मेरा नाम रेनू है. में एक गर्ल्स कॉलेज के हॉस्टल में पढ़ती हु. कॉलेज की छुट्टियों में घर आयी थी. गर्ल्स कॉलेज में सभी लड़कियों के बिच मेरा दम घुटता था. हमेश ऐसे लगता के कोई तो लड़के से संपर्क हो जाये। लेकिन कहते हे ना, जो नसीब में नहीं वो कभी नहीं मिलता।
अपनी उंगलिओ से चुत को सहलाके परेशान हो गयी थी. अपने ही हातो से चुत को सहलाने में कोई मजा नहीं है. किसी मर्द का हात लगे तो शरीर में एक नयी ऊर्जा का बहाव महसूस होता है. मुझे भी वही ऊर्जा चाहिए थी.
जिस दिन से घर आयी थी, आस पास रहने वाले लड़को को देखकर बहोत मन करता के किसी न किसी को तो पटा लू. क्यूंकि ज्यादा दिन की छुट्टिया नहीं थी. कुछ दिन बाद वापस हॉस्टल ही जाना था. मेने सोचा अगर जाने के पहले एक बार किसी लड़के से चुदाई करने का मौका मिले तो मजा आ जाये। मेरी सारी कॉलेज की दोस्त किसी न किसी से छुडवाके वापस आएगी। मुझे भी इस बार अपनी चुत को लंड का दर्शन करवाना था.
कुछ दिन ऐसे ही बीत गए. कोई बात नहीं बानी। एक दो लड़को से इशारा मिला था. लेकिन फिर वो भी बादमे दिखे नहीं।
फिर एक दिन में जब सुभह उठी, तो घरमे देखा के एक जवान लड़का घरमे काम कर रहा था. में उठकर बाहर आयी. और नास्ता करने बैठी, तो माँ ने बताया के हमारे यहाँ जो दीदी काम करती है, ये उनका लड़का है. गांव से आया है. आज से हमारे यहाँ साफ़ सफाई का काम करेगा।
में ये बात सुनकर अंदर से बहोत खुश हुई. क्यूंकि जब मेरी पहली नजर उसपर पड़ी, तब वो लड़का टीशर्ट पहने था, उसने हाफ पेंट पहनी थी. दिखने में गोरा और लगभग मेरी ही उम्र का था. भोलासा चेहरा। में जब टेबल पे बैठे नास्ता कर रही थी. तब मेरे आस पास कोई नहीं था. वो लड़का जिसका नाम माँ ने विकी बताया वो टीवी को पोछ रहा था. मेरी नजर उसे ऊपर से निचे टटोल ने लगी.
उसे काम करते हुए देख मेरी चुत जग गयी. मेरा बदन धीरे धीरे गरम होने लगा. फिर जब वो पलट के सामने राखी चीजों को पोछ रहा था, मेरी नजर उसके लंड की और गयी. विकी के लंड की तरफ देखते हुए मेरी सासे बढ़ने लगी. मेरी आखो के सामने ही वो खड़ा था.
लेकिन अभी घरमे माँ भी थी तो कुछ करना सही नहीं था. कुछ देर बाद में अपने कमरे में गयी. पुरे वक्त मुझे वीकी का ही ख्याल आ रहा था.
तभी दरवाजे की घंटी बजी. गैस का सिलेंडर लेकर आदमी आया. माँ उससे बाते करने में लग गयी. मेने विकी को अपने कमरे की तरफ बुलाया। और उसे कहा के मेरी ये अलमारी है, इसके पास भी थोड़ा साफ़ कर दो.
उसने धीमी आवाज में कहा जी मालकिन अभी कर देता हु.
विकी मेरे कमरे में आकर साफ सफाई करने। में उसे देखने लगी. दरवाजा वैसे खुला ही था. माँ की बाहर बाते करने की आवाज मुझे सुनाई दे रही थी.
मुझे विकी को अपने करीब लाना था. तो मुझे एक तरकीब सूजी, मेने अपना कुरता गले से निचे किया ताके मेरे स्तन ऊपर से दिखाई दे.
