एक छोटे से गांव में मंदिर को सम्भालनेका काम गांव का एक पंडित किया करता था. गांव में ज्यादातर बुजुर्ग लोग थे. जवान सारे काम करने के लिए शहर में रहा करते थे. उसी मंदिर में गांव की एक लड़की सिमा आया करती थी. उसे भगवन की पूजा करना पसंद था. सिमा करीब २१ साल की लड़की थी. सुभह ७ बजे मंदिर पोहच जाती और पडितजीके सात पूजा पाठ करती।
पंडित जी और सिमा की अछि बनती। पडित जी की उम्र ५० थी. बढ़ी सफ़ेद दाढ़ी, और हमेशा कुरता और निचे सफ़ेद रंग की धोती में रहते। मंदिर के पीछे एक छोटा माकन था जहा पंडित जी रहा करते ते.
एक दिन सुभह का वक्त था. हमेशा की तरह सिमा सुभह ७ बजे मंदिर पोहची। पंडित जी मंदिर में ही थे. सिमा ने पंडित जी का हाट बाटना सुरु किया। सिमा पूजा में पंडित जी का मदत करने लगी. जैसे ही पूजा ख़तम हुई.
सिमा पूजा में इस्तेमाल किये हुए बर्तन एक बड़ी थाली में बटोरनेलगी। तभी पंडित जी ने सिमा की पीठ पे हात रखा और उसे धीमी आवाज ने कहने लगे, सारे बर्तन अच्छे पानी से धो लेना। पंडित जी बाते करते हुए सिमा की पीठ सहलाने लगी. सिमा ने इसका विरोध नहीं किया। सिमा पंडित जी से इतनी घुल मिल गयी थी के वो पंडित जी का किसी भी बात का बुरा नहीं मानती।
फिर जब सिमा जाने निकली। सिमा जैसे पंडित जी के पैर गिरकर खड़ी हुई, पंडित जी ने हसते हुए सिमा को अपने करीब लिया और उसे गले लगा लिया। कसकर सिमा को गले लगाकर कुछ देर पकडे रहे.
सिमा ने कभी किस बी बात का बुरा नहीं माना तो पंडित जी का हौसला और भी बढ़ गया. कुछ दिन तक ऐसे ही पंडित जी सिमा के करीब जाते और किसी तरह उसे छू लेते।
कभी सिम की बाजु को हात लगाते तो कभी उसकी पीठ को सहलाते। फिर जब पूर्णिमा का दिन आया, पंडित जी ने सिमा को कहा, के मंदिर पूरा दिन बंद रहेगा। सुभह स्नान करके एकबार पूजा की जाएगी। फिर मंदिर बंद कर देंगे।
पूर्णिमा के दिन सुभह सिमा सफ़ेद रंग का कुर्ता और पजामा पहनकर आयी थी. सिमा मंदिर में आते ही, उन्होंने मंदिर का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। सिमा को कहा तुम पूजा की तैयारी करो में तुरंत स्नान लेकर आता हु.
थोड़ी देर बाद, पंडित जी स्नान लेकर आये. सिमा पंडित जी को देखकर थोड़ी चौक गयी. क्यूंकि पंडित जी ने सिर्फ लंगोटी पहनती थी. और उनके शरीर पे कुछ नहीं था. भगवन का नाम जपते हुए हात में एक तांबे का पानी से भरा कलश लेकर आये. आकर वो पूजा में बैठे। सिमा पास ही में बैठी थी. पंडित जी ने पूजा सुरु की. सिमा से जो भी देने के लिए कहते वो सब पंडित जो देती। कुछ देर पूजा चली.
जैसे पूजा ख़तम हुई. पंडित जी ने चन्दन का टिका सिमा के माथे पे लगाया। फिर टिका उसकी गर्दन पे लगाया। फिर सिमा को कहने लगे. अपना कुरता ऊपर करो. सिमा थोड़ी चौक गयी लेकिन पंडित जी ने कहा है तो वो मना नहीं कर पायी। उसने कुर्ता ऊपर उठाया और पंडित जी ने सिमा की नाभि पे चन्दन का टिका लगाया। सिमा को नाभि पे ठंडा महसूस हुआ तो वो मुस्कुराने लगी.
