मौसी के बेटे की गांड मारी
सुभह जब में उठा, निचे काफी शोर गुल चल रहा था. उठकर आया आया और झांककर देखा तो मौसी और उसका बेटा घर आये थे. ये मेरी दूर की मौसी थी. बहोत दिनों बाद गांव आयी थी. शायद पिताजी ने मुझे बताया था के मौसी कुछ दिनों के लिए रहने आने वाली है, लेकिन मेरे दिमाग से बात निकल गयी.
मेरा नाम अनूप है. मेरा डिवोर्स हो गया है. शादी के १ साल में ही डिवोर्स हो गया था. तब से में अकेला ही हु. में नहाकर निचे आया. मौसी और उसके बेटे से बात हुई. चाय पीते पीते बहोत सी बाटे हुई. मौसी का बीटा जवान हो गया था. गोरा चिट्टा लड़का. उसका नाम अभिषेक था.
मेने अभिषेक से बाते की. वो थोड़ा शर्मीला किसम का लड़का लग रहा था. मुझे काम के लिए जाना था तो में कुछ देर में निकल गया.
पूरा दिन काम करके जब रातको ८ बजे के आसपास घर आया तो खाने के लिए सब तैयार थे. हमने साथ में खाना खाया. फिर सोने की तैयारियां होने लगी. सभी सोने जा रहे थे. बाहर ठण्ड भी बहोत थी. मेने कहा में बाहर होकर आता हु. मुझे सिगरेट पिने जाना था. तभी मेरा ध्यान अभिषेक की तरफ गयी. वो मेरी तरफ देख रहा था. मेने अभिषेक को पूछा चलो मेरे साथ, घूमकर आते है.
वो खुश हो गया. तुरंत उठ गया. हम मेरी गाड़ी लेकर निकले. रात बहोत हो चुकी थी तो सारि दुकाने बंद हो चुकी थी. फिर मुझे याद आया की हाइवे के पास एक छोटासा ढाबा है वह मिल सकती है.
हम रातके अँधेरे में गाड़ी चलकर ढाबे पे पोहचे. गाड़ी से उतारते हे ही मेने अभिषेक को कहा में सिगरेट पिता हु. लेकिन घरपर किसी को नहीं बताना। अभिषेक ने गर्दन हिलाकर हा कहा.
मेने सिगरेट ली. अभिषेक को कहा तुम्हे भी जो लेना है वो ले लो तुम. तो अभिषेक ने फालूदा मंगा लिया.
वो फालूदा खाने लगा, में सिगरेट पि रहा था. मेरी नजर बार बार उसपर ही घूम रही थी. में उसे ऊपर से निचे देखने लगा. उसकी उचाई मेरे उतनी ही थी. गोरा शरीर, गुलाबी होठ, बाहर निकली हुई गांड मेरे नजरो से बच नहीं पायी।
अभिषेक को मेने कहा, ज्यादा मीठा मत खाया करो नहीं तो मीठे हो जाओगे. तो वो हसने लगा.
मेने आगे पूछा कोई गर्लफ्रेंड है तुम्हारी, वो कहने लगा नहीं. अभी तक कोई मिली नहीं.
तो मेने कहा, मतलब अभी तक वर्जिन हो तुम. तो फिर से हसने लगा. और बोला है.
हम दोनों ने भी ट्रैक पैंट पहनी थी. और ऊपर टीशर्ट.
मेने अपने लौड़े को पैंट के ऊपर से मसलते हुए अभिषेक को कहा. ऐसी ठण्ड में कोई मिल जाये ना तो मजा आ जाये.
अभिसेक ने मुझे लंड को मसलते हुए देखा और मुस्कुराने लगा.
पेंट के अंदर मेरा लंड खड़ा होने लगा था. मेने अपनी सिगरेट ख़तम की और हम गाड़ी की तरफ चलने लगे. गाड़ी कोने ढाबे से दूर खड़ी थी. खुला मैदान था. और घना अँधेरा.
सामने के हाइवे पे चलनी वाली गाड़ियों की आवाज। चलते हुए जैसे ही हम गाड़ी के पास आये. सुनसान जगह देख मेरा लंड तन गया. मेने सोचा अगर किसी तरह में अभिषेक को मना लू तो इसकी गांड मारने में बहोत मजा आएगा.
