे की तरफ देखते हुए.
राजेश ने मेरी तरफ देखते हुए अपने लौड़े पे हात लगाया। मेरी नजर उसके इशारे पे पड़ी और मुजसे रहा नहीं गया.
में झट से राजेश के करीब आयी और राजेश को कसकर गले लगा लिया. अह्ह्ह। अह्ह्ह. मेरी जवानी उफान मारने लगी.
राजेश ने भी मुझे कसकर पकड़ा. उसका मुँह मेरे स्तनों के बिच दबने लगे. राजेश मेरे मुलायम स्तनों के ऊपर अपना मुँह दबाने लगा.
फिर मेने राजेश का मुँह दोनों हातो से पकड़ा और उसके होठो पे चूमने लगी. अह्ह्ह उम्म्म्म मममम मममम
राजेश भी मुझे चूमते हुए उत्तेजित हो उठा और उसने मेरे दोनों स्तनों को जोर जोर से दबाना सुरु किया. अह्ह्ह्ह अहःअहः. अहहह.
उसकी स्तनों को दबाने वाली हरकत ने मुझे पागल कर दिया. में भी उसे पागलो की तरह चूमने लगी.
अह्ह्ह. उम्म्म्म अम्मम्म अम्म्म उम्म्म अम्मम्म ामममम
अम्मम्म ाम्म्म उफ्फ्फ्मफमम
चूमते हुए मेने राजेश की टीशर्ट उतार दी. उसके नंगे बदन पे अपना हात घुमाने लगी. आह्हः. राजेश का शरीर भी काफी गरम हो चूका था.
हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं था. नमिका का कभी भी आ सकती थी.
तो मेने अपना पहना हुआ कुर्ता ऊपर उठाया, अपनी ब्रा को ऊपर खींचा और स्तनों को बाहर निकाल के राजेश के सामने रख दिए. राजेश ने जैसे ही स्तनों को देखा वो पागल ही हो गया. उसने सीधा निप्पल को मुँह में लिया और स्तनों को दबाते हुए चूसने लगा.
अह्ह्ह अहहह यह. उम्म्म राजेश अपना मुँह मेरे स्तनों पे रगड़ते हुए निप्पल चूस रहा था. मेरे गोरे स्तन, तने हुए निप्पल देखकर राजेश को बहोत ही मजा आ रहा था. वो चूसते हुए मेरे निप्पल को काटने लगा.
अहहहह अहहह. उम्म्म्म. अह्ह्ह निप्पल को मुँह में पकड़कर खींचने लगा. अहहहहह। .. अहहहह.
मुझे काफी दर्द हो रहा था तो मेने राजेश को थप्पड़ जड़ दिया. कमीना मेरे स्तनों को भी काटने लगा.
किसी तरह मेने अपने आप को उससे छुड़वाया। मेरे शरीर की गर्मी बढ़ चुकी थी.
में राजेश के छाती पे चूमते हुए निचे बैठने लगी.
राजेश के सामने घुटने पे बैठी. और राजेश की पेंट पकड़कर निचे खींच दी. राजेश की पैंट उतारते ही राजेश मेरे सामने पूरा नंगा खड़ा था.
राजेश का लंड जब मेरे सामने आया में चौक गयी. राजेश का लंड एक बड़े आदमी के लंड की तरह लम्बा और मोटा था.
मेने मुठी में लंड को पकड़ा तो पता चला की लंड इतना बड़ा है के दोनों हातो से पकड़ना पड़ रहा है.