फिर पंडित जी ने सिमा को कहा खड़ी हो जायो। सिमा खड़ी हुई और जैसे जैसे पंडित जी ने कहा वैसे वैसे वो पूजा करने लगी. पहले फूल अर्पण किये, पानी चढ़ाया। उसके बाद पंडित जी मंत्र पढ़ते हुए ईशारेसे सिमा को कहा की मेरे पैरो पे बैठो। सिमा कुछ सोच नहीं पायी। वो पंडितजी जैसे कहते वैसे करती।
सिमा जैसे पंडित जी के पैरो पे बैठी, पंडित जी ने उसे ठीक से अपनी गोदी में बिठा लिया। फिर उसके हात में कमंडल देकर बोले पकडे रहो. सिमा कमंडल पकड़े बैठी, पीछे से पंडित जी मंत्र कहते। मंत्र कहते हुए पंडित जी ने दोनों हातो से सिमा की कमर पकड़ली, फिर उसे बोले अब थोड़ा थोड़ा पानी आगे डालते चलो. है मंत्र के बाद सिमा थोड़ा पानी निचे गिरती।
सिमा को लग रहा था के पूजा चल रही है. लेकिन पंडित जी का तो दूजा चल रहा था.
सिमा का शरीर जैसे पंडित जी के लंड को चुने लगा. उनका लंड खड़ा होने लगा. पंडित जी मंत्र पढ़ते पढ़ते सिमा के पीठ पे हात रगड़ने लगे. उसके बालो की खुसबू सूंघने लगे. पण्डितजीका शरीर तपने लगा. उन्होंने पूजा ख़तम करने के पहले सिमा को कसकर पकड़ा और अपने लंड पे ठीक से बैठकर निचे से लंड को सिमा की गांड पे रगड़ने लगे. पंडित जे वो स्पर्श सहा नहीं गया और मंत्र कहने के दौरान उनके मुँह से आह्हः की आवाजे निकलने लगी. आह्हः ससष्ठ शहहआ
पंडित जी का तपता बदन उनको असहनीय होने लगा. पंडित जी ने सिमा को खड़े होने कहा. फिर वो भी खड़े हुए. जैसे पंडित जी खड़े हुए. उनका खड़ा लंड लंगोटी के ऊपर से साफ साफ दिख रहा था. सिमा की नजर खड़े लंड पर पड़ी और वो कुछ देर उसे देखती ही रही.
पंडित जी ने खड़े होकर सिमा को कहा झुको और धीरे धीरे कमंडल से पानी निचे डालो। जैसे ही सिमा पानी डालने के लिए झुकी। पंडित जी ने पीछे से सिमा को पकड़ा और अपना खड़ा लंड उसकी गांड पे दबा दिया। आअह्ह्ह। गांड पे लंड दबाकर मंत्र बोलने लगे. मंत्र कहते समय धीरे धीरे अपनी कमर को हिलाकर सिमा की गांड पे लंड को घिसने लगे. अहह अहह बिच बिच में पंडित जी की सिसकती आवाज सिमा को सुनाई दे रही थी. लेकिन वो जैसे पंडित जे कह रहे ते वैसे ही किये जा रही थी.
अहह उम्म्म्म आहहहह
अहह अहहह हहहह
अब पंडित जी का सय्यम ख़तम होने लगा. उन्होंने सिमा को पीछे के घर में आने के लिया कहा. जैसे सिमा पीछे के घर में आयी. पंडित जी ने उसे कहा के अब पूजा का अंत करेंगे। पूजा को ख़तम करने के लिए तुम्हे ये सफ़ेद कपडा पहना पड़ेगा।
पंडित जी ने एक बड़ी सफ़ेद साड़ी जैसा सफ़ेद कपडा सिमा को पहने के लिए दिया। उसे कहा इसके आलावा और कुछ भी नहीं पहना है. सिमा ने गर्दन हिलके हा कहा और कपडा लेकर वो अंदर कमरे में चली गयी.
