कुछ महीनो पहले की बात है. में घर पे दुपहर को आया करता था. कुछ दिनों से मेने देखा के माँ दुपहर को बाहर चली जाती थी. और शामको ५ बजे घर आती थी. हफ्ते में दो से तीन बार उसका जाना होता था.
मेने एक दिन माँ को पूछा कहा जा रही हो तो उन्होंने कहा में मार्किट से सामान लाने जा रही हु. लेकिन मुझे जितना पता था, माँ कभी सामान लेकर नहीं आयी थी.
कुछ हफ्तों बाद पापा को ये बात पता चली. पापा के एक दोस्त ने माँ को दुपहर को बाहर जाते हुए देखा था. रात को जब पापा ने माँ को पूछा के कहा गयी थी. तो पापा से माँ ने कहा की उसकी एक सहेली बीमार थी. तो उसको देखने गयी थी.
मुजसे माँ कुछ और कहती थी और पापा को कुछ और. मुझे शक हुआ के कुछ तो गड़बड़ है.
मेने सोचा इस बात का पता लगाना पड़ेगा के माँ कहा जाती है.
एक दिन दुपहर को में स्कुल से आकर खाना खाकर बैठा था. टीवी देख रहा था. दुपहर के ३ बजे थे. माँ हर बार की तरह घर से कही जानेकेलिए निकली. में भी उसके पीछे पीछे छुपते छिपाते हुए निकला. माँ ने ऑटो रिक्शा ली. में पिछेसे साइकल पे पीछा कर रहा था. ऑटो रिक्शा काफी दूर तक मुझे ले आयी. फिर एक जगह पर ऑटो रुकी. में बहोत ही पीछे रास्ते पे खड़े टेम्पो के पीछे छुपके खड़ा था.
मेने देखा माँ ऑटो से उतरी, और उसके आगे एक सफ़ेद रंग की इंनोवा गाड़ी खड़ी थी. माँ उसके अंदर जाकर बैठी. फिर वो गाड़ी आगे जाने लगी. में भी उनका पीछे करने लगा. अछि बात ये थी के रस्ते पे टेम्पो चल रहे थे. तो गाड़ी को धीरे चलना पड़ा. उस वजसे गाड़ी हमेशा मेरी नजरो के सामने ही रही.
कुछ दूर आकर, गाड़ी ने एक कच्चे रस्ते पे मोड़ लिया. मे भी मोड़ लेकर पीछा करने लगा. उस कच्चे रस्ते पे दोनों तरफ पेड़ पौधे थे. पेड़ो से घिरा घना रास्ता था. कुछ अंदर तक जानेके बाद वो गाड़ी दाई तरफ रुकी. मेने भी अपनी साइकल एक पेड़ की पीछे रुकदी. गाड़ी वही पे कड़ी थी. दोनों तरफ पेड़ थे.
पास के पेड़ोंकी वजसे मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. मेने अपन साइकल वही पेड़ के पास रख दी. फिर धीरेसे झुककर चलते हुए में गाड़ी के पीछे आकर खड़ा हो गया. पीछे की काच से अंदर देखा तो माँ आगे की सीट पर बैठी थी. और बगल में एक आदमी बैठा था. कुछ अंदर चल रहा था. में फिर झुककर आदमी की सीट की तरफ आगे आया. धीरेसे मेने अपनी गार्डन ऊपर उठाकर अंदर देखा तो मेरे होश ही उड़ गए.
मेने देखा माँ ने उस आदमी का लंड मुँह में लिया था. और वो उस लंड को मुठी में पकड़कर हिलाते हुए चूस रही थी. उस आदमी ने माँ के दोनों स्तन दबाके रखे थे. वो आदमी माँ के मम्मो को दबा रहा था तो कभी एक हाट से माँ की पीठ रहला रहा था. में बिना आवाज किये अंदर झांक रहा था.
मुझे तो समज नहीं आ रहा था के में क्या करू. इसलिए चुप चाप खड़े रहकर देखता रहा. माँ को उस आदमी का लंड चूसते हुए देख यहाँ मेरा भी लंड खड़ा हो गया था. मेरा एक हात अपने आप लंड पर चला गया. और में भी लंड को मसलते हुए माँ को देखने लगा.
अहहह…. क्या हो रहा हे ये.
कुछ देर बाद दोनों ठीक से बैठे. मेने देखा वो बाहर निकलने वाले थे. में धीरेसे गाड़ी के पीछे वापस आकर छुप गया.