चलते चलते में सोचने लगा. गाड़ी के पास आते ही मुझे एक ख्याल आया. मेने अभिषेक को कहा, जरा अंदर झुककर मेरी सीट के निचे पानी की बोतल पड़ी है वो निकाल दो ना.
अभिषेक अंदर की और झुका और बोतल ढूंढ़ने लगा., मेने मौका देखा और धीरेसे अपना लंड उसकी गांड पे टिका दिया. अभिषेक कहने लगा, भैया यहाँ पे नहीं है.
में कहने लगा देख वही निचे हात घुमाके, वही पड़ी होगी.
यहाँ में पिछेसे अभिषेक की गांड पे अपना लंड रगड़ने लगा. आह्ह्ह्ह बड़ा मजा आ रहा था. बाहर की ठण्ड, घना अँधेरा, और गांड पे लंड रगड़ने मिल रहा है, अह्ह्ह्हह। .. मेरा मन उछल ने लगा.
अभिषेक फिर से पूछने लगा. भैया नहीं है… आप क्या कर रहे हो पीछे से.
मेने लंड को गांड पे दबाते हुए कहा, कुछ नहीं. तुम बस बोतल ढूंढो
अभिषेक को पता चल गया में उसकी गांड के साथ खेल रहा हु. तो वो कहने लगा. नहीं मिल रही भैया आप पीछे हो जायो. मुझे बाहर आने दो. और वो बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था.
मेने उसको अंदर ही पकड़ रखा. रुकू अभिषेक. मिल जाएगी बोतल रुको थोड़ा। ऐसे ही झुके रहो.
अभिषेक, पीछे हटने की कोशिश करने लगा.
यहाँ मेरा लंड खड़ा होकर उफान मार रहा था. मुजसे रहा नहीं गया. तो मेने अभिषेक की ट्रैक पैंट पिछेसे पकड़ी और निचे उतर दी. अंडरवेर के साथ पैंट घुटने के निचे उतर गयी.
अभिषेक की गांड दिखने लगी. मेने भी अपनी पेंट निचे खींची और खड़े लंड को अभिषेक की गांड की बिच की दरार में दबा दिया.
आहहह अहहह. अहहहह.
मेरा लंड गांड की दरार में अंदर तक घुस गया.
अभिषेक चिल्लाने लगा. भैया ये क्या कर रहे हो. छोड़ो मुझे.
यहाँ मेरा लौड़ा पागल हो चूका था. में पिछेसे अभिषक के ऊपर लेट गया. और अभिषेक को दबाकर अपना लंड उसकी गांड में पटकने लगा. आहहह अहहह. उम्म्म्म अहहह अहहह अहह. अहहह
अभिषके की गांड बहोत ही कोमल थी. लौड़े का टोपा गांड पे पटक रहा था जिससे एक सुकून मिल रहा था.
जबसे डिवोर्स हुआ हे ठीक से चोदने मिला नहीं. आज गांड मिली थी तो छोड़ने का मन नहीं था.
आहहह अहहह. अहह. ओममममम
अभिषेक बस कुछ देर और बस अहहह अहहह अह्ह्ह्ह अहःअहः… जोर जोर से में अपना लंड अभिषेक की गांड में पटकता रहा. अह्हह्ह्ह्ह अहह.
पास में हाइवे पे गाड़िया चल रही थी. तो अभिषेक की आवाज उसमे दब गयी.
कुछ देर बाद मेरे लंड ने अभिषेक की गांड की दरार में पानी छोड़ दिया. आहहहहहहह. शरीर मानो तड़पते हुए पानी छोड़ रहा था. अहहहहह…
सारा पानी अभिषेक की गांड में छोड़ दिया.
फिर में पीछे हटा. अपनी पैंट पहनी. अभिषेक भी रोती हुई शकल लेके अपनी पेंट ऊपर खींचने लगा. मेने उसे कहा. कुछ नहीं हुआ. घर जाकर गांड धो देना.
और मेने अपनी जेब से अभिषेक को ५०० रुपये दिए और कहा. ये रखो.
