३ स्टूडेंट और एक टीचर

आज जो में कहानी बताने जा रही हु वो सच्ची घटना पे आधारित है. मेरा नाम नीमा है. में एक टीचर हु। कॉलेज के बच्चो को पढ़ाती हु. अभी हम एक नए शहर में रहने आये थे. यहाँ आकर करीब ४ महीने हमें हुए है. मेरे पति एक बड़ी कंपनी में काम करते है. दोनों भी पढ़े लिखे है तो दो भी पैसा कमाते है. हमने काफी मेहनत करके पैसे इखट्टा किया और ३ रूम का फ्लैट अछि सी सोसाइटी में ले लिया है.

एक ही फ्लोर पे हमारे ३ कमरे है. एक रूम हमने किराये पे दे दिया। एक में हम रहते और एक रूम को मेने अपना क्लास बना दिया। कमरे में बच्चो को बैठने के लिए खुर्सिया, टेबल, लिखने के लिए बोर्ड सारि सुविधाएं बना के रखी थी.

अब मेरे बारे में थोड़ा बात दू. में और मेरे पति हम दोनों ही रहते है. काफी दिनों से काम के बढ़ते टेंशन की वजस से हमारे बिच का रिश्ता ठीक नहीं चल रहा था. मेरे पति जब रातको घर आते. में पूरी कोशिश करती के उनको खुश करू. उनके क्ररीब जाकर उनको प्यार करने की कोशिश भी करती लेकिन वो कुछ न कुछ बहाना देकर मुजसे दूर चले जाते और सो जाते।

काफी महीनो से यही चल रहा था. ना हमारी बाते ठीक से होती, न मुझे शारीरिक सुख मिलता। इस वजसे में थोड़ी मायूस भी रहा करती। मेरा किसी भी चीज में मन नहीं लगता। किसी तरह क्लास के बच्चो से बाते करके मेरा दिल हल्का हो जाता।

एक दिन की बात है. में अपने क्लास के बच्चो को पढ़ा रही थी. उस दिन मेने क्लास में साडी पहनी थी. ३ कॉलेज के बच्चे थे. नितिन, रमेश, और आदित्य। सब की उम्र १९ से २० साल के बिच थी. उस दिन दो बच्चे आगे बैठे थे. रमेश पीछे बैठा था. रमेश गणित के सवाल ठीक से हल नहीं कर रहा था. तो में उसके बगल में खुर्सी लेकर बैठी और उसे पढ़ाने लगी.

उसकी किताब पे लिखते हुए जब में प्रश्न का हल निकाल रही थी तब रमेश मेरी गर्दन की तरफ देखने लगा. पहले तो मेरा ध्यान नहीं था. लेकिन जब मेने देखा की वो कुछ देखे जा रहा है. तो मेने पहले तो अपना पल्लू ठीक किया।

मुझे पता चला की जैसे ही मेरे साडी का पल्लू सरक रहा था, मेरे मम्मो की बिच की दरार दिख रही थी. रमेश मेरे ब्लाउज़ के अंदर झाकने की कोशिश कर रहा था. मेने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, और ब्लाउज़ को ठीक से पल्लू से ढककर रमेश को पढ़ाने लगी.

फिर दूसरे दिन, में बोर्ड पे पढ़ा रही थी. तभी मुझे भास् हुआ के जैसे ही में पलटकर बोर्ड पे लिखना सुरु करती हु, पीछे बैठे दिनों बच्चे कुछ हरकते कर रहे है. मुझे पीछे हलचल महसूस हो रही थी. लेकिन जैसे ही में मुड़ती, सभी शांत बैठे मेरी तरफ ध्यान दे रहे होते थे. मुझे लग रहा था दाल में कुछ तो काला है.

तो मेने क्या किया। उनको एक सवाल लिखने कहा. तबतक में सामने खुसी पे बैठी। मेरे सामने जो टेबल था, उसपर मेने अपना मोबाइल का कैमेरा सुरु किया। और फोन को ऐसे पुस्तकोंके बिच छुपाके रखा के बच्चो को पता नहीं चले. मेने फ़ोन को ठीक से छुपाके वीडियो सुरु किया।

फिर में उठकर बोर्ड पे सीखने लगी. फिर से मुझे पीछे हलचल महसूस हुई. कुछ देर बाद जब में वापस आकर अपनी खुसी पे बैठी। मेने फ़ोन हात में लिया।
और फ़ोन में रिकॉर्ड किया वीडियो देखने लगी.

