पति के चाचा की मुझपे बुरी नजरे

निकुंज मेरे पति है. उनके चाचा कुछ ही दिन पहले शहर से गांव आये थे. उनका घर हमारे घर से पास ही में था. अकेले ही गांव आये थे तो निकुंज ने उन्हें दोनों वक्त के खाने के लिए हमारे ही घर आने कह दिया था.

पहले दिन जब दुपहर को चाचा जी आये. जमीन पे बैठे खाना खा रहे थे. में जब खाना परोस ने लगी. तो उनकी नजरे मेरे स्तनों पे घूमने लगी. हवस भरी नजरो से मेरी तरफ देखने लगे.

मुझे तुरंत पता चल गया की चाचा की मुजपे बुरी नजर है. ऐसे मेरी तरफ देख रहे थे मानो खाने के साथ मुझे भी खा जायेंगे।

खाना खाने के बाद में अपने काम में लगी. बर्तन धो रही थी. निकुंज घर के आंगन में किसी से बाते कर रहा था. तभी अचानक चाचा अंदर की तरफ आये और मुजसे यहाँ वहा की बाते करने लगे.

मेने काम करते हुए जब उनकी तरफ देखा तो अब वो मेरे कमर की तरफ देख रहे थे. साडी खिसकनेसे मेरी कमर दिख रही थी. काफी देर वो बाते करते हुए खड़े रहे. फिर जब उन्होंने देखा की निकुंज वापस घर में आ राहा है तो वो जा रहा हु कहकर निकल गए.

उनको डरकर जाते हुए देख मुझे बहोत हसी आयी.

अब रात को चाचा फिर से खाने के लिए घर आये. निकुंज अभी खेत से होकर आया था. निकुंज ने चाचा को कहा के आप खाना खा लो में नाहाकर आता हु.

में चाचा को खाना परोसने लगी.

मुझे अभी भी दुपहर की बाते याद करके हसी आ रही थी. मेने सोचा क्यों ना चाचा को थोड़ा ललचाया जाये।

मे अंदर आयी, मेने अपना ब्रा ऊपर उठाके स्तनों को थोड़ा बाहर रखा. साडी का पल्लू हटाके स्तनों को इतना खुला रखा की चाचा को दिखाई दे.

फिर में बाहर आयी और चाचा को खाना परोसने लगी. चाचा ने जैसे ही देखा मेरे बड़े बड़े स्तन ब्लाउज़ के ऊपर से दिख रहे हे. चाचा की आखे खुली की खुली रह गयी. चाचा टकटकी लगाए मेरी तरफ ही देखे जा रहे थे. उन्होंने अपनी पलखे भी नहीं झुकाई

में वापस अंदर आयी, और मेने चावल लिए. जब चावल लेकर में परोसने फिर से झुकी, तो चाचा ने हद ही कर दी. मेने देखा चाचा मेरी तरफ देखते हुए अपनी धोती के ऊपर हात रखकर अपने लंड को मसलने लगे. में थोड़ी डर गयी, लेकिन ऐसे बर्ताव कर रही थी, जैसे मेने कुछ देखा ही नहीं।

चावल परोसकर जब में वापस अंदर आयी, मेरी सासे बढ़ने लगी. ये मेने क्या देख लिया। चाचा तो उत्तेजित होने लगे. में एक पल के लिए ठहर गयी.

मेने देखा की निकुंज को और वक्त लगेगा नाहाकर आने में. और कुछ करू जिससे चाचा तड़पने लगे.

फिर मेरे दिमाग में एक बेवखूफ़ भरा विचार आया.

मेने अपनी साड़ी ऊपर उठाके बांध दी. इतनी ऊपर उठाई के मेरी गोरी जांग दिखने लगी. मेने जब अपने आप को देखा तो शर्म भी आ रही थी. और डर भी लग रहा था. लेकिन मुझे लगा, कर के देखते है क्या होता है.