पंडित वही धीमी आवाज मे मंत्र बोलते रहे. कुछ ही पल में जब सिमा कमरे से सफ़ेद कपडा पहनकर बाहर आयी तो पंडित जी की आँखे खुली की खुली रह गयी. सिमा के गोरे शरीर पे लिपटा हुआ सफ़ेद कपडा उसके जवान शरीर को साफ दर्शा रहा था. सिमा के बड़े स्तनों का आकर और सफ़ेद कपडे के ऊपर झलकते उसके निप्पल देखकर पंडित जी के मुँह में पानी आने लगा.
पंडित जी ने उसे कहा यहाँ स्नान गृह में खड़ी हो जाओ. सिमा स्नान गृह में खड़ी हुई. और फिर पंडित जी ने उसे बाल्टी से पानी लेकर अपने आप के ऊपर डालने कहा.
सिमा ने बाल्टी से पानी से भरा लोटा लिया और अपने ऊपर डालने लगी.
पंडित जी वही सामने खड़े होकर सिमा को स्नान करते हुए देखने लगे. जैसे जैसे सिमा पानी अपने शरीर पे डालने लगी. वैसे वैसे सिमा ने पहना हुआ सफ़ेद कपडा गिला होने लगा. गिला होने के साथ सिमा का बदन दिखने लगा.
पतला सफ़ेद कपडा सिमा के शरीर पे चिपक गया. सिमा के शरीर की खूबसूरत बनावट दिखने लगी. पंडित जी ने ऊपर से निचे अपनी नजर घुमाई तो वो बहोत खुश हुए. सिमा का शरीर काफी आकर्षित था. उसके स्तन गोलाकार थे. निप्पल तन गए थे. गोलाकार नाभि दिखने लगी. जांग पे गिला कपडा चिपक गया था. उसी जांग के बिच छुपी सिमा की चुत धीरे धीरे नजर आने लगी.
पंडित जी ने सिमा को कहा अब पलट के स्नान करो. सिमा पलटी। जैसे ही वो पलटी उसके पीठ पे चिपका सफ़ेद कपडा पूरा पारदर्शी हो चूका था. जैसे निचे नजर पड़ी, सिमा की उठी हुई गोलाकार गांड देखकर पंडित जी का गाला सुख गया. गिला कपडा सिमा की गांड की दरार के बिच समां गया था. जिस वजसे सिमा की बड़ी गांड का आकर साफ दिखाई पड़ रहा था.
सिमा ने २ बड़े लोटे पानी अपने शरीर पे डाले। अब सिमा पूरी तरह गीली हो चुकी थी. गिला सफ़ेद कपडा आगे और पीछे से सिमा के गोर बदन पे चिपका हुआ था. पंडित जी ने सिमा को कहा अब समय आ गया है पूजा ख़तम करने का, जैसे में कहु वैसे वैसे तुम करो.
पंडित जी ने मंत्र कहते हुए सिमा को अपने सामने खड़ा किया। सिमा को कहा हात जोड़कर आँखे बंद करके खड़ी रहो. सिमा ने आँखे बंद की हात’जोड़े।
फिर पंडित जी मंत्र कहते हुए सिमा के शरीर पे रखा सफ़ेद कपडा धीरे धीरे हटाने लगे. सिमा ठण्ड की वजस से कपकपा रही थी. पंडित जी ने जैसे ही कपडा हटाया, सिमा पूरी तरह नग्न अवस्था में खड़ी थी.
