हेलो दोस्तों, आज जो में आपको कहानी बताने जाने वाला हु. ये हमारे जीवन की एक ऐसी सच्चाई है जो हमने कभी किसी को भी आज तक बताई नहीं थी. आज में आपके सामने ये सच्चाई रखने जा रहा हु. हमारी कहानी सच्ची घटना पे आधारित है. तो पढ़िए हमारी कहानी और आनंद लीजिये और आखिर में अगर हमारी कहानी अछि लगी तो जरूर कमेंट में अपने विचार बता देना।
तो चलो सुरु करते है कहानी की. मेरा नाम वीरेंदर है. लोक मुझे वीरू के नाम से जानते है. ये कहानी २०२५ की है. मेरी बीवी का नाम सरोज है. हमारी शादी को करीब १ साल हो चूका था. मेरी ख्वाइश थी के एक बार तो में लदाक की वादियों में बाइक चलाऊ
मेने अपनी बीवी सरोज की ये बात बताई। वो भी राजी हो गयी. हम दोनों ने लदाक बाइक पे घूमने का प्लान बनाया।
मेने ऑफिस से १० दिन की छुट्टी ले ली. नवम्बर का महीना चल रहा था. ठण्ड अभी लडक में सुरु ही हुई थी. सही वक्त था बाइक लेकर लदाक घूमने का. डॉन दिन बाद ही हम लदाक में थे. मेने वह से एक बुलेट बाइक भाड़े पे ले ली.
अचे से जैकेट पहनकर, हात में ग्लोव्ज और बर्फीली वादियों में ठण्ड से बचने के लिए जो भी सामान की जरुरत थी, सभी लेकर हम सुभह करीब ५ बजे निकल पढ़े. आस पास के नज़ारे बहोत सुन्दर थे. हमारी तरह कई बाइकर उसी रस्ते पे चले जा रहे थे.
सरोज बहोत ही खुश थी. उसे बहोत मजा आ रहा था. मुझे बाइक पे चिपक के बैठी थी. रास्ते में हमें कई जगह छोटे छोटे झरने भी दिखाई दे रहे थे. एक तरफ उचे ऊचे पहाड़ और दूसरी तरफ खाई. उसी खाई में निचे नदी बह रही थी.
हमने करीब ५ घंटे का रास्ता पूरा किया और एक गांव में पोहच गए. वो गांव में कुछ देर ठहरे, आस की ख़ूबसूरती को में फोटो खिचाये, खाना खाया और वहा से कुछ यादगार चीजे लेकर हम वापस शहर की तरफ निकल पड़े.
२ घंटे से हम चले जा रहे थे. सुभह जल्दी निकले थे, अब दुपहर के ३ बज रहे थे. शाम होने के पहले हमें वापस अपने होटल में पोहचना था. कुछ देर बाद सरोज ने कहा के उसे भूक लग रही है तो मेने कुछ ही दुरु पर एक छोटासा घर देखा। ढाबे जैसा कुछ लग रहा था.
वो एक ही ढाबा था जो वह खुला था. पास में दो और घर दिख रहे थे लेकिन वो बंद थे. मेने उस ढाबे के पास बाइक रोकी। हमारी आवाज सुनकर एक चाचा अंदर से बाहर आये. उनकी उम्र ५० के आस पास होगी। नेपाली जैसे दिख रहे थे.
मेने चाचा को पूछा, कुछ खाने को मिलेगा यहाँ पे.
तो चाचा ने हां कहा.
हम बाइक से उतरे। जाकर ढाबे पे बैठे। आस पास पूरा सन्नाटा था. हमारे आलावा कोई नहीं था. ठंडी हवा चल रही थी. ढाबा खाई के बगल में ही था तो निचे से बहती हुई नदी दिखाई दे रही थी.
दूर दूर तक जहा देखो सुंदर बर्फ से ढके पहाड़ दिख रहे थे. में और सरोज सामने सामने खुर्सी पे बैठे थे. चाचा को मेने पूछा क्या मिलेगा खाने में तो उन्होंने कहा मग्गी है. और चिकन राईस प्लेट है.
तो मेने कहा दोनों एक एक प्लेट देदो।
चाचा अंदर गया, हमारे लिए पानी की बोतल ले आया. मेने ध्यान दिया, चाचा अंदर खड़े होकर बार बार सरोज को घूर रहा है.
तब मेरे दिमाग में ख्याल आया, क्यों न चाचा को थोड़ा तड़पाया जाये।
तो मेने टेबल के निचे से सरोज को पैर मारकर इशारा दिया। सरोज मेरी तरफ देखने लगी, मेने उसकी तरफ देखकर इशारे में अपने जैकेट की चैन खोलते हुए कहा, चाचा को थोड़ा कुश करो.
