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दोस्त ने दिया धोका लेकिन उसके पापा ने लिया मौका

आज जो में कहानी बताने जा रही हु वो एक सच्ची घटना पे आधारित ये. पहले में आपको कथा में जो पात्र हे उनके बारेमे बता दू.

मेरा नाम रीवा है. में २६ साल की हु. मेरी दोस्त निशा वो भी मेरी ही उम्र की है. और इस कहानी ने उसके पापा जिनका नाम जनक है. ये कहानी हम तीनो पे आधारित है.

में और निशा हम उसके गांव में जो घर है, वह घूमने जाने का प्लान करते है. निशा के पापा जनक पहले से ही गांव में ही थे. हमें छुट्टिया थी ऑफिस में सो हमने कुछ दिनों के लिए उनके गांव जाने का सोचा।

बहोत मिन्नतों के बाद मेरे घर वाले मने थे. तो में ये मौका जाना नहीं देना चाहती थी.

हमने गांव जाने का प्लान बनाया। ५ दिन हम गांव रहने वाले थे. सारी तैयारियां कर दी. और शुक्रवार की सुभह को में अपनी बैग लेकर स्टेशन पे पोहच गयी.

रेलवे स्टेशन पे पोहचते ही. मेने निशा को फोन लगाया। उसका फोन नहीं लग रहा था. कुछ ही देर में ट्रैन आने वाली थी. मुझे चिंता होने लगी.

मेने फिर उसकी मम्मी के फोन नंबर पे फोन लगाया, तो निशा ने ही उठाया, वो कहने लगी की उसकी मम्मी की तबियत ठीक नहीं है. वो मम्मी को डॉक्टर के पास ले आयी है. बीपी बढ़ गया है.

में निशा की बात सुनकर चिंता में आ गयी. ट्रैन तो कुछ देर में आ जाएगी। अगर निशा अभी भी घर पे है तो वो स्टेशन पोहच ही नहीं पायेगी।

मेने पूछा तो अब क्या करे. तो निशा ने कहा, तू चिंता मत कर. तू चली जा मेने पापा को कह दिया है. वो तुजे स्टेशन लेने आ जायेंगे. में दो दिन बाद जो ट्रैन है उससे आ जाउंगी।

मुझे डर लगने लगा. दिमाग में ख्याल आया, अब अगर में घर चली गयी तो मम्मी पापा मुझे जाने से साफ़ मन कर देंगे। में कुछ देर सोच में पड़ गयी. निशा ने भी फोन काट दिया।  वो डॉक्टर से बात कर रही थी..

कुछ ही पल में ट्रैन आ गयी. में अभी भी स्टेशन पे ही खड़ी थी. उतने में जनक अंकल, निशा के पापा का फोन आ गया. उन्होंने कहा के तुम चिंता मत करो. तुम आ जाओ. में यहाँ तुम्हे स्टेशन पे आ जाऊंगा तुम्हे लेने।

में पहले भी जनक अंकल को मिली थी. वो अच्छे स्वाभाव के है. अब घर जाना से अच्छा मेने सोचा चली जाती हु. वैसे भी दो दिन बाद निशा तो आ ही रही है.

में ट्रैन में चढ़ गयी. वैसे ट्रैन का सफर काफी शानदार रहा.

करीब ९ घंटे बाद में गांव पोहची।

ट्रैन से उतरी तो देखा अंकल स्टेशन पे पोहचे थे. शाम होने ही वाली थी.

जनक अंकल ने मेरी बैग ली और हम घर की और रवाना हो गए. एक टुकटुक में हम दोनों बैठे। जनक अंकल पास ही में बैठे। टुकटुक बहोत ही छोटी थी, और हमारे सात और भी लोग बैठे थे. भीड़ में किसी तरह अपना सामान संभाले हम बैठे थे.

जनक अंकल शरीर मेरे शरीर से चिपका हुआ था. जैसे जैसे टुकटुक आगे बढ़ रही थी. वो मुझे गांव की बाते बताने लगे. बाहर दिख रहे मंदिर, तालाब सब के बारे में बताने लगे.

करीब २० मिनट की टुकटुक की सफारी के बाद जब गांव पोहचे। मेने देखा। जनक अंकल का गांव काफी दूर अलग थलग जगह पे था. चारो तरफ शांति। ज्यादा कोई दिख नहीं रहा. पहले मुझे लगा, के अँधेरा होने वाला है इस वजसे शायद कोई बाहर नहीं दिख रहा.

