बीवी को आज खुलके चोदा

हमारी शादी को १ साल हो गया था. अरेंज मैरेज थी इसलिए एक दूसरे को समझने में थोड़ा वक्त लगा. अभी हम दोनों भी मुंबई में रहते है. घर परिवार दिल्ली में है. जबसे मुंबई आये है, दोनों का भी मन खुलने लगा है. दोनों भी कंपनी में जॉब करते है. मेरा नाम अमन है और मेरी बीवी का नाम आकांशा

आकांशा वैसे तो मॉडर्न विचारो की है. लेकिन दिल्ली में थे तब तक वो ज्यादा खुलकर बात नहीं करती थी. यहाँ मुंबई आने के बाद हम दोनों ने भी खुल के एक दूसरे से बाते करना सुरु कर दिया.

धीरे धीरे हमारी बाते यहाँ तक पोहची के आकांशा मुझे अपने ऑफिस में जो लड़का उसके स्तनों को देखता रहता है उसके बारेमे बताने लगी. आकांशा ने कहा बहोत बार वो अंदर झाकने की कोशिह करता है. आकांशा भी उसको और चिढ़ाने के लिए जानभूझकर झुककर उसको अंदर का नजारा दिखती है. खाना कहते समय सामने बैठा होता है तो जानभूझकर ड्रेस के ऊपर के बटन खोल के रखती है. और अपने ऑफिस ब्रैंड को खुलकर झाकने देती है.

हम बाहर घूमने जाते तो वो लड़को तो ताड़ते हुए उकसी छाती कितनी बड़ी है, उसका लंड कितना बड़ा होगा हम यहाँ बाते करने लगे. में खूबसूरत लड़की दिखती तो उसके बूब्स कितने बड़े है, उसकी गांड क्या लाजवाब है उसके बारेमे हम बात करने लगते है.

एक दिन ऐसे ही हम मुंबई के जुहू बिच पे चले गए. शाम का वक्त था भीड़ भी बहोत ज्यादा थी. हलकी सी ठण्ड भी थी. हम भीड़ में पानी की तरफ बढ़ने लगे. देखा तो चारो तरफ लोग ही लोग थे. अंधेर में बिच पे लोग दिखाई दे रहे थे. भीड़ में आगे बढ़ते हुए में आकांशा के शरीर पे हात घुमाने लगा. बहोत मजा आ रहा था.

कभी आकांशा की कमर पकड़ता, तो कभी पीठ पर हात रगड़ते हुए निचे गांड की तरफ ले जाता. भीड़ का फायदा उठाकर गांड पे भी हात मेने घुमाया, एक मुस्लिम औरत हमारे बगल में चल रही थी, वो मुझे देखने लगी. मे जानबूझकर उस औरत के सामने ही आकांशा की गांड पे हात रख रहा था और हम आगे चल रहे थे.

चलते चलते हम समुंदर के पानी के पास आ गए. सामने तो पूरा अँधेरा था. कुछ भी दिख नहीं रहा था. पैरो के पास आती हुई लहरोमे चलते हुए हम आगे जाने लगे. अछि हवा चल रही थी. बहोत ही रोमांटिक माहौल था.

चलते चलते हमने देखा कुछ कपल तो पानी के पास अंधेरेमे ही एक दूसरे को गले लगाकर खड़े है. एक दूसरे को चुम रहे थे. धीरे धीरे और आगे बढे तो पानी में एक कपल खड़ा था, उसने तो सीधा लड़की के बॉल को जोर से दबा दिया. लड़की शर्मायी, दोनों की मस्ती चल रही थी.