कुरता को जितना हो सके गले से निचे करके, में विकी खड़ा था उसी के बगल में जो किताबे राखी थी, वो उठाने लगी. जब में निचे बैठे किताबे उठा रही थी तब मेने देखा विकी मेरी तरफ मुदा। उसकी नजर मेरे स्तनों पे पड़ी. में निचे गर्दन लिए किताबो को धीरे धीरे समेट रही थी.
तभी मेरा ध्यान गया, विकी ने हल्केसे अपने लंड को हात लगाया, उसने मेरी तरफ देखते हुए अपने लंड को धीरे से दबाया। में निचे बैठी तो मेरे काफी करीब ही उसका लंड था. मेने जानबूझकर अपनी दोनों हात नजदीक लेकर अपने स्तनों को बिच में दबाया ताके ऊपर से और भी बड़े दिखे। स्तनों का वो उभर देखकर विकी की हालत भी बिघड रही थी. मेने देखा वो बार बार अपने लंड को छू रहा है. मेने जब तक साडी किताबे समेट ली तब तक तो विकी का लंड खड़ा हो चूका था.
मेने जब आखिरी बार गर्दन ऊपर लेकर विकी के लंड की तरफ देखा तो पैंट के ऊपर उसका तम्बू बन गया था. में छोड़ा चौक गयी. माँ भी घरमे थी. अब ये कैसे बाहर जायेगा इसका मुझे डर लगने लगा. माँ ने देख लिया तो.
में वीकी का खड़ा लंड देखकर खुद ही डर गयी और पीछे मुड़कर खड़ी हुई. अपना कुरता ठीक किया और खुद ही कमरे के बाहर खड़ी हो गयी.
मेने देखा माँ सामने वाली आंटी के घर के बाहर खड़ी होकर बाते कर रही है.
में दबे पाव फिरसे मेरे कमरे में आयी. विकी अभी भी वही खड़े होकर सफाई कर रहा था. मुझे साफ दिख रहा था के उसका लंड खड़ा हो गया है.
मेने उसे कहा तुम जाओ अब बाहर। वो चला गया.
उस वक्त अगर माँ नहीं घरमे होती तो विकी के साथ कसकर चुदाई करती।
लेकिन उस दिन जो मेने विकी के शरीर में आग लगायी। वो आगे जाकर बढ़ती ही गयी. मेने देखा जब भी में विकी के सामने आती वो मुझे ताड़ते रहता। उसकी नजरे मेरे शरीर को ऊपर से निचे घूरती रहती।
दूसरे ही दिन सुभह के वक्त जब माँ नहाने गयी थी. विकी मेरे कमरे के आसपास ही घूम रहा था. मेने जैसे ही दरवाजा खोला, वो सामने खड़े रहकर टेबल की सफाई करते हुए मेरे कमरे में देख रहा था. मेने भी सोचा मौके का फायदा उठा लेती हु. माँ अभी भी नहा रही थी.
मेरे कमरे का दरवाजा आधा ही खुला था. में नींद से उठी और अंगड़ाई लेते हुए दरवाजे के सामने ही खड़ी थी. विकी मुझे बाहर से देख रहा था.
मे रातको सोते हुए शार्ट पैंट और टीशर्ट पहनती थी. मेरी जांग दिख रही थी. मेने झुककर अपने बदन को थोड़ा ढीला करने लगी. अपनी कमर को हिलने लगी. आखिर में मेने अपनी टीशर्ट उतारी और ब्रा में फसे मेरे स्तनों को दिखाकर मेने विकी को और उत्तेजित करना सुरु किया। दरवाजे के सामने ही झुककर में उसे अपने बड़े बड़े स्तनों के दर्शन दे रही थी. कुछ देर बाद जब मेने तिर्की नजर से उसकी तरफ देखा तो वो फिरसे अपने लंड को मसल रहा था.
में थोड़ा मुस्कुरायी और उसे अपनी हलचल से ललचाती रही. काफी देर वो वही खड़ा रहा. फिर मेने सोचा अभी माँ आ जाएगी नहाकर तो मेने दरवाजा बंद किया और कपडे पहन लिए.