लेकिन जब मेने जनक अंकल से पूछा तो वो कहने लगे. के काफी तर लोग शहर में काम करने चले जाते है. तो गांव में सिर्फ छुट्टियों में ही आते है.

अभी तो छुट्टिया नहीं चल रही तो बुजुर्ग लोग ही दिखेंगे गांव में.

हम घर की और बढे. घर काफी बढ़ा था. पत्थर और मिटटी से बना घर कोठी की तरह दिख रहा था. ऐसे घर मेने राजस्तान में देखे थे.

हम अंदर गए. अंकल ने दरवाजा बंद किया। अँधेरा हो चूका था.

अंकल ने मुझे कोने का कमरा बताया, जहा में सोने वाली थी. काफी बड़ा कमरा था. जमीन पे सोने के लिए गद्दे रखे थे.

अंकल ने कहा, आराम कर लो. में कुछ खाने के लिए लाता हु.

में कमरे में गयी और पहले तो मेने नाहा लिया। नहाकर में कमरे से बाहर निकली। अंकल सामने टेबल पे बैठे चाय पि रहे थे. उन्होंने मुझे भी चाय पिने बुलाया।

में आकर खुर्सी पे बैठी।  कुरता पजामा पहने में. गीले बाल सुकाते हुए.

अंकल ने चाय और नास्ता दिया।

मेने खाना सुरु किया। अंकल मुझे देखते हुए गांव की बाते करने लगे. बताने लगे. के कोण कोण उनके परिवार से यहाँ रहता था.

अब तक सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन कुछ देर बाद मेरा ध्यान गया जनक अंकल की आखो पे वो मेरी तरफ घूरे जा रहे थे.

उनकी नजर मेरे स्तनों की तरफ थी. कुछ देर तक तो मेने ध्यान नहीं दिया। लेकिन फिर मेने देखा अंकल देखे ही जा रहे है. बात कम कर रहे है और स्तनों की तरफ देखे जा रहे है.

तो मेने बाल सवारते हुए निचे देखा तब मेरा ध्यान गया के मेरे गीले बालो से रसता हुआ पानी मेरे कुर्ते को गिला कर रहा था. गीले बालो ने कुर्ते को इतना गिला कर दिया के अंदर का ब्रा भी गिला हो गया और मेरा निप्पल का आकर दिखने लगा. में चौक गयी. मे तुरंत उठकर गयी और अपना टावल लेकर बाल पोहचने लगी.

अंकल की नजर बार बार वही जा रही थी. बाल पोहचते हुए मेने अंकल की तरफ देखा वो मुस्कुरा रहे थे. में खड़ी रहकर ही चाय पिने लगी. मुझे थोड़ा डर भी लगने लगा था. आज रात मुझे जनक अंकल के साथ इस सुनसान सी कोठी में बितानी है. अंकल के इरादे भी ठीक नहीं लग रहे है.

अंकल की हरकते देखकर मेरे भी दिमाग में गंदे गंदे ख्याल आने लगे.

मेने सोचा यहाँ बाहर अंकल के सामने अपने बदन की नुमाइश करने से अच्छा हे में अपने कमरे में जाकर थोड़ी डेर लेटती हु

में अंदर कमरे में आई, दरवाजा बंद किया और जमीन पर रखे गद्दे पे लेट गयी. मोबइल पे वीडियो देखने लगी.

वीडियो देखते देखते पता नहीं क्यों मेरी चुत खुजलाने लगी. बार बार मेरा हात अपनी चुत जा रहा था.

पाजामे के ऊपर से खुजलाते हुए कब अंदर हात डाल दिया मुझे पता ही नहीं चला. अब एक हात में मोबाइल और दूसरा हात पाजामे के अंदर ड़ालकर में अपनी चुत को सहलाने लगी.

अह्ह्ह अह्ह्ह्हह।।। ट्रैन में बैठे बैठे चुत जब गयी थी. पैरो के बिच कबसे कसी हुई थी. मेने पैरो को फैलाया और चुत को खोल दिया। आह्ह्ह्हह्ह अच्छा लग रहा था. आआह्ह्ह

में चुत को सहला ही रही थी के मेने देखा दरवाजे के बाहर कोई खड़ा है. दरवाजे के निचे से मुझे पैर दिख रहे थे. मुझे पता था के ये निशा है. कोने से कमरे के भीतर झांक रहे थे.