सरोज हसने लगी. उसे मेरी बात समज आ गयी. मेने सरोज को इशारे में बात कह दी और उठकर अपनी बाइक की सफाई करने आ गया.
में बाइक पोछने लगा, सरोज ने चाचा को अंदर से पानी का गिलास लाने कहा.
में बाइक के पीछे बैठे सबकुछ देख रहा था. चाचा जैसे गिलास लेकर आये. उसने चाचा को पानी की बोतल खोलकर पानी गिलास में डालने कहा.
जब तक चाचा बोतल खोल रहा था. सरोज ने अपने जैकेट की चैन खोली। अंदर सरोज ने जो टीशर्ट पहनी थी वो गले से इतनी निचे थी के उसके आम दिखाई दे रहे थे.
धीरेसे सरोज ने जैकेट को खोला तो चाचा की नजर सरोज के आम पे पड़ी. वो चाचा से बात करने लगी. चाचा बात करते हुए सरोज की तरफ देख रहा था और उसके आम की बिच की गहराई को माप रहा था.
में बाइक के पीछे बैठा सरोज की हर एक हरकत को बारीकीसे देख रहा था.
बात करते करते सरोज ने सामने के टेबल पे रखा हात धीरे धीरे चाचा के लौड़े की तरफ बढ़ाया। टेबल पे अपना हात खिसकते हुए उसकी उंगलिया चाचा के लौड़े के पास पोहची।
चाचा ने एक चद्दर जैसा कपडा अपने कमर पे बांधा हुआ था. जैसे गांव में लोग बांधते है.
सरोज की और देखते हुए चाचा का लंड खड़ा होने लगा था. जैसे ही सरोज ने देखा की चाचा की चद्दर फूल रही है.
सरोज ने धीरेसे अपनी ऊँगली चाचा के लौड़े को छू ली. चाचा सरोज की तरफ देखते हुए मुस्कुराते हुए खड़ा रहा. में दुरी पे था तो चाचा मेरी तरफ भी ध्यान दे रहा था.
लेकिन में बाइक पे पीछे छुपकर नजर छुपाते हुए ध्यान दे रहा था.
सरोज ने धीरेसे अपना पूरा हात चाचा की पहनी लुंगी जैसी चद्दर पे घुमाया। खड़ा लंड अब साफ महसूस हो रहा था.
चाचा ने सरोज को लंड को हात लगते देख धीरेसे चद्दर को हटाया और अपने लंड को बाहर निकाल दिया। सरोज ने जैसे ही चाचा का लंड देखा वो उसे देखते ही रह गयी.
लंड काफी लम्बा था. इतना गोरा था के गुलाबी दिख रहा था. सरोज ने चाचा के लंड को कसकर पकड़ा और हिलने लगी. चाचा खुश हो गया और सरोज के करीब आ गया.
सरोज के मुँह के सामने आकर खड़ा हो गया. सरोज ने कसकर लंड को पकडे हिलाना सुरु किया। में बाइक के तैयार के बिच से दोनों को देख रहा था.
हिलाते हुए सरोज ने लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी. आअह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह। अपनी बीवी को ऐसे दूसरे के लंड चूसते देख मेरा लंड खड़ा हो गया. आह्ह्ह्ह आह्हः ा… उम्म्म्म
सरोज पूरा लंड मुँह लेकर चूसे जा रही थी. आह्हः।। सरोज को मुँह में लंड चूसते देख चाचा के हात सरोज के आम के पास बढे और उसने सरोज के आम दबाना सुरु किया। आअह्ह्ह्ह अहहह।। दोनों हातो से सरोज के आम को दबाने लगा. आह्ह्ह्हह आह्हः।। सरोज भी बड़ी जोश में चाचा का लंड चूस रही थी. आअह्ह्ह्ह अहहहहह उम्मम्मम्मम
फिर सरोज रुकी, उसने अपना टीशर्ट ब्रा के सात ऊपर उठाया और अपने दोनों आमो को बाहर निकला।
चाचा ने जैसे ही आम देखे वो झुककर निप्पल चूसने लगा. दोनों आम दबाते हुए निप्पल चूसने लगा. आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह सरोज भी सिसकने लगी. कभी चाचा को देखती कभी मेरी तरह नजर घूमती।
आह्ह्ह्ह आह्हः हह वो नजर कितना सुख देने वाला था. सामने इतना सुन्दर पहाड़ो का नजारा। चेहरे को छूती ठंडी बर्फीली हवा और सामने मेरी बीवी के आम को एक गांव का आदमी दबा दबा के चूस रहा है. आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह अहहह उफ्फफ्फ्फ़ आआह्ह्ह
दोनों आम को बारी बारी चूसने के बाद, चाचा पीछे हटा, सरोज धीरेसे उठी, और दोनों अंदर चले गए.
