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पति का काला सच सामने आया – Gay husband hindi sex story

आशीष, मेरे पति एक फैक्ट्री में काम करते थे. वही उनकी दोस्ती विकास से हुई. विकास आशीष से उम्र में काफी छोटा था. लेकिन उनकी अछि बनती थी. छुट्टी के दिन विकास हमारे घर आया करता था. फिर दोनों अपने कमरे में बैठकर बाते किया करते थे.

विकास का घर आना जाना था तो मेरी भी विकास से बाते होने लगी. आशीष को मुजसे कोई परेशानी नहीं थी इसलिए विकास और में हम खुलकर बाते किया करते थे. हमारे बिच एक अछि समज बन गयी थी.

कुछ दिन बाद पता नहीं कैसे लेकिन में और विकास करीब आने लगे. हमारी बाते, और आखे मिलने लगी. विकास मेरी तरफ जैसे देखता, मुझे उसके चेहरे के भाव देखकर ही पता चल जाता की विकास मेरी तरफ आकर्षित हो रहा है.

विकास के इस बर्ताव से में भी विकास के तरफ आकर्षित होने लगी थी. कुछ दिन ऐसे ही बीत गए. फिर एक दिन में किचेन में अपना काम कर रही थी.

हमेशा की तरह आशीष और विकास दोनों हमारे कमरे में बैठे टीवी देख रहे थे. और उनकी बाते चल रही थी. किचेन में उनकी आवाज सुनाई दे रही थी.

काम करते समय मुझे याद आया की हमारी पॉलिसी ख़तम होने वाली है. में किचेन से कमरे की और बड़ी ही थी के मेने कमरे में अंदर आते ही देखा की आशीष का हात विकास की पैंट के ऊपर था और वो विकास का लंड दबा रहा था. जैसे आशीष ने मुझे देखा, उसने अपना हात पीछे ले लिया.

मे थोड़ा सहम गयी. लेकिन ऐसे बर्ताव किया जैसे मेने कुछ देखा नहीं. मेने आशीष को कहा की वो पॉलिसी ख़तम होने आयी हे तो जाकर पैसे भर देना।

में वापस किचेन में आयी, मेरे दिमाग में वही दृश्य चल रहा था. मुझे आशीष विकास का लंड दबाते हुए दिख रहा था.

मेने सोचा आदमी वैसे भी ऐसे मस्ती मजाक करते रहते है. शायद आशीष और विकास में भी दोस्ती है तो मस्ती चल रही होगी. तो मेने बात को वही छोड़ दिया और अपने काम में लग गयी.

कुछ हफ्ते और बीते।

फिर एक दिन में सब्जी लेने जा रही थी. विकास और आशीष घर में थे. मेने आशीष को कहा की में सब्जी लेने जा रही हु. देरी से आयूंगी। सुबह के १० बजे थे.

में घर से थैली लेकर निकली। थोड़ी दूर पोहचते ही मेने देखा मे पैसे लेना तो भूल ही गयी. कल शॉपिंग के लिए गयी थी तो सारे पैसे ख़तम हो गए थे.

मुझे फिर से घर आना पड़ा पैसे लेने के लिए.

मेने दरवाजा खोला, पैसे मेने किचेन के एक अलमारी में रखे थे. तो में किचेन की तरफ जा रही थी. तभी मेने देखा की हमारे कमरे का दरवाजा अंदर से बंद है.

मेने सोचा अंदर तो विकास और आशीष थे. बातें करते हुए बैठे थे. इन्होने दरवाजा क्यूँ बंद कर लिया।

मुझे शक होने लगा. में दरवाजे के बाहर खड़ी अंदर की आवाज सुनने की कोशिश कर रही थी. लेकिन कुछ सुनाई नहीं दे रहा था. हल्कीसी मरमराने की आवाज सुनाई दे रही थी. ऐसे लग रहा था की कोई कुछ खा रहा है.

अचानक मुझे याद आया की, हमारे बाथरूम के अंदर कोने में एक गड्ढा किया था जब पानी का पाइप लगाना था. वो गड्ढा अंदर रखे डिब्बे के पीछे अभी भी वैसा ही है.

वहा से कमरे के अंदर में देख सकती हु. में तुरंत बाथरूम में गयी. सामने रखे छोटे छोटे सामान के डिब्बे उतार के निचे रखे और उस छोटे से गड्ढे से अंदर झाकने लगी.

