गांव में माँ का भी मन कर गया चुदने का
रातकी बस थी. माँ ने मुझे घरमे आवाज लगायी. सोनू बैग भरके तैयार रखना. मेने अपनी बैग भरकर रख दी थी. कॉलेज की भी छुट्टिया चल रही थी तो और बहोत सालो बाद गांव जाने का मौका मिला था. इसलिए में बहोत ही खुश था. रातको १० बजे में और माँ मौसी के घर जाने निकले. रास्ता पहाड़ियों से घिरा था. रातभर बस चलती रही. उसी अंधेरेमे माँ को कई बार मेरा हात लग रहा था. एक दो बार तो मेरी कोहनी माँ के स्तनों को घिसी भी. स्तनों की कोमलता मुझे महसूस हुई.
मुझे वैसे नींद नहीं आ रही थी. तो खिड़की से बाहर देखते हुए जा रहा था. उसी दौरान चलती हुई बस में माँ का पल्लू फिसला। माँ सोइ हुई थी तो माँ का ध्यान नहीं रहा. पल्लू हटते ही माँ के स्तनों की बिच की दरार साफ दिखने लगी. ब्लाउज़ से ऊपर उठे कोमल स्तन बाहर आ रहे थे. चलती हुई बस में खिड़की से आती हुई पिली लाइट में माँ के स्तनों को निहार रहा था.
स्तनों देखकर मन में आया, अगर ये चाटने मिले तो कितना मजा आएगा. काफी देर तक माँ का पल्लू निचे गिरा रहा. एक हात से में अपने लंड को दबाते हुए माँ की तरफ देख रहा था. माँ के गालो को देखते हुए ख्याल आया. काफी अछि दिखती हे माँ.
कुछ देर बाद जब पास से जाने वाले ट्रक ने हॉर्न बजाय तब माँ की नींद खुली. उसने देखा पल्लू निचे गिर गया है तो तुरंत उठाकर स्तनों को धक् दिया. मेरी तरफ देखा तो में सोने का नाटक कर रहा था.
माँ को लगा किसी ने कुछ नहीं देखा. वो वापस सो गयी.
सुभह करीब ८ बजे हम गांव पोहचे. बहोत ठण्ड थी गांव में. वह से मौसी का घर कुछ दुरु पे था.
हम मौसी के घर पोहचे. मौसी बहोत खुश हुई हमें देख. बहोत सालो के बाद मिल रहे थे. मौसे के पति, काम के सिलसिले बाहर थे. दो दिन बाद आएंगे ऐसे मौसी ने कहा.
पूरा दिन हमारा बातो में और गांव के कुछ पहचान के लोगो को मिलने में चला गया. दिन कब निकल गया पता नहीं चला.
शामको घर वापस आये. मौसी ने अच्छा खाना बनाया था. गांव में अँधेरा जल्दी हो जाता है. लोग ९ बजे ही सो जाते है.
में भी खाना खाकर अंदर के कमरे में आ गया.
कुछ देर बाद माँ भी अंदर आगयी. मौसी दूसरे कमरे में सो रही थी. माँ ने अंदर आकर दरवाजा बंद किया और लाइट बंद कर मेरे ही बगल में लेकिन थोड़ी दूर सो गयी.
अँधेरा हो चूका था. ठण्ड भी बहोत थी. उस कमरे में में और माँ हम दोनों ही थे. उस शांत वातावरण में मेरा लंड खड़ा होने लगा. मेरा हात अपने आप मेरे पेंट के अंदर चला गया. में लैंड को मसलने लगा. जैसे जैसे मेरी मुठी कस रही थी, वैसे वैसे मेरा लौड़ा और भी तन रहा था. कुछ देर बाद तो मेरा पूरा शरीर गरम हो गया.
मेरी नजर बार बार माँ पर जा रही थी. माँ मेरी तरफ पीठ करके सोइ थी. खिड़की से आने वाले उजालेमे में माँ को देख रहा था.
माँ को देखते देखते पता नहीं मुझे क्या हुआ मुजसे रहा नहीं गया. में धीरेसे माँ की और खिसका. माँ के करीब जाकर मेने धीरेसे अपना लंड माँ की गांड पे चिपकाया.
मुझे लगा माँ सो गयी है. मेने हिम्मत की और में और करीब गया और लौड़े को माँ की गांड पे दबाया.
मेरा लंड माँ की गांड पे छूने लगा. बहोत अच्छा लग रहा था. मजा आ ही रहा था की तभी माँ ने हलचल की. में डर गया और पीछे खिसका
में चद्दर उठाकर सोने का नाटक किया. माँ ने थोड़ा पीछे झाका फिर वो पीठ करके सो गयी.
में बहोत ही डर गया था. मेने सोचा अब में पकड़ा ही जाता. अब कुछ नहीं करूँगा.
में सोने ही वाला था की तभी मेने देखा माँ ने हलचल की. माँ ने धीरेसे अपनी गांड पीछे मेरी तरफ खिसकायी.
