मेरा नाम राज कुमार है. प्यार से लोग मुझे राज कहते है. कुछ दिनों पहले की बात है. मेरे चाचा ने मुझे फोन किया. में कॉलेज से घर ही आ रहा था. उन्होंने फोन पे बताया की उन्हें कुछ काम से गांव जाना है तो में उनकी दुकान सँभालु. चाचा की में कोई बात नहीं टालता था तो तुरंत हा कर दिया.
दूसरे ही दिन से में दुकान पे बैठने लगा. चाचा की मोबाइल फोन कवर की दुकान थी. छोटीसी दुकान सड़क को लगकर थी. बगल में एसबीआई की बैंक थी. और कोई भी दुकान नहीं थी. दुकान में जगह भी ज्यादा नहीं थी. दो लोग जमीं पर सो सकते है इतनी ही जगह थी. लेकिन दुकान को अछि तरह टाइल्स लगाकर बनाया था. पूरी दुकान में मोबाइल के कवर, चार्जर, हेडफोन ऐसे साडी चीजे लगाकर राखी थी. सामने की तरफ काउंटर था उसके अंदर भी मोबिअल के कवर और बहोत सारि चीजे लगाकर राखी थी. इस वजसे दुकान भरी भरी लगती थी. काउंटर इतना बड़ा था की मेरी कमर तक आता था. इस वजसे दूर से बहार से अंदर देखना मुमकिन नहीं था.
वैसे ज्यादा कस्टमर दिन में नहीं रहते थे. दुपहर १२ बजेसे शामको ५ बजे तक तो कोई भी नहीं आता था. दोपहरको या मोबाईल पे गेम खेलो या गर्लफ्रेंड उर्मिला से बात करो. किसी तरह २ दिन मेने निकल दिए.
तीसरे दिन मेने अपनी उर्मिला से बात करते हुए कहा की दुकान पे दुपहर को आयो. यहाँ बैठ कर बाते करते है. दूपहको वैसे कोई नहीं होता दुकान पे. उसका घर दुकान से करीब आधा घंटा दूर था. तो उर्मिला ने कहा में दुपहर को १ बजे अति हु. तो मेने हा कर दिया.
उर्मिला मिलने आ रही है इसलिए में बहोत खुश था. बहोत दिनोसे उर्मिला को चोदा नहीं था. मुझे उसके बड़े बड़े मम्मो की बहोत याद आ रही थी. उसके मम्मो को दबाने का जो मजा है. वो मनो मेरे लिए टेंशन दूर करनेका जरिया बन गया है. कुछ देर दोनों मम्मो को दबाओ तो सारा टेंशन दूर हो जाता है.
धीरे धीरे वक्त आगे बढ़ते गया. उस दौरान कुछ कस्टमर आये भी. थोड़ी बहोत खरीदारी हुई भी. लेकिन मेरा ध्यान आज सिर्फ उर्मिला पे था. करीब डेड बजे उर्मिला दुकान पर पहोची. उसे मेने अंदर आने को कहा. अंदर सिर्फ दो टेबल थे. मेने एक उसे दिया बैठने के लिए. दोनों के चेहरे पर ख़ुशी थी.
वो थोड़ी शर्मा रही थी. चारोतरफ की चीजे देख उर्मिला बोली, बहोत अछि दुकान है. छोटी है लेकिन काफी सामान भरा है.
तो मेने हां, चाचा सँभालते हे. उनके पापा ने ली थी. वो पहले चलते थे.
हमारी बाते सुरु हुई. बातो बातो में मेने उसका हात पकड़ लिया. उसके कोमल हातो को सहलाते हुए उसके पुरे बदन को ऊपर से टटोल रहा था. वो भूरे रंग की सलवार कमीज पहनकर आयी थी. अपने मम्मो को ओढ़नी से ढक्कर बैठी थी. ओढ़नी की वजसे मुझे उसस्के मम्मो को देखने में परेशानी हो रही थी. उर्मिला को कुछ देर बाद जब पता चला की मेरी नजर उसके मम्मो पर ही घूम रही है.
तो उसने एक अछि गर्लफ्रेंड की तरह खुद ही अपनी ओढ़नी उतर के पास में रखे अपने बैग पर रख दी. ओढ़नी हटते ही मुझे उसके दोनों मम्मो अछि तरह दिखने लगे. बात करते समय उर्मिला थोड़ी झुककर बैठी थी तो ऊपर से में अंदर तक देख प् रहा था.
