शामको में जिम से आया, लिफ्ट के लिए रुका था, तभी हमारे बिल्डिंग के ७वी मंजिल पे रहने वाले अंकल अपनी बीवी राधिका के साथ आये. मेने उनको देखा, हमारी बाते हुई. राधिका आंटी शर्मा रही थी. लेकिन हमारी आखे मिल रही थी. अंकल ने पहले पूछा कोनसे जिम में जाते हो. तो मेने बताया के पास की ही जिम है वहा जाता हु. बातो बातो में कहा मुझे भी पहले जिम का शौक था लेकिन काम के चलते वक्त ही नहीं मिला।

फिर आगे उन्होंने कहा, राधिका को भी योगा का शौक है. वो घरमे योगा करती रहती है. मेने एक नजर राधिका आंटी की तरफ देखा। उनके बड़े बड़े स्तनों को देखकर तो लग रहा था की अच्छा योगा करती होगी। उनके पहने हुए सलवार कमीज में तो स्तन काफी बड़े लग रहे थे.

अंकल ने मेरे हात पे बने टैटू को देखकर कहा ये काफी अच्छा लग रहा है तुमपर। तुम तो एकदम शेर की तरह हो. में थोड़ा शर्मा गया. राधिका आंटी भी मुझे देखकर मुस्कुराने लगी.

तब तक लिफ्ट आ गयी और हम अंदर चले आये. लिफ्ट छोटी होने की वजसे में और राधिका आंटी पीछे खड़े थे. अंकल हमारे आगे खड़े थे. लिफ्ट का दरवाजा बंद हुआ और जैसे ही लिफ्ट ऊपर जाने लगी. राधिका आंटी और में, हम दोनों एक दूसरे को देखने लगे. वो मुस्कुराई, में मुस्कुराया। मुझे लगा आंटी मुझे इशारा दे रही है. तो मेने धीरेसे अपना हात आंटी के हात के नजदीक लिया। जैसे ही हमारी उंगलिया टकराई। आंटी ने मेरा हात पकड़लिया। अह्ह्ह। आंटी के कोमल हातो का स्पर्श महसूस होते ही मेरे शरीर में गुदगुदी होने लगी. लंड तिलमिलाने लगा. अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़

अंकल की पीठ के पीछे, में राधिका आंटी का हात पकड़कर खड़ा था. उंगलिया बाते कर रही थी. दोनों की आँखे भी मिली। आंटी के बदन को देखकर मुजसे रहा नहीं गया. तो मेने धीरेसे अपना हात आंटी की कमर पे रखा. और राधिका आंटी की पीठ सहलाने लगा. आंटी शांत खड़ी रही. मन तो बहोत कुछ करने का था, लेकिन तबतक लिफ्ट ऊपर पोहच गयी. मुझे अपना हात वापस पीछे लेना पड़ा.

लिफ्ट का दरवाजा अंकल ने खोला और दोनों निकल गए. मेरा घर ९ वि मंजिल पे था तो में ऊपर चला गया. लेकिन उस दिन से दिल में जो आग लगी, वो जलती रही. दो दिन तक में आंटी को ढूंढ़ता रहा लेकिन वो मुझे दिखाई नहीं दी. फिर दो दिन बाद मुझे अंकल बिल्डिंग के सामने दुकान थी वह मिले। में जानभूझकर दुकान के बाहर रुका रहा. जैसे ही अंकल आये. उन्होंने मुझे देखा और हमारी बाते होने लगी. अंकल ने तब बताया। वो और राधिका आंटी घूमने बाहर गए थे. सुभह ही आये.

बातो बातो में अंकल ने पूछा। तुम योग करते हो. तो हड़बड़ाहट में मेने कहा, हां में योग करता हु. तो एक काम करो. आज शाम को ८ बजे घर आकर आंटी को थोड़ा योग शिका देना ना. उसे कोई सीखने वाला चाहिए था.

में उनकी बात सुनकर खुश हुआ. मेने तुरंत हा कर दिया। फिर अंकल वहा से चले गए.

मेने शामको राधिका आंटी के घर जाने की पूरी तैयारी कर ली. मन ख़ुशी से उछल रहा था. काफी उत्तेजित हो चूका था. अपनी उत्तेजना देखकर मुझे लगा इतनी उत्तेजना में में जल्दी झड़ जाऊंगा। इसलिए आंटी के घर जाने के पहले मेने एक गोली खा ली जिससे लंड देर तक खड़ा रहे.

ठीक ८ बजे में राधिका आंटी के घर के बाहर था. दरवाजेकी घंटी बजे. आंटी ने दरवाजा खोला। हम दोनों ने एक दूसरे को प्यार से देखा। आंटी ने मुझे अंदर बुलाया।

दरवाजा बंद हुआ और में सामने के सोफे पे बैठा। कुछ ही पल में अंदर से अंकल भी आये. उन्होंने कहा में अपना ऑफिस का कुछ काम कर रहा हु. राधिका अभी आ जाएगी। आपलोग अंदर योगा करलो।

मेने डरते हुए अपनी गर्दन हिलाई। अंकल चले गए अंदर. में वह बैठा रहा.

कुछ ही देर बाद राधिका आंटी अंदर के कमरे से बाहर आयी. में आंटी को देखकर चौक ही गया. आंटी ने काले रंग की योगा पैंट पहनी थी. और ऊपर गुलाबी रंग का योगा टीशर्ट पहना था. दोनों भी काफी पतले कपडे से बने हुए थे. जिस वजसे वो कपडे राधिका आंटी के शरीर पे कसकर बैठे थे. सामने से आंटी के बड़े बड़े आम देखकर तो में पागल ही हो गया. बड़े बड़े स्तनों को देखकर मेरे हात में खुजली होने लगी. दबाने के मन करने लगा.

राधिका आंटी का शरीर बिलकुल सविता भाभी जैसा था. आंटी मुस्कुराते हुए मेरे पास आयी, और बोली चलो अंदर के कमरे में चलते है. और वो कमरे की और चल पड़ी. जैसे वो मुड़ी और मेरे आगे चलने लगी. आंटी की बड़ी हिलती हुई गांड देखकर मेरे ते होश ही उड़ गए. गांड पे कसकर चिपकी योगा पेंट गांड का बड़ा आकर अछेसे बता रही थी.

मटकती हुई राधिका आंटी की गांड देखकर में उनके पीछे चलता रहा. हम अंदर के कमरे में आये. हमने पहले खड़े रहकर योगा शुरू किया। आंटी को में योग करने के लिए मदत करने लगा. उस समय में काफी करीब जाने की कोशिश कर रहा था. आंटी ने भी मुझे रोका नहीं। कभी सामने से तो कभी पीछे से में उनके हात को हात लगता तो कभी उनकी कमर को. सामने के बड़े आईने में देखकर योगा चल रहा था.

राधिका आंटी के शरीर की खुसबू से मेरा मन विचलित हो रहा था. आंटी को भी मेरी भावनाये पता चल रही थी. हमारी आखे मदहोश होने लगी थी.

योगा करते हुए आंटी झुकी तो उनके बड़े स्तनों के बिच की गुफा मुझे दिखने लगी. में बड़े चाव से अंदर देखने लगा. आंटी अपना योग करती रही. मेने उनको सहारा देने के बहानेसे अलग अलग जगह छूना सुरु किया। कभी कमर पे हात लगता तो कभी हात पकड़ता।

जब एक पैर पर खड़े रहकर योगा कर रहे ते थे तब उनका संतुलन बिघडा और राधिका आंटी ने गिरने का बहाना किया और मुझे गले लगाया। हमारे शरीर एक दूसरे से चिपके। उनके स्तन मेरी छाती पे लगे.

वो वक्त था जब दोनों एक दूसरे के काफी करीब आये. मेरा हात आंटी की कमर पे था. दोनों भी मुस्कुराते हुए एक दूसरे के पास अनेका आनंद ले रहे थे. अब मुझे यकीन हो गया था के आंटी को मेरे करीब आने का बुरा नहीं लग रहा है. इसलिए में और खुल गया.

खड़े रहकर योग करते समय मेने आंटी को पीछे से पकड़ लिया। मेरा शरीर आंटी के पीठ पे चिपका हुआ था. मेरा लंड आंटी की गांड पे दबाये रखा था. आंटी के चेहरे पे जो बैचेनी थी उससे पता चल रहा था के आंटी को मेरे खड़े लंड का पता चल गया है. राधिका आंटी ने मुझे रोका नहीं। में अपना काम करता रहा.

हम जमीन पे बैठे और योगा करने लगे. आंटी ने अपना सर निचे रखकर पीछे से गांड ऊपर उठा दी. गोल बड़ी गांड को देखकर मुजसे रहा नहीं गया. में उनकी गांड के पीछे बैठा और धीरेसे अपने लंड को आंटी की गांड पे दबाये उनकी कमर को सहलाने लगा. ऐसे जता रहा था जैसे हम योग कर रहे है.

अपनी कमर को थोड़ा आगे पीछे करते हुए आंटी की गांड पे अपने लंड को आगे पीछे करता रहा. आंटी को भी मजा आ रहा था. इसलिए वो बिना कुछ बोले मुझे पूरा सहयोग दे रही थी. मेरा लंड अब अंदर इतना तप गया था की चुदाई के तड़प रहा था.

लेकिन अंकल घरमे थे इसलिए मुझे बहोत डर भी लग रहा था. कुछ देर झुककर योग करने के बाद आंटी जमीन पे सीधी लेट गयी. मेने उनका एक पैर ऊपर उठाया और पैर को फैलते हुए अपने लंड को सीधा उनकी चुत के ऊपर रख दिया। पैर का योगा करते हुए निचे लंड को चुत के उपर रगड़ता रहा. खड़े लंड को आंटी की चुत छूने लगी. अह्ह्ह्ह। अहहह।।।। उम्म्म्म

फिर दोनों पैर ऊपर उठाकर लंड को चुत पे टीकाकार घिसने लगा. अह्ह्ह अहहह अहह.. आंटी की नशीली आखे मुझे देखने लगी. में आंटी को देखने लगा. मेरी शरीर की गर्मी आसमान छूने लगी.

कुछ देर तो मेने अपने आप को संभाला लेकिन जैसे ही आंटी ने मुँह खोल के अह्ह्ह की आवाज में सिसकी।।। मेरा सब्र का बांध टूट गया. मेरा मुँह आंटी के होटो तक पोहचा और दोनों ने चूमना सुरु किया। उम्म्म्म ममममम ममम उम्म्म्म आह्हः अह्ह्ह्ह

दोनों एक दूसरे को चूमने लगे. बदन को बदन रगड़ने लगे. दोनों की जबान एक दूसरे पे घिसने लगी. उम्म्म अम्मम्म अह्ह्ह।।।।

कुछ देर होठो को चूमकर जैसे निचे जाने लगा. आंटी की गर्दन चूमने लगा. उम्म्म अम्मा। गर्दन को चूमते हुए निचे आया तो आंटी के बड़े बड़े स्तनों को दबाने लगा. अह्ह्ह्ह। कितने कोमल स्तन है. आह्हः। उफ्फफ्फ्फ़। लंड को चुत पे दबाये आंटी के स्तनों को दबाने लगा. आंटी की सिसकनेकी आवाज कानो को सुकून दे रही थी. अह्ह्ह उम्मम्मम्म आअह्हह्ह्ह्ह

स्तनों को दबाते दबाते मेने आंटी की टीशर्ट ऊपर उठा दी. अन्दर का ब्रा दिखने लगा. ब्रा के ऊपर से दबाते हुए अपना मुँह स्तनों के ऊपर दबा के चाटने लगा. आह्हः अहहह। उम्म्म्म। आंटी के स्तन तो ब्रा में समां नहीं पा रहे थे. में जोर जोर से दबाते हुए स्तनों की दरार में अपना जबान डालकर चाट रहा था. अह्ह्ह्ह उम्म्म

अचानक हमें अंकल की आने की आवाज सुनाई दी. में तुरंत पीछे हटा. आंटी ने टीशर्ट निचे कर दी.

अंकल अंदर कमरे में आये. और कहने लगे. हो रहा हे न योग. तो मेने डरते हुए गर्दन हिलाई। हां अंकल हो रहा है.

अंकल देखकर चले गए फिर से बाहर। यहाँ हम दोनों के शरीर तप रहे थे. आंटी उठकर जैसे ही कड़ी हुई. मेने उसे कसकर पकड़ लिया और पास की दीवाल पे टीकाकर खड़ा कर दिया।

हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे. मेने टीशर्ट ऊपर उठा दी. अंदर की ब्रा के ऊपर से स्तनों को दबाने लगा. आंटी ने मेरी छटपटाहट देखि और अपना ब्रा खोल दिया। जैसे ही ब्रा निकला आंटी के बड़े आम खुलगए। .. अह्ह्ह उम्म्म्म अह्ह्ह्ह आह्हः

आंटी के आमो को दबाते हुए मेने निप्पल को मुँह में ले लिया। आह्हः। क्या मीठे आम थे. जोर जोर से दबाते हुए में आम को चूस रहा था. मेरे हात को जो स्तनों की कोमलता महसूस हो रही थी. उससे में पागल ही हो गया. बहोत जोर जोर से दबाने का मन कर रहा था. उसपर आंटी के मुँह से निकलने वाली आह की आवाज मुझे पागल बना रही थी. उम्म्म अह्ह्ह्ह। अह्ह्ह्ह

स्तनों को काफी देर तक चूसकर जब पीछे हटा. मेरा लंड बाहर निकलने के लिए पागल हुए जा रहा था. मेने आंटी की तरफ देखकर उसका हात पकड़ा और अपने लंड पे लगाया। आंटी ने बड़े प्यार मेरे लंड को मसाला। फिर तुरंत निचे बैठी। और मेरी पैंट को निचे उतरके लंड को बाहर खींचा। मेरा खड़ा लंड उछल के बाहर निकला।

जैसे ही आंटी ने लंड को मुठी में पकड़ा मेरे शरीर में बिजली बहने लगी. आंटी के कोमल हातो का स्पर्श लंड को और उत्तेजित कर रहा था. आहहह। आंटी लंड को हिलने लगी. हिलाते हिलाते लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी. अहहह अह्ह्ह यही तो चाहिए था।  अहहह आह्हः

आंटी अह्ह्ह्हह। में आंटी की तरफ देखते हुए अपने लंड को मुँह में जाते हुए देख रहा था.अह्ह्ह।  क्या नजारा था वो. आह्ह्ह्ह। आंटी के गुलाबी होठ लंड पे घिस रहे थे.

आंटी की जबान लंड पे घिसने लगी. आंटी लंड को चाटने लगी. पुरे लंड को चाटकर मुँह में ले रही थी. आह्ह्ह्हह।।।। निचे लटकी गोटियों को कसकर पकड़े दबाने लगी. आह्ह्ह्ह। अहह मेरे लंड ने उत्तेजनाकि सारी हदे पार कर दी.

 काफी देर तक आंटी ने मेरा लंड चूसा। फिर जैसे ही वो रुकी। मेने आंटी को वही पे जमीन पे लिटा दिया। लिटा के धीरेसे उनकी योग पैंट निचे खींची। अंकल आने की संभावना थी इसलिए योग पेंट सिर्फ घुटनो तक निचे खींची। अन्दर की निकर भी निचे खींची। फिर दोनों पैर ऊपर उठके निचे से चुत पे अपना मुँह रखकर चुत को चाटने लगा. अह्ह्ह्ह। उम्म्म्म अम्मम्म। चुत काफी तपी हुई थी. चुत से पानी निकल रहा था. में जबान को चुत के अंदर डाले चाटने लगा. अह्ह्ह उम्म्म अम्म्मम्म अम्माम्मा। अम्म्मम्म। अम्मा। दोनों हातो से पैरो को पकडे। चुत में मुँह घिसने लगा. अह्ह्ह अह्ह्ह अहहू उम्म्म्म।।

फिर एक ऊँगली चुत में डाली और अंदर बाहर करते हुए चुत में रगड़ने लगा. अहःअहः। हहहह। अहम्म्म्म आंटी आवाज करने लगी. आंटी के चुत को देखकर रहा नहीं गया. तो में घुटनो पे बैठे लंड को चुत पे रखा और दोनों पैर को ऊपर उठाये निचे से चुत को चोदने लगा. अह्ह्ह उम्म्म। आहहहह फ्फ्फफ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह

लंड असानीचे गीली चुत के अंदर चला गया. अहहह अहहह। उम्म्म। अहह. जोर से लंड को चुत में पटकते हुए चोद रहा था. फक आह्हः अहहह अहह..