मेने दोनों हातो से राजेश का लंड पकड़ा और जोर से हिलने लगी. अह्ह्ह्ह. अहह. राजेश भी सिसकने की आवाज करने लगा. आह्ह्ह्ह…
काफी मजा आ रहा था लंड को हिलाने में, अह्ह्ह्ह
लंड को हिलाते हुए लंड के आगे से गुलाबी फूल बाहर आने लगा. उस गुलाबी फूल को देखकर मेरा मन और मचलने लगा. मेने धीरेसे अपना मुँह आगे किया और लंड के गुलाबी फूल को चाटने लगी. अह्ह्ह. उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह चिप चीपा पानी निकल रहा था. मेने जबान गुलाबी फूल पे रगड़कर पूरा लंड चाटना सुरु किया. अह्ह्ह्ह। उम्म्म्म अम्मम्म अम्मम्म
आअह्ह्ह।।। मेने लंड को पूरा मुँह में लिया और चूसने लगी. अह्ह्ह अहहह. अहहह. अहहह. उम्म्म्म मममम
लंड चूसते हुए मेरे शरीर की गर्मी चर्म सिमा पे पहोच गयी. अह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह। .. काफी बड़ा लंड मिला है. अह्ह्ह्ह अहहह. उम्म्म्म
काफी देर मेने लंड को चूसा.
फिर में उठी, बगल में बेड था. में उसपर लेटी। राजेश मेरे ऊपर आया और मुझे होठो से चूमते हुए निचे जाने लगा. मेरी नाभि पे चूमते हुए अपने हात मेरे शरीर पे रगड़ते हुए मेरी चुत की तरफ मुड़ा।
जैसे ही राजेश ने मेरा पजामा उतारा, मेरे शरीर में अजीब सी थरथराहट होने लगी. राजेश ने मेरा पजामा पूरा उतार दिया.
मेरी चुत को मेने पैरो को समेट कर ढक दिया. राजेश वही रुका नहीं. उसने मेरे पैर फैलाये और मेरी चुत को चाटने लगा. आह्ह्ह्ह… अहहह. राजेश को चुत चाटते हुए देख लग रहा था, की उसको सब पता है.
में उसको देखकर दंग रह गयी. अह्ह्ह्ह. बड़े प्यार से मेरी चुत में जबान अंदर तक डालकर चाट रहा था. अह्ह्ह अहहह. उफ्फफ्फ्फ़.
अह्ह्ह .. अह्ह्ह्ह. यही आनंद लेने में मजा आता है. अह्ह्ह्ह अहहह
फिर राजेश ने मेरी चुत में अपनी ऊँगली डाली और जोर जोर से अंदर रगड़ते हुए चुत को चाट रहा था.
काफी देर मेरी चुत को चाटने के बाद राजेश ने मेरी चुत की तरफ अपना लंड लिया, और धीरेसे चुत में डालने लगा.
फिर से में चौक गयी, राजेश को ये भी पता था की लंड कहा डालना है. जैसे ही उसने जोर से धक्का देते हुए लंड को मेरी चुत में धकेला आअह्ह्ह्ह… चुत खुल गयी.
राजेश ने लंड को पूरा अंदर तक डाला और जोर जोर से मुझे चोदने लगा. अह्ह्ह अहहह अह्ह्ह हः. उफ्फ्फ. उफ्फ्फ्फफ्म उम्म्म्म आए राजेश अह्ह्ह अहा
वो भी आह भरते हुए मुझे पुरे जोश में चोदे जा रहा था. अह्ह्ह्ह अहहह. चुत में घिसता हुआ लंड मेरी चुत को एक अनोखा आनंद दे रहा था. मेरे शरीर में बिजली दौड़ने लगी. अहहह हहह
दोनों भी चुदाई का भरपूर आनंद ले रहे थे. अह्ह्ह अहहह.
तभी अचानक हमें बाहर किसी औरत की बाते करने की आवाज सुनाई दी. हमें लगा की नमिका को तो नहीं आयी. मै डर के मारे राजेश को दूर करके उठकर सीधा पास की खिड़की के पास चली गयी. खिड़की थोड़ी सी खोलके बाहर देखने लगी. वहा से घर के सामने का रास्ता दिख रहा था.
मेने बाहर देखा तो कोई और ही औरते थी जो रस्ते पे खड़ी बाते कर रही थी.
