Home » रुचिका और शुभम की सेक्स स्टोरी पार्ट 3

रुचिका और शुभम की सेक्स स्टोरी पार्ट 3

पार्ट २ के बाद से हर दिन ऑफिस में उसकी एक झलक भी मुझे पागल कर देती थी। वो जानबूझकर टाइट ब्लाउज पहनती, स्कर्ट थोड़ी छोटी रखती ताकि जब वो झुके तो मुझे उसकी जाँघों की चमक दिखे। लंच टाइम में वो मेरे डेस्क पर आकर फुसफुसाती, “आज रात फ्री है? मैं तेरे लिए कुछ स्पेशल प्लान कर रही हूँ।” मेरा दिल धड़कने लगता।

शनिवार की शाम थी। मैंने एक अच्छा सा ३-स्टार होटल बुक किया था – अहमदनगर के बाहर, सुनसान रोड पर, जहाँ कोई जान-पहचान वाला नहीं आता। रुचिका ने कहा था, “मैं ८ बजे तक आ जाऊँगी। रूम नंबर मैसेज कर देना। और हाँ… कुछ नया ट्राई करने का मन है आज।”

मैं ७:४५ पर पहुँचा। रूम ४०४ – क्लीन, मॉडर्न, किंग साइज बेड, बड़ा सा बाथरूम, और बालकनी से बाहर अंधेरा। मैंने लाइट्स डिम कर दीं, कुछ कैंडल्स जलाईं (होटल में उपलब्ध थीं), और वेट करने लगा। दिल तेज़ धड़क रहा था।

ठीक ८:१० पर दरवाजे की घंटी बजी। मैंने खोला तो रुचिका सामने खड़ी थी – एक लंबा ब्लैक कोट पहने हुए, नीचे क्या है ये दिख नहीं रहा था। उसके बाल खुले थे, लिपस्टिक डार्क रेड, आँखों में काजल – वो एकदम सेक्स गॉडेस लग रही थी। वो अंदर आई, दरवाजा बंद किया और कोट उतार दिया।

नीचे वो पहने थी – ब्लैक लेस ब्रा और मैचिंग थॉन्ग, जाँघों तक हाई स्टॉकिंग्स, और हाई हील्स। उसके स्तन ब्रा से बाहर झाँक रहे थे, निप्पल्स लेस के पीछे से साफ दिख रहे थे। थॉन्ग इतनी छोटी कि उसकी चूत की शेप क्लियर थी। मैं स्तब्ध रह गया।

“लाइक?” वो मुस्कुराई और मेरे पास आई। मैंने उसे दीवार से सटा दिया और जोर से किस किया। मेरी जीभ उसकी जीभ से लड़ रही थी, हाथ उसके स्तनों पर। ब्रा के ऊपर से दबाए, निप्पल्स को चुटकी से पकड़ा। वो सिसकारी ली, “आज रात मुझे अपनी पूरी तरह बना ले… जो चाहे कर… कोई लिमिट नहीं।”

हम बेड पर गिर पड़े। मैंने उसकी ब्रा उतारी – उसके बड़े, गोल स्तन बाहर आए। मैंने दोनों को हाथों में लिया, दबाया, चूसा। एक निप्पल मुँह में, दूसरा उँगलियों से खेल रहा था। वो कमर उठा रही थी, “शुभम… चूस जोर से… काट… मैं तेरी हूँ।” मैंने दाँतों से हल्का काटा, वो चीखी लेकिन मजा ले रही थी।

फिर मैं नीचे गया। उसकी थॉन्ग को साइड किया और चूत चाटनी शुरू की। वो पहले से ही बहुत गीली थी – उसका रस मेरी जीभ पर चिपक रहा था। क्लिटोरिस को जीभ से घुमाया, फिर चूसा। दो उँगलियाँ अंदर डालीं, जी-स्पॉट पर प्रेशर दिया। वो चिल्लाई, “आह्ह… तेज… और तेज… मैं आ रही हूँ!” उसका पहला ऑर्गेज्म आया – शरीर काँप रहा था, रस मेरे मुँह में बह रहा था।

अब वो मेरी बारी लेना चाहती थी। उसने मेरी शर्ट उतारी, पैंट नीचे की। मेरा लंड पहले से ही पूरा खड़ा था। उसने हाथ में पकड़ा, ऊपर-नीचे किया, फिर जीभ से टिप चाटी। “तेरा लंड कितना गरम है… आज मैं इसे पूरा एन्जॉय करूँगी।” उसने पूरा मुँह में लिया – डीप थ्रोट, गले तक। मैंने उसके बाल पकड़े, धक्के दिए। वो गैग कर रही थी, आँखों में आँसू लेकिन रुक नहीं रही थी। उसका थूक मेरे लंड पर बह रहा था, बॉल्स तक।

कुछ मिनट बाद वो बोली, “अब मुझे चोद… लेकिन पहले कुछ नया।” उसने अपना बैग खोला – अंदर वाइब्रेटर, हैंडकफ्स, ब्लाइंडफोल्ड, और एक छोटा लुब्रिकेंट बॉटल। मेरी आँखें चौड़ी हो गईं।

