रुचिका और शुभम की सेक्स स्टोरी part 2

उस पहली रात के बाद से हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। रुचिका अब मेरी लाइफ का सबसे बड़ा एडिक्शन बन चुकी थी। ऑफिस में हम दोनों प्रोफेशनल रहते, लेकिन नजरें मिलते ही वो मुस्कुराती और आँख मारती – जैसे कह रही हो, “आज रात फिर से?” मैं भी बस इंतजार करता रहता।

कुछ दिन बाद एक फ्राइडे शाम को ऑफिस में टीम मीटिंग के बाद सब घर चले गए। सिर्फ हम दोनों बचे थे – वो भी इसलिए क्योंकि रुचिका ने जानबूझकर अपना लैपटॉप चार्जर भूलकर रख दिया था। मैंने कहा, “चल, मैं तुझे घर छोड़ दूँ।” लेकिन वो बोली, “नहीं शुभम, आज ऑफिस में ही रहते हैं थोड़ी देर। कोई नहीं है।”

हम लाइट्स बंद करके सिर्फ टेबल लैंप जलाकर बैठ गए। वो मेरे पास आई, मेरी कुर्सी पर मेरी गोद में बैठ गई। उसकी स्कर्ट ऊपर चढ़ गई, और मैंने महसूस किया कि आज वो पैंटी ही नहीं पहनी थी! “आज मैं तैयार आई हूँ तेरे लिए,” वो फुसफुसाई। उसकी चूत पहले से ही गीली थी, मेरी जाँघ पर लग रही थी।

मैंने उसे किस करना शुरू किया – पहले होंठों पर, फिर गर्दन पर, कान के पीछे। वो सिसकारी ले रही थी, “आह्ह… शुभम… आज मुझे बहुत जोर से चोदना है… मैं पूरे हफ्ते तेरे बारे में सोचकर गीली हो रही थी।” मेरे हाथ उसके शर्ट के अंदर गए, ब्रा के हुक खोले और उसके बड़े-बड़े स्तन बाहर निकाले। निप्पल्स कड़े थे, गुलाबी और सूजी हुई। मैंने एक को मुँह में लिया, चूसा, दाँतों से हल्का काटा। वो कमर उछाल रही थी, “हाँ… ऐसे ही… काट मुझे… दर्द के साथ मजा आता है!”

फिर वो नीचे उतरी, मेरी पैंट उतारी और लंड बाहर निकाला। वो पहले से ही पूरा खड़ा था, नसें फूली हुईं। उसने जीभ से टिप चाटी, फिर पूरा मुँह में लिया – धीरे-धीरे, गहराई तक। मैंने उसके बाल पकड़े और धीरे से धक्के दिए। वो गैग कर रही थी लेकिन रुक नहीं रही थी। उसका थूक मेरे लंड पर बह रहा था, चमक रहा था। “रुचिका… तू कितनी अच्छी चूसती है… आह्ह… बस ऐसे ही!”

कुछ मिनट बाद मैंने उसे उठाया और ऑफिस के कांफ्रेंस टेबल पर लिटा दिया। उसकी स्कर्ट पूरी ऊपर, पैर फैलाए। मैंने घुटनों पर बैठकर उसकी चूत चाटनी शुरू की। वो क्लीन शेव्ड थी, गुलाबी और बहुत टाइट। क्लिटोरिस पर जीभ घुमाई, फिर दो उँगलियाँ अंदर डालीं और जी-स्पॉट ढूंढा। वो चीख रही थी, “शुभम… उँगलियाँ और तेज… मैं आ रही हूँ… आह्ह्ह!” उसका रस मेरे मुँह में बहा, मीठा और गरम। वो थर-थर काँप रही थी।

अब बारी मेरी थी। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा, टिप अंदर डाली। वो टाइट थी, लेकिन गीली होने से आसानी से अंदर चला गया। मैंने धीरे-धीरे शुरू किया, फिर स्पीड बढ़ाई। टेबल हिल रहा था, पेपर गिर रहे थे। वो पैर मेरी कमर पर लपेट रही थी, “जोर से… फाड़ दे मुझे… तेरे लंड की आदत पड़ गई है!” मैं जोर-जोर से ठोके मार रहा था, उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने एक हाथ से उसके गले को हल्का दबाया (जैसा वो पसंद करती थी), दूसरा हाथ क्लिट पर। वो पागल हो रही थी।

फिर मैंने उसे पलटा – डॉगी स्टाइल में। उसके गोल नितंब पकड़े, पीछे से घुसाया। वो जोर से चिल्लाई, “आयyy… गहरा… और गहरा!” मैंने उसके बाल पकड़े, पीछे खींचे और जोरदार ठोके मारे। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। मैंने एक उंगली उसकी गांड में डाली – वो पहले से ही तैयार थी। “हाँ… आज गांड भी मार… मैं तेरी हूँ पूरी तरह!”

मैंने लुब्रिकेंट (जो वो बैग में लाई थी) लगाया और धीरे से गांड में डाला। वो टाइट थी, दर्द हो रहा था लेकिन वो बोली, “रुकना मत… धीरे कर लेकिन पूरा डाल!” मैंने पूरा अंदर किया, फिर धीरे-धीरे चोदना शुरू। वो रो रही थी लेकिन मजा भी ले रही थी, “आह्ह… दर्द अच्छा लग रहा है… जोर से चोद मेरी गांड!” मैं स्पीड बढ़ाई, एक हाथ से चूत में उँगलियाँ डालकर। वो दो जगह से स्टिमुलेट हो रही थी।

शेवटी मैंने उसकी चूत में वापस डाला और जोर से झड़ गया – बहुत सारा गर्म माल अंदर। वो भी साथ में आई, चूत काँप रही थी। हम दोनों टेबल पर गिर पड़े, साँसें फूल रही थीं। पसीना, सेक्स की खुशबू, और ऑफिस का सन्नाटा।

उसने मेरी तरफ देखा, मुस्कुराई और बोली, “शुभम, ये सिर्फ पार्ट 2 है। अगली बार होटल में पूरी रात… और कुछ नया ट्राई करेंगे।” मैंने उसे किस किया और कहा, “तू मेरी है, हमेशा।”

अब हर वीकेंड हम कहीं न कहीं मिलते हैं – कभी कार में, कभी उसके फ्लैट में, कभी होटल में। ऑफिस में रिस्क लेकर भी कभी-कभी। वो मेरी सेक्स पार्टनर नहीं, मेरी पूरी दुनिया बन गई है।

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