ठण्ड बहोत है न बाहर इसलिए मुजसे रहा नहीं गया. ये सारि बाते किसी नहीं बताना. हमारे बिच ही रखना.
अभिषेक चुपचाप गाड़ी में बैठ गया. हम घर चले आये
अब दूसरे दिन सुभह के नास्ते के वक्त मेरी नजर अभिषेक से मिली. वो भी खुश लग रहा था. काम पे जाते समय मेने अभिषेक को कहा चलता हु. रातको मिलते है.
लेकिन काम ज्यादा होने की वजसे मुझे घर आने में देरी हो गयी. घर आया तो सभी सो गए थे. रातके करीब १२ बज ही चुके थे. में ऊपर के कमरे में सोता था.
मेने कपडे बदले और सोने जा ही रहा था के. तभी मेने अभिषेक को खिडकीसे ऊपर आते हुए देखा. मेने तुरंत दरवाजा खोला. अभिषेक अंदर आया. मेने दरवाजा बंद किया.
सरे सो गए थे. में अभिषेक को देखकर बहोत कुछ हुआ. लंड पैंट में मचलने लगा. अभिषेक को कहा आज देर हो गयी घर आने में इसलिए बाहर जा नहीं पाए. उसके चेहरे पे एक ख़ुशी थी. उसे देखकर पता चल रहा की कल जो हुआ, अभिषेक को भी उसमे मजा आया.
बाते करते हुए मेने प्यार से उसकी पीठ पे हात घुमाया. पीठ से होकर मेरा हात उसकी गांड पे चला गया. मेने अभिषेक की गांड दबाकर कहा, ज्यादा वक्त नहीं है हमारे पास.
ऐसे कहते हुए मेने अभिषेक के सामने अपना लंड पेंट की ऊपर से ही दबाना सुरु किया. लंड पहले से ही तना हुआ था.
मुजसे रहा नहीं गया. मेने अभिषेक का हात पकड़ा और अपने लौड़े पे लगाया. अभिषेक भी शरमाते हुए मेरा लंड दबाने लगा. आहहहहा. अभिषेक का हात लंड पे लगते ही मेरा शरीर उछलने लगा. मेने अभिषेक को करीब लिया और उसे होठो पे चुम लिया. उम्म्म्म अम्माम्मा. अभिषेक मेरा लंड दबाये जा रहा था.
हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे. आहहह. अहःअहः. उम्मम्मम ममममम अम्मम्म
फिर मेने अभिषेक को निचे बिठाया. उसने मेरी पेंट निचे खींची और जैसे ही लंड बाहर निकला उसने तुरंत लंड को मुँह में लेलिया. अभिषेक जिस उस्साह से लंड को चूस रहा था, मानो वो भी रहा देख रहा था इस मौके का.
अभिषेक ने जोर जोर से लंड को हिलाके चूसना सुरु किया. आहाहा. उसकी जबान लंड पे घिसने लगी. अहहहहहहह. उम्मम्मम। लंड काफी बड़ा था, तो आधा ही मुँह में जा रहा था.
कुश देर चूसने के बाद मेरा लंड पानी छोड़ने के लिए तैयार था. एक पल मन में आया के मुँह में छोड़ दू. लेकिन बादमे सोचा की अभी नहीं, कही बुरा न मान जाये.
तो मेने लंड को अभिषेक के मुँह से बाहर खींचा और उसके सामने ही हिलाते हुए फर्श पे सारा पानी उदा दिया. अह्ह्ह्ह अहहहहह
अहहहह अहहहह
पानी की पिचकारी काफी दूर तक गयी. हाहाःहाह उम्मम्मम्म अअअअअ
फिर अभिषक खड़ा हुआ. मेने प्यार से उसे फिर से होठो पे किस किया और वो चला गया.
उस दिन रातभर में यही सोचता रहा की अभिषेक को चोदना ही पड़ेगा. यही मौका है. सोचते सोचते मुझे याद आया. कुछ दूर एक गांव में मेला लगने वाला है. वह बड़ी पूजा भी होती है.
मौसी को कहकर २ दिन के लिए अभिषेक को वह ले जाता हु. रूम ले लूंगा और पूरी रात अभिषिक की गांड मरूंगा.