में और आकांशा तो देखकर चौक गए. चलते चलते हम इतना आगे आ गए की साडी खाने की दुकाने पीछे रह गयी, भीड़ थोड़ी कम होने लगी. उस शांत वातावरण में तो मेरा भी मन करने लगा चुदाई का. में तो ये सोच रहा था की आकांशा क्या सोच रही होगी ये सब देखकर।

हम चलते हुए आस पास नजर घुमा रहे थे. तो हमें कपल दिख रहे थे रेत में बैठे. किसिंग चल रहा था, कही कही दबाना खींचना सब चल रहा था.

ये सबा देखकर मेरा भी मन करने लगा. मेने आकांशा की कमर पे हात रखा. चलते चलते उसकी पीठ पे में घुमाने लगा. आकांशा का कोमल बदन मुझे मदहोश करने लगा.

मेने महसूस किया हमारे आगे पीछे वैसे कोई नहीं है. हम अँधेरे में चल रहे थे. जो भी लोग थे वो कुछ दुरु पे ही थे. तो मौका सही था. मेने अकाशा को पानी की तरफ चलने कहा, चलते चलते मेने अपना हात आकांशा की पीठ से होकर निचे सरकाया और उसकी बड़ी गांड को दबाने लगा. आह्हः. आकंशाने जो टॉप के निचे पैंट पहनी थी वो बहोत ही पतली थी. बिलकुल योग पेंट की तरह.

इस वजसे गांड को दबाने में और भी मजा आ रहा था. आकांशा सिसकने लगी. कहने लगी कोई देख लेगा. मेने कहा देखने दो. इसी में तो मजा है. और कसकर उसकी गांड को पकड़कर हम चलने लगे.

गांड की कोमलताने मुझे उत्तेजित कर दिया. पता नहीं मेरे मन में क्या आया मेने अपना हात पिछेसे सीधा आकांशा की पेंट के अंदर डाल और उकसी बड़ी कोमल गांड को दबाने लगा. अकांशी भी चौक गयी, लेकिन मुझे उसने रोका नहीं. उसको भी मजा आने लगा. हम ऐसे ही धीरे धीरे चलते रहे.

आकांशा के मुँह पे एक मदहोशी छा गयी. उसने जब मेरी तरफ देखा, मुझे उसकी आखो में नशीली दिख रही थी. मानो वो अंदर से तड़प रही थी. दोनों को भी रहा नहीं गया, हम वही रुके और मेने आकांशा को कसकर गले लगाया और होठो पे चुम लिया. उम्म्म्म ममममम.. अहहह. उम्म्म अमामं. आकांशा भी मुझे कसकर पकड़कर चुम रही थी. दोनों के शरीर गरम हो चुके थे. मेरा एक हात अभी भी आकांशा की पैंट में था. उसकी गांड दबा रहा था. दूसरे हात से मेने उसके बॉल को दबाया. आहहहह. अहहहह. आहहह उम्म्म्म ामममम अम्म्मा

दोनों को भी फरक नहीं पड़ रहा था की कोई देख रहा है हमें. काफी देर हम एक दूसरे को ऐसे ही चूमते रहे. फिर किसी तरह दोनों ने एक दूसरे को संभाला

आकांशा  ने अपने कपडे ठीक किये. हम अभी काफी दूर आ गए थे. आकांशा ने मेरी तरफ देखा और कहा अमन मुझे कुछ हो रहा है. रहा नहीं जा रहा

आकांशा की जवानी उफान मार रही थी. मेने आकांशा को कहा चलो थोड़ी देर रेत पे बैठते है. जैसे पीछे कपल बैठे थे, वैसे ही हम भी सुखी जगह देखकर बैठ गए. जानबूझकर पानी के थोड़ा करीब बैठे तकर आगे से कोई हमें देखे ना

में और आकांशा रेत पे चिपक कर बैठे. आकांशा ने अपना हात मेरी जांग पे रगड़ न सुरु किया. मेने जींस पेंट पहनी थी. मेरा लंड तो पहले से ही तना हुआ था. अपने हात को मेरी जांग पे रगड़ते हुए लंड के करीब ले गयी और मेरा लंड दबा दिया.