मेने ठीक से देखा तो मुझे पता चला की उनको सिर्फ मेरे पैरो का भाग दिख रहा  होगा.क्यूंकि में कोने में सोयी थी.

मेरे दिमाग में खयाल आया के थोड़ा अंकल को भी तड़पती हु. तो मेने धीरेसे हात अपने पाजामे में के ऊपर रखा और चुत को सहलाने लगी.

प्यार से सहलाते हुए अंकल को दिखा रही थी. आह्हः अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह।।।

फिर पलट के सो गयी, और गांड ऊपर उठाकर पजामे में हात डालकर सहलाने लगी. आअह्ह्ह आह्हः अहह.. आह्ह्ह्ह

मेने फिर से दरवाजे की और देखा, अंकल अभी भी वही खड़े थे.

चुत को सहलाते हुए मेरी चुत अब गरम हो चुकी थी. मुजसे अब रहा नहीं जा रहा था.

मुझे देखना था के बाहर अंकल अब क्या कर रहे होंगे।

तो में उठकर दरवाजे के पास जाने लगी, तो अंकल पीछे चले गए. उन्होंने शायद मुझे आते हुए देख लिया।

मेने दरवाजा खोला तो अंकल सामने ही खुर्सी पे बैठे थे. और मेरी तरफ देख रहे थे.

मेने अंकल से पूछा, अंकल खाना बनाना बाकि होगा न? तो अंकल कहने लगे. खाना तो तैयार हे.

तुम्हे भूक लगी होगी तो साथ में बैठ जाते है.

ऐसे कहते हुए वो अपने पेंट के ऊपर से लौड़े को सहलाने लगी.

जब अंकल अपने लौडो को सहलाने लगे. तब मेरा ध्यान गया अंकल की पेंट के तरफ. मेने देखा अंकल की पेंट ऊपर उठी हुई है. देखकर पता चल रहा था के लंड खड़ा हो चूका है.

मे थोड़ा बात करते समय हड़बड़ाने लगी.

अंकल मेरी तरफ देखते हुए खड़े हो गए. उसके साथ उनका लंड भी खड़ा हो गया.

जैसे ही अंकल ने मेरी तरफ देखा, मेरी नजर अंकल के पेंट की तरफ चली गयी. अंकल के खड़े लंड ने उनकी पेंट के ऊपर तम्बू बना दिया था.

मुझे डर लगने लगा. अंकल मेरी तरफ बढ़ रहे थे. तभी में पलटी और मेने अंकल को हड़बड़ाते हुए कहा, में अपना मोबाइल अंदर भूल आयी हु. लेकर आती हु.

ऐसे कहकर में पलटी और कमरे में जाने ही वाली थी के अंकल ने मेरा हात पकड़के मुझे अपनी और खींच लिया।

झटके से मुझे इतनी जोर से खींचा के में सीधा अंकल को लिपट गयी. दोनों एक दूसरे को देखने लगे. अंकल ने मेरी आखो में देखा और कसकर मुझे बाहो में लेकर होठो को चुम लिया। आह्हः उम्मम्मम।। अंकल के होठ मेरी होठो पे रगड़ने लगे. आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह उम्मम्मम्म

मेरी तपी हुई चुत मेरे दिमाग पे इतनी हावी हो गयी के में भूल ही गयी के ये मेरी ही दोस्त के पापा है.

अंकल ने मेरे स्तनों को दोनों हातो से दबाना सुरु किया। आह्ह्ह्ह। चूमते हुए उनको मजबूत हातो से वो मेरे दोनों बड़े बड़े स्तनों को दबाने लगे. अह्ह्ह्ह आह्हः अह्ह्ह्ह। .. मेरी सास चढ़ने लगी. मेने अंकल को कसकर बाहो में जकड़ा और उनसे लिपट गयी.

फिर अंकल ने मेरी गर्दन पे चूमते हुए मेरी पीठ को सहलाया और निचे हात ले जाकर मेरी बड़ी गांड को दबाने लगे. आह्हः अह्ह्ह अह्ह्ह उम्म्म

मेरे तन बदन में आग लग गयी. आह्ह्ह्ह।।।

अंकल ने फिर मेरा कुर्ता उठालिया, निचे से कुरता उठाते हुए मेरी तरफ देख रहे थे. जैसे ही कुरता निकला, मेरी ब्रा में फसे मेरे दोनों स्तनों को देखकर अंकल की आँखे चमकने लगी.

