मेरा नाम विपिन है. में २४ साल का हु. आज जो में कहानी आपको बताने जा रहा हु वो मेरी, मेरा दोस्त हरीश और सुमन के बारेमे है. मेर और हरीश दोनों कॉलेज से दोस्त है. हम हमरे घर मैदान के पास घुमा करते थे. साथ में ही हमेशा रहा करते थे.
एक दिन हरीश के पड़ोस में रहने वाली सुमन ने हमें मार्किट में देखा। सुमन खुद चलकर हरीश से बात करने आयी. हमारी तीनो की उम्र लगबघ सामान ही है. दोनों बात कर रहे थे. में बगल में खड़े सुमन को ऊपर से निचे निहार रहा था. सुमन की और मेरी आँखे भी मिली।
दोनों हसकर बाते कर रहे थे. सुमन पूछ रही थी हरीश को तुम यहाँ क्या कर रहे हो. तो हरीश ने मजाक में कह दिया लड़किया ताड रहे है. तो सुमन हसने लगी. और कहने लगी. ताड़ो बहोत लड़किया घूम रही है यहाँ पे. और हम दोनों सुमन की बात सुनकर हसने लगे.
उस दिन पहली बार मेरी सुमन से बातचीत हुई. वो निकल गयी. लेकिन कुछ दिनों बाद सुमन खुद हमसे बात करने आ गयी. हम वही मैदान के पास बैठे रहते थे ये सुमन को पता था.
धीरे धीरे मेरी भी अछि दोस्ती सुमन से हो गयी. फिर एक दिन हम मार्किट में घूम रहे थे. हरीश की माँ ने सब्जी लाने भेजा था. तो सुमन भी हमारे साथ थी. तब मौका देखकर मेने सुमन के कंधे पे हात रख दिया। सुमन ने भी मना नहीं किया। उस दिन के बाद मेरे हात बार बार सुमन को छूने लगे.
मुझे छूते हुए देख हरीश भी मौका देखकर सुमन को छू लेता था. कभी कभी हात भी पकड़ लेते थे. सुमन को भी वो सब अच्छा लगने लगा था. हम दोनों भी सुमन के शरीर के सात खेलने लगे.
सुरवात में तो सुमन के सामने बड़े सीधे साढ़े रहते थे. लेकिन आखिरकार हम थे तो लड़के, धीरे धीरे सुमन के सामने ही एक दूसरे को गालिया भी दिया करते। सुमन को भी अब आदत हो गयी थी. वो भी हमारे बिच हसकर मजे लेने लगी.
फिर आया वो दिन जब सब बदल गया. हरीश के माता पिता माता के दर्शन के लिए ३ दिन के बाहर जाने वाले थे. तो वो जाने के बाद मेने और हरीश ने घर पे पार्टी करने का प्लान किया था.
हम दारू मांगकर घर पे पिने वाले थे. मेरी और हरीश की सारि तैयारियां हो गयी थी. फिर मुझे ख्याल आया के अगर हम किसी तरह सुमन को भी मन ले तो मजा ही आ जायेगा।
अगली बार जब सुमन से हम मिले तो मेने सुमन को सारी पार्टी की बाते बताई। मेने सुमन को कहा के तुम भी आ जाओ, मिलकर मजे करते है.
पहले तो सुमन ने मना कर दिया। लेकिन फिर हरीश भी उसे मनाने ने लगा. तो आखिरकार सुमन मान गयी. उसने कहा के कुछ देर के लिए सिर्फ आयूंगी। ज्यादा देर रुक नहीं सकती।
हम दोनों भी उसकी बात को मान गए.
शुक्रवार की शाम की पार्टी की तैयारी हो चुकी थी. में और हरीश हम दुपहर से ही घर पे थे. शाम को करीब ६ बजे सुमन पीछे के दरवाजे के पास आयी. मेने दरवाजा खोलकर उसे अंदर लिया।
फिर हम सीधे ऊपर के रूम में चले आये. वहा हरीश हमारा इंतजार कर रहा था. जैसे ही कमरेका दरवाजा बंद हुआ. हमने धीमी आवाज में गाने लगाकर पार्टी सुरु की.