जब मेने वीडियो सुरु किया और जो वीडियो में दिखा उससे में दंग रह गयी.

वीडियो में मुझे दिखा। जैसे ही में पलटकर बोर्ड पे लिखना सुरु करती हु. आगे बैठा नितिन दोनों हातो से गंदे गंदे इशारे कर रहा है. उसने ऐसे इशारा किया जैसे वो मेरी गांड दबाना चाहता है. फिर पास में बैठा आदित्य ऐसे एक्टिंग करता है जैसे उसने मुझे अपने पैर पे बिठाके मेरी कमर को पकड़के बैठे बैठे मुझे चोद रहा है.

पीछे बैठा रमेश ईशारेसे बताने लगा, जैसे वो मेरे स्तनों को दबा रहा है और स्तनों के बिच मुँह रखकर घिस रहा है.

ये सब देखकर में चौक गयी. मुझे अब समज नहीं आ रहा था के में क्या करू. में कुछ करती तो फिर तीनो को मुझे निकालना पढता।

उस दिन मेने कुछ नहीं किया। रातभर मेरे दिमाग में यही चल रहा था. उस वीडियो को में जितना देखती मेरे मन में अजीब से हलचल पैदा होती।

सच कहु तो में भी बहोत दिनों से भुकी थी. पति से शारीरिक सुख मिल नहीं रहा था. अब जब तीन नौजवान लड़को को मेरी तरफ आकर्षित होते हुए देख रही हु, मुझे रहा नहीं जा रहा था. मेरी चुत गरम होने लगी थी. शरीर की कपकपाहट, मन में बढ़ती हलचल मुझे लड़को के करीब जाने का इशारा दे रही थी.

दूसरे दिन फिर से में साडी पहनकर पढ़ाने लगी. इसबार मेने जो ब्लाउज़ पहना था, उसमे बाजु नहीं थी. मेरे गोर हात खुले दिख रहे थे. ब्लाउज़ भी गले से काफी निचे था जिससे मम्मो के ऊपरी भाग अच्छे से दिख रहे थे. ये सब करके मुझे जानना था के ये तीनो लड़को के मन में क्या चल रहा है.

हमेशा की तरह मेने पढ़ाना सुरु किया। मेने सभी को एक पाठ लिखने कह दिया। और फिर में पीछे बैठे रमेश के पास चली गयी. उसे मेने मम्मो के बिच देखते हुए पहले भी देख लिया था.

में रमेश के बगल में बैठी। उसे पढ़ाने लगी, पढ़ाते समय रमेश मेरे गले की तरफ देखने लगा. जालीदार साडी के पल्लू के बिच से दिख रहे मेरे स्तनों को देखे जा रहा था.

धीरे धीरे मेने अपना दाया कन्धा निचे करना सुरु किया तो मेरा पल्लू निचे फिसलने लगा. कुछ ही देर बाद पल्लू पूरा निचे फिसला और रमेश को मेने अपना ब्लाउज़ दिखा दिया। छोटे ब्लाउज़ के ऊपर से दरार साफ साफ दिख रही थी. गहरी दरार के बिच रमेश झाकने लगा. उसकी भी आखे चकाचौंद हो चुकी थी. मेने पल्लू कुछ देर निचे ही गिराए रखा, फिर जब फिर से पल्लू को उठाके ऊपर ले रही थी, तो जानभूझकर पल्लू को हात में पकड़े, पल्लू को ठीक करते हुए देर लगा रही थी. ताके रमेश को ज्यादा मौका मिल जाये मेरे स्तनों के अंदर झाकने का.

में पढ़ते हुए पल्लू ठीक कर ही रही थी के मेने देखा रमेश अपने लंड को छूने लगा. पैंट के अंदर उसका लंड बड़ा होते हुए मुझे दिखाई दे रहा था. जब उसने लंड को दबाया, तब मेने तिरछी नजर से देख लिया। देखकर पता चल रहा था की रमेश का लंड काफी लम्बा हो चूका है.