में देखकर चौक गया. मुझे समाज नहीं आया में क्या करू. तभी माँ ने फिर से हलचल की और फिर से अपनी गांड थोड़ी पीछे की.
में समाज गया माँ इशारा दे रही है. मेने धीरेसे अपना लंड माँ की गांड पे फिर से चिपकाया. जैसे ही मेरा लंड माँ की गांड पे छूने लगा माँ की सिसकने की आवाज मुझे सुनाई देने लगी. में समाज गया माँ भी जगी हुई है.
मे और करीब गया और कसकर मेरा लंड माँ की गांड पे दबाया. आहहहह. बहोत मजा आ रहा था.
लंड को माँ की गांड के दबाये, मेने अपना हात माँ की पीठ पे रखा और ऊपर से निचे घूमने लगा. माँ और सिसकने लगी. आह्ह्ह्ह. सस्शह्ह्ह.
गर्दन से लेकर निचे कमर तक हात ले गया. और फिर धीरेसे मेने माँ की गांड पे हात रखा और माँ की बड़ी गांड दबाने लगा.
अहहहहह… माँ की बड़ी गांड की कोमलता महसूस करके मानो मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. आआह्ह्ह क्या गांड थी माँ की. मेरा लौड़ा उछलने लगा.
मेने धीरेसे माँ की साड़ी ऊपर की. माँ की जांग पे हात घूमते हुए माँ की निक्कर को पकड़ने लगा. फिर माँ की निक्कर को निचे खींचा. पीछे मेरे खड़े लंड को पैंट से बाहर खींचा और माँ की निक्कर को निचे घुटनो तक उतार के अपने लंड को माँ की गांड की दरार में डाल दिया. माँ थोड़ी सहम गयी. लेकिन मेने और जोरसे लंड को माँ की गांड में दबाया. अह्ह्ह्हह। .. लंड के टोपे को माँ की गांड का जो स्पर्श महसूस हुआ. अहहहहह. अहहह. बहोत ही मजा दे रहा था. अहहहह
में बड़े प्यार से माँ की गांड में लंड घिस रहा था. माँ भी जोर जोर से सिसकने लगी… फिर मुजसे रहा नहीं गया तो मेने सीधा हात आगे लिए और माँ के स्तनों को दबाने लगा. पूरी बॉडी को माँ की पीठ पे चिपकाके, अपने लंड को माँ की गांड पे दबाके, आगे की और में माँ के स्तनों को दबाने लगा. आहहहह. मेरे शरीर की गर्मी मुजसे ये सब करवाने लगी
मन ही मन में पता था की ये मेरी माँ है. लेकिन खड़े लंड के आगे मुझे भी झुकना पड़ा. में जोर जोर से माँ के स्तनों को दबाये जा रहा था. माँ की आह की आवाज धीरे धीरे बढ़ने लगी थी.
ज्यादा रत भी नहीं हुई थी. करीब ११ बजे होंगे. लेकिन गांव का अँधेरा, ठण्ड के कारन ऐसे लग रहा था के रातके तीन बज रहे है. यहाँ माँ की सिसकने की आवाज सुनकर में और भी जोश में आ चूका था.
मेने जैसे ही जोर जोर स्तनों को दबाना सुरु किया, माँ का भी सबर छूट गया, माँ पलटी और उसने मुझे होठो पे चुम लिया. होठोंको होठ लगते ही हम दोनों भी पागल हो गए. दोनों एक दूसरे को कसकर गले लगाकर चूमने लगे. मेरा हात माँ के स्तनों को दबा रहा था. चूमते चूमते मेने माँ की साडी पूरी ऊपर कर दी. माँ की पीठ पे हात घुमाते हुए माँ की गांड को पंजे से पकड़ लिया और आगे से मेरे लंड को माँ की चुत पे दबाने लगा. पीछे से गांड को दबाते हुए आगे से लंड को चुत पे घिस रहा था.
में पागल सा हो गया था. चूमते हुए माँ के ऊपर चढ़ गया. फिर होठोंसे होकर माँ के गालो को चूमने लगा. निचे निचे जाने लगा. गर्दन से होकर स्तनों पर पोहचा. ब्लाउज़ को खींचकर निकल दिया. माँ ने भी ब्लाउज़ उतारने में मदत की. स्तनों को खुलता देख मेरे मुँह से लाल टपकने लगी. जैसे ही ब्लाउज़ हटा और बड़े स्तनों का नजारा दिखा. मेने तुरंत अपना मुँह स्तनों पे रखा और चूमने लगा. आहहहह. अहहहह. अहह.
स्तनों की कोमलता पागल बनाने वाली थी. निप्पल को मुँह में लेकर चबाते हुए चूस रहा था. निप्पल को खींच खींचकर चूसने लगा. माँ जोर जोर से आह भरने लगी.