गाने लगाकर में और हरीश नाचने लगे. सुमन शर्मा रही थी. तो उसे भी मेने खींचकर बिच में ले लिया और तीनो नाचने लगे. सुमन को ऐसे खुलकर नाचते हुए देख मेरा जी मचलने लगा.
हरीश ने दारू की बोतले खोली। में और हरीश पीते हुए नाचने लगे. दोनों को कुछ ही देर में दारू चढ़ने लगी.
जैसे ही नशा उफान मारने लगा. हमारे हात सुमन की और बढ़ने लगे. हरीश कभी सुमन को अपनी और खींचता तो कभी में सुमन को मेरे करीब ले आता.
देखते ही देखते दोनों भी सुमन को अपना बनाने की कोशिश करने लगे. मुझे लगा के सुमन ऐसे माने गई नहीं। तो मेने सुमन को भी बोतल से पिने के लिए कहा.
वो पहले तो मना कर रही थी. लेकिन फिर मान गयी. उसको भी कुछ देर बढ़ चढ़ने लगी. वो भी अब खुलकर नाचने लगी. उसके उछलते हुए मम्मो को देख मेरे मुँह में पानी आने लगा.
दबाने का बहोत मन कर रहा था. तो मेने सुमन को अपनी और खींचा और कसकर उसे गले लगा लिया और नाचने लगे. सुमन भी मदहोश होकर पार्टी का आनंद ले रही थी.
हरीश ने मुझे देखा सुमन को गले लगते हुए तो उसने पीछे छे आकर सुमन को कसकर पकड़ लिया।
सुमन अब हमारे बिच खड़ी. आगे और पीछे से हम दोनों उसके शरीर को अपना शरीर रगड़ रहे थे.
मेने हरीश की तरफ देखा तो उसकी आखो में भी हवस दिख रही थी. हमने आखो से ही एक दूसरे को इशारा किया। दोनों को भी पता था के अब आगे क्या होने वाला
मेने सुमन को कसकर पकड़े उसकी गर्दन को चुम लिया। सुमन तड़पने लगी. मुझे दूर करने लगी. लेकिन फिर वो भी मुझे चूमने लगी. मेरे गलो को काटने लगी. मेने कसकर उसे पकड़ा और सुमन के गुलाबी होठो पे अपने होठ दबाकर चुम लिया। आअह्ह्ह अहह उम्म्म्म अम्मम्म
आह्हः अहहह उम्मम्मम्म आअह्ह्ह्हह। उम्
कसकर सुमन को पकडे में उसे चूमने लगा. सुमन ने भी अपने दोनों हात मेरी गर्दन पे लपेट दिए और मुझे चूमने लगी. सुमन को भी शायद यही चाहिए था. उम्म्म उम्म्म्म म्म्म उम्मम्मम्म अह्ह्ह्ह ममममम
कसकर गले लगाए हुए जब खड़ा था, सुमन के बड़े बड़े मम्मो का मेरी छाती को छूना मुझे पागल बना रहा था. मेरे हात सुमन की पीठ पे घूम ही रहे थे. उसकी ब्रा की पट्टी को हात लग रहा था तो ऐसे लगा के इसका कुरता निकालके ब्रा खोल दू.
में सुमन को चुम रहा था तो मुझे पीछे की तरफ हरीश अपनी टीशर्ट उतारते हुए दिखाई दिया। हरीश ने अपनी टीशर्ट उतरी और सीधा आकर सुमन की गांड पे अपना लंड रगड़ने लगा.
में मन में सोच रहा था, ये क्या कर रहा है. थोड़ा सबर कर. लेकिन हरीश कमीना इतना उतावला हो चूका था की साले ने अपनी टीशर्ट उतर के अपनी पैंट को निचे किया और अंडरवेर के ऊपर से तना हुआ लंड सुमन की गांड पे पीछे से रगड़ने लगा. आह्ह्ह्ह हहह..