मेने सब्जी ली और चलते हुए चाचा की तरफ बढ़ी. जैसे ही चाचा ने मुझे आते हुए देखा, उनकी नज़रे मेरी गोरी जांग पे टिक गयी. वो अपने लंड को दबाने लगे. उनकी जबान होठो पे घिसने लगे. में शांति से करीब आयी और सब्जी परोसने लगी. झुककर फिर से मेने अपने बड़े बड़े स्तनों के दर्शन चाचा को दिए. निचे मेरी जांग तो दिख ही रही थी.

चाचा ने धोती के अंदर अपना हात डालकर लंड को पकड़ के रखा था और मुठी में पकड़के लंड मसल रहे थे. जैसे ही मेने देखा की चाचा के सर पे अब हवस का भुत सवार हो गया है.

में खाना परोस के जाने लगी. कोने में मेने देखा चीजे भिखरी पड़ी है. जानबूझकर में चीजे उठाने गयी और चाचा की तरफ गांड दिखाकर झुकी, जैसे में झुकी मेरी पहनी हुई साड़ी और भी ज्यादा ऊपर उठ गयी. चाचा को मेरी जांग के सात मेरी निक्कर भी दिखने लगी.

कुछ देर में झुककर खड़ी रही. चीजे बटोरने लगी. सारि जमीन पे भिखरी चीजे उठाई और फिर अंदर चली गयी.

अंदर जाते ही. में दरवाजे के आड़ छुपकर चाचा को बाहर देखने लगी.

तो मेने देखा चाचा मचल रहा था. उसने यहाँ वहा देखा और धोती के अंदर से अपना लंड बाहर निकाला। में चाचा का लंड देखकर चौक गयी. काफी लम्बा लंड था.

चाचा ने लंड मुठी में पकड़ रखा था. कुछ देर चाचा लंड की तरफ देखते हुए उसे मसलता रहा.

फिर चाचा ने पानी का ग्लास उठाया, थोड़ा पानी हात पे लिया और ठंडा पानी लंड को लगाने लगा. में देखकर चौक गयी के चाचा ये क्या कर रहा है.

शायद अपने गरम लंड को ठन्डे पानी से ठंडा कर रहा है. लंड को पानी लगाकर चाचा ने फिर से धोती के अंदर दाल दिया और खाना खाने लगा.

उतने में निकुंज भी नाहाकर बाहर आया, मेने अपनी साडी और ब्लाउज़ को ठीक किया। कही वो देख न ले मुझे इस अवस्ता में.

चाचा खाना खाकर चले गए. पुरे वक्त उनकी नज़रे मेरे ऊपर ही घूम रही थी.

में निकुंज के सामने ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे कुछ हुआ ही नहीं

ऐसे ही दो दिनों तक मेने चाचा को ललचाया, कभी अपने स्तनों की झलक दिखाके, कभी सामने पैर फैलाके बैठे अपनी निक्कर दिखाके तो कभी झुककर काम करते हुए गांड दिखाके

फिर दो दिन बाद शामको जब चाचा हमेशा की तरह खाना खाने घर आये. आते ही उन्होंने मुझे पूछा निकुंज शहर जाने वाला था, वो चला गया क्या, तो मेने कहा,

हां चाचा जी वो आज शामको ही चले गए. कल दुपहर को वापस आएंगे। और में अंदर चली गयी.

कुछ देर बाद जब चावल और दाल लेकर बाहर आयी, चाचा अभी भी वही खड़े थे. मेने चाचा को कहा, आप खड़े क्यूँ हो खाना लगा रही हु, आप बैठिये।

मेने पतीला निचे रखा और वापस अंदर जाने लगी. जैसे ही में मुड़ी, चाचा ने कसकर मेरा हात पकड़ा और मुझे अपनी और खींच लिया। में चौक गयी, चाचा ने मुझे कसकर गले लगा लिया और जबरदस्ती मुझे गालो पे और गर्दन पे चूमने लगे.