माँ घरमे थी इसलिए विकी को मेरे करीब आने का मौका नहीं मिल रहा था. लेकिन उसकी नजरे मेरी तरफ ही थी.
पूरा दिन किसी तरह बीत गया. फिर शाम को मुझे अपने कमरे में पडोसीकी आंटी की आवाज आई. वो माँ को पुकार रही थी.
माँ दरवाजा खोलकर बहार उससे बात करने चली गयी. कुछ देर बाद मेरे कमरे के दरवाजे के पास आकर बोली। पास ही में एक साडी की सेल लगी है. वो पड़ोस की आंटी के सात जा रही है. कुछ देर में वापस आएगी कहकर वो निकल गयी.
माँ जब निकल रही थी, तब हमारा नौकर विकी घरमे ही था. हम दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा। दोनों को पता था के ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा। दोनों की नजरे माँ की तरफ थी. विकी अंदर किचेन में चला गया. और माँ निकल पड़ी कहकर के जल्दी आ जाउंगी। में मन में सोच रही थी के आराम से आना माँ.
माँ चली गयी. मेने दरवाजा अंदर से ठीक से बंद किया। पीछे मुड़ी तो विकी किचेन से मुझे देख रहा था.
मेने उसकी तरफ देखा और अपने कमरे में चली गयी. आगे क्या होगा ये सोच सोच कर मेरा शरीर गरम होने लगा.
में कमरे में खड़ी थी, तभी विकी पीछे से मेरे कमरे के पास आया, मेरे सामने जो टीवी थी, उसमे मुझे वो साफ़ दिखाई दे रहा था.
वीकी कमरे में दबे पाव आया और उसने मुझे पिछेसे कसकर पकड़ लिया। मेरी सास फूल गयी. उसके शरीर का स्पर्श पीठ पे होते ही, मेरे शरीर में अजीब सी हलचल होने लगी.
विकी ने कसकर मेरी कमर पकड़ी और मेरे गर्दन को चुम लिया। वही पे में पिघल गयी. उसके चेहरे को अपनी गर्दन पे छूते हुए महसूस करते में अपने आप को संभल रही थी.
लेकिन विकी भी काफी तड़प रहा था, उसने जब देखा के में भी सिसकते हुए आनंद ले रही हु. तो उसने अपने दोनों हात मेरे स्तनों पे रखे और जोर से दबाने लगा. अह्ह्ह उम्म्म आअह्ह्ह। उसके बड़े पंजो से मेरे स्तनों को जब वो दबाने लगा, मेरे निप्पल तन गए.
किसी मर्द का स्पर्श शरीर पे महसूस करना बहोत ही अनोखा अनुभव होता है. विकी ने फिर मुझे पलटा, मेरी तरफ देखा और मेरे होठो को चुम लिया, उम्म्म्म। दोनों ने एक दूसरे को कसकर गले लगाया और होठो को चूमने लगे. दोनों भी हवस से भरे थे, कब से एक दूसरे के करीब आने के लिए तड़प रहे थे.
दोनों की जबान एक दसूरे पे घिसते हुए होठो को चुम रहे थे. उम् अम्मम्म अम्म्मा।।।। विकी फिर से जोर जोर से मेरे बड़े स्तनों को दबाने लगा. अहहह अह्ह्ह अह्ह्ह अहह.. उम्म्म। बहोत मजा आ रहा था.
स्तनों को दबाते हुए विकी ने मेरा पहना हुआ टीशर्ट उतार दिया। ब्रा दिखने लगी. चूमते हुए ही ब्रा के ऊपर से स्तनों को दबाने लगा. अह्ह्ह। ओमममम। मुजसे भी रहा नहीं गया तो मेने भी उसकी टीशर्ट उतार दी. उसके साइन पे अपने हात घूमने लगी. उसका शरीर भी भट्टी की तरह तप रहा था.
फिर मेरे होठो को चूमते हुए वो नीचे जाने लगा. मेरे ब्रा से ऊपर उठे स्तनों को चूमने लगा. मेने अपना ब्रा खोला और स्तन जैसे ही दिखने लगे, विकी तो पागल ही हो गया. ब्रा हटते ही मेरे दोनों स्तनों को जोर से पकड़कर दबाने लगा और खड़े निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा. अहह अम्म्म। उम्मम्मम। आआअह्ह्ह्ह
बहोत मजा आ रहा था जब विकी मेरे निप्पल को चूस रहा था. मेरी चुत गीली हो चुकी थी.