मुजसे समक्ष की हलचल को देखकर रहा नहीं गया. मेने पहले तो अपना पल्लू ठीक किया। मम्मो को ढकते हुए बिच की जगह खुली ही छोड़ दी ताके रमेश देखता रहे. फिर बातो बातो में पढ़ाते हुए मेने रमेश की जांग पे हात रखा, तो रमेश चौक गया. उसका शरीर जम सा गया.

में पढ़ाये जा रही थी, वो कुछ भी हलचल नहीं कर रहा था. मेने एक नजर उसके पैंट पे घुमाई, तो मेने देखा पैंट के अंदर गाजर रखा है ऐसी वो फूल गया था.

मेने धीरे धीरे अपना हाट रमेश की जांग पे घुमाया, रमेश मचलने लगा. उसकी सास चढ़ने लगी. मुझे भी डर लग रहा था लेकिन मेरी शरीर की गर्मी अब बढ़ी जा रही थी.

रमेश की जांग पे हात घुमाते हुए मेने धीरेसे अपना हात उसके लंड पे रखा तो उसने चौकते हुए मेरे भी जांग पे अपना हात रख दिया। में धीरे धीरे उसके लंड को सहलाने लगी. वो भी मेरी जांग पे हात घुमाने लगा. आह्हः उम्. रमेश का लंड तो काफी लम्बा था. उसके लंड का आकर जानकर मेरे तनमन में आग लगने लगी. अह्ह्ह ओमममम आम… में हातोंसे उसकी लम्बाई माप रही थी. आह्हः उम्म्म।।।।

अब मुजसे रहा नहीं जा रहा था. तो मेने अपना हात रमेश के लंड से हटाया, और उठाकर अपनी जगह जाकर बैठी। आगे बैठे नितिन और आदित्य को मेने कहा तुम अब घर चले जायो। काल आते समय सारा होमवर्क करके आना. रमेश तू रुको। तुम्ही यही बैठकर पूरी पढाई ख़तम करो.

नितिन और आदित्य जाने लागे। में उनके जाने तक वही बैठी रही. फिर जैसे ही दोनों निकल गए, कमरे का दरवाजा बंद हुआ. मेने रमेश को अपनी बुक लेकर अपने पास बुलाया। रमेश उठकर मेरे पास आया. मेने उसकी बुक ली और उसमे देखने लगी, तभी पास में खड़े रमेश ने फिर से मेरी तरफ देखते हुए अपने लंड को सहलाना सुरु किया। मेरी नजर पढ़ी तो देखा के अभी भी रमेश का लंड खड़ा था. अभी तो साफ़ साफ़ उसकी लम्बाई का पता चल रहा था.

मेने उसकी तरफ देखा। हम दोनों एक दूसरे को देखने लगे. में खड़ी हुई. मेने रमेश को देखते हुए कहा, इस बारेमे किसी को कुछ बताओगे के नहीं। रमेश ने गर्दन हिलाते हुए नहीं कहा.

मुजसे रहा नहीं गया और मेने रमेश को गले लगा लिया। कसकर दोनों ने एक दूसरे को गले लगे. दोनों का शरीर भट्टी जैसे तप रहा था. रमेश ने मेरी पीठ पे हात घूमना सुरु किया और में उसकी पीठ को सहलाने लगी. जैसे ही रमेश ने मेरी गर्दन को चूमा मेरे शरीर में मानो बिजली दौड़ पड़ी. अह्ह्ह अहहह। रहहह। . रमेश मेरी गर्दन को चूमते हुए मेरे गालो तक पोहचा, और फिर दोनों के होठ आमने सामने आये और हमने एक दूसरे को चुम लिया। अह्ह्ह्ह। उम्म्म्म।।।

कब से तड़प रही थी किसी मर्द के होठो को चूमने के लिए अह्ह्ह उम्म्म्म। आआह्ह। रमेश ने कसकर मुझे पकड़े मेरे होठो को चूमा, दोनों की जबान एक दूसरे पे घिसने लगी. अहहह अहहू ममममम। ….