जैसे ही कुरता निचे फेका, अंकल ने मेरे ब्रा को दबोचना सुरु किया। ब्रा को निचे खींचा और स्तनों को बाहर निकालके चूसने लगे. आह्ह्ह्ह। निप्पल को मुँह में लेकर चूस रहे थे. आह्ह्ह्ह अह्ह्ह उम्मम्मम अम्म्मम्म उफ्फ्फफ्फ्फ़।

मेरे कोमल स्तनों पे आदमी के मजबूत हातो का स्पर्श उत्तेजित करने वाला था. आह्ह्ह्ह अहह… अंकल जैसे मुँह में निप्पल को पकड़े खींच रहे थे. अंग अंग उछलने लगा. आअह्ह्ह।।

मेने भी जल्दबाजी करते हुए अंकल का पहना हुआ शर्ट उतार दिया। प्यार से उनकी पीठ पे हात घुमाते हुए अंकल को अपने स्तनों को चूसते हुए देख रही थी.

बारी बारी दोनों स्तनों को चूसने के बाद जब अंकल पीछे हटे, मेने देखा उनकी आखे नशीली हो चुकी थी. आँखों में हवस भरी थी.

अंकल ने मेरी तरफ देखते हुए अपनी पैंट निचे की. अंदर से उभरता हुआ लंड उछल के बाहर आया.

जैसे ही मेरी नजर अंकल के लंड पे पड़ी, में पागल ही हो गयी. इतना लंबा लंड में पहली बार देख रही थी. अच्छे से तना हुआ और कठोर दिख रहा था.

पता नहीं क्यों लेकिन लंड देखते ही में अपने आप निचे बैठ गयी और लंड को हात में पकड़ लिया।

जब लंड को सामने पकड़े देख रही थी, तो मुझे ऐसास हुआ के ये मेने क्या कर दिया। लेकिन अब लंड की कठोरता हात को छूने लगी. लंड की नोक पे गुलाबी गुलाब जामुन देख मेरे मुँह से पानी आने लगा.

मेने मुँह आगे किया और गुलाब जामुन को मुँह में लेकर चाटने लगी. आह्ह्ह्हह अहहह आह्हः अहहह।।।

लौड़े को कसकर मुट्ठी में पकड़े, हिलाते हुए मुँह में ले रही थी. आह्हः उम्मम्मम अम्म्म क्या लौड़ा मिला है. आअह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह

मन खुश हो गया जैसे ही लंड को मुँह में लिया।

बड़े जोश से में लंड को चिराग की तरह घिसते हुए चूसने लगी. आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह उम्मम्मम्मम।।।

जितना हो सके उतना लंड मुँह में लेकर चूस रही थी. आह्ह्ह्ह अह्ह्ह उम्मम्मम अम्म्मम्म

काफी देर लंड चूसने के बाद. मेने निचे लटकती हुई दोनों गोटियों को हात में लिया और दबाने लगी. अंकल सिसकने लगे. आह्ह्ह्ह आह्हः अह्ह्ह्ह रीवा बेटा आह्ह्ह्ह अहह उम्मम्मम्म उम्मम्मम्मम

अंकल के गोटो को दबाने ने से अंकल इतने उत्तेजित हो गए के मेरा नाम लेते हुए उन्होंने मेरा सर पकड़ा और जोर से मेरे मुँह में लंड को दबा दिया और कसकर सर पकड़के मेरे मुँह में लंड मरने लगे. आह्ह्ह्ह आह्ह्हम्म। में मुँह खोल के बैठी, और लंड पूरा मुँह में दबाने लगे. आह्हः अहह हहह अह्ह्ह ओमममम

मेरा मुँह काफी देर तक चोदते रहे, फिर जब वो पीछे हटे, मेने थोड़ी चैन की सास ली.

अंकल मेरे सामने बैठे और मुझे वही जमीन पे लिटा दिया। में लेटी वैसे ही मेरा पजामा अंकल ने निचे खींच दिया। में अपने आप को अंकल के हातो नंगी होते देख शर्मा रही थी. लेकिन अंकल बड़ी तेजी से मेरे कपडे उतार रहे थे.

पजामा उतरा फिर मेरी गोरी जांग पे चूमते हुए मेरी चड्डी को धीरे धीरे निचे करने लगे. आअह्ह्ह्ह आह्हः अहह.. मेरी जांग को चूमते और ऊपर आकर मेरी नाभि को चाटते।।। आह्ह्ह्ह। अंकल का जबान घिसते हुए जांग चाटना मुझे पागल बना रहा था. उनके हात मेरे गोर बदन पे घूमने लगे.