स्तनों को चूसने के बाद जब विकी पीछे हटा उसकी आखे नशीली दिख रही थी. उसने मुझे पीछे पलग पे सुलाया, और मेरी पहनी हुई शार्ट पैंट खींचकर उतरी।
में अब बेड पे सिर्फ पैंटी में सोई थी. मुझे देखते हुए विकी ने अपनी भी पेंट उतारी। मुझे उसकी अंडरवेर का उठाव देखकर समाज आया था के विकी का लंड काफी बड़ा निकलने वाला है.
विकी मेरे ऊपर आया और मुझे चूमने लगा. होठो से सुरवात की और निचे चूमते हुए जाने लगा. अह्ह्ह्ह। स्तनों से होकर जैसे निचे मेरी नाभि पे पोहचा, अपनी जबान नाभि में घुसेड़ के चाटने लगा. आह्ह्ह्ह। में तड़पने लगी. अह्ह्ह उम्म्म अम्म्म। आआअह्हह्ह्ह्ह
नाभि को चाटते हुए जैसे ही वो निचे गया, उसने मेरी पैंटी दोनों हातोंसे पकड़ी और खींचकर उतार दी. मुझे पूरा नंगा कर लिया। फिर पैर फैलाकर जैसे ही उसने अपने होठ मेरी जांग पे रखे, में पागल ही हो गयी. मेरी गोरी जांग को चाटते हुए वो चुत की तरफ बढ़ गया. अह्ह्ह्ह अहहह। मेरा तड़पता बदन अहह हहह…
चुत को जैसे उसके होठ लगे, मेने आखे बंद कर ली. विकी ने अपनी जबान से मेरी चुत चाटना सुरु किया। अह्ह्ह।। इसी का तो इंतजार था. अहहह अहहह। मेरी गीली चुत को वो चाटे जा रहा था. अह्ह्ह। उम् उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह।।
ऊँगली चुत में डालकर घिसने लगा. चुत का दाना ढूंढ़कर जब उसने उसपे अपनी जबान रगड़ना सुरु की मेरे शरीर की गर्मी आसमान छूने लगी. मेने पैरो की कैची बनायीं और विकी को अपनी चुत में दबोच लिया। विकी को अपनी चुत पे दबाने लगी. अह्ह्ह्ह अह्ह्ह।। विकी रुका नहीं वो चुत को चाटे जा रहा था
काफी देर बाद जब मेने उसे छोड़ा, विकी पीछे हटा, उसने अपनी अंडरवेर निचे उतरी। और लंड को बाहर निकला, विकी का लंड’देखकर में बहोत खुश हुई. काफी बड़ा और तना हुआ था विकी का लंड. विकी ने मुझे हात पकड़कर उठाया और बेड के कोने में ही भिटाये, मेरे सामने अपना लंड लेकर दे दिया। मेने तुरंत लंड को मुठी से पकड़ा, और हिलाते हुए उसे मुँह में ले लिया। अह्ह्ह अहहह। उम्म्म। अम्म्मम्म ऍम.. मुँह में लेकर लंड को चूसने लगी. अह्ह्ह अहह..
विकी के लंड को पकड़के हिलने में और चूसने में बड़ा मजा आ रहा था. अह्ह्ह उनममम। अम्मम्म अम्म्म मम. जितना मुँह में ले सकी उतना अंदर लेकर चूस रही थी. उम् ममम अम्म्म। अम्म्मम्म
उसकी गोटियों को हातो से मसल रही थी. लंड और गोटियों को चाटकर गिला किया।
उसके बाद विकी ने वही मुझे सुलाया, मेरे पैर फैलाये और धीरेसे से अपने लंड को मेरी चुत में धकेल दिया, आह्हः अहहह। इतना बड़ा लंड चुत को रगड़ते हुए जब अंदर जा रहा था, मेरे तन मन में आग लग गयी. आह्हः। अह्ह्ह। उफ्फफ्फ्फ़। अम्म्मम्म बहोत मजा आ रहा था.