सिमा को नग्न करते ही, पंडित जी ने अपना भी लंगोट हटा दिया। जैसे लंगोट हटा, पंडित जी का ७ इंच का लम्बा लंड उछल के बाहर निकला। पंडित जी ने लंड हात में लेकर खींचा।
फिर सिमा के सामने आकर उसे कहा अब अपनी आँखे खोलो। सिमा ने जैसे ही अपनी आँखे खोली सामने खड़े पंडित जो को नंग देखकर वो चौक गयी. उसकी नजर पंडित जी के आखो से होकर निचे जाने लगी, और जैसे ही पंडित जी का ७ इंच का खड़ा लंड सिमा ने देखता तो पलभर के लिए वो देखती ही रही.
उसके लिए एक नंगे आदमी को सामने देखना ये एक अनोखा अनुभव था.
सिमा के सामने जो हो रहा था उसे देखकर वो कुछ बोल ही नहीं पायी।
पंडित जी धीरेसे सिमा के करीब आये और उसे कसकर गले लगा लिया। पंडित जे के तपे हुए शरीर की गर्माहट सिमा को अछि लगने लगी. उसने पंडित जी को कसकर पकड़ लिया और सिसकने लगी.
पंडित जी के हात सिमा की पीठ पे रगड़ने लगे. सिमा के स्तन पंडित जी के सीने पे कसकर चिपके हुए थे. पंडित जी ने अपने हात सिमा के पीठ से निचे ले जाकर उसकी गांड पे रखे और प्यार से सिमा की बड़ी गांड को दबाने लगे. सिमा ने जैसे अपनी सवेदनशील गांड पे पंडित जी के हातो को महसूस किया उसके शरीर की गर्मी बढ़ने लगी. सिमा ने पंडित जी को कसकर पकड़ा तो आगे से पंडित जी का लंड चुत पे रगड़ने लगा. पंडित जी का लंड चुत की दरार को छूकर दोनों पैर के बिच आ पोहचा। अहहह उम्म्म पंडित जी की सिसकने की आवाज सिमा के कानो में गूंजने लगी.
ऊपर सिमा के रगड़े स्तन, पीछे गांड पे दबाते पंडित जी के हात और आगे पंडित जी का चुत पे रगड़ता लंड.. सिमा का शरीर चारो तरफ से घिर गया था
पंडित जी ने सिमा को कसकर पकड़ते हुए उसके कंधो से चूमना सुरु किया। सिमा सिसकने लगी. अह्ह्ह उम्म्म्म अह्ह्ह्ह अहहह।
पंडित जी के होठ सिमा के कंधो से होकर उसके गर्दन पे चले गए. चूमते चूमते होठ जैसे सिमा के होठो पे पोहचे। बाबा का सबर टूट गया. पंडित जी ने सिमा के मुँह दोनों हातो से पकड़ा और होठो को चूमने लगे. उम्म्म अम्मामा अम्मामा ममम. उफ्फफ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह अहाः। पंडित जी की उत्तेजना अब सातवे आसमान पे थी. सिमा के कोमल होठो को वो चूसने लगे. उनकी हवस साफ दिखाई दे रही थी. उम्म्म अम्म्मम्म। उम्म्म। जबान से जबान लगते हुए, होटो को होटो से रगड़ते हुए चूसने लगे. उम्म्म अम्मम्म अह्ह्ह उम्म्म
चूमते हुए सिमा के बड़े स्तनों को दबाने लगे. निप्पल को उंगली में पकड़े घिसने लगे. उम्म्म अम्म्म आ.अअअअअ अहहह। जैसे होठो से हटे, सीधा मुँह निचे ले लिया और सिमा के स्तनों को कसकर दोनों हातोंसे दबाते हुए निप्पल को चूसने लगे. उम्म्म अम्मामा। अम्माम्मा। अम्म।
सिमा भी अब मदहोश हो चुकी थी. उसे भी बाबा का ये बर्ताव पसंद आने लगा. उसकी सिसकती हुई आवाज ने मंदिर गुजने लगा. आह अहहह उम्म्म्म। अम्म्मा।।।
पंडित जी ने अपने दोनों पंजो से स्तनों को जकड़लिया था. कसकर स्तनों को दबाते हुए उसकी कोमलता का मजा ले रहे थे. अहहह आहहह
जैसे ही स्तनों से पंडित जी हटे, उन्होंने पास रखा कमंडल हात में लिया। सिमा पंडित जी को देखने लगी. पंडित जी ने कमंडल हात में पकडे सिमा को कहा, हात में पकड़ो। अपने लंड की तरफ इशारा किया।
सिमा ने पंडित जी के लंड को हात में पकड़ा। सिमा को पंडित जी ने कहा ठीक तरह से ढोना। और फिर पंडित जी लंड पे पानी डालकर मंत्र पढ़ने लगे. सिमा दोनों हातो से लंड को धोने लगी. पानी लंड पे गिरता रहा. सिमा के कोमल हात का लंड पे होने वाला स्पर्श महसूस करते हुए पंडित जी ने आँखे बंद कर दी. अहह उम्म्म की आवाज करते हुए मंत्र कहने लगे.