मुझे बहोत ही अजीब लग रहा था. इतने बड़े घर में ऐसे नंगी हो कर सो रही हु, और मेरी ही दोस्त का पापा मुझे चुम रहा है. आह्ह्ह्ह अहहह

अंकल ने मेरी चड्डी खींची और निचे उतर दी. जैसे ही अंकल की नजर मेरी चुत पे पड़ी, वो पागल भेडिये की तरह चुत पे टूट पड़े, आह्ह्ह्ह आह्हः उम्मम्मम अह्ह्ह्ह अह्ह्ह उम्मम्मम्म अम्म्म आह्ह्ह्हह

चुत के अंदर अब अंकल की जबान घिस रही थी. अह्हह्ह्ह्ह पानी पानी हो चुकी थी में. अंकल ने मेरे दोनों पैर फैला दिए थे और अपना मुँह चुत के अंदर दबाते हुए मेरी चुत की गहराई में चाट रहे थे. आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अहह उम्मम्मम ाम्म्म।।

अंकल को सही तरीके से पता था के कहा कहा चेतना है. वो बारी बारी मेरी चुत के एक एक भाग को अच्छे से चाट रहे थे. आह्ह्ह्हह्ह। जहा ऊँगली डालनी है वहा ऊँगली डालकर घिस रहे थे. आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह।।।।

इसलिए मुझे अनुभवी आदमी पसंद है. उन्हें पता होता है औरत को कैसे खुश करना है. आअह्ह्ह आह्हः अहहह।।।।

में जमीन पे लेती, तड़पती हुई. अंकल को अपनी चुत चाटते हुए देख रही थी. आह्हः हाह उफ्फफ्फ्फ़।

चुत को चाटने के बाद अंकल ने अपना लंड आगे किया, और धीरेसे से मेरी चुत में दबाते हुए मेरे ऊपर आकर लेट गए. मेरी आखो में देखते हुए निचे से लंड को चुत में मरने लगे. आह्हः आह्हः अहह उम्म्म्म। अंकल आअह्ह्ह्ह। मुझे दर्द होने लगा. इतना बड़ा लंड पहली बार मेरी चुत की गहराई नाप रहा था. आह्हः आह्हः आह्हः उम्म्म्म आह्ह्ह्ह

अंकल ने चुत की गहराई लंड से नाप ली, फिर जो उन्होंने चुदाई सुरु की. आह्ह्ह्ह आह्हः अहह. जोर जोर से लौड़े के चुत में मारने लगे. आह्हः अहहह अहह उम्म्म्म अह्ह्ह्ह उम्मम्मम्म अह्ह्ह्हह

लंड चुत में अंदर तक घिस रहा था. चुत से पानी की बौछार होने लगी. आअह्ह्ह अहह अहहह।। अंकल ने चुदाई करते हुए मेरे स्तनों को काटने लगे. आअह्ह्ह अहह हां…

दोनों तरफ से होने वाले दर्द में में पागल हो गयी. आअह्ह्ह। चुदाई के अलावा दिमाग में और कुछ भी नहीं आ रहा था. आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह।।।।

अंकल की चुदाई जब रुकी, मेरी सास में सास आयी.

अंकल पीछे हटे और मुझे पलट दिया

में पलटी ही थी. के अंकल ने मेरी मोटी रसीली उठी हुई गांड देखि तो जोर से चपेट मार दी. में चिल्लाई। आह्ह्हह्ह्ह्ह अहह. वो गांड पे पड़ी चपेट इतनी जोर से लगी के में तड़पने लगी.

अंकल मेरी तड़प देखकर इतने खुश हुए के उन्होंने जोर से मेरी गांड पे और एक चपेट मार दी. आअह्ह्ह आह्हः अहहह ह..

चपेट मरकर मेरी गांड पे अपना मुँह रगड़ते हुए चूमने लगे. दोनों हातो से मेरी गांड को दबाने लगे. आह्ह्ह्हह आह्हः अहह… में गांड पे चपेट मार मार के लाल कर दी.