ये क्या हो रहा है, मे डर गयी. में चाचा को कहने लगी, छोड़ो मुझे आह्ह्ह्ह। चाचा क्या कर रहे हो. चाचा ने मुझे कसकर पकड़ लिया था. आह्हः। मेरी कमर को पकड़के अपने मर्दानी हातो से जकड़कर मुझे अपने शरीर पे खींच रहे थे. अह्ह्ह अहहह शहहहससस

चाचा मुझे छोड़ो नहीं तो में चिल्लाऊंगी। अहहह  में पुरे जोर से चाचा को धकेल ने लगी. पूरी ताकद से चाचा को पीछे करने लगी.

चाचा ने जोर जबरदस्ती करते हुए कहा, चिल्लाओगी तो में तुम्हारी ही बदनामी कर दूंगा। इतने दिनों से जो मुझे तड़पा रही थी.

भलाई इसी में हे चुप चाप में जैसा कहु वो करो नहीं तो तुम्हारी ही बदनामी हो जाएगी पुरे गांव में

जैसे ही मेने चाचा की बात सुनी, मेरा डर और बढ़ने लगा. उसी डर में में लगी रही, चाचा को दूर करती रही.

उसी हड़बड़ाहट में मेरा साडी का पल्लू निचे गिर गया. मेरा ब्लाउज़ दिखने लगा. स्तनों का ऊपरी भाग चाचा ने जैसे ही देखा, उसने अपने होठ मेरे स्तनों पे टिका दिए और चूमने लगा. अह्ह्ह्ह हहहह। चाचा नहीं।।।

उस छीना झपटी में चाचा की लुंगी भी खुलकर निचे गिर पड़ी. चाचा ने अंदर अंडरवेर पहनी थी वो मेरे शरीर पे घिसने लगी. मुझे निचे एसास हुआ की चाचा का लंड खड़ा हो चुका है. मेरे शरीर पे अंडरवेर को दबाके मुझे छू रहे थे. आह्हः अहहह।। नहीं चाचा।।। मुझे जाने दो.

लेकिन चाचा नहीं माना। चाचा ने जबरदस्ती मेरे गालो को चूमते हुए मेरे होठो को छू ही लिया। अह्ह्ह उम्मम्मम। चाचा के होठ जैसे ही मेरे होठो को टकराये।

चाचा ने मुझे कसकर पकड़के आखिरकार होठो पे चुम ही लिया। दोनों एक दूसरे को चूमने लगे. तब पता नहीं मुझे क्या हुआ. मेरे हात जो अभीतक चाचा को दूर करने में लगे थे, अचानक से रुक गए.

में भी चाचा को चूमने लगी. चाचा ने जैसे ही देखा मे शांत होने लगी हु, चाचा के हात जो कमर पे थे वो सीधा मेरे स्तनों पे आकर रुके। स्तनों पे हात रखते ही जैसे ही चाचा ने दोनों हातो से मेरे स्तन दबाये। अह्हह्ह्ह्ह। में सिसकने लगी. अह्ह्ह्ह। चाचा चूमते हुए मेरे स्तनों को जोर जोर से दबाने लगा.

खेतीबाड़ी करके चाचा के हात काफी मजबूत हो चुके थे. अपने मरदाना हातो से मेरे स्तनों को दबा रहे थे. अह्ह्ह्हह। बड़े बड़े पंजे मेरे स्तनों को मसल रहे थे. अह्ह्ह्ह अहहह

मुजसे ये सब सहा नहीं गया और मेरा हात अपने आप चाचा के लौड़े पे चला गया. चाचा की अंडरवेर के ऊपर से खड़े लंड को पकड़कर दबाने लगी. अह्ह्ह्ह।।। चाचा का लंड मजबूत था. काफी लम्बा भी था. में अपने हातो से दबा दबाके लंड का आनंद लेने लगी.