अछि तरह लंड को धोकर पंडित जी ने सिमा को कहा, अब इसे धीरेसे मुँह में लेकर इसे चुसो। सिमा ने एक नजर लंड देखा, अपने हातो को लंड पे रगड़ते हुए मुठी से पकड़ लिया और फिर धीरेसे अपने मुँह में लंड को लेकर चूसने लगी. उम्म्म अमामा।।।। पंडित जी की आह निकल गयी.. सिमा के मुँह में लंड जाते ही उनकी सिसकने की आवाज दुगनी हो गयी. आह्ह्ह्ह।।उम्मम्मम्म
सिमा ने जैसे देखा पंडित जी को मजा आ रहा है. उसने लंड जोर जोर से घिसना सुरु किया मुँह में लेकर चूसने लगी. उम् ममम उम्. चूसते हुए निचे लटके गोटे दबाने लगी. अहह अहहह उम्म्म अह्ह्ह।
काफी देर चूसते रही ही. फिर पंडित जी ने सिमा को रोका। उसे निचे जमीन पे सुला दिया।
सिमा के पैर फैलाके, पंडित जी बिच में बैठे। सामने सिमा की चुत खुलते हुए देख पंडित जी को रहा नहीं गया और भूके शेर की तरह उन्होंने अपना मुँह सिमा की चुत पे रखा और चुत को जबान से चाटने लगे. आहहह सिमा आवाज करने लगी. अह्ह्ह उम्म्म उफ्फफ्फ्फ़। अह्ह्ह्ह
पंडित जी चुत कहते जा रहे थे, और सिमा जमीन पर हात पटकते हुए आँखे बंद कर तड़प रही थी. अह्ह्ह उम्म्म अम्म्म अम्माम्मा
पंडित जी ने पूरी जबान सिमा के चुत में डाली और जो पानी चुत से निकल रहा था, सब चाट गए. फिर एक ऊँगली चुत में डालकर रगड़ने लगी. इससे सिमा की शरीर की आग और बढ़ गयी. उसे और भी मजा आने लगा. अहंम उम्म्म। .. आअह्ह्ह हह अहःअहः उम्म्म्म
काफी देर चुत को चाटने के बाद, पंडित जी ने अपना लंड आगे लिया, और धीरेसे सिमा की चुत में डाल दिया। अह्ह्ह। चुत में लंड जाने लगा. अह्ह्ह आह. इतना बड़ा लंड चुत में लेकर सिमा खुश हो गयी. पंडित जी ने कसकर उसे चोदना सुरु किया। अह्ह्ह ओममममम।।।
बहोत दिन बाद पंडित जी को चुत मिली थी. इसलिए वो भूके शेर की तरह सिमा को चोदे जा रहे थे. अहहह्म्म उम्म्म्म
लंड को पूरा अंदर तक घुसा के चोद रहे थे. जितना अंदर जाता उतना अंदर दबा रहे थे.