वो आदमी बाहर निकला. दूसरी और से माँ बाहर निकली. उसने माँ को गाड़ी पास झुककर खड़ा किया। माँ उसको मना कर रही थी. कह रही थी कोई देख लेगा. लेकिन वो आदमी माना नहीं. उसने जबरदस्ती माँ को झुकादिया, पिछेसे माँ की साड़ी उठाई और अपनी पेंट निचे उतारी. उसका बड़ा लंड बाहर निकला. लंड को पकड़के पिछेसे माँ की चुत में लंड को डाल वो माँ को छोड़ने लगा. माँ सिसकने लगी. ाहः अहह. श्श्श्श. वो भी जोर जोर से आह भरते हुए माँ को छोड़ने लगा.
अहहह. माँ को आंखोके सामने चुडते हुए देख मेरा लोडा उछलने लगा. में भी अपने लवडे को हिलाने लगा. अहहहह आहहह. उफ्फ्फ्फ़… वो आदमी ऐसे माँ को चोद रहा था जैसे कोई जानवर चोदता है.
कुछ देर बाद वो आदमी आह भरते हुए बोलै. पानी निकलने वाला है. सीधी हो जा. जैसे ही माँ सीधी हुई. उसने अपना लोडा माँ के मुँह में दे दिया. और माँ फिरसे लोड़े को चूसने लगी. आहहहह. अहहह उफ्फ्फ्फ़ उम्म्म्म अहहहह.
चूसते चूसते आदमी ने अपना पानी माँ के मुँह में ही छोड़ दिया. माँ लंड को चुस्ती रही। काफी देर बाद फिर वो आदमी शांत हुआ. वो निकलने लगे. तो में धीरेसे पीछे मुड़ा और अपनी साइकल लेकर निकल पड़ा.
मुझे घर पोहचने में देर हो गयी. जब घर पोहचा माँ पहले से ही घरपर थी. माँ ने टीवी पे गाने लगाए थे. बड़ी खुश होकर खाना बना रही थी.
मुझे देखकर बोली. कहा थे तुम. तो मेने कहा दोस्त के घर गया था.
उस दिन मुझे पता चल की माँ बाहर जाकर किसी से चुदवाती है.
उस रात मुझे नीद ही नहीं आ रही थी. बार बार वही दॄश्य मेरे सामने आ रहा था. माँ मुझे उस आदमीसे चुड़ते हुए दिख रही थी. में अपने लंड को मसलते हुए सोच में था.
इस बारेमे में पापा से भी बात नहीं कर सकता था. पापा को पता चलेगा तो बहोत बड़ा बखेड़ा खड़ा हो जायेगा.
कुछ देर तक सोचने के बाद मुझे लगा. मुझे इसका फायदा उठाना चाहिए. मुझे भी माँ को चोदने की चाह होने लगी थी. इससे बढ़कर मौका आगे मिलेगा ही नहीं।
अगलेही हफ्ते मुझे पता था की माँ फिरसे अपने वही दोस्त को मिलाने जाएगी. इसबार मेने सोचा, जैसे ही वो घर आएंगे.
मेने सारी प्लानिंग कर ली.
में अपने कमरे में था. माँ बाहर निकल गयी. फिर करीब ६ बजे वो घर लौटी. काफी खुश थी. माँ ने मुझे हॉल में ही देख लिया.
मेने माँ को पूछा कहा गयी थी. तो माँ ने कहा के मार्किट गयी थी. सब्जी लेने. तो मेने कहा सब्जी कहा है फिर. तो वो चौक गयी. उसके चेहरे का रंग उड़ गया. वो घबराते हुए बोली.
वो सब्जी वाला सब्जी बहोत ही महँगी दे रहा था तो मेने नहीं ली. अगली बार ले लुंगी.
माँ मेरी बात टालकर अंदर के कमरे में चली गयी. में उसके पीछे आया और बिना डरे मेने माँ को कहा मुझे पता है तुम कहा जाती हो.
मेरी बात सुनकर माँ झट से पलटी। उसने मेरी तरफ देखा.
मेने माँ की आँखोमे आँखे डाल कहा की मेने पिछली बार मेने तुम्हारा पीछा किया था. और मेने झाड़ियों के पीछे जो भी हुआ वो सब देख लिया.
माँ के चेहरे का रंग उड़ गया. उसकी आँखे रोने जैसी हो गयी थी.