सब सही जा रहा था, तभी चाचा को पता नहीं क्या हुआ, चाचा ने मेरा ब्लाउज़ बिच से पकड़ा और दोनों हातो से खींचकर फाड़ दिया। में चौक गयी. आह्हः चाचा ये क्या कर रहे हो. लेकिन चाचा मेरी बात सुने तो. उन्होंने ब्लाउज़ को खींचकर दो टुकड़े कर दिया और मेरे दोनों स्तन उछल के बाहर निकले.

जैसे ही चाचा की नजर स्तनों पे पड़ी, चाचा ने पकड़ के निप्पल मुँह में लिए और दबा दबा के स्तनों को चूसने लगा. अह्ह्ह अहहह। अहहह। चाचा की तड़प देखकर मुझे एसास हुआ के मेने इस जानवर को जगा के बड़ी गलतो कर दी है. अह्ह्ह्ह चाचा जिस तरह से मेरे स्तनों को दबा रहे थे, देखकर ही लग रहा था की काफी दिनों से भरे बैठे है

पागलो की तरह मेरे स्तनों को दबा रहे थे और दोनों निप्पल को चूस रहे थे. अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अहह.. उम्मम्मम अम्म्म

चाचा की तरफ देखते हुए मेने उनका कुरता ऊपर खींचकर उतार दिया।

फिर कुछ देर बाद चाचा रुके, उन्होंने मेरी तरफ देखा और साडी खींचने लगे. में चाचा को कहने लगी, चाचा बस हो गया. लेकिन वो साडी खींचते रहे. में गोल गुमने लगी. साडी निकलने लगी. जैसे ही पूरी साडी निकली, में भी अब सिर्फ निकर पे खड़ी थी.

चाचा मुझे हवस भरी नजरो से देखते हुए मेरी तरफ बढ़ने लगे. में हलके पैरो से पीछे जाने लगी. मुझे बहोत ही शर्म महसूस हो रही थी. चाचा से डर भी लगने लगा था

लेकिन चाचा रुके नहीं, मेरे करीब आये और मुझे पीछे से पकड़ लिया। आह्हः उफ्फ्फ्फ़। अह्ह्ह्ह। . मेरी सासे चढ़ने लगी, यहाँ चाचा मेरी नंगी पीठ पे चूमने लगे. अह्ह्ह अह्ह्ह अहहहह। उम्म्म्म अम्म्म

दोनों हातो से स्तनों को दबाये रखे थे. मुझे छोड़ ही नहीं रहे थे. अह्ह्ह।।।उम्म्म्म  फिर उन्होंने जबरदस्ती मेरी निक्कर निचे उतारना चाही। मेने निक्कर पकड़ रखी थी।  किसी तरह में अपने आप को छुडवाके दूर भागने लगी,

लेकिन तभी चाचा के हात में मेरी निकर फस गयी. चाचा ने निक्कर को कसकर खींचा और निकर भी फट गयी. निकर फटके निचे गिरी और में चाचा के सामने पूरी नंगी खड़ी.

चाचा मेरे गोरे नंगे बदन की और घूरने लगे. मेने एक हात से अपने स्तनों को ढक दिया और दूसरे से मेरी खुली चुत को ढकने लगी. अह्ह्ह अह्ह्ह अहह

उम्म्म अम्मम्म उम्म्म ओमममम

चाचा ने मेरी तरफ देखते हुए अपनी अंडरवेर निचे खींची। में सिर्फ देखती रही. जैसे ही अंडरवेर निचे गयी, चाचा का खड़ा लंड बाहर निकला मेरे आखे चकाचौंद रह गयी.

चाचा मेरे सामने पुरे नंगे खड़े थे. जटिल किसान का बदन. इस उम्र में भी चाचा काफी आकर्षक दिख रहे थे. खासकर चाचा के लौड़े का आकर देख में खुश हो गयी।

पति का छोटा लंड मुझे कभी खुश ही नहीं कर पाया था. आज इतने बड़े लंड को सामने देखकर मन में एक ख़ुशी महसूस होने लगी.