मुझे ये प्लान सही लगा.
दूसरे ही दिन सुभह जब मौसी किचेन से बाहर आयी. मेने मौसी को ये बात बताई. मौसी तुरंत मान गयी.
अभिषिक कुछ देर बाद वह आया तो मौसे ने उसे भी ये बात बताई. हम दोनों की फिर से आँखे मिली. अभिषेक ने भी है कह दिया.
में बहोत ही खुश हुआ.
हमने शामको ही जाने का प्लान किया. में बहोत ही उस्साहित था.
शामको हम निकले मेरी गाड़ी लेकर. करीब २ घंटे बाद हम उस गांव पोहचे. वहा बहोत ही अछि रौनक थी. मेला लगा हुआ था. चारो तरफ लोग ही लोग.
मेने एक होटल में कमरा लिया था. हम सीधा होटल में पोहचे. खाना हमने आते समय ही खा लिया था.
कमरे में आये. कमरा छोटा ही था. एक बड़ा बेड था.
हम दोनों ने अपने कपडे बदले.
अभिषेक बोतल से पानी पि रहा था. तो मेने उसे पिछेसे पकड़ा और कहा. आज की रात तुम मेरी बीवी हो. और में उसके सीने पे हात घूमने लगा. उसकी गांड पे मेरा लंड घिसने लगा.
अभिषेक ने अपने हातो में जो बोतल पकड़ी थी वो टेबल पे रखी, मेने उसे अपनी तरफ घुमाया और होटो पे चूमने लगे. आआह्ह्ह हम्म्म उम्म्म्म अम्म्म
दोनों एक दूसरे की पीठ पे हात घुमा रहे थे. कुछ ही देर बाद मेरा हात अभिषेक की पीठ से होकर उसकी गांड पे चला गया और में अभिषेक की गांड दबाने लगा.
अहह उफ्फ्फ्फ़ अहहह… अहाः…
अभिषेक की गांड दोनों हातोंसे से दबाकर में उसको चुम रहा था. आह्हः अहःअहः
फिर मेने उसकी टीशर्ट उतार दी. उसके निप्पल को उंगलियों से मसलने लगा. गर्दन पे चूमते हुए निचे आया और अभिषेक के निप्पल चूसने लगा. आहहहह.. अहःअहः. गुलाबी निप्पल थे अभिषेक के. अहहह. उम्मम्मम्म
बाहर की ठण्ड और अंदर की गर्मी का एक अजीब सम्मलेन हो रह था. दोनों के शरीर तप रहे थे. मेने भी अपना टीशर्ट उतर दिया. अभिषिक को गले से लगाकर अपना बदन उसपर घिसने लगा.
मेने अभिषेक को बेड पर लिटाया और उसको अपने ऊपर ले लिया. वो मुझे चूमने लगा. और मेरे भी निप्पल चूसने लगा. जीभ से मेरे निप्पल चाटने लगा. आहहहह अह्ह्ह मजा आ रहा था. धीरे धीरे अभिषेक निचे गया. पेट को चूमते हुए निचे आया. मेरी पेंट खींचकर उसने उतर दी. में पूरा नंगा, लंड खड़ा.
अभिषेक ने जरा भी देर ना की और मेरे लौड़े को मुँह में लेकर चूमने लगा. आहहह. अहहहह. जैसे ही अभिषेक ने चूसना सुरु किया, में बेड पे तड़पने लगा.
अहहह अहहह उम्म्म्म अहहहह अहहह.
मेरा शरीर भट्टी की तरह तप रहा था. अभिषेक ने पहले अछि तरह मेरा लंड चूसा फिर मेरे गोटो को भी चाट चाटकर चूस लिया.
फिर मेने अभिषेक को निचे सुलाया. उसको भी नंगा किया. उसका छोटासा लंड मुझे दिखने लगा. मेने अभिषेक के ऊपर अपना पैर रखा और उल्टा होकर ६९ की पोजीशन में अभिषेक के मुँह में अपना लैंड दे दिया.