चूमते हुए रमेश ने मेरे दोनों स्तनों को दबाना सुरु किया। आअह्ह्ह।। ऐसे दबा रहा था जैसे दूध ही निकाल रहा हो. दोनों हात के पंजो को खोलकर पुरे स्तन को पकड़के दबाये जा रहा था. अह्ह्ह उम्म्म्म। अम्म्मम्म।।।। अह्ह्ह।।।।।

मेरे साडी का पल्लू निचे गिरा। वैसे ही रमेश ने मुझे चूमना छोड़ अपना मुँह मेरे मम्मो की तरफ बढ़ाया। ब्लाउज़ के ऊपर से बाहर निकले स्तनों को चूमते हुए वो अंदर अपनी जबान डालने लगा. उम्म्म अम्मम्म। उम्मम्मम

रमेश का मम्मो की तरफ प्यार देखते हुए मेने ब्लाउज़ खोल दिया। अंदर का ब्रा दिखने लगा. ब्लाउज़ निचे गिरा, अब रमेश ने ब्रा को निचे किया और मम्मो को बाहर निकले जैसे ही निप्पल अपने मुँह में लेकर चबाना सुरु किया अह्ह्ह अहहह।। अहहह। रमेश निप्पल को खींचने लगा. दोनों हातो से स्तनों को दबाते हुए चूसने लगा. अह्ह्ह्ह।। हाहहह। आआआ

आधी लटकी ब्रा को होल्कर मेने निचे फेक दिया। स्तनों को पूरा खुलते हुए देख रमेश और भी पागल हो गया और जोर जोर से दबाते हुए मेरे दूध को पिने लगा. अहहह आहहहह अहहह उफ्फ्फफ्फ्फ़ आह्ह्ह्हह्ह

मेने उसकी पहनी हुई टीशर्ट उतर दी. नौजवान लड़के के शरीर को छूने का एक अलग ही मजा है. मेने रमेश को कसकर गले लगाकर उसे अपना दूध पिने दिया और में उसके पीठ को सहलाने लगी.

कफी देर बाद रमेश ने मेरे निप्पल को अपने मुँह से बाहर निकला। मेरे निप्पल तन गए थे. हवस से मन भर गया था.

रमेश ने मेरी साडी का पल्लू पकड़ा और साडी उतरने लगा. मे रमेश को अपनी साडी उतारते हुए देखती रही. साडी जैसे हटी में सिर्फ काले रंग की चड्डी में रमेश के सामने कड़ी थी.

रमेश कुछ देर मेरे गोर बदन को देखता रहा. उसकी नज़ारे मेरे बदन को ऊपर से निचे टटोलने लगी. मुजसे रहा नहीं गया, तो मेने रमेश की पेंट खोली, बटन खोला और पेंट निचे कर दी. रमेश ने पेंट उतारी, उसका लंड अंडरवेर में काफी लम्बा दिख रहा था.

मे रमेश के सामने निचे बैठी, उसकी अंडरवेर को दोनों हातो से निचे खींचा, नंगा रमेश मेरे सामने खड़े देख में शर्मा रही थी. रमेश के लंड पे जैसे ही नजर पड़ी, में पागल ही हो गयी.

मेने लंड को कसकर पकड़ा, और सीधा मुँह में लेकर चूसने लगी. अहहह उम्म्म अह्ह्ह। उम्मम्मम। रमेश का लंड लोहे जैसा कठोर हो चूका था. जैसे जैसे में लंड को हिलाते हुए चूसने लगी, मेने जाना लंड और भी कठोर हो रहा है. मुझे लंड के ऊपर उभरी नसों को देखकर एसास हो रहा था की रमेश भी काफी तप गया है.