“पहले मुझे बाँध,” वो बोली। मैंने हैंडकफ्स से उसके हाथ बेड के हेडबोर्ड से बाँध दिए। फिर ब्लाइंडफोल्ड लगाया। वो अंधेरे में थी, सिर्फ स्पर्श महसूस कर सकती थी। मैंने वाइब्रेटर ऑन किया – हल्का मोड। पहले उसके निप्पल्स पर रखा। वो सिहर उठी, “आह्ह… ये क्या है… बहुत अच्छा लग रहा है!” फिर धीरे-धीरे नीचे ले गया, क्लिटोरिस पर। वो कमर उछाल रही थी, “शुभम… अंदर डाल… प्लीज!”

मैंने वाइब्रेटर अंदर डाला, और साथ में अपनी उँगलियाँ। वो पागल हो रही थी। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक झटके में पूरा अंदर। वो चीखी, “आयyy… हाँ… जोर से!” मैंने स्पीड बढ़ाई – जोरदार ठोके, बेड हिल रहा था। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने एक हाथ से उसके गले को हल्का दबाया, दूसरा क्लिट पर। वो बार-बार आ रही थी – दूसरा, तीसरा ऑर्गेज्म।

फिर मैंने उसे खोला, पलटा – डॉगी स्टाइल। उसके नितंब ऊपर, मैंने पीछे से घुसाया। बाल पकड़कर पीछे खींचा, जोर से ठोके मारे। “तेरी चूत कितनी टाइट है… हर बार नई लगती है!” वो बोली, “जोर से… फाड़ दे… मैं तेरी स्लट हूँ आज!”

अब एनल की बारी। मैंने लुब्रिकेंट बहुत लगाया – पहले उँगली से तैयार किया। वो रिलैक्स थी। “धीरे… लेकिन पूरा डाल,” वो बोली। मैंने टिप रखी, धीरे अंदर किया। वो दर्द से चीखी लेकिन बोली, “रुकना मत… मुझे पसंद है!” मैंने पूरा अंदर किया, फिर धीरे-धीरे मूवमेंट शुरू। वो सिसक रही थी लेकिन मजा ले रही थी। “आह्ह… गांड में तेरे लंड का एहसास… बहुत अच्छा!”

मैंने एक हाथ से चूत में वाइब्रेटर डाला – डबल पेनेट्रेशन। वो पागल हो गई, “मैं फिर आ रही हूँ… आह्ह्ह!” उसका शरीर काँप रहा था। मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया – उसकी गांड में जोर से झड़ गया। बहुत सारा गर्म माल अंदर। वो भी साथ में आई।

हम थककर बेड पर लेट गए। पसीना, सेक्स की खुशबू, साँसें तेज। वो मेरी छाती पर सिर रखकर बोली, “शुभम… मैं तुझसे प्यार करती हूँ। ये सिर्फ सेक्स नहीं… कुछ ज्यादा है।” मैंने उसे किस किया, “मैं भी तुझसे प्यार करता हूँ रुचिका। तू मेरी जिंदगी है।”

रात अभी बाकी थी। हमने शावर लिया – साथ में। पानी के नीचे फिर से किसिंग, फिर से सेक्स। शावर में स्टैंडिंग पोजिशन में मैंने उसे चोदा – उसकी पीठ दीवार से सटाई, पैर मेरी कमर पर। पानी बह रहा था, हमारी बॉडीज स्लिपरी। वो चीख रही थी, “हाँ… ऐसे ही… और गहरा!”

फिर बेड पर वापस – ६९ पोजिशन। मैं नीचे, वो ऊपर – मैं उसकी चूत चाट रहा था, वो मेरा लंड चूस रही थी। हम दोनों साथ में आए – मेरा माल उसके मुँह में, उसका रस मेरे मुँह में।

रात ३ बजे तक हम ५ राउंड कर चुके थे। हर बार कुछ नया – स्पूनिंग, रिवर्स काउगर्ल, लोटस पोजिशन। आखिरी राउंड में मैंने उसे मिशनरी में लिया, आँखों में आँखें डालकर। धीरे-धीरे, प्यार से। “रुचिका… तू मेरी है… हमेशा,” मैंने कहा। वो बोली, “और तू मेरा… हमेशा।” हम साथ में आए – शांत, गहरा, इमोशनल ऑर्गेज्म।

सुबह हम चेकआउट किए। कार में जाते हुए वो मेरे हाथ में हाथ डालकर बोली, “अगली बार घर पर… मेरे फ्लैट में। और इस बार और ज्यादा टाइम।” मैं मुस्कुराया, “जैसी तू कहे।”

ये हमारी स्टोरी अभी जारी है – ऑफिस, होटल, घर, कार… हर जगह हम एक-दूसरे को एक्सप्लोर करते हैं। रुचिका मेरी सेक्स गॉडेस, मेरी लवर, मेरी सबकुछ है।

adagaleshubham03@gmail.com

Telegram id @Diolover00

Leave a Reply