मेने आगे कहा की मेने अगर पापा को बता दिया तो तुम्हे पता हे इसका क्या अज्जाम होगा।
माँ और डर गयी. कहने लगी. नहीं पापा को इसबारेमे कुछ नहीं बताना.तुम जो बोलोगे में करुँगी. लेकिन इस बारेमे अपने पापा से कुछ नहीं कहना।
जैसे मेने वो बात माँ के मुँह से सुनी में खुश हो गया.
मेने माँ को कहा फिर मुझे कुछ तुमसे चाहिए.
माँ ने धीरेसे पूछा क्या चाहिए. मेने कहा, मुझे वही सब चाहिए जो तुम उस आदमी के साथ कर रही थी.
मेरी बात सुनकर माँ सहम गयी. वो पीछे अपने पलंग पर बैठ गयी. सिसकते हुए मुझे कहने लगी. नहीं ये गाला है. तुम मेरे बेटे हो. ऐसा मत करो.
में अपनी बात पे डटा रहा. मेने माँ को फिरसे कहा. मुझे वही चाहिए. अगर नहीं मिला तो में पापा को सबकुछ बता दूंगा.
माँ सहम ते हुए मेरी तरफ देख रही थी. कुछ देर मे ऐसे ही खड़ा रहा फिर धीरेसे माँ की और बढ़ने लगा. माँ अपने आप को पीछे करने लगी. धीरेसे में उसके पास पोहचा. जैसेही में माँ के सामने खड़ा हुआ. माँ मेरे लंड की और देखने लगी. मुझे कहने लगी. मत करवा मुजसे हे. ये सही नहीं है.
मेने माँ की बात अनदेखी की और सीधा अपनी पेंट को माँ के सामने निचे की. अंदर से मेरा लंड बाहर निकला. माँ एक नजर मेरी तरफ देखती और फिर नजर को मेरे लोडे पर घूमती.
मेने उसका हात पकड़ा और लोडे को लगाया.
माँ नहीं नहीं कहते हुए मेरा लोडा पकडे बैठी थी. मेने माँ को कहा जल्दी करो. अभी और कोई रास्ता नहीं है.
वो मेरी तरफ देखते हुए लौड़े को हिलने लगी. आह्ह्ह्ह. माँ के कोमल हातो में मेरा लोडा काफी आनंद दे रहा था.
माँ को भी एहसास हुआ के अभी और कोई रास्ता नहीं. वो जोर जोर से लौड़े को हिलाने लगी. अहहहह ससससस हहहह. सुउउफ उफ्फ्फ… अह्ह्ह्ह
कुछ देर लंड को हिलने के बाद मेने माँ को कहा बस रुको अब और अपने मुँह में लेलो. माँ फिरसे मेरी तरफ देखने लगी. मेने उसकी कोई बात नहीं सुनी। अपने खड़े लौड़े को माँ के मुँह के करीब ले आया.
माँ ने भी धीरेसे अपना मुँह खोला और लौड़े को मुँह में ले लिया. अहहहहह. अहहहह. मुँह में जाते ही मेरे लौड़े ने मनो नाचना सुरु किया. आहहह. माँ की जबान लौड़े पे घूमने लगी. माँ मेरे लौड़े को चूसने लगी. मुठी में लौड़े को पकड़ के हिलने लगी. और हिलाते हिलाते चूसने लगी.
अहहहहहह. क्या मजा दे रही थी माँ अहःअहः…. में माँ को अपना लौड़ा चूसते हुए देख और भी उत्तेजित हो रहा था. अहहहह अहहह…. उफ्फ्फ्फ़.
काफी देर बाद जब लौड़ा माँ के मुँह से बाहर निकला, लौड़े पे माँ की लाल से लौड़ा चिकना हो चूका था.
मेने फिर माँ को कहा बीएड पे लेट जायो. इसबार माँ ने कोई भी रोकटोक नहीं की. वो सीधा लेट गयी. में माँ के ऊपर चढ़ा. माँ की और देखते हुए उसपर चढ़ गया. और माँ के होठोंको चूमने लगा.
उम्मम्मम ाएमममम। .. माँ के ऊपर आते मेरे शरीर में हवस भर गयी थी. मेने पागलो की तरह माँ को चूमना सुरु किया. माँ भी मुझे चूमने लगी. होठोंसे होकर गालो पर चूमने लगा. फिर गर्दन चूमने लगा. धीरे धीरे में माँ के स्तनों पर आ पोहचा. माँ की साडी को हटा के माँ के ब्लाउज़ को मेने पकड़ लिया. स्तनों को हातोंसे से दबाने लगा. माँ ने मेरी हवस को देखते हुए अपना ब्लाउज़ निकल दिया.