यहाँ मेरा भी लंड खड़ा हो गया था. मेने जैसे ही सुमन के होठ अपने से दूर किये, मेने देखा हरीश ने सुमन के दोनों मम्मो को दबा दिया था और पीछे से वो लंड को सुमन की गांड पे पटक रहा था. आह्ह्ह्हह्ह
सुमन की आँखे भी हवस से भर गयी थी. उसकी बिखरी जुल्फे बता रही थी के वो भी अब चुदवाने के लिए तैयार है. मेने सुमन का कुरता पकड़ा और ऊपर उठाकर निकाल दिया।
सुमन की ब्रा देखकर में खुश हो गया था के हरीश ने पीछे से ब्रा का हुक खोल दिया। जैसे ही हुक निकला आगे से ब्रा निचे गिर गयी और मेरी आखो के सामने सुमन के दोनों मोठे दूध से भरे मम्मे उछल ने लगे. आह्ह्ह्हह्ह। मेने तुरंत एक निप्पल मुँह में लिया और दबाते हुए चूसने लगा. एक मम्मे को में चूस रहा था, दूसरे को हरीश अपने हात से दबा रहा था. हम दोनों इतने उतावले हो गए थे के सुमन को अपने बिच में लेकर उसे दबा रहे थे.
जहा हात लगाने मिले वहा हात लगा रहे थे. लड़की मिल जाये तो दिमाग काम करना बंद कर लेता है.
मेने सुमन के दूध को दबा दबा के चूस लिया। फिर हरीश ने सुमन को पलटा और उसने जबरदस्ती सुमन का मुँह पकड़ा और होठो को चूमने लगा. आअह्ह्ह आह उम्म्म ामममम उम्म्म्म ामममममम
दोनों हातो से सुमन के मम्मो को दबाते हुए, होठो को चुम रहा था. आह्हः उम्म्म्म अहहह्म्म।।।
मेने अपने कपडे उतार दिए. पूरा नंगा हो गया.
फिर सुमन ने पहना हुआ पजामा मेने निचे खींचा। पजामा निचे हुआ तो सुमन की गांड पे चिपकी उसकी सफ़ेद जालीदार चड्डी दिखने लगी. आह्ह्ह्हह। सुमन की गांड काफी बड़ी दिख रही थी. आअह्ह्ह्हम्म्म्म
मेने सुमन की पीठ को चूमते हुए निचे निचे जाने लगा. उसके गोर बदन को छूते हुए निचे की और बैठा। गांड के ऊपर बैठी चड्डी को निचे खींचा और जैसे ही सुमन नंगी हो गयी. मेने सुमन की गांड में अपना मुँह दबा दिया। आअह्ह्ह्हह अहह…
गोरी गांड काफी मुलायम थी. मेने अपना मुँह सुमन की गांड पे रगड़ना सुरु किया। आअह्ह्हअहह. दोनों हातो से सुमन की मुलायम गांड को दबाने में मजा आ रहा था. मेरा लंड उछलने लगा. गांड को चूमते हुए निचे की और गया तो मुझे सुमन की चुत दिखने लगी.
दोनों पैरो के बिच दिख रही चुत को देखकर में इतना खुश हुआ के अपना मुँह सुमन के पैरो के बिच दबाकर मुँह चुत को लगा दिया आअह्हह्ह्ह्हह।।
गीली चुत को चाटने लगा. टपकता पानी मुँह में लेते हुए जबान जैसे मेने सुमन की चुत में रगड़ी सुमन ने अपने पैर और फैला दिए और मुझे अंदर मुँह लेने की जगह मिल गयी.
आह्हः आह्हः उम्म्म्म उम्म्म आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़
चुत के अंदर एक ऊँगली डालकर रगड़ते हुए चाटने लगा. अह्ह्ह्हह्हह
वहा ऊपर सुमन ने हरीश के कपडे उतार दिए. हरीश भी अपना लंड दिखाते सुमन के सामने खड़ा हो गया. सुमन के मम्मो को चूस रहा था.