कुछ देर चोदने के बाद, जब उठे तो लंड चुत के पानी से गिला हो चूका था. ऐसे ही उठकर पंडित जी निचे जमीन पे सीधा लेट गए, सिमा को अपने ऊपर लेकर उसे लंड पे बिठा लिया। सिमा लंड पे जैसे बैठी, लंड पूरा चुत में ले लिया। लंड को अंदर लेकर ऊपर निचे उछलने लगी. आअह्ह्ह। अब सिमा की मदहोश जवानी देखते हुए पंडित जी चुदाई का आनंद ले रहे थे.
अह्ह्ह उम् अम्म्म। सिमा के बाल खुले। लंड को पूरा अंदर जाते देख पंडित जी बहोत खुश थे. उछलते हुए सिमा के स्तनों को देखना किसी सपने से कम नहीं था.
अह्ह्ह उम्म्म अम्म्म अम्मम्म उम्म्म्म
अह्ह्ह अम्म्मम्म
थोड़ी देर ऊपर से चुदाई करके, पंडित जी ने सिमा को अपने पास खींच लिया और कसकर उसे गले लगते हुए उसे चूमने लगे. निचे लंड अभी भी चुत में ही था. चूमते हुए अपने दोनों हात सिमा की गांड पे ले गए और कसकर गांड पकड़के सिमा को फिर से छोड़ने लगे. कमर को उठा उठा कर लंड को चुत में धकेल रहे थे
अहह अहह उम् अह्ह्ह उम्म्म्म अम्मम्म
उम्म्म ओह्ह्ह अह्ह्ह
पटक पटक कर चुदाई के बाद. पंडित जे ऊपर से सिमा हटी. पंडित जी उठे और सिमा को घोड़ी बना दिया। पीछे से पंडित जी ने सिमा की गांड दबायी, उसे चूमा और लौड़े को फिर से चुत में धकेल के सिमा को चोदने लगे. अहह अहहह उम्म्म अम्मम्म।।।
पंडित जी को लगने लगा की पानी कभी भी निकल सकता है तो उन्होंने अपनी गति बधाई। सिमा की कमर को कसकर पकड़े लौड़े को चुत में धकेलने लगे. आठ अहह उम्म्म अहहह्म्म इमम्म। उफ्फफ्फ्फ़।
दोनों भी जोर जोर से सिसकराहे थे. दोनों का शरीर अब चुदाई में पूरी तरह तल्लीन हो चूका था. पंडित जी सिमा की नंगी पीठ पे अपने हात घूमते हुए लौड़े को चुत में धकेल रहे थे. अह्ह्ह अह्ह्हौंमम अहःअहः अहहह। जवान लड़की को चोदने में जो मजा आ रहा था पंडित जी को. वो उसका पूरा मजा ले रहे थे.
कुछ देर बाद लौड़े ने पानी निकलने का इशारा दिया, पंडित जी ने लंड को चुत से बाहर खींचा। सिमा को अपनी तरफ किया और उसके मुँह में लंड दबोच दिया। जैसे ही सिमा लंड को चूसने लगी. सिमा के मुँह में लौड़े ने पानी की बौछार कर दी. गरम पानी की धार सिमा के मुँह में गिरने लगी. उम्म्म अह्ह्ह्ह अम्म्मम्म
उफ्फफ्फ्फ़ मममममम
अहहहहह
पूर्ण पानी निकला तब पंडित जी ने चैन की सास ली. पंडित जी ने सिमा को सारा पानी पि जाने के लिए कहा. सिमा वो पूरा पानी गटक गयी. अहह उम्म्म्म
पंडित जी ने खड़े होकर प्यार से सिमा को गले लगाया। उसे चूमा
उस दिन के बाद से सिमा पंडित जी के साथ खुलकर चुदाई करती। जब भी मन करता पंडित जी सिमा को पीछे के घर में ले जाते और उसे उठा उठाकर चोदते
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