इतने पास बैठी खूबसूरत उर्मिला की आँखे, गुलाबी होठ और बड़ेबड़े मम्मो को देखकर मेरा लंड पैंट के अंदर खड़ा हो गया. मेने धीरेसे अपने हातोंमे पकडे उर्मिला के हात को अपने लंड पर दबा दिया. उर्मिलाने शरमाते हुए मुझे देखा लेकिन बिना कुछ कहे बाते करते करते उसने मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही दबाना सुरु किया। अहह। .अहहहह ,,,, उफ्फ्फ्फ़ आअह्ह्ह
उसका दबाना सुरु हुआ और यहाँ मेरे दूसरा हात मेने उसकी पीठ पर रखा और ऊपर से निचे हात को उर्मिला की पीठ पर घूमते हुए कोमल शरीर का आनंद लेने लगा. अह्ह्ह. उर्मिला। अहहह अहहहहह.. मेरे बढ़ती हुए हलचल को देखकर उर्मिलने जोर से मेरे लंड को दबाना सुरु किया.
मेरा शरीर तपने लगा. मेने दाए हात से उर्मिला के मम्मो को दबाना सुरु किया. जोर जोर से मम्मो को दबाने लगा. एक हात उसकी पीठ पर घूमते हुए दूसरे हात से मम्मो को दबा रहा था. अह्ह्ह. दोनों मम्मो का कोमल स्पर्श मन को शांति देने वाला था. दबाते हुए मेने अपने मुँह को उसकी तरफ किया और दोनों एक दूसरे को चूमने लगे. होठो को होठ मिलकर चूमना सुरु किया. मम्मो को दबाते हुए में और करीब आ गया.
एक डर था की कोई बहार से देख लेगा. लेकिन दोनों के अंदर अब इतनी हवस भर गयी थी के एक दूसरे को दूर करना नामुमकिन्स सा हो गया था. दोनों एक नजर बहार की और रखते हुए चुम रहे थे. मेरा धीरेसे मेने उर्मिला के कमीज के अंदर डाल दिया और अंदर से ब्रा को दबाकर मम्मो से खेलने लगा. उर्मिला को भी पता था की मुझे उसके मम्मो को दबाना चूसना बहोत पसंद है. उसने मेरी ख्व्याइश पूरी करने केलिए, धीरेसे अपना कमीज ऊपर उठाया और ब्रा के निचेसे मम्मो को बहार निकालकार मुझे चूचियों को चूसने दे दिया. आअह्ह्ह्ह.. उम्म्म उम्म्म्म
दुकान का बाहर का काउंटर उचा था तो बाहर से किसी को कुछ दिखेगा नहीं ये हमें पता था. मेने अपना मुँह झुककर दोनों चूचियों को बारी बारी चूसना सुरु किया। मम्मो को दबा दबाकर उर्मिला का दूध पि रहा था. उम्म्म आअह्ह्ह अहहह… अहहहह उम्म्म्म। .. उर्मिला भी सिसकने लगी. उसके भी मुँह से अहहह की आवाजे आने लगी.
में मम्मो को चूसने में मग्न था तभी अचानक उर्मिला ने मुझे पीछे हटने को कहा. हडबडात में उसने अपना कमीज निचे किया और डरते हुए वो काउंटर के निचे बैठ गयी. मेने बहार की तरफ देखा तो एक अंकल दुकान की तरफ आ रहे थे. में तुरंत उठकर खड़ा हुआ. अंकल आये और बोले मुझे मोबाईल का कवर चाहिए।
मेने ठीक है कहा और कुछ कवर निकल के काउंटर पर रखे. मेरे पैरो के पास ही उर्मिला बैठी थी. उसके मम्मी अभी भी बहार ही थे. चूचिया मुझे दिख रही थी. में यहाँ अंकल से बात कर रहा था. वह निचे उर्मिला की मस्ती सुरु हो गयी. वो मेरे पैंट के ऊपर से लंड को दबाने लगी. पहले से ही मेरा लड़ तना हुआ था. उसपर ये और उसे ललचा रही थी.
अंकल ने मुझे पूछा, ये मोबाईल कवर को खोलके देख देखसकता हु. तो मेने तुरंत कहा, है खोलकर देखो। एकदम कड़क माल है.
उर्मिला को मेरा इशारा समझ आया. उसने मेरी पैंट खोली और उसने लंड को बाहर निकाला, मे दोनों पर फैलाकर अपने लंड को निचे बैठी उर्मिला के मुँह पे एकदम नजदीक ले गया. यहाँ अंकल को कवर दिखते हुए में उर्मिलाकि निचे से होने वाली हरकतों का आनद ले रहा था. उर्मिलाने लंड को कसकर मुठी में पकड़कर हिलाना सुरु किया. आह। .. आह्हः मेरे शरीर में बिजली दौड़ने लगी. अहहह.
यहाँ अंकल भाव तोल पे आने लगे. मेने कहा अंकल सस्ता है ले लो. ये कही पे भी नहीं मिलेगा. तभी अचानक से उर्मिलने लंड को सीधा मुँह में ले लिया। आहाहा। … लंड जैसे ही उर्मिला के मुँह में गया, मेरे आखो के सामने मनो अँधेरा सा छा गया. उर्मिला अपनी जबान लौड़े पे गोल गोल घुमाकर चाटने लगी. वह अंकल सो रुपये पे अटके थे. मेने उनको कहा ठीक है अंकल ले लो.