में जैसे ही चुत को चाटकर खड़ा हुआ. सुमन पीछे मुड़ी और मुझे प्यार से गले लगा दिया। आह्हः। अब हम तीनो भी पुरे नंगे थे.
सुमन के गोरे नंगे बदन को अपने शरीर पे रगड़ते हुए महसूस करना बहोत ही मजेदार अनुभव था. मेने सुमन को कसकर पकडे रखा था. आह्ह्ह्ह अहहह उम्म्म्म
सुमन मुझे चूमते हुए, निचे बैठी और उसने मेरा तना हुआ लंड मुठी में पकड़ा और मुँह में लेकर चूसने लगी. आह्ह्ह्हह अहहह अहहह।।।
लड़की के मुँह में लंड देना मतलब स्वर्ग का द्वार खोलना। आह्ह्ह्हह्ह
सुमन पूरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी. आह्हः। उसकी जबान लंड पे घिसने लगी. तो में पागल सा हो गया. लंड की कठोरता और बढ़ने लगी. सुमन ने मुठी में मेरा लंड कसकर पकड़ा था. और जोर जोर से हिला रही थी. आह्ह्ह्ह आह्हः सुमन आह्ह्ह्ह अहह…
पूरा लंड जबान से चाट लिया, फिर मेरे दोनों गोटोंको दबाते हुए लंड के साथ खेलने लगी. अपने मुँह पे लंड को रगड़ने लगी.
इतने प्यार से सुमन को मेरा लंड चूसते हुए देख, हरीश से रहा नहीं गया. वो भी अपना खड़ा लंड लेकर मेरे पास आकर खड़ा हुआ.
सुमन ने हरीश का लंड देखा और दूसरे हात में उसका भी लंड पकड़के हिलने लगी. आह्ह्ह्हह
दोनों का लंड हिलाते हुए चूसने लगी. आह्हः अहह उम्मम्मम अह्ह्ह्हह। ..
काफी देर दोनों का लंड चूसने के बाद, सुमन को पास की खुर्सी के सहारे झुका दिया। सुमन ने अपने हात खुर्सी पे रखे.
पीछे से उठी हुई सुमन की गांड देखकर हम दोनों भी खुश हो गए. हरीश पहले चोदने जा रहा था. मेने उसे धकेल दिया, और सीधा सुमन की कमर पकड़के अपना लंड सुमन की चुत में घुसेड़ दिया। आह्हः चुदाई सुरु हो गयी. आह्हः आह्हः उम्म्म्म अह्ह्ह्हह
जोर जोर से लंड को सुमन की चुत में मरते हुए मजा आ रहा था. मेरे लंड की नसे तन गयी थी. अह्ह्ह्ह अहह सुमन आह्ह्हह्ह्ह्ह
हरीश से रहा नहीं जा रहा था तो वो सुमन के मुँह के पास अपना लंड ले गया और आह्ह्ह्ह करती सुमन के मुँह में लंड दबा दिया अहहह अहहह अहह….
सुमन का मुँह पकड़के हरीश उसे चोदने लगा. आह्ह्ह्ह आह्हः अहहह यह उम्मम्मम
काफी देर चुदाई के बाद, हरीश की बारी आयी. हरीश ने अब सुमन को चोदना सुरु किया। हरीश इतना उतावला था के एक बैल की तरह जोर जोर से सुमन की गांड पे चपेट मरते हुए उसे चोद रहा था. आअह्ह्ह अहहह अहह अहह अहह.
में पास खड़ा सुमन के लटकते हुए मम्मो को दबा रहा था. आह्हः उम्म्म्म ममममम
हरीश की चुदाई रुकी, तब सुमन भी सिसक रही थी. दोनों को सास चढ़ गयी थी.
मेरा लंड अभी भी तना हुआ था.
में निचे सोया, और सुमन को बोला मेरे लंड पे बैठे। वो रुको रुको करते हुए बोतल से पानी पिने लगी. पानी पीकर आयी और मेरे लंड पे बैठ गयी.