में यहाँ निचे से पूरी नंगी खड़ी, ऊपर कुरता पहना।
में बाहर झांक रही थी तभी राजेश पीछे से आया और मेरा कुरता उठाकर मेरी बड़ी गोरी गांड को दबाने लगा. आह्ह्ह्ह. अहह. उम्म्म्म.
राजेश दोनों हातो से मेरी गांड दबा रहा था. फिर उसने मेरी गांड की दरार में अपना लंड दबाया. और गांड में लंड को पटकने लगा. अह्हह्ह्ह्ह
मेने राजेश को कहा. रुक जा देखने दे. नमिका तो नहीं आयी. लेकिन वो मेरी बात सुने तो.
उसने अपना खेल जारी रखा. मेरी गांड की दरार में अपना खड़ा लंड घिसने लगा. अह्ह्ह्ह आअह्हह्ह.. अह्ह्ह. उफ्फ्फ.
फिर राजेश ने मेरी कमर को पीछे खींच, मुझे झुका दिया. में बंद खिड़की के पास झुककर खड़ी होकर, खिड़की की दरार से बाहर झाकती हुई.
पीछे राजेश ने अपना लंड मेरी चुत में डाला. और अंदर तक लंड को घुसेड़ के फिर से चोदने लगा हहहहह अहहह. अहहहह अह्ह्ह्ह
राजेश अह्ह्ह्हह.. मेरी कमर को कसकर पकड़के चुदाई होने लगी. अह्ह्ह्ह अहःअहः. राजेश की जांग मेरी कोमल गांड पे ऐसे पटक रही थी के गांड पे कोई चपेट मार रहा है ऐसी आवाज आने लगी. पूरा कमरा चपेट की आवाज से गूंज रहा था. अहहह अहहह अहहह
अहहह. राजेश बड़ी बेहरमी से चुत में लंड घुसेड़ रहा था. मेरी चुत से ज्यादा देर सहा नहीं गया और चुत झड़ गयी. अह्ह्ह अहहहह यह. उफ्फ्फ्फ़. आह्हः
चुत के पानी में लंड अंदर घिसते जा रहा था. अह्ह्ह अहहह. उफ्फ्फ्फ़. उफ्फ्फ. हम्म्म्म
कुछ देर बाद राजेश चिल्लाया, दीदी पानी आह्ह्ह्ह क्या करू….
मेने उसको कहा मुझे मुँह में दे दे. और उसने अपना लंड चुत से बाहर खींचा, में तुरंत पलटी, और निचे घुटनो पे बैठे लंड को मुँह में लिया. चूसना सुरु किया ही था के लंड से पानी की बौछार होने लगी. आह्हः अहहह उम्म्म अह्ह्ह्ह अहहहह
पूरा गरम पानी जो लंड से मेरे मुँह में आया था सारा में पि गई. काफी देर पानी निकलता रहा, निचे मेरी चुत भी पानी टपका रही थी.
बादमे दोनों की भी आत्मा शांत हुई. हम दोनों ने तुरंत कपडे पहने इसके पहले के नमिका आ जाये।
हम दोनों फिर से निचे आकर बैठे. कुछ देर बाद नमिका आयी.
दोनों ऐसे बर्ताव कर रहे थे जैसे कुछ हुआ ही नहीं. नमिका मुजसे बाते करने लगी. में अपनी गीली चुत लेकर किसी तरह नमिका की बाते सुन रही थी.
फिर में घर चली गयी.
उस दिन के बाद राजेश और मेने काफी बार उसके घर में चुदाई की है. अगर चुदाई नहीं भी करने मिली तो जब भी में घर आती, राजेश के पैंट में हात डालकर लंड को हात तो जरूर लगाती
मेने और राजेश ने इस बात की किसी को कानोकान खबर नहीं होने दी
कैसी लगी हमारी कहानी जरूर कमेंट करके बताना
One comment
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