मेरा नाम श्याम है में कॉलेज में पढता हु. कुछ ही महीनो पहले हमारी फॅमिली अल्ल्हाबाद आ गयी थी. पापा इंजीनियर है तो उन्हें काम के सिलसिले में अलग अलग जगह जाकर रहना पड़ता था. तो वो हमें भी साथ ही ले जाते है.
इसदौरांत हमारी पड़ोसन रीना आंटी से मेरी मुलाकात पास के एक दुकान पे हुई. वो कुछ सामान लेने आई थी. में दूध और ब्रेड लेने गया था. तो उनके पास छुट्टे पैसे नहीं थे तो मेने उनको पैसे दिए. तभी हमारी थोड़ी सी बातचीत हुई. मेने उनको घर के पास आते जाते देखा था. लेकिन उनका घर हमारे घर के पीछे की तरफ था तो इतना मिलना नहीं हो पाता था.
जैसे जैसे दिन बीतने लगे. हमारी मुलाकात ज्यादा बार होने लगी. रीना आंटी ने मुझे अपने बारेमे बताना सुरु किया. वो मुजसे काफी प्यार से बात कर रही थी. घर तक चलकर आते समय हमने एक दूसरे के बारेमे सबकुछ जानना सुरु किया. रीना आंटी ये जानकर खुश हुई की में कॉलेज में पढता हु.
घर पास आते ही वो अपने रास्ते चली गयी और जाते जाते कहकर गयी की मिलते है फिर.
जैसे वो आगे जाने लगी. मेरी नजर आंटी के पीठ से होकर निचे गांड तक घूमती हुई उन्हें टटोलने लगी. आंटी साड़ी में काफी खूबसूरत लग रही थी. पास से आंटी के वो बड़े बड़े मम्मो को देख तो ऐसा लग रहा था की एक बार तो इन मम्मो को चूसने का अवसर मिल जाये. तो मजाहि आ जाये.
आंटी धीरे धीरे नजरोसे दूर हो गयी लेकिन मेरे अंदर आग जलाकर चली गयी.
अब में हरोज सुभह दूध लेने निकलता और दुकान के पास खड़ा आंटी के आने की राह देखता. आंटी ठीक उसी वक्त दुकान पे आती. फिर हम सामान लेकर घर की तरफ निकलते.
आंटी से बातचीत में और एक बात पता चली के आंटी के पति पायलेट है. वो हफ्तों तक घर से बाहर रहते है. आंटी घर में अकेली ही रहती है. और आंटी और उनके पति भी कुछ ही महीनो पहले यहाँ पे आये है. इस वजसे उनको भी यहाँ कोई नहीं जानता.
मुझे ये बात जानकर और भी ज्यादा ख़ुशी हुई. कुछ ही दिनों में आंटी मुजसे काफी खुलकर बाते करने लगी.
एक दिन ऐसे ही बाते करते समय आंटी ने मुझे पूछा आज क्या कर रहे हो. तो मेने कहा कुछ नहीं घर पर ही रहूँगा.
तो हो सके तो घर आ जाना दुपहर को. मेरे पति अगले सोमवार को आ रहे है. में पूरा दिन अकेले घर पर बोर हो जाती हु. तुम आजाना घर पर बाते करते है.
में ये सुनकर काफी खुश हुआ. मेने तुरंत हा कह दिया. आंटी फिर चली गयी और में घर आ गया.
घरपर पापा नहीं थे. में आकर सोफे पे लेट गया और मोबाइल में गेम खेल रहा था. गेम खेलते हुए ये सोच रहा था की माँ को क्या बताऊ. दुपहर को अगर घर में नहीं दिखा तो दस सवाल पूछेगी.
में सोच में ही था तभी माँ अंदर के कमरे से बाहर निकली और बोली आज में दुपहर को अपने सहेली के घर जा रही हु. तो शाम को ७ बजे तक वापस आयूंगी
माँ की वो बात सुनकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. मेने धीरी आवाज में माँ को ठीक है माँ कहा.
चलो अब घर पर कोई नहीं होगा तो में आसानीसे आंटी के घर जा पाउँगा।
कुछ ही देर बाद माँ निकल गयी.
मेने कुछ देर रहा देखि. और सीधा अपने कमरे में जाकर नए कपडे पहनकर तैयार हो गया. जीन्स और टीशर्ट पहन लिए. खुसबूदार अत्तर लगाकर में घर से निकल पड़ा.
१० मिनट में आंटी के घर के बाहर में खड़ा था. दरवाजे की घंटी बजायी. थोड़ी ही देर में आंटी ने दरवाजा खोला. वो मुझे देखकर खुश हुई. उन्होंने मुझे अंदर आने दिया.
जैसे ही अंदर आया आंटी का घर देख में चौक गया. काफी आलीशान घर था. आंटी को मेने कहा आपका घर तो बहुत सुन्दर है. आंटी ने मुस्कुराते हुए कहा. हा बड़ा तो है. अभी तो तुमने सिर्फ बाहर से देखा है. अंदर से देखोगे तो तुम्हारी आँखे देखती ही रह जाएगी.
आंटी की ये बात सुनकर पहले तो मुझे समज नहीं आया के क्या कहना चाहती थी. थोड़ा सा डर भी लग रहा था. लेकिन में अब घर में तो आ ही गया था. जो भी होगा अब देखा जायेगा.
में सोफे पर बैठा. घर को बैठे बैठे ही देख रहा था. आंटी अंदर से मेरे लिए सरबत ले आयी. जैसे ही उन्होंने मेरे हात में सरबत थमाया, उनका साड़ी का पल्लू निचे खिसका. आंटी के बड़े बड़े मम्मो की बिच की दरार खुलकर मेरे आंखोके सामने आयी. एक पल तो लगा जैसे कोई सेक्स फिल्म आखो के सामने चल रही है. आंटी ने नखरीली आवाज से अपना पल्लू ऊपर लिया.
मेरी आखो के सामने जो हुआ उसपर मुझे भरोसा ही नहीं हो रहा था. मेरा गला सुख गया. आंटी सामने ही सोफे पे बैठी और हसकर मुजसे बाते करनी लगी. यहाँ मेरे दिमाग की चलने की गति धीमी हो चुकी थी. मेरी नजर बार बार आंटी के गुलाबी होठोंपर और बड़े मम्मो पर घूम रही थी. आंटी क्या कह रही है कुछ भी मेरे कानो तक नहीं पोहच रहा था.
में सरबत पीते समय जब आंटी के मम्मो को टटोल रहा था तो शायद आंटी ने जान लिया की मेरी नजर कहा पर है. उन्होने धीरेसे अपना पल्लू फिर से सरका दिया और ऐसे ही मेरे सामने बैठी रही. में शॉक हो गया. ये क्या हो रहा है. गिलास को मुँह से लगाकर रखा था और आँखे आंटी के मम्मो पर टिकी हुई थी. बड़े बड़े बदामी आम ब्लाउज़ में जकड़े हुए थे.
अचानक आंटी उठी और मेरे बगल में आकर बैठी, पास बैठकर मुझे कहने लगी ये सामने वाला रूम हमारा है. उसके बगल वाला मेहमान आते है तो उनके लिए रखा है. मेने सरबत का गिलास ख़तम किया और वो सामने टेबल पर रखा. भाभी उत्तेजित होकर मुझे बता रही थी. यहाँ में धुंदली आखो से भाभी की और देख रहा था. बात करते करते भाभी ने अपना हात मेरी जांग पर रखा.
जैसे ही उनका कोमल हात मेरी जांग पर घूमने लगा मेरे लंड ने सलामी दे दी. पास में बैठी आंटी भी उत्तेजना में क्या बड़बड़ा रही थी उन्हको भी पता नहीं चल रहा था. उनका साड़ी का पल्लू निचे गिर गया था. मुझे मम्मो के अंदर तक सबकुछ दिखाई दे रहा था. उठे मम्मो को देख मुँह से पानी आ रहा था. आगे क्या करे…. दोनों को भी समज नहीं आ रहा था. यहाँ मेरी हालत ख़राब हो रही थी. क्यूंकि लंड चड्डी के अंदर उछाल मारने लगा.
में सोच ही रहा था के क्या करू. तभी मेरी नजर भाभी ने मेरी जांग पे रखे हात पर गयी. मेने सोचा अगर में झटकेसे अपने आप को आंटी के तरफ मोड़ता हु तो आंटी का हात किसककर सीधा मेरे लंड को छू लेगा.
मेने जरा भी देर न की और अचानक से में आंटी की ओर पलटा. जैसे ही मेरा पैर आंटी की तरफ किसका, आंटी का हात सीधा मेरे लंड पे आ गया. आंटी बात करते करते रुकी और मेरी तरफ देखने लगी. उनकी रुकी हुई आखे देख में डर गया. लेकिन आंटी ने कुछ कहा नहीं बल्कि वो मेरे लंड को जीन्स पैंट के ऊपर से दबाने लगी.
मेरे मुँह से आह्हः की आवाज आने लगी. आंटी बड़े प्यार से लंड दबा रही थी और नशीली आखो से मेरी तरफ देख रही थी.
मेरी आखो में देख मेरे नजदीक आई और मेरे होठोंपे चुम्बन ले लिया. होठोंपे आंटी के गुलाबी होठ रगड़ने लगे तो मुजसे रहा नहीं गया और मेने आंटी को गले लगाया. दोनों एक दूसरे को चूमने लगे.
आंटी मुझे गले लगाकर मेरे ऊपर आ गयी. आंटी मुजसे भी ज्यादा तड़प रही थी. मेरे हात आंटी के पीठ से होकर आगे आये और मम्मो को दोनों हातोंसे जकड लिया. अहहह ाहः. स्सश्श्श. अहहह अहहहह। .. ब्लाउज़ के ऊपर से भी आंटी के बबले काफी मुलायम महसूस हो रहे थे. मेने जोर जोर से मम्मो को दबाना सुरु किया. अह्ह्ह हाः. अहःअहः अह्ह्ह हाहा
आंटी ने होठोंको चूमते हुए मेरे जीन्स की चैन खोल दी. वो बटन को खोलकर पेंट निचे उतारने लगी. मुझसे भी अभी रहा नहीं जा रहा था तो मेने भी पैंट उतारनेमे आंटी की मदत की. आंटी ने खींचकर मेरी जींस उतार दी. मेरे सामने खड़े रहकर मुझे हवस भरी नजरोसे देख रही थी. जींस को आंटी ने दूर फेका और अपने खुले बालोको बांधने लगी.
जबतक तो बाल बांध रही थी. तब तक मेने निचे पड़े आंटी के साड़ी के पल्लू को हात में उठा लिया. हात में पल्लू पकड़कर खींचने लगा वैसे आंटी गोल गोल घूमकर साडी को धीरेसे उतारने लगी. आअह्ह्ह. औरत को ऐसे नंगा होते देखना काफी मजेदार होता है.
कुछ ही देर में पूरी साडी निकल गयी. मेने साड़ी को समेट कर सोफे के पीछे फेक दिया. आंटी अभी ब्लाउज़ और चड्डी पर मेरे सामने खड़ी थी. हवस भरी नजर से देख रही थी.
मेने सोफे पे बैठे आंटी की तरफ देखते हुए अपने अंडरवेर के ऊपर से लंड को सहलाना सुरु किया. आंटी मुस्कुराई और मेरे सामने बैठी. उसने फिर मेरा हात हटाते हुए कहा. तुम क्यूँ तकलीफ ले रहे हो. में हूँ न इस काम के लिए. ऐसे कहकर आंटी अपना कोमल हात मेरे अंडरवेर पर घूमने लगी. अंदर तना हुआ लंड बाहर आने के लिया तड़प रहा था. आंटी को देखते हुए मेने अपना टीशर्ट उतर दिया.
आंटी का हात धीरे धीरे मेरी कमर की और गया और फिर आंटी ने दोनों हातोंसे मेरी अंडरवेर पकड़ी और धीरे धीरे निचे खींचने लगी. आआह्ह्ह.. तने हुए लंड ने उछाल मारना सुरु किया. आंटी ने पूरी अंडरवेर निचे खींची और मेरे लंड को बाहर निकल दिया.
में अब पूरा नंगा आंटी के सामने सोफे पे बैठा आंटी को हवस भरी नजर से देख रहा था. आंटी ने मेरा लंड अपनी मुट्ठी में जकड़ा और गिलानी लगी. अहःअहः अहहह सशहषष ाहः.. आअह्ह्ह. ये स्पर्श मेरे लंड को कठोर करने केलिए काफी था. आंटी ने लंड को हिलाते हुए अपने मुँह में ले लिया. आहहह आंटी. अहहह आहहह… आंटी जोश में मेरा लंड चूस रही थी. ऐसे लग रहा था जैसे काफी दिन से लंड के तलाश में थी. आंटी अपनी जबान को पुरे लंड पर ऊपर से निचे तक घुमाकर आनंद ले रही थी. अहहहह.. लंड के गुलाबी भाग को जबान से चाट रही थी. अहहह. सससस आअह्ह्ह आंटी…
लंड पर जबान घिसते हुए निचे चली गयी और दोनों गोटे आंटी ने चाटना सुरु किया. लंड और गोटें दोनों भी आंटी ने अछि तरह चाट लिए.
काफी देर के बाद लंड को आंटी ने छोड़ा. फिर वो पीछे हटी और मेरे सामने खड़ेहोकर आंटी ने अपना ब्लाउज़ खोल दिया. जैसे ही ब्लाउज़ हटा आंटी के बड़े बड़े मम्मे सामने आये. आआह आआह … क्या नजारा था. गुलाबी चूचियों का उभार और भी मनमोहक था.
आंटी ने एक नजर मेरी तरफ प्यार भरी नजरो से देखा और अणि चड्डी भी निचे उतरने लगी. धीरेसे चड्डी को उतारते हुए मेरी तरफ ही टकटकी लगाके देख रही थी. पूरी नंगी होते ही जब मेने आंटी को ऊपर से निचे तक देखा ऐसे लगा मानो में एक सेक्स वीडियो देख रहा हो. सामने एक गोरी सी औरत खड़ी है. यकीन नहीं हो रहा था के सब कुछ मेरे साथ हो रहा है.
आंटी ने एक कदम आगे बढ़ाया और यहा मेरी सासे चढ़ने लगी. में सोफे पर टिक कर बैठा. आंटी धीरेसे मेरे ऊपर आकर बैठी और मुझे चूमने लगी. मेने भी आंटी को गले से लगा लिया. आंटी ने चूमते हुए अपने मम्मो को ऊपर उठाया और मेरे मुँह में चूचिया दे दी. आआआह. चूचियों को मुँह में लेकर जैसे चूसने लगा. आंटी आअह्ह्ह भरने लगी. दोनों हातो से मम्मो को दबाकर चूचियों को चबा रहा था. काफी बड़े मम्मे थे. काफी दिनों की भूक आज मिटाने का मौका मुझे मिला था.
दोनों मम्मो को जोर जोर से दबाते हुए निचे अपने लंड को छूते हुए चुत का आनंद लेने लगा. काफी देर तक में मम्मो से खेल रहा था. फिर आंटी ने धीरेसे अपना हात निचे लिया और लंड को चुत में डाल कर लंड पे उपर निचे कूदने लगी. अह्ह्ह.. मेरा लंड चुत में अंदर तक जाने लगा. आंटी की चुत काफी गीली थी. वो लंड पर जोर जोर से उछलने लगी. अहःअहः. मम्मे आखो के सामने उड़ रहे थे. मेने दोनों हातोंसे मम्मो को दबाना सुरु किया. अहहहहह अहहह अहहह अहहहहहहह. आंटी ाहः अहह अहहह अहहहह.
कुछ देर ऊपर से चोदने के बाद आंटी उठी. मेरा हात उसने पकड़ा और मुझे उठाकर अपने कमरे में ले गयी. जैसे हम अंदर आये. आंटी ने दरवाजा अंदर से बन किया. मुझे बेड पर ले गयी और निचे सुलाकर मेरे मुँह पे बैठ गयी. चुत को सीधा मुँह में डालकर घिसने लगी. में अब अपनी जबान से चुत को चाट ने लगा. चुत से निकलने वाले पानी को पीते जा रहा था.
ाहः अहहह. आंटी जो जोर से चिल्लाने लगी. ाहः अहहह अहहह। . चाटो मेरी चुत को. बहोत ही प्यासी है. अहहह. अहःअहः ाहः. उसमसमसम ाहः.
चुत’को मेरे मुँह पर घिसने लगी. ाहः ाहाहाःहाहा. अहहहआ
फिर मेने आंटी को घोड़ी बना दिया. आंटी की बड़ी गांड देखि तो हात अपने आप गांड पे चल पड़ा. जोर से गांड पे मारते हुए गांड को दबाने लगा. आंटी की गांड गोल मटोल और काफी बड़ी थी.
गांड को मारते हुए धीरेसे मेने लंड को चूत में धकेला. लंड अंदर जाने लगा. आंटी फिर आह भरने लगी. कुछ ही देर में लंड पूरा चुत में चला गया. मेने आंटी की कमर पकड़ी और आंटी को चोदने लगा.
अब मुजसे रहा नहीं जा राहत था. में जंगली की तरह आंटी को चोद रहा था. लंड भी काफी कठोर हो चूका था. आंटी की हिलती गांड और उसकी सिसकने वाली आवाज सुन में पागल हो चूका था. बहोत ही मजा आ रहा था चोदने में. चुत ने लंड को कसकर पकड़के रखा था. आहहहआ. चुत के अंदर घिसते हुए लंड’का आनंद ले रहा था. कुछ देर चोदने के बाद लंड से जब पानी निकलने ही वाला था तो आंटी को मेने पूछा कहा छोड़ू पानी. तो आंटी ने चिल्लाते हुए कहा अंदर मत छोड़ना .. मेने सुनते ही लंड को चुत से बाहर खींचा. आंटी घूमकर मेरे लंड के पास आयी और लंड को हिलाते हुए चूसने लगी.
अहहह अहाः। … लंड को आंटी की जबान लगते ही पानी निकलने लगा. गरम लंड ला पानी आंटी पिने लगी. अहहह. अहहहह.
पूरा पानी निकलने तक लंड आंटी के मुँह में ही था.
फिर जब में शांत हुआ. आंटी बेड पर सो गयी. में भी बगल में सो गया. दोनों एकदूसरे को कसकर पकड़कर सोये थे.
उस दिन बाद से में आंटी के घर बार बार जाने लगा.
हमारी चुदाई अब रोज की बात हो गयी थी. आंटी ने मुझे पूरी छूट दे दी थी.
कैसी लगी मेरी कहानी जरुन कमेंट करके बताना।
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