जैसे हि मेने अंदर देखा, मेरे तो होश ही उड़ गए. जो में देख रही थी उसपर भरोसा नहीं हो रहा था .

कमरे के अंदर विकास खड़ा था. आशीष मेरा पति घुटनो पे बैठा था. और वो विकास का लंड मुँह में लेकर चूस रहा था. आशीष ने विकास के गांड पे अपने दोनों हात रखे थे और वो विकास की गांड दबाते हुए उसका लंड मुँह में लेकर आगे पीछे करते हुए दिख रहा था.

ये सब देखकर मेरा तो शरीर कापने लगा. अह्ह्ह. मेरी सासे फूलने लगी. ये क्या में देख रही हु. मेरा पति किसी का लंड चूस रहा है.

मन अजीब सा बर्ताव करने लगा. विकास का लंड काफी बड़ा था. आशीष के मुँह में आधा ही जा पा रहा था.

मुझे लगा था की विकास आशीष का अच्छा दोस्त है. लेकिन दोस्ती की आड़ में ये सब हो रहा है ये मुझे नहीं पता था.

जिस तरह मजे लेकर आशीष विकास का लंड चूस रहा था. मुझे कुछ अजीब सा लगने लगा.

काफी देर आशीष ने विकास का लंड चूसा, फिर आशीष खड़ा हुआ. वो हमारे बेड के पास आया, और झुककर खड़ा हो गया. विकास पीछे से आया, उसने आशीष की पेंट पीछे से निचे की.

आशीष की गांड दिखने लगी. में फिर चौक गयी. कही ये वही तो नहीं कर रहे जो में सोच रही हु.

विकास ने आशीष की गांड देखि तो उसने आशीष की गांड पे दो चपेट मारी। फिर दोनों हातोंसे आशीष की गांड दबाई. और अपना लंड हात में पकड़ा.

आशीष की गांड के नजदीक आया. विकास ने अपने हात पे थूक लगायी और वही थूक आशीष की गांड पे घिसी।

फिर लंड को धीरेसे आशीष की गांड में डालने लगा. आशीष मचलने लगा.

पीछे से विकास धक्के देते हुए लंड को आशीष की गांड में डाल’रहा था. धीरेसे विकास का लंड आशीष की गांड में चला गया. विकास ने फिर आशीष की गांड मारना सुरु किया.

अह्ह्ह्ह. मेरे पति के ऐसे भी शौक हे ये मुझे पता नहीं था.

विकास अब जोर जोर से आशीष की गांड मारने लगा. आशीष की शकल मुझे दिख रही थी. उसके चेहरे पे एक अजीब सी मुस्कराहट थी. वो सिसकती हुई आवाज करते हुए बेड के ऊपर अपना मुँह दबाकर आनंद ले रहा था.

कमरे में आशीष और विकास की आवाज गूंजने लगी. अहह अहहह उफ्फ्फ्फ़. अहहहह अहहह…

मेने सुना था की लड़के लड़के भी सेक्स करते है. लेकिन एक दिन अपने ही पति को ही किसी से चुदवाते देखूंगी ये सपने में भी सोचा नहीं था.

वहा विकास ने आशीष की कमर को कसकर पकड़ के लंड को आशीष की गांड में जोर जोर से पटका. अह्ह्ह अहहह. उफ्फ्फ…..

काफी देर चुदाई चली. फिर मेने देखा विकास ने बड़ी सास ली और लंड को आशीष की गांड से बाहर निकाला. आशीष पलटा और उसने विकास का लंड मुँह में लेकर चूसना सुरु किया.

कुछ ही देर में विकास ने सारा पानी आशीष के मुँह में छोड़ दिया. अह्ह्ह. आशीष पूरा पानी पि गया.

अह्ह्ह अहहह. उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह. उम्मम्मम्मम

फिर दोनों शांत हुए. में तुरंत वाहा से निकली और घर के बाहर चली गयी.

जब में कुछ देर बाद लौटी, दोनों कमरे में बाते करते हुए बैठे थे.

मेने ऐसे बर्ताव किया जैसे कुछ हुआ ही नहीं.

उस दिन के बाद से मेरा अपने पति के तरफ देखने का नजरया ही बदल गया

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