चाचा अपने खड़े लंड को लेकर मेरी तरफ बढ़ने लगे. में शर्म से पानी पानी हो रही थी. चाचा मेरे बहोत करीब आये. और मेरा हात पकड़कर अपने लंड पे ले गए.

जैसे ही मेने चाचा के लंड को पकड़ा मेरा सबर का बांध टूट गया. में धीरेसे निचे बैठी, और लंड को पहले तो नजदीक से देखती रही. मुठी में पकड़ते हुए चाचा के लंड को हिलाने लगी. लंड को हिलाते हुए अपनी जीभ गुलाबी भाग पे टिकाई और जबान को लंड पे घिसने लगी. चाचा सिसकने लगे. अह्ह्ह्ह अहहहहह हहह. चाचा को सिसकते हुए देख मुझे भी जोश आ गया. मेने लंड को मुँह में लिया और चूसने लगी. अह्ह्ह अहहह अहहहह। उफ्फफ्फ्फ़। अह्ह्ह्ह आहहहह।

चाचा की कहराने की आवाज मेरे कानो में गूंजने लगी. जैसे ही में अपनी जबान को गुलाबी भाग पे घिसती चाचा जोरजोर से कहराते अह्ह्ह अहहह अहहह।।।

जबान को पुरे लंड पे घिसते हुए मेने लंड को चाट लिया। अह्ह्ह उम्म्म उम्म्म्म

चाचा की लटकती हुई गोटियों को हातोंसे से मसलके मेने लंड को चूसा और जोर जोर से लौड़े को चूसने लगी अहहह उम्म्म्म अम्मम्म अम्मामा

फिर जब चाचा को लगा, अब बस हो गया लंड को चूसना, उन्होंने मुझे वही पे जमीन पे लिटा दिया। मेरे पैरो को फैलाया और मेरी चुत को चाटने लगे. अह्ह्ह अहहह अहंमम अम्मम्म अम्मम्म अम्म अह्ह्ह्ह अहहह। अह्ह्ह्ह। उम्मम्मम्म मममम उफ्फ्फ्फ़ फ़फ़फ़फ़फ़

चाचा ने जैसे ही अपनी जबान चुत में डाली, मेरी ख़ुशी आसमान छूने लगी. अह्ह्ह्ह अहहह। अहहह

चाचा की जबान चुत के अंदरतक जाकर चाट रही थी. अह्ह्ह अहहह चुत का हर एक कोना चाचा ने चाटके गिला कर दिया। आह्हः अहहह अहह. उम्म्म्म यही मजा चाइये था. अह्ह्ह अहहह। में जमीन पे तड़प रही थी. अह्ह्ह्ह

चुत को चाटते हुए चाचा ने अपनी ऊँगली भी चुत में डाली और चाटते रहे अहहहहहह। चाचा तुम तो गजब ढा रहे हो अह्ह्ह अहहह

काफी देर तक चाचा ने चुत का मजा लिया, फिर वो मेरे ऊपर आकर लेटे , निचे से चाचा का लंड धीरेसे मेरी चुत में जाने लगा. आह्हः। चाचा का बड़ा लंड चुत की दिवारोंको घिसते हुये अंदर पीसलेने लगा. चाचा ने अच्छा किया के चुत को चाट के अंदर से गिला कर दिया था. नहीं तो मुझे बहोत दर्द होता।

चाचा का लंड आधा अंदर चला गया ही था के चाचा ने मेरी आखो में देखकर एक जोर का धक्का दिया और लंड पूरा अंदर घुसेड़ दिया। आह्ह्ह्हह अह्ह्ह। चाचा आह्हः आह्हः।  ये क्या कर रहे हो अह्ह्ह।