आह्ह्ह्ह आह्हः उम्मम्मम्म अम्म्मम्म

फिर मेरी कमर को पकड़कर उन्होंने मुझे घोड़ी बना दिया। में घुटनो के बल बैठे, गांड ऊपर उठा दी. मुँह निचे ही जमीं पे रखा था. अंकल ने अपना लंड धीरेसे मेरी चुत में धकेला, लंड सीधा मेरी चुत के अंदर चला गया. आह्ह्ह्हह्ह।। अब लंड और गहरा जाते हुए महसूस हो रहा था. आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्ह।।

अंकल ने कसकर मेरी कमर पकड़ी और चुदाई फिर से सुरु हो गयी. आह्हः अह्ह्ह्ह अहह.. जोर जोर से पटकते हुए अंकल मुझे चोदने लगे. आह्हः आह्हः अहह उम्म्म्म

अंकल का लंड पूरा अंदर तक जा रहा था. आह्हः आह्हः अहह उम्म्म।।।।। मेरी सिसकती आवाज से पूरा कमरा गूंजने लगा. आह्ह्ह्ह अहह….
चुदाई जोरो सोरो से चल ही रही थी. के मेने सुना अंकल कहने लगे, आह्ह्ह्हह निशा बेटा आह्ह्ह्ह हहहह क्या चुत हे तुम्हारी बेटा आह्ह्ह्ह अहहह

मेरा नाम तो रीवा है. निशा तो उनकी बेटी का नाम है. मुझे पहले लगा के शायद गलती से मुझे निशा बुला रहे होंगे। जोर जोर से लंड को चुत में मरने लगे.

सिसकते हुए फिर से अंकल कहने लगे. आह्ह्ह्ह निशा।।।।। जबसे तुम्हे मेने नहाते हुए देखा है, तुम्हे चोदना चाहता था. आअह्ह्ह्ह आह. आअज तुम नहीं लेकिन तुम्हारी दोस्त रीवा तो मिल गयी… आह्ह्ह्ह। .. एक दिन तुम्हे भी चोद दूंगा निशा बेटे आह्हः अह्ह्ह्ह

ये सुनकर में चौक गयी. अंकल अपनी सगी बेटी निशा को चोदने की बाते कर रहे थे. आह्हः आह्हः उम्मम्मम्म

में ये क्या सुन रही थी, मुझे कुछ समज नहीं आ रहा था. अंकल अब बार बार निशा और मेरा दोनों का नाम लेते हुए चुदाई कर रहे थे. आह्ह्ह्ह आह्हः अहह..

जोर जोर से चुदाई चलने लगी. आह्ह्ह्ह।। मेरी चुत ने कुछ ही पल में पानी छोड़ दिया और में झड़ गयी. आह्हः आह्हः अहह.

अंकल अभी भी लगे पड़े थे. मेने अपनी गर्दन ऊपर उठाई। और घोड़ी बन गयी. तो अंकल ने मेरे बाल खींचे और बाल खींचकर पकड़े मुझे चोदने लगे. आह्हः आह्हः अहह अहंमम।।।

इतने जोर से बाल खींच रहे थे के में चिल्लाने लगी. आह्हः आह उम्मम्मम अह्ह्ह्ह

काफी देर चुदाई के बाद, जब अंकल का लंड पानी छोड़ने ही वाला था, तो उन्होंने अपना लंड चुत से बाहर खींचा और मुझे पलटके अपने लौड़े के सामने बिठाया।

में लंड के सामने बैठी ही थी के अंकल के लंड से पानी की पिचकारी उड़ने लगी. सारा पानी मेरे मुँह पे फ़ैल गया. आह्ह्हह्ह्ह्ह

अंकल ने मेरा मुँह दबाकर खोला और मेरे मुँह में आधा पानी छोड़ दिया। गरम गरम पानी की बौछार मेरे मुँह में होते हुए आखो के सामने देख रही थी. मुझे लंड के छोटे से गड्ढे से पानी निकलते हुए सामने दिख रहा था. आअह्ह्ह्हह अहह उम्मम्मम्म।।।

जितना पानी मुँह चला गया वो में पि गयी. उम्म्म ामममममममम

थोड़ी देर बाद जब अंकल शांत हुए. वो पीछे हटे, मेने पास में पड़ा अपना कुरता उठाया, और मुँह पोछ दिया। चीप चिप्पे पानी से मुँह भर गया था.

कपडे उठाये और अंदर चली गयी.

उस दिन की चुदाई मेरे लिए यादगार बन गयी.

अंकल ने मुझे २ दिन तक चोदा। फिर निशा आ गयी तो हमें ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं मिला।

दो दिन में अंकल की बीवी बनकर उन्हें खुश कर रही थी.

कैसी लगी कहानी जरूर कमेंट करके बताना।

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