मेने पुरे लंड को मुँह में खींचा और चूसने लगी. अह्ह्ह उम्म्म्म।।। बहोत दिन बाद लंड के दर्शन हुए है. अह्ह्ह अह्ह्ह उम्मम्मम अहंमम।।

लंड को चूसते हुए निचे लटकी गोटियों को दबाने लगी. दोनों गोटियों को हात में लेकर मसलने लगी. अह्ह्ह उम्म्म्म। आह्ह्ह्हह अहह उफ्फफ्फ्फ़।

जबान लंड के गुलाबी भाग को रगड़ते हुए रमेश को और भी उत्तेजित कर रही थी. ताकि जब चुदाई सुरु हो, रमेश मुझे अच्छे से पेले। उम्म्म अम्म्म अम्म्मम्म

काफी देर लंड को चूसने के बाद जब में पीछे हटी, रमेश ने मुझे कहा टीचर अब मेरी बारी, आप जमीं पे लेट जाओ. जैसे में निचे जमीन पे लेटी। रमेश पैरो के पास बैठा, उसने मेरी चड्डी को खींचा और मुझे पूरा नंगा कर दिया। अपने ही क्लास में ऐसे नंगी सोये हुए देख में शर्म से पानी पानी हो रही थी.

रमेश ने चड्डी निकालके मेरे पैर फैलाये और अपना मुँह मेरी चुत पे रखकर जब चाटना सुरु किया, अह्ह्ह अह्ह्ह। में स्वर्ग में ही पोहच गयी. आह्हः अहहहह रमेश की जबान मेरे चुत में घिसने लगी. मेरी चुत का दाना फड़फड़ाने लगा. अह्ह्ह उम्म्म। रमेश जब चुत के दानो को चाटने लगा, मेरा बदन मछली के तरह तड़पने लगा. आह्हः अहहह। . इतना सुख कभी नहीं मिल मुझे आह्हः अहहह हाहाहा। उफ्फफ्फ्फ़ फ़फ़फ़फ़

जवान लड़का चुत चाट रहा होता है तो शरीर में एक अलग ही ख़ुशी महसूस होती है. अह्ह्ह उम्म्म। .. अहह अह्ह्ह्ह ऐसा सुख तो पति से भी नहीं मिलेगा कभी. अह्ह्ह अहह अहह उम्म्म्म

रमेश ने चुत में ऊँगली डाली और घिसने लगा. अह्ह्ह्ह अहह। ऊँगली अंदर घिसते हुए चुत को चाट रहा था. अह्ह्ह्ह अह्ह्ह। चुत पानी छोड़ने लगी. अहह. रमेश चुत चाटे जा रहा था. उफ्फ्फ्फ़ अहहह।।।।

बहोत देर चुत को चाटने के बाद जब वो पीछे हटा, मेने थोड़ी सास ली. कबसे सास ऊपर निचे हो रही थी. में सास ले ही रही थी. के चुत पे मुझे कुछ छूने लगा. निचे देखा तो रमेश ने अपना खड़ा लंड चुत पे दबा दिया था. अह्ह्ह्ह। धीरेसे लंड को चुत में उसने धकेला, प्यार से मेरे ऊपर आकर लेटा। अभी तक लंड आधा ही चुत में गया था. मुझे देखते हुए रमेश ने लंड को चुत में दबाना सुरु किया और १ से २ धक्के में लंड पूरा अंदर चला गया. अह्ह्ह्ह अहह

रमेश ने धीरेसे से चुदाई सुरु की और जैसे जैसे उसके लंड की खुजली बढ़ी, उसने जो चोदना सुरु किया अहहहहह अह्ह्ह आ. लंड जोर जोर से चुत में अंदर बाहर होने लगा. चुत को अंदर तक घिसते हुए बाहर आ रहा था. अहहह अहहहह अहहह।।। अहहह रमेश अहहह उम्म्म्म। उम्म्म

रमेश पूरी ताकद लगाते हुए लंड को चुत में पटक रहा था. ऐसे लग रहा था अपनी टीचर पे पढाई का पूरा घुस्सा निकाल रहा है. अह्ह्ह अहह उम्मम्मम

काफी देर चुदाई चली फिर जब लंड चुत से बाहर निकला, चुत इतनी गीली हो चुकी थी के पानी टपकने लगा.

रमेश उठकर खड़ा हुआ, उसने मुझे कहा टीचर अब आप घोड़ी बन जायो। में मुस्कुराई। लड़को को औरतो को घोड़ी बनाने में बहुत मजा आता है.