वो अंदर जाते ही, में धीरेसे बिना आवाज किये ढाबे की और बढ़ा. दरवाजे के पास आकर धीरेसे अंदर झाका तो मेरे होश उड़ गए.
सामने सरोज खड़ी थी, उसकी पेंट घुटनो के निचे उतरी हुई. और चाचा उसके सामने घुटनो पे बैठे सरोज की चुत को चाट रहा था. मेने सरोज को देखा उसने मुझे देखा। सरोज की नशीली आखे देखकर पता चल रहा था के उसकी चुत को बहोत मजा आ रहा है.
मुजसे रहा नहीं गया, तो मेने अपनी पेंट खोली और लंड को बाहर निकला और सरोज को देखते हुए हिलने लगा. आआह्ह्ह आह्हः अहाः।।।।
चाचा ने अपना मुँह पूरा सरोज की जांघ में घुसा दिया था और जबान चुत पे घिसते हुए अच्छे चाट रहा था. आअह्ह्ह आह्हः अहहह अह्ह्ह। सरोज खड़ी रहकर चुत चटवाने का पूरा आनंद ले रही थी. आअह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह्ह आह्ह्ह्ह
में यहाँ जोर जोर से अपने लंड को हिलाते हुए दोनों को देख रहा था. आह्ह्ह्ह उम्मम्मम्मम
कुछ देर चुत चाटने के बाद चाचा खड़ा हुआ, उसने सरोज को घुमाकर झुका दिया। सरोज सामने के टेबल पे हात रखकर झुक गयी, चाचा ने जैसे ही सरोज की बड़ी मोठी गांड देखि, पहले तो वो सरोज की गांड को चूमने लगे. दोनों हातो से दबाते हुए चाटने लगे. अह्ह्ह्हह अहहह अहह उम्मम्मम ामममममम
गांड को देखने के बाद, चाचा ने अपना लंड पकड़ा और धीरेसे सरोज की चुत में डालकर दबा दिया। आअह्हह्ह्ह्ह। सरोज चिल्लाई। आअह्हह्ह्ह्हह
चाचा का लंड मुजसे भी लम्बा था. पूरा लंड सरोज की चुत में डालकर चुदाई सुरु की. आह्हः अहहह अहहह अहहह हहह…
चाचा अपनी कमर को आगे पीछे हिलाते हुए लंड को चुत में घिसने लगे. आअह्ह्ह आह्हः हहह.. में यहाँ देखकर पानी पानी हो रहा था. अपने लंड को कसकर दबा रहा था. आअह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह।।।।।
चाचा ने फिर सरोज की कमर कसकर पकड़ी और जोर जोर से चोदने लगा. आअह्ह्ह्ह आह्हः।।। सरोज की गांड पे गिरती चपेट मुझे सुनाई दे रही थी. आअह्ह्ह अहह अहहह अहह…..
चाचा ने काफी देर चुदाई की, फिर पानी निकलते समय चाचा ने सरोज से पूछा अंदर ही छोड़ दू.
तो सरोज चिल्लाई, नहीं अंदर मत छोड़ना मुँह में देदो।
जैसे ही सरोज ने कहा, चाचा ने झटकेसे लंड को चुत से बाहर खींचा, सरोज तुरंत पलट के निचे घुटनो पे बैठी।
चाचा का लंड मुँह में लेकर चूसने लगी. और चाचा के मुँह से आअह्ह्ह्ह आह्हः की आवाज सुनाई देने लगी. आअह्हह्ह्ह्हह। चाचा के लौड़े ने पानी छोड़ दिया। आह्ह्हह्ह्ह्ह
यहाँ मेरे लौड़े से भी पानी बाहर निकला अह्ह्ह्ह उम्मम्मम आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्ह ओमममम उफ्फफ्फ्फ़
वह चाचा शांत हुआ. यहाँ में.
सरोज ने चाचा का पूरा पानी अपने मुँह में लेकर वो पि गयी.
में तुरंत अपनी बाइक के पास भागा और साफ़ सफाई करने लगा.
कुछ देर बाद दोनों भी अंदर से बाहर निकले।
में वापस आकर खुसी पे बैठा, चाचा ने खाना परोसा। सरोज और चाचा दोनों ऐसे बर्ताव कर रहे थे के जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
चाचा मुजसे नज़ारे चुरा रहा था. मेरी तरफ देख ही नहीं रहा था. वो सरोज से ही बात कर रहा था.
हमने खाना खाया और चाचा को पैसे देकर वह से निकल पड़े.
उस दिन रात को मेने सरोज को वही सब याद करते हुए होटल के रूम में बहोत चोदा
लदाक की वो यात्रा हमारे लिए यादगार बन गयी.
कैसी लगी हमारी कहानी जरूर हमें कमेंट करके बताना।