धीरेसे लंड सुमन की चुत में दोबारा चला गया. और सुमन मेरे लंड पे उछलने लगी. आअह्ह्ह अह्ह्ह्ह अहहह अहह….उम्मम्मम्ममा ाममममममम
आह्हः अहहह उम्म्म्म ाममममम
उछलती हुई सुमन को देखा तो उसके मम्मे उछल रहे थे. आह्ह्ह्ह अहह उम्मम्मम आह्ह्ह्ह
फिर जैसे ही सुमन मेरे ऊपर से हटी, और जमीं पे लेट गयी तो हरीश उसके ऊपर सो गया. हरीश ने सुमन के पैर फैलाये और फिर से लंड को सुमन की चुत में लंड को दबाकर चोदने लगा. आह्ह्ह्हह अहहहह।।।
आज हम दोनों को चुत मिली थी तो दोनों भी पागल हो गए थे. बिचारि सुमन को सास लेने भी नहीं दे रहे थे. एक के बाद एक दोनों के लंड सुमन की चुत को चोदे जा रहे थे.
हरीश सुमन को चोदते हुए उसके मुँह में अपनी जबान डाल रहा था. उसे चुम रहा था. आआह्ह्ह्हह अहहह अहह अहहह आह…..
चुदाई जोरो शोरो से हुई. फिर जब आखिरी वक्त आने लगा.
सुमन को अब आखरी बार हमने घोड़ी बनाया। सुमन जमीं पे घुटने पे बैठी। हरीश ने पहले चुदाई सुरु की आह्ह्ह्ह अहहह।। तब तक में सुमन के मुँह में अपना लंड देकर बैठा था. सुमन मेरे लंड को चूस रही थी. आअह्ह्ह अहहह।।।।।।
मेने हरीश को कहा कमीने कंडोम पहन ले. तो उसने तुरंत लंड पे कंडोम चढ़ा लिया। और जोर जोर से सुमन को चोदने लगा. आअह्हह्ह्ह्ह अहहह अहह
दोनों आगे पीछे से सुमन को चोद रहे थे. आअह्ह्ह अहहह।।।
कुछ देर बाद हरीश झड़ गया.
जैसे ही वो झडा में तुरंत पीछे गया और सुमन की चुत में लंड दबाते हुए उसकी गांड पे चपटे मरने लगा. पूरा लंड अंदर चुत में डालकर जैसे ही चुदाई सुरु हुई. आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह
अब में रुका नहीं। दोनों हातो से सुमन की कमर को पड़के जोर चुदाई सुरु की. आह्ह्ह्ह अहहह। सुमन की गांड पे मेरी जांघ जोर जोर से पटक रही थी. पूरा कमरा चुदाई की आवाज से गूंज उठा. आह्हः अहहह अहह अहह…..
जैसे ही मेरा लंड पानी छोड़ने वाला था. मेने सुमन को पलटा, उसके मुँह को खोला और लंड उसके मुँह में देकर सारा पानी छोड़ दिया। आह्ह्हह्ह्ह्ह
सुमन भी मेरा पानी पिने लगी. लंड को मुँह में पकडे मुझे देख रही थी. आअह्ह्ह्हह। लंड से निकलता पानी सुमन के मुँह में गिरते हुए देख मेरा तन मन खुश हो गया.
आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह।।।
सारा पानी गिरने के बाद मेने सुमन के मुँह से लंड बाहर खींचा.
तीनो बहोत ही थके हुए थे. पास ही में हरीश जमीन पे नंगा ही लेटा हुआ था.
में और सुमन भी कुछ देर जमीन पे लेटे रहे.
फिर सुमन अपने कपडे पहनके निकलगई।
उस दिन के बाद, हमारी प्यारी दोस्त सुमन, अब हमें हर महीने २ से ३ बार खुश कर देती थी. कभी तीनो एक साथ तो कभी अलग अलग चुदाई होती रहती थी.
तुम्हारी भी ऐसी कोई दोस्त है जिसको तुम चोदना चाहते हो तो जरूर हमें कमेंट में बताना।