दोनों निप्पल को अछि तरह चूस लिया. फिर निचे जाने लगा. माँ की नाभि को चूमने लगा. जीभ से नाभि के आस पास चाटने लगा. आहहहह. माँ मदहोश हो गयी. जमींन पर तड़पने लगी. उस तड़पते हुए बदन पे जो बची हुई साड़ी थी वो मेने निचे खींचकर उतर दी. माँ को पूरा नंगा कर दिया. मेने भी अपना टीशर्ट उतार के फेका. निचे से अपनी पैट भी उतार दी और नाभि को चूमते हुए माँ की जांग पे आ पोहचा.
माँ की बड़ी गोरी जांग मक्खन की तरह थी. चूमने में मजा आ रहा था. पास ही दिख रही चुत चूमने का मजा दुगना कर रही थी. मेने जांग को चूमते हुए चुत की और बढ़ना जारी रखा,
जैसे ही चुत पे पोहचा, अपनी जबान बाहर निकालके चुत को चाटने लगा. अहहह. माँ की चुत बहोत ही गरम थी. आहहहह. चुत से पानी निकल रहा था. अहःअहः अहःअहः. उफ्फफ्फ्फ़. अहःअहः
मेने माँ के पैर फैलाये और चुत में जबान डालकर चाटने लगा. अहहहह उम्म्म्म अम्माम्मा अम्माम्मा..
अहंमम चुत को चाटने में बहोत मजा आ रहा था.
उम्म्म्म आम उम्म्म्म अहहहह
काफी देर चुत को चाटने के बाद जब में पीछे हटा मेरा लंड माँ को चोदने के लिए उछल रहा था.
मेने माँ के पैर फैलाके लंड को सीधा माँ की चुत में रखा और धकेल के पूरा लंड माँ की चुत में डाल दिया. लंड को चुत में फसाकर माँ के ऊपर सो गया और निचे से चोदना सुरु किया. आहहह अहहह ाहः
माँ के होठो को चूमते हुए चोदने लगा. इतनी ठण्ड में भी दोनों को भी पसीना आ रहा था. पता चल रहा था की दोनों का शरीर चुदाई के लिए बहोत दिनों से तड़प रहा था.
मेने जोर जोर से माँ को चोदा। . फिर लंड को बाहर खींचा, माँ की बगल में सो गया. फिर पिछेसे माँ को पकड़कर माँ का एक पैर ऊपर उठाया. और फिर से लंड’ को चुत में डालकर छोड़ने लगा.
अहहह. माँ सिसकने लगी. अहहह आह्हः कहा
अहहह अहहह अहहह अहहह
पुर चुदाई के दौरान मुझे माँ सिर्फ एक नंगी औरत का शरीर महसूस हो रही थी. मन में सिर्फ चुदाई के बारेमे सोच रहा था.
अहहह अहहह हम. उम्म्म्म अहाः
बहोत देर तक चोदने के बाद मेने देखा लंड को एक बार माँ के मुँह में देना चाहिए. तो में ६९ की पोजीशन में आ गया. मेने माँ के मुँह में लंड दिया और निचे में माँ की चुत में ऊँगली डालकर चोदने लगा
माँ ने भी बड़े प्यार से मेरा लंड चूसना सुरु किया. वो लंड को अपनी और खींच खिचके मुँह में ले रही थी. लौड़े के गुलाबी टोपे पे जीभ को रगड़ते हुए चूस रही थी.
अहहहहहहह. अहहह.
यहाँ में माँ की चुत को चाटते हुए माँ की चुत में एक ऊँगली अंदर दाल रहा था. अंदर ऊँगली रगड़ते हुए चुत चाट रहा था.
कुछ देर बाद में ऊपर से हटा. माँ को मेने घोड़ी बना दिया. घोड़ी बनके जैसे ही में गांड की तरफ आया. मेने माँ की गांड को चूमा. दोनों हातोंसे से गांड को अछि तरह दबाके आनद लिया. फिर लौड़े को धीरेसे माँ की चुत में डालकर चोदना सुरु किया. अहहहहहहह.
लौड़ा अब झड़ने के लिए तैयार था. मेने माँ को कसकर पकड़ रखा था और जोर जोर लौड़े को चुत में पटक रहा था. अहहह अहहहह.
लंड चुत में घिसते हुए और गरम हो रहा था. अहा अहहहहह.
माँ को चोदने में इतना मजा आएगा कभी सोचा नहीं था.
बहोत देर तक माँ को चोदा , फिर अचानक लौड़े से एक जोर को पानी की बौछार निकली. में चोदने में इतना मग्न हो गया था की लौड़े के पानी को माँ की चुत में ही छोड़ दिया.
लंड को चुत में दबा के रखा. लंड से पानी की पिचकारी निकल रही है वो महसूस हो रहा था. मजा इतना आ रहा था की लंड को मेने चुत में दबाके ही रखा.
फिर जब पूरा पानी निकला, मेने धीरेसे लंड को बाहर खींचा।
माँ और में दोनों भी थक गए थे. माँ ने साडी को ठीक किया और सो गयी. में भी कपडे पहनके सो गया.
उस दिन माँ को चोदने में बहोत मजा आया.