में उठकर बैठी। पलटकर घुटनो पे बैठी, दोनों हात जमीं पर रखकर बैठी ही थी के रमेश मेरे मुँह के सामने आया और अपना गिला लंड मुँह के सामने रखकर हिलाने लगा. मुझे लगा था के पीछे से चोदेगा लेकिन रमेश तो मुँह में लंड देने लगा. मेने भी ज्यादा सोचा नहीं, मेने वही गीले लंड को मुँह में खींचा और घोड़ी बने रमेश के लंड को चूसने लगी आह अह्ह्ह उम्म्म्म अह्ह्ह्ह आह उम्म्म्म उम्म्म्म

लंड पे लगे चुत के पानी के चाट रही थी. जबान को लंड पे ऐसे घिस रही थी जैसे लॉलीपॉप खा रही हु. उम्म्म अम्म्मअह्ह्ह्ह उम्मम्मम

में रमेश का लंड चूसने में मग्न थी तभी अचानक पीछे से कुछ मेरी चुत में झटकेसे अंदर गया. में चौक गयी. रमेश का लंड में में धरे, गर्दन को पीछे लिए जब देखा तो मेरे तो होश ही उड़ गए.

पीछे आदित्य खड़ा था. उसने अपनी पेंट निचे कर दी थी और पीछे से जो मेरी चुत में अभी अभी घुसा था वो और कुछ नहीं आदित्य का लंड था. आदित्य मेरी तरफ देखे मुस्कुराते हुए अपने लंड को चुत में दबाने लगा. मेने डरते हुए रमेश का लंड मुँह से निकलने की कोशिश की लेकिन रमेश ने मेरा मुँह पकड़लिया और कसकर मेरे मुँह में पूरा लंड दबा दिया। औम्म्मम्म अम्म्म।। उम्म्म। मेरे मुँह में लंड दबाकर मेरा मुँह बंद किया।

पीछे से आदित्य ने अपना पूरा लंड अंदर चुत में धकेला और मेरी कमर को कसकर पकड़े चोदने लगा. अहह अहहह अहह ाहः. मेरी तो आँखे बाहर आ गयी.

ये क्या हो रहा है. आगे से रमेश मेरे मुँह को चोद रहा था पीछे से आदित्य। अह्ह्ह अहह अह्ह्ह उम्मम्मम।।।

में इस झटके से बाहर निकल ही रही थी के मेने देखा मेरे मम्मो को कोई दबा रहा है. अब ये दोनों हात किसके है. मुँह में रमेश का लंड पकडे तिरछी नजरोसे जब मेने देखा तो मुझे नितिन पूरा नंगा होकर मेरे बगल में खड़ा मेरे मम्मो को दबा रहा था. अह्ह्ह्ह ओमममममम मेरे तीनो स्टूडेंट एक साथ

अहह अहहह उम्म्म ये तो में सोचा ही नहीं था.

अहह अहह. अहह मन में डर तो था लेकिन जिस तरह मेरे नंगे बदन पे तीनो का प्रहार हो रहा था. अंदर से एक ख़ुशी भी महसूस हो रही थी.

अह्ह्ह अहह उम्म्म।।।।

कुछ देर बाद जब तीनो रुके, में तुरंत खड़ी हुई. तीनो मेरे सामने नंगे खड़े. तीनो के लंड भी खड़े.

मेने कहा, तुम कहा से आये. हमें ये सब अभी रोकना पड़ेगा।

तब आदित्य ने कहा, टीचर डरो मत हम किसी को कुछ नहीं बताएँगे। ऐसे कहते हुए वो मेरे नजदीक आया. और मेरे मम्मो को दबाने लगा. अह्ह्ह।। मेने उसे धीरेसे दूर करना चाहा, लेकिन पीछे से नितिन ने मुझे जकड लिया। उसका लंड मेरी गांड की दरार में घुसते जा रहा रहा था. अह्ह्ह अहह

आदित्य ने मेरे निप्पल को कसकर दबाया और मुँह में लेकर चूसने लगा. आह्हः। में उसे दूर नहीं कर पायी। आदित्य और नितिन दोनों ने मुझे आगे पीछे से जकड लिया। में दोनों के बिच सैंडविच की तरह फस गयी थी.