काफी देर चुदाई चली. फिर लंड को बाहर खींच मेने आंटी को पलट के घोड़ी बना दिया। जैसे ही आंटी घूमी, आंटी की बड़ी गांड मेरे सामने आई. मेने गांड को दबाते हुए लंड को निचे से चुत में डाला और फिर से कसकर चुदाई सुरु की. अहहहहहह। उफ्फफ्फ्फ़। इसके पहले के अंकल वापस आये मुझे आंटी को चोद लेना था.

अह्ह्ह फक आंटी आह्हः अहह. उम्मम्मम्म आंटी भी अपनी सिसकती आवाज से आनंद ले रही ही.

चुदाई चल ही रही थी. के मुझे चलने की आवाज सुनाई दी. मेने तुरंत लंड चुत से बाहर खींचा और खड़ा होकर पेंट ऊपर कर ली. आंटी ने भी अपनी योग पेंट ऊपर खींच ली.

दोनों खड़े हो गए. तभी पीछे से अंकल अंदर आये. मेरी पीठ उनकी तरफ थी. में जानभूझकर पीठ दिखाकर खड़ा रहा नहीं तो मेरा खड़ा लंड दिख जाता।

अंकल अंदर कमरे में आये. हम दोनों योग करने का नाटक करने लगे. अकाल सामने की अलमारी में कुछ ढूंढ रहे थे. मेने आंटी को सामने की खुर्सी पे हात रखकर झुककर खड़ा कर दिया। आंटी अपने एक पैर को पीछे से ऊपर उठाई योग करने लगी.

 में आंटी के बगल में ही खड़ा था अपना खड़ा लंड अंकल से छुपाके

 थोड़ी देर बाद अंकल बाहर चले गए. जैसे ही अंकल गए, मे आंटी के पीछे गया. आंटी की योग पैंट निचे खींची और अपना खड़ा लंड चुत में डाल दिया। अब मुजसे रहा नहीं जा रहा था. इसके पहले के अंकल वापस आये में आंटी को चोदना चाहता था. मेने लंड को चुत में डालकर आंटी की कमर कसकर पकड़ी और जो चुदाई सुरु की आह्ह्ह्ह अह्ह्ह। आंटी सिसकने लगी. में पिछेसे आंटी को जोर जोर से चोदे जा रहा था. अह्ह्ह आंटी। अहह. उम्म्म्म अह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़।

आंटी की गीली चुत में लंड अंदर तक जा रहा था. अह्ह्ह्हह। अहहह। लंड की चुत में होने वाली रगडाहट ने मेरे शरीर में आग लगा दी थी. कुछ देर बाद मेरे लंड ने पानी निकलने का इशारा दिया। मेने तुरंत लंड बाहर खींचा, आंटी को पास की खुर्सी पे बिठाया और लंड मुँह में दे दिया। आंटी ने भी बिना कुछ सोचे लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी. उम्म्म अम्म्म

आंटी के मुँह की गर्माहट लंड को लगते ही लंड पिघल गया और पानी की बौछार आंटी के मुँह में होने लगी. अह्ह्ह। अहहह। अहहह। आंटी के मुँह में सारा पानी गिरने लगा. अह्ह्ह्ह।। आंटी भी पानी पि गयी. अह्ह्ह उम्म्म

कुछ देर बाद जब लंड को बाहर खींचा आंटी बड़े प्यार से लंड को चाटकर साफ करने लगी. हमने फिर कपडे ठीक किये। जाते जाते अंकल को मिला तो अंकल पूछने लगे, ठीक तरीकेसे योग सिखाया न आंटी को. तो मेने मुस्कुराते हुए कहा, है अंकल आंटी सिख गयी योग. आंटी को मेने कहा है के कभी जरुरत पड़ी तो मुझे फिर से सीखने के लिए बुला लेना।

उस दिन के बाद आंटी के घर मेरा जाना आना लगा ही रहता। योग के बहाने में आता और आंटी को चोद के चला जाता।

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