मेने भी उसके स्तनों को पकड़ा और दबाने लगा. मेरी तड़प देख आकांशा ने खुद ही अपने ब्रा का हुक पिछेसे खोल दिया. टॉप के अंदर ब्रा खुला.

आकांशा यहाँ वह देखने लगी. और बोली. कोई नहीं है. चुसो ना.

में भी पागल सा हो गया था. खुले आसमान के निचे समुन्दर के किनारे. ऐसी हरकते कर रहे थे.

पीछे से लोग गुजर रहे थे. लेकिन मेने जो आकांशा की तड़प देखि, वो अपना ड्रेस ऊपर उठाने के लिए तड़प रही थी. में तुरंत निचे झुका, आकंशाने अपना टॉप ब्रा के साथ ऊपर उठाया और निप्पल मेरे मुँह में आ गए.

अहहह उम्म्म में निप्पल चूसने लगा. एक हात से आकांशा के आम दबाकर निप्पल को चूसने लगा. अहह.. अह्ह्ह. उम्म्म आकांशा मुझे अपने टॉप के निचे ढकने की कोशिश कर रही थी. लेकिन टॉप बहोत ही छोटा था. आह्ह्ह्ह. कुछ जाते हुए लोगो ने तो हमें देख भी लिया. लेकिन आकांशा ने मुझे रोका नहीं. में आकांशा के आम चूसता रहा.

फिर कुछ देर बाद जब पीछे हटा. थोड़ी देर शांत बैठे रहे. अंदर की गर्मी बढ़ रही थी. आकांशा बिच बिच में मेरे लौड़े को दबा रही थी. अचानक आकांशा ने कहा, बाहर निकालके दो न, मुझे चूसना है.

में चौक गया. मेने कहा नहीं, कोई देख लेगा. आकांशा जबरदस्ती करने लगी. कहने लगी, तुम नहीं निकालोगे तो में खुद ही निकाल लुंगी.

आकांशा की ये तड़प देख में डर गया था. मेने आकांशा को कहा घर चलते है. यहाँ किसीने देख लिया तो परेशानी हो जायेगे।

हम तुरंत उठे, आकांशा ने मेरे हात को कसकर पकड़ लिया था. आकांशा का ब्रा टॉप के अंदर खुला ही छोड़ दिया था. जिस वजसे उसके स्तन ज्यादा हिल रहे थे. पता चल रहा था की ब्रा नहीं पहना है. हमने जुहू बीच से बाहर निकलके ऑटो ली। आकांशा ऑटो में भी मेरे लौड़े के ऊपर उंगलिया घुमा रही थी.

आकांशा की हवस बढ़ी जा रही थी. हम बिल्डिंग के निचे पोहचे. लिफ्ट से ऊपर जाने लगे. आकांशा को देखा तो मानो घर में जाने के लिए तड़प रही थी.

जैसे लिफ्ट रुकी, हम कमरे में घुसे, मेने तुरंत दरवाजा बंद किया. आकांशा ने अपनी बैग कोने में ही फेक दी, और मुझे आकर कसकर गले लगाया और मेरे होठो को चूमने लगी. मेरे भी हात से रूम की चाबी निचे गिरी, मेने भी आकांशा को कसकर पकड़ा और चूमने लगा. उम्म्म्म अम्म्मम्म अम्म्मम्म अम्मम्म अम्म्मम्म

दोनों के अंदर की हवस ने चर्म सिमा पार कर दी थी. हमारी जबान एक दूसरे से लड़ रही थी. पागलो की तरह एक दूसरे को चुम रहे थे. मेने अपने दोनों हातो से आकांशा के स्तनों को दबाया. आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह. उम्म्म्म. निचे लंड पेंट के अंदर उफान मार रहा था.