आहहह. क्या बड़े गोरे स्तन थे. निप्पल को जैसे ही देखा, मुजसे रहा नहीं गया. मेने तुरंत निप्पल मुँह में लिया और चूसने लगा. अहहहह. अहहहह। …
दोनों स्तनों को मसलकर निप्पल को चूस रहा था. अहहहह. उफ्फ्फ्फ़. आहहह.
फिर निचे जाने लगा. माँ के कमर से होकर चूमते हुए निचे जांग पर आ पोहचा. साडी को ऊपर उठा लिया. माँ की चड्डी दिखने लगी. गोरी जांग को चूमते हुए मेने माँ की चड्डी निचे खींची.
चड्डी उतारते ही मेरे आंखोके सामने माँ की चुत दिखाई दी. मेने जरा भी देर न की और चुत को चाटने लगा. माँ जोर जोर से चिल्लाने लगी. अहहह अहह. बेटा अहहहह माँ ने दोनों पैर फैलाके मुझे अंदर ले लिया. चुत में जबान डालकर में चाट रहा था. चुत पहले से ही गीली थी. आहहहह अहहहह. उफ्फफ्फ्फ़ उम्म्म्म अहहहह…
काफी देर चुत चाटने के बाद मेने अपना लौड़ा सामने लिया. धीरेसे चुत में दाल के माँ के दोनों पैर पकडे और माँ को चोदने लगा. अहहह अहःअहः। उफ्फ्फ्फ़ अहःअहः अहहह. आह
लौड़ा पूरा माँ के चुत में चला गया था. में जोर जोर से माँ को चोदने लगा. में भूल ही गया था के में अपनी माँ को चोद रहा हु. लौड़ा भी इतना तन गया था की चोदने के आलावा और कुछ सूज ही नहीं रहा था.
अहहहह हहहह. माँ भी पलंग पे तड़प रही थी. उसे भी मजा आने लगा था. मेने भी अपनी चोदने की गति बधाई और माँ के ऊपर लेटकर उसे चोदने लगा अहहहह। … अहहहहहह
फिर में पीछे हटा. अब माँ को मेने घोड़ी बना दिया. माँ ने अपनी गांड जैसे उठाई, में देखता ही रह गया. माँ की गोल बड़ी गांड को सहलाते हुए दोनों हतोसे दबाने लगा. गांड के निचे गीली चुत चमक रही थी. गांड को दबाते हुए मेने अपने लौड़े को फिर से माँ की चुत में धकेला. जैसे ही माँ की चुत उछलने लगी. मेने माँ की कमर कसकर पकड़ी. और चोदना सुरु किया.
अहहहहहह. इसबार लौड़ा पूरा अंदर जा रहा था. अहहह अहहह. उफ्फ्फ्फ़. अहःअहः. काफी अंदर तक लंड को डालकर चोद रहा था. अहहहहह. अहहह. ाहः.
बहोत मजा आ रहा था. माँ अपना मुँह पलंग की गद्दी पर रख सिसक रही थी. अहहहह आहाहा… अहहहह. में यहाँ माँ को चोदते जा रहा था.
पानी निकलने आया तो मेने अपनी गति बढ़ा दी. और जोर जोर से चोदने लगा. आहहहहह. माँ अहःअहः. चोदते हुए माँ को कहने लगा. क्यों तू दूसरे से चुदवाती है. मुजसे चुदवायाकर.
मेरी बाते सुन माँ भी कहने लगी. हां बेटा अब से में तुजसेही चुड़वाउंगी ाहाहाःहाहा. ाहः.
जैसे ही मुझे लगा पानी निकलने ही वाला है, मेने तुरंत लौड़े को बाहर निकाला और माँ की गांड पे ही सारा पानी उड़ा दिया।
कुछ देर में वह ही पलंग पर लेटा रहा. माँ बाहर चली गयी थी. फिर भी बाहर निकला. हमने पापा को कभी इस बात की खबर होने नहीं दी.
माँ अभी भी उस आदमी से मिलने जाती है. लेकिन वो मुझे भी घरमे खुश रखती है. इसलिए मेने कभी उसे रोका नहीं.
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