चाचा ने जोर जोर से चुदाई सुरु की. कहने लगे. कबसे तुझे चोदना चाहता था. अह्ह्ह अहहह।।।ा हहहहह अहहह

चाचा ने चोदते हुए मुझे चूमना सुरु किया। मेने भी चाचा को कसकर पकड़ लिया और चुदाई चलती रही. अहह अह्ह्ह अहह. उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह अहह

कुछ देर चुदाई के बाद चाचा ने मुझे अपने ऊपर बिठा दिया। मेने लंड को चुत में डाला और लंड पे ऊपर निचे कूदने लगी. अह्ह्ह अह्ह्ह। मेरा मदहोश बदन चुदाई का पूरा आनंद ले रहा था. अह्ह्ह अहहह। लंड पूरा अंदर जा रहा था. अह्ह्ह अहहह।। स्तन ऊपर निचे हो रहे थे. अह्ह्ह्ह। चाचा आराम से सोते हुए आनंद ले रहा था.

अह्ह्ह अहहह हहह अहहह हहह

फिर चाचा ने मुझे उल्टा लिटा दिया। कहने लगे, देखु तो तेरी बड़ी गांड। मुझे पलटके सुला दिया। मेरी बड़ी गांड को दबाते हुए कहने लगे. अह्ह्ह्ह तुम्हारी गांड तो काफी बड़ी है अह्ह्ह अहहह। दबाते हुए मेरी गांड को चूमने लगे.

चूमते हुए मुझे पूछा, गांड में डालू लंड. तो मेने कहा नहीं।

तो वो मान गए. लेकिन कहने लगे, ऊपर ऊपर से तो गांड चोद लेता हु. ऐसे कहकर चाचा मेरी पीठ पे सो गए और अपने लंड को गांड के बिच डालकर लंड को पटकने लगे. अह्ह्ह अहहह हहह हहह. जोर जोर से लंड को गांड में पटकते हुए हाफ रहे थे. अह्ह्ह यह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अहहह अहह

मेरी गांड के साथ थोड़ी देर खेलकर जब चाचा पीछे हटे उन्होंने मुझे घोड़ी बना लिया। में कुत्तेकी तरह दोनों हात और पैरो पे बैठी। पीछे से चाचा ने अपना लंड फिरसे चुत में धकेला और चुदाई सुरु हुई. अह्ह्ह अहःअहः। चाचा अभी काफी जोश में थे. उन्होंने मेरी कमर पकड़ रखी थी और जोर जोर से धक्के देते हुए मेरी चुत मार रहे थे.

अहह अहहह अहह अहह अहहह। सससस श्श्श अहहह अह्ह्ह अहह चाचा धीरे अहहह अहहह आअह्ह

चाचा ने इतनी जोर से चुदाई की के में कुछ ही पल में झड़ गयी. अह्ह्ह अहहह।

चाचा लगे रहे. उनका लोहे जैसा लंड अभी भी खड़ा था. चुत को चीरते हुए अंदर घुस रहा था. अह्ह्ह अहहह हाहाहा।।।

काफी देर चुदाई के बाद चाचा ने लंड को बाहर खींचा, मुझे पलटके मेरे मुँह में अपना लंड दे दिया।

जैसे ही मेने लंड को चूसना सुरु किया, लंड से पानी की बौछार होने लगी. गरम पानी मेरे मुँह में गिरने लगा. आह्हः अहहहह अहह..

चाचा के लंड को चूसते हुए मेने सारा पानी पि लिया। अह्ह्ह अहहह।

फिर जाकर चाचा शांत हुए.

कुछ देर हम बैठे रहे, फिर चाचा अपने कपडे पहनके खाना खा लिए और चले गए.

उस दिन के बाद से चाचा ने मुझे बहोत बार चोदा

चुदाई तब तक चलती रही जब तक चाचा फिर से शहर अपने घर न चले गए.

कैसी लगी मेरी कहानी कमेंट करके जरूर बताना

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