आकांशा ने टॉप ऊपर उठाया, ब्रा पहले सी खुला था तो वो निचे गिर पड़ा. खुले हुए स्तनों को जोर जोर से दबाकर निप्पल ऊँगली से दबाने लगा. आकांशा सिसकने लगी, चिल्लाने लगी, अहहहह ाहाःहाहा. आज निप्पल भी काफी तन गए थे. ऊँगली में पड़कर दबाते हुए में निचे झुका और निप्पल को चूसने लगा. अह्हह्ह्ह्ह अहहहह. अहहह..

आकांशा ने मेरी टीशर्ट उतार के फेकि। मेरे बदन पे अपना हात रगड़ने लगी. में उसके निप्पल चुसके पीछे हटा तो आकांशा ने मेरे निप्पल मुँह में ले लिए. मेरे निप्पल को आकांशा चूसने लगी. जीभ से चाटने लगी.

अह्ह्ह्ह अहःअहः अहह. उम्म्म ओमममम अम्मम्म.
अहहहह अहहह अह्ह्ह. उम्म्म्म

मेरे निप्पल को चूसते हुए निचे बैठी. सीधा मेरी पेंट के बटन खोलकर निचे खींच दी. पेंट उतरी, अब अंडरवेर को भी पकड़ा और खींचकर मुझे पूरा नंगा कर दिया. मेरा लौड़ा उछलकर सामने आया.

आकांशा ने लौड़े को देखते ही उसे मुठी में पकड़कर मुँह में खींच लिया. आह्ह्ह्हह्ह. आकांशा के गरम मुँह में मेरा लंड जाते ही मेरे शरीर में मानो कपकपीसी होने लगी.

अह्ह्ह अहहह. आकांशा मेरे लौड़े को जोर जोर से हिलाते हुए अपने मुँह में ले लहि थी. जीभ से लंड को पूरा चाट लिया. अह्ह्ह अहहह अहहह अहहह. बहोत मजा आ रहा था.

लंड के साथ मेरी दो गोटिया भी चाट ली. आज आकांशा बहोत ही ज्यादा मुड़ में थी. इतना खुलके लंड को चूसते हुए में उसे पहली बार देख रहा था.

अह्ह्ह्ह अह्ह्ह. उम्म्म अम्म्म. उफ्फफ्फ्फ़.

लौड़े को जब छोड़ा, मेने आकांशा को तुरंत खड़ा किया, और बेड पे सुला दिया. बेड पर जैसे वो लेती, मेने उसकी पेंट पकड़कर खींच दी. आकांशा की पैंटी दिखने लगी.

मेरा खड़ा लेकर में आकांशा पे चढ़ गया. दोनों की सास चढ़ी हुई थी. मेने अपना मुँह आकांशा के स्तनों के बिच घिसते हुए जोर से स्तनों को दबाया. चूमते हुए निचे जाने लगा.

पेट से होकर, नाभि पे जीभ घुमाते हुए में पैंटी पर आकर तुका. पैंटी के ऊपर गर्मी महसूस हो रही थी. आकांशा की पेंट पे जब मेने अपना मुँह रखा, वो मुझे गरम लगी.

मेने पेंट को निचे खींचा. पैंटी उतारते ही आकांशा की चुत सामने आयी.

चुत की दरार देखकर में पागल सा हो गया. मेने तुरंत आकांशा के पैर फैलाये और जीभ को चुत के अंदर डालकर चाटना सुरु किया. अहःअहः। अहहह अहःअहः

आकांशा तड़पने लगी. अहहह ाहाःहाहा. ाहहम उम्मम्मम ामममम

बेड पे अपने हात पटकने लगी, चद्दर को खींचने लगी. में चुत को चाटे जा रहा था. ऊँगली को चुत में डालकर घिसने लगा. चुत का पानी जबान से चाट चाट के पि गया. अह्ह्ह अहहह . उम्म्म अम्मम्म

निचे लंड चुत में जाने के लिए तड़प रहा था. चुत को चाट के पीछे हटा. आकांशा के पैर पुरे फैलाये, बिच में आकर बैठा और लौड़े को धीरेसे चुत में धकेला. आधा लंड चुत में चला गया.