विकी ने पूरा लंड अंदर धकेला और फिर सुरु हुई चुदाई। आअह्ह्ह। धक्के देते हुए विकी ने मेरी चुत को चोदना सुरु किया अह्ह्ह अहहह ः…
उसका लंड पूरा अंदर तक जा रहा था. काफी बड़ा और कठोर लंड अंदर लेते हुए जो मजा आ रहा था वो में शब्दों में बयां नहीं का सकती। अह्ह्ह्ह अहहह। मुझे चढाई का यही पल बहोत आनंद देने वाला लगता है.
अह्ह्ह अहहह। उम्म्म्म विकी चोदो मुझे आअह्ह्ह। कबसे चुत तुम्हारे लंड की प्यासी थी. आह्हः। अपनी मालकिन की बात मानोगे न.
विकी कहने लगा, हह मालकिन। आज आपकी चुत को जो में मजे दूंगा वो किसी ने आपको नहीं दिए होंगे। और जोर जोर से लंड को चुत में मारने लगा. अहह उम्म्म्म अम्मम्म।
बहोत देर विकी ने चुदाई की. फिर मुझे कहा मुद जायो। जैसे में मुड़ी, मेरी गांड पे चपेट मरने लगा. अहहह। उसके मर्दानी हातो से जो चपेट गांड पे पड़ रही थी, उससे एक अजीब सी उत्तेजना होने लगी, मेरी मोटी कोमल गांड पे उसकी उंगलिया छप गयी. फिर वो मेरी गांड को चूमने लगा. दोनों हातोंसे से गांड को मसलने लगा. अह्ह्ह अहहह उम्मम्मम।।।।
जैसे ही गांड से उसका हात हटा, उसने मुझे घोड़ी बना दिया। मेने अपनी गांड ऊपर की. घुटनो पे बैठी, विकी पीछे से आया, और अपना लंड मेरी चुत में डालकर जोर जोर से चोदने लगा अहह अहहह
में अपना मुँह बेड पे रखे सिसकती हुई अहह अहह विकी आह्हः अहह चोदे अह्ह्ह अहह हाउफ्फ्फ्फ़ फ़फ़फ़फ़फ़
विकी ने मुझे कसकर पकड़ा था और चुत में लंड को जोर जोर से मारे जा रहा था. अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़। अम्मम्म अम्म्म
चुदाई चली जा रही थी. और बहोत मजा आ रहा था.
देखते ही देखते मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया। में झड़ गयी. विकी अभी भी लगा रहा. उसका लंड चुत के भीतर जाकर सारा पानी बाहर खींच रहा था. अह्ह्ह अहहह अहहह उम्म्म अम्म्म
कुछ देर बाद विकी चिल्लाया, निकलने वाला है. तो मेने उसे कहा बाहर निकालो।
जैसे ही उसने लंड झटकेसे बाहर खींचा, में पलट गयी और उसके लंड को मुँह में ले लिया। मुँह में विकी का लंड आते ही उसने पानी गिरना सुरु किया। लंड से बहोत सारा गरम पानी गिरने लगा. मेने लंड को मुँह में ही दबाये रखा और पूरा पानी पि गयी. उम्मम्मम्म अम्म्म। अम्म्म।
विकी सिसकते हुए अह्ह्ह आह्हः। मालकिन अह्ह्ह अहहह अहह.
पानी पूरा गिरने के बाद जाकर विकी का लंड शांत हुआ.
माँ आने के पहले हमने अपने कपडे पहन लिए. और सबकुछ जैसे पहले था वैसेही रखकर बैठ गए. कुछ देर बाद माँ आयी.
वो मुझे अपनी नयी ली हुई साड़िया बताने लगी. वो अपनी साडिया लेकर खुश थी. और में यहाँ चुदाई करके खुश थी.
उस दिन के बाद विकी ने मुझे काफी बार चोदा। . हॉस्टल में वापस जाने तक हमने बहोत बार चुदाई की
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