अंकल ने पैसे निकले और मेरे हाथ में थमा दिए. मेरे हात कप कापरहे थे. अंकल भी मेरे हतोको देख मुझे शक की नजर से देखने लगे. जैसे ही वो चले गए. मुझसे रहा नहीं गया. और मेने दोनों निचे लिए, उर्मिलाका सर दोनों हातोंसे पकड़ा और पच….. पच। ……. पच…… उसके मुँह को चोदना सुरु किया. मेरे अंदर मानो जानवर आ गया था. उर्मिला के मुँह के अंदर लौड़े को ऐसे डाल रहा था जैसे वो उसका मुँह नहीं कोई गड्ढा मिल गया है.
तना हुआ लंड पूरा अंदर तक जा रहा था. उर्मिला के मुँह की थूक से पूरा लंड गिला हो चूका था. अहहह ाहः. उम्म्म अहहहह.. आहाहा
काफी देर बाद में रुका। मेरा लंड उर्मिला की थूक से पूरा गिला होकर लाल टपकाते हुए खड़ा था.
मेने उर्मिला को तुरंत निचे जमीन पर सोने को कहा. और उसे अपनी सलवार भी उतारने को कहा. मुझे उसकी चुत चाटने थी.
उर्मिला निचे सो गयी. उसने अपनी सलवार और चड्डी उतर दी. में उसे सलवार उतारते हुए देख लंड को मसल रहा था. जैसे ही उसने सलवार उतारी , मेने एक नजर बाहर देखकर पक्का करलिया के कोई आ नहीं रहा.
मुड़कर सीधा निचे बैठा, उर्मिला के पैर फैलाये और सीधा अपना मुँह उर्मिला के चुत पर रख चूसने लगा. उम्म्म ोाम्म्म अम्मामा. उर्मिला भी उछलने लगी. उसकी सिसकती हुई आवाजने मुझे भी उत्तेजित कर दिया. में चुत में जबान डालकर चाटने लगा. चुत काफी गरम और चिप चिपि हो चुकी थी. चाटने में बहोत मजा आ रहा था. उम्म्म अहहह. फिर चुत’को चाटते हुए दोनों हातो से मम्मो को दबाने लगा. अहःअहः ाहाःहाहा. अहःअहः। .. अहह. सससस. ाहः
चुत का पूरा पानी पीकर जब पीछे हटा. उर्मिला की और देखा तो उसकी आँखे भी हवस से भरी थी. मुझे देखते हुए बोली। अब चोद दे मुझे। रहा नहीं जा रहा.
मेने अपना लंड आगे लिया दोनों पैर फैलाकर जगा की और लौड़े के चुत के अंदर घुसेड़ दिया. धक्का देकर पूरा का पूरा लंड चुत में डाल दिया.
लौड़े को पूरा चुत में दाल उर्मिला पे लेटकर चोदना सुरु किया।
अहहहह अहहह. आह
शसशहसष अहहह आ.. उफ्फ्फ्फ़
उर्मिला भी आवाज करने लगे. आहाहा. अहहह. ुसस्स…
में जोर जोर से धक्के देने लगा. गिला लंड गीली चुत में अंदर तक जा रहा था. दोनों ने एक दूसरे को कसकर पकड़ रखा था. निचेसे में धक्के देते हुए चोद रहा था. मेने उर्मिला की आखो में देखा और उसे होठों पर चूमते हुए चोदने में और भी मजा आ रहा था.
अहहह. ाहाहाःहा
काफी देर चोदने के बाद में झड़ने ही वाला था. मेने उर्मिला को कहा में झड़ने वाला हु. आज तेरे मुँह में सारा पानी छोडूंगा. ऐसे कहते हुए में पीछे गया. लंड चुत से बाहर निकला।
उर्मिला को उठाकर सामने बैठाया और उसके मुँह में मेरा लंड दे दिया. वो लंड को चूसने लगी. उसकी जबान लंड पर जैसे लगी, मेरे लंड ने गरम पानी उर्मिला के मुँह में उड़ाना सुरु किया. आहहह. में चिल्लाने लगा. अहःअहः. अहहह. उर्मिला। . अहहहह. उर्मिला भी बड़े चाव से लंड को पूरा मुँह में लेकर घिसते हुए पानी पि रही थी. अहःअहः ाहाहाःहाहा. अहहहह. सससस उफ्फ्फफ्फ्फ़
कुछ देर बाद जब लंड शांत हुआ. में पीछे हटा. उर्मिला पूरा पानी पि गयी थी. हमने कपडे पहने और फिर से टेबल पर बैठ गए. दोनों भी तृप्त हो चुके थे. काफी देर हमने बाते की फिर वो चली गई.
उस दिन ऐसे दुकान के भीतर गर्लफ्रेंड को चोदने में बहूत मजा आया.
कैसे लगी आपको मेरी ये कहानी, कमेंट करके जरूर बताना।
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