रमेश मेरी चुत में ऊँगली डालकर घिसने लगा. आह्हः अहहह अहह. आज ये क्या हो रहा हे मेरे सात. तीन नौजवान लड़के मेरे शरीर से खेल रहे है. अह्ह्ह उम्म्म।।।उफ्फफ्फ्फ़

आदित्य ने मम्मो को दबाया, निप्पल अच्छे से चूसे फिर जब मुझे आगे की और झुकाया, आदित्य ने अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया। में आदित्य का लंड चूसने लगी. तो पीछे से नितिन ने मौका देखकर उसका लंड मेरी चुत में दाल दिया और मुझे चोदने लगा. अहह अहहह अहह अहहह अहह उम्म्म ममम ामम अउ

बरी बरी तीनो मुझे चोदे जा रहे थे. अह्ह्ह अहह उम्म्म्म आमा….

आदित्य का लंड मेने चूस के छोड़ा, पीछे से नितिन का लंड भी चुत की चुदाई के बाद बाहर निकला, फिर आदित्य निचे जमीन पे लेटकर मुझे उसने अपने लंड पे बैठने कहा.

आदित्य का तीनो लंड में सबसे बड़ा था. में धीरेसे लंड अपनी चुत में लेते हुए उसपर बैठी। और फिर लंड पे कूदने लगी. अहहह। आदित्य का लंड काफी अंदर तक गहराई माप रहा था. अह्ह्ह अहःअहः।। जोर जोर से उछल उछल के चुदाई चल रही थी.

तभी रमेश मेरे सामने पैर फैलाके खड़ा हुआ. उसके लंड को भी मुँह में लेकर चूसते हुए मे आदित्य के लंड पे उछल रही. अह्ह्ह अहह आह्हः

काफी देर चुदाई हुई. फिर जब हम उठे, आदित्य ने सामने की कुर्सी पे मुझे झुककर खड़ा किया। और फिर आदित्य ने आगे आकर पहले मेरे मुँह में लंड दिया।

मेने अच्छे से उसके लंड को चूसकर गिला किया। वो गिला लंड लेकर वो पीछे गया. मेरी गांड को दबाते हुए चूमने लगा. फिर खड़ा होकर उसने पीछे से मेरी चुत को चोदना सुरु किया। आह्हः।।

आगे मेरे मुँह में रमेश ने लैंड लंड दिया। उसका लंड चूसते हुए गिला किया। आदित्य ने काफी देर पीछे से चुदाई की, फिर रमेश पीछे गया. उसने भी गांड पे दो चपेट लगायी। गांड को चूमने लगा. फिर चुत में लंड डालकर जोर जोर से चुदाई की. सभी लड़को में रमेश कमीना लड़का था. ऐस चोद रहा था मुझे जैसे में उसकी बीवी हु. आह अह्ह्ह अहह

आखिर में नितिन ने भी अपना लंड मुजसे चुसवाया। नितिन शरीफ शांत लड़का था. लंड को गिला करके उसने भी मेरी चुत को चोदा

फिर तीनो मेरे खड़े हुए, में घुटनो पे बैठी थी. तीनो के लंड को बारी बारी चूसते हुए हिला रही थी. कुछ ही पल बाद एक एक करके तीनो के लंड से पानी की पिचकारी उड़ने लगी. मेने मुँह खोलकर रखा था. सारा पानी मेरे मुँह पे उड़ने लगा. कुछ मुँह में चला गया तो कुछ मेरे माथे से होकर, गालो पे और होठो से होकर निचे गिरने लगा. तीनो ने अपने लंड के पानी से मेरा मुँह भर दिया था. अह्ह्ह उम्म्म्म अम्मम्म अम्मम्म

जितना पानी मुँह में गया था वो में पि गयी.

सभी शांत होने लगे. मेने कपडे समेटे और अंदर अपना मुँह धोने चली गयी.

जब तक साडी पहनकर वापस आयी, तबतक तीनो ने कपडे पहनलिये थे.

मेने तीनो को समझाया किसी को इसके बारेमे खबर नहीं लगने देना। तीनो मान गए.

उस दिन के बाद से मुझे तीन नौजवान लड़के मिल गए जिनसे में कभी भी चुदवा के ले सकती थी.

में काफी खुश रहने लगी थी.

कैसी लगी मेरी कहानी मुझे अपनी राय कमेंट में बताना

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