वह अभिषेक ने मेरा लंड मुँह में लिया, यहाँ मेने उसका लंड चूसना सुरु किया. अहहह. अहःअहः अहहह. अभिषेक के लंड को मुँह में पकड़कर चूस रहा था. अभिषेक भी मेरा लंड चूस रहा था.
काफी देर बाद जब में उठा. मेरा मन अभिषेक की गांड देखने का था. मेने अभिषेक को पलटा. जैसे ही उसकी गांड मेरे सामने आयी. मेरी आँखे बड़ी हो गयी. आह्ह्ह्ह क्या गांड थी अभिषेक की. मेने सीधा अपना मुँह अभिषेक की गांड में डाला और प्यार से चूमने लगा. ह्ह्ह्ह. उम्म्म्म उम्म्म्म
अभिषेक आहहह. अहहह. गांड को दबाते हुए चूमने लगा. जीभ से अभिषेक की गांड को चाटने लगा. उम्मम्मम यह
गांड के गड्ढे में अपनी जीभ डालकर चाट लिया. अपनी ऊँगली गांड में डालकर अंदर बाहर करने लगा. उम्मम्मम अम्म्म
अभिषेक की गांड से मुझे प्यार ही हो गया था.
फिर में पीछे हटा. अब गांड मरने की बारी थी. मेने सामने राखी तेल की बोतल ली. गांड की दरार में तेल डालकर गांड के गड्ढे को ठीक तरह से मसाला. ऊँगली से गांड के गड्ढे को तेल से भर दिया.
फिर थोड़ा तेल अपने लौड़े पे लगाया. लौड़े को तेल से घिसा, फिर बोतल रखकर, अभिषेक को घोड़ी बना दिया. अभिषेक का मुँह बेड पर और गांड पीछे से ऊपर उठाकर मेने लौड़े को धीरेसे अभिषेक की गांड में डालना सुरु किया. धीरे धीरे गांड में लंड जाने लगा. अभिषेक गांड हिला रहा था. मेने कसकर उसकी गांड पकड़ी. जैसे ही आधा लंड गांड में चला गया.
धक्का देकर पूरा लंड अभिषेक की गांड में डाल दिया. आअह्हह्हह्ह. पूरा लंड अब अभिषेक की गांड में था. मेने दबा के रखा था.
अभिषेक की पीठ पे हात घूमते हुए लंड को धीरे धीरे गांड से अंदर बाहर करने लगा. अहहह अहःअहः. गांड में लंड अछि तरह फस गया था. अहहहहह अहहहह. उम्मम्मम्म
मजा आने लगा. मेने धीरे धीरे अपनी गति बधाई और अभिषेक की गांड जोर जोर से मरने लगा. अहहह आह्हः अहहह अहहहह. उम्म्म ामममम ामा
अभिषेक अपना मुँह बेड पे दबाकर आवाज को दबा रहा था. में यहाँ पागल ही हो चूका था. मेने जोर जोर गांड मरना जारी रखा. अहहह अहहहहह…..
जैसे जैसे अंत नजदीक आ रहा था. में और जोश में गांड मार रहा था. अहहह अहःअहः हाहाहा. दोनों हातोंसे कसकर अभिषेक की कमर पकड़ राखी थी. और जांग को जोर से अभिषेक की गांड पे पटक पटककर उसे चोद रहा था
काफी देर तक चुदाई चली. फिर मुझे महसूस हुआ लंड अभी पानी छोड़ने वाला है. मेने जोर जोर से चुदाई की और अभिषेक की गांड में ही सारा पानी छोड़ दिया.
अहहहहहह. उम्मम्मम्म अहहहहहह अहहहहहह
अहहहह अहहहहहहहहह
आज स्वर्ग सुख का आनंद मिला. आहहहहहहह
कुछ देर तक मेने लंड को गांड में ही दबाये रखा.
फिर लंड को बाहर खींच लिया.
दोनों कुछ देर ऐसे ही सोये रहे.
उस दिन मुझे चोदने का असली आनंद मिला.
दो दिन हम वही थे. दो दिन हमने खुप चुदाई की.
घर आये तब अभिषेक ने भी किसी को कुछ नहीं बताया.
कैसी लगी मेरी चुदाई की कहानी जरूर कमेंट करके बताना