फिर धीरेसे आकांशा के ऊपर लेता, लेटते समाय बचा हुआ लंड भी चुत के अंदर चला गया. अब आकांशा की आखो में आँखे डालकर देखते हुए मेने अपनी मन की बात जो में आकांशा को कभी कह नहीं पाया वो आज कह दी.

मेने आकांशा को कहा, में तुम्हे अपनी रंडी बनाना चाहता हु. तुम्हे रंडी की तरह चोदना चाहता हु.

आकांशा मेरी बात सुनकर बोली, अह्ह्ह्ह. अमन में तुम्हारे मुँह से ये सुनने के लिए तड़प रही थी.

में तुम्हारी रंडी ही हु. तुम बनाओ मुझे अपनी रंडी.

अह्ह्ह्ह आकांशा मेरी रंडी… कहते हुए मेने लंड को धीरे धीरे चुत में अंदर बाहर करना सुरु किया. अह्ह्ह्ह. अहहह. आकांशा.

आज तुजे में चोद’चोद के अपनी रंडी बना दूंगा. फिर हरोज तुजे मेरी रंडी की तरह चुदाई करनी पड़ेगी.

चोदते हुए में आकांशा के होटो को चुम रहा था. अह्ह्ह. आकांशा भी बड़ी बड़ी सास ले रही थी. अहहह अहहह.

अह्ह्ह अमन अह्ह्ह अह्ह्ह. में रंडी की तरह तुमसे चुदुँगी आह्हः अहहहह. अहःअहः तुम जैसा कहोगे में करुँगी. मुझे तुम्हारी रंडी बना दो.

में जोर जोर से चुत को चोदने लगा. अहहह अहाः अहह. अहहह. अहहह. साली रंडी, अहहह अहःअहः छिनाल आह्ह्ह्हह अहहह.

कुछ देर चोदते हुए मे पलटा और आकांशा को अब मेरे ऊपर ले लिया. आकांशा मेरे लौड़े पे बैठी और उछल ने लगी. अह्ह्ह अहःअहः. लौड़ा चुत में अंदर तक जा रहा था. आठ अहहहह.

छिनाल की तरह बाल उड़ाते हुए आकांशा मेरे लौड़े पे ऊपर निचे कर रही थी अह्ह्ह आह्हः अहहह. में उसके बड़े आम ऊपर निचे होते हुए देख रहा था. अहहह अहाः उम्म्म्म उम्म्म अम्म्मम्म

कुछ देर बाद, आकांशा लौड़े के ऊपर से उठी और वो सीधा मेरे मुँह पे आकर बैठी. मेने उसकी चुत को अपने मुँह में लिया और फिर से चाटने लगा. अह्ह्ह। उम्म्म्म अम्म्मम्म अम्मम्म ाममम.

आकांशा को ये बहोत ही पसंद था. में जबान को चुत डालकर छोड़ दिया, आकांशा अपनी चुत को मेरे मुँह पे आगे पीछे घिसने लगी. अह्ह्ह मममममम अम्म्मम्म अम्म्मम्म

जब वो मुँह के ऊपर से हटी, मेरा मुँह चुत के पानी से गिला हो चूका था.

में उठा और आकांशा को घोड़ी बना दिया. आकांशा की गांड की बड़ी दरार देखि तो अपना गिला मुँह आकांशा की गांड में डालकर घिसने लगा. गांड की कोमलता चेहरे पे महसूस करने लगा. अह्ह्ह्ह अहहह अह्ह्ह. बड़ा अच्छा लग रहा था.

गांड पे मुँह साफ करने के बाद घुटने पे बैठा. लंड को हात में पकड़कर धीरेसे चुत में धकेला. आकांशा ने चुत को कस दिया था. लंड जा नहीं रहा था. में धक्का देते हुए लंड को अंदर डालने लगा. आधा लंड गया फिर जोर से धक्का देकर पूरा लंड आकांशा की चुत में घुसेड़ दिया. आकांशा ने गर्दन ऊपर करके आह्हः की आवाज की.

मेने उसकी कमर दोनों हातो से पकड़ी और सुरु हो गया चुत को चोदने का काम फिरसे। आह्ह्ह्हह अहहहहहह. अहम्म्म्म में आकांशा की गांड पे चपेट मारते हुए उसको चोदने लगा. आह्हः ाहाहाःहाहा. अहहह

अह्ह्ह्ह रंडी साली आहहहह. अहहहह अह्ह्ह्ह. क्या माल है तू. आह्ह्ह्हह्ह ह…. लंड को जोर जोर से चुत में पटकते हुए. आह्ह्ह्ह अहहह.

आकांशा भी आवाज कर रही थी , बड़ी बड़ी सासे ले रही थी. अह्ह्ह अहहहह अहहह….

आकांशा कपड़ो के बिना क्या देखती है तू. अहहहह अहःअहः. अह्ह्ह. आज मेरा मन इतना खुल गया था के सोचा आज सब कूच बोल दी दो. चोदते हुए मेने आकांशा को कहा,

मेने तेरे बड़े बड़े आम और तेरी बड़ी गांड देखकर ही तेरे से शादी की थी. मेरा सिर्फ तुजे चोदने का ही मन था. अह्ह्ह ाहाःहाहा. लौड़े को चुत में दबाते हुए. आह्ह्ह्ह

आज से में तुझे अपनी रंडी समजू ना.

आकांशा ने कहा, हां. मुझे अपनी रंडी ही समज अह्ह्ह अहःअहः अहहह अहह. जब चाहे तू मुझे चोदा कर आह्हः अहहह. अहहह

आकांशा के मुँह से रंडी सुनकर में और भी उत्तेजित हो उठा और जोर जोर से लंड को चुत में पटकते हुए चोदने लगा. अह्ह्ह अहहह आकांशा अहःअहः

कुछ ही देर बाद मेरा लंड पानी छोड़ने के लिए तैयार था.

मेने लंड को बाहर खींचा, आकांशा को पलटके सामने बिठाया, उसने मुँह खोला वैसे मेने दोनों हातोंसे उसका मुँह पकड़ा और मेरा लौड़ा उसके मुँह में अंदर तक घुसा दिया.

लौड़े ने गरम पानी की बौछार कर दी. मेने आकांशा का मुँह कसकर पकड़ रखा था. लंड को मुँह में दबाये रखा था. आह्ह्ह्ह अह्ह्ह रंडी अहहहहह अहह हाहुम्म अम्मम्म अम्मम्म। . पि जा रंडी सब आह्ह्ह्ह अहःअहः..

कुछ देरबाद जब सारा पानी मेने आकांशा के मुँह में छोड़ा तब जाकर मेरी सास में सास आयी. मेने लंड को आकांशा का के मुँह से निकला. आकांशा की तरफ देखा तो वो सारा पानी पि गयी थी.

में पीछे ऐसे ही लेट गया. आकांशा ने पानी की बोतल से पानी पिया और वो भी मेरे बगल में लेट गयी. हम दोनों कसकर एक दूसरे को गले लगाकर लेटे रहे.

उस दिन के बाद से आकांशा और मेरे बिच की बातचीत का डर था वो ख़तम हो गया. हम खुलकर एक दूसरे को अपने मन की बाते बताने लगे. अभी हमें किसीका डर भी नहीं रहा. आकांशा ने मुझे कभी रोका नहीं किसी भी बात के लिए.

अब हम दोनों गन्दी से गन्दी बाते करते हुए चुदाई करते है